14/01/2026
*बावली गांव के पूर्व सैनिक को 55 साल बाद मिली पेंशन*
एएफटी लखनऊ ने दिया बड़ा फैसला, चार माह में भुगतान के निर्देश; देरी पर 8% ब्याज
लखनऊ, 12 जनवरी 2026:
प्री-1973 (1973 से पहले) के रक्षा कर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय में आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल (AFT), क्षेत्रीय पीठ, लखनऊ ने बावली गांव (तहसील-बड़ौत, जिला-बागपत) निवासी पूर्व सैनिक एक्स-सैपर हरपाल सिंह को इनवैलिड पेंशन (अयोग्यता/चिकित्सीय आधार पर पेंशन) देने के आदेश जारी किए हैं। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि आदेश के अनुपालन में देरी होने पर संबंधित विभाग को 8% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। 
यह मामला संख्या 122/2023 में सुना गया, जिसकी सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति अनिल कुमार (मेंबर-जु.) एवं माननीय वाइस एडमिरल अतुल कुमार जैन (मेंबर-ए.) की पीठ ने की। 
1960 में भर्ती, 1970 में मेडिकल आधार पर सेवा से हटाया गया
मामले के रिकॉर्ड के अनुसार, हरपाल सिंह की सेना में प्रारंभिक भर्ती 13 अक्टूबर 1960 को हुई थी। बाद में उन्हें 10 अप्रैल 1963 को रिक्रूट के रूप में शामिल किया गया। इसके बाद उन्हें 07 मार्च 1970 को लो मेडिकल कैटेगरी (EEE) में पाए जाने पर सेवा के लिए अयोग्य घोषित करते हुए सेना से इनवैलिड आउट कर दिया गया। 
पूर्व सैनिक के अधिवक्ता विंग कमांडर पुष्पेन्द्र कुमार ढाका ने ट्रिब्यूनल के समक्ष कहा कि चिकित्सा कारणों से सेवा से हटाए जाने के बावजूद हरपाल सिंह को डिसएबिलिटी इनवैलिड पेंशन नहीं दी गई। उन्होंने इस संबंध में 06 जून 2022 को प्रतिनिधित्व (रिप्रेजेंटेशन) भी भेजा, मगर कोई जवाब नहीं मिला। 
सरकार का तर्क—10 साल की न्यूनतम सेवा पूरी नहीं
केंद्र सरकार व संबंधित विभागों ने दलील दी कि आवेदक ने 10 वर्ष की न्यूनतम पात्र सेवा पूरी नहीं की है, इसलिए वह इनवैलिड पेंशन का हकदार नहीं है। सरकार ने यह भी कहा कि गैर-पेंशनधारी मामलों में निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद सेवा रिकॉर्ड नष्ट कर दिए जाते हैं, इसलिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। 
वादी के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
वादी के अधिवक्ता विंग कमांडर पुष्पेंद्र ढाका ने इस मामले में सुखविंदर सिंह बनाम भारत संघ (2014) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए सिद्धांतों का हवाला दिया, जिसके अनुसार भर्ती के समय दर्ज न हुई बीमारी/अयोग्यता को सामान्यतः सेवा के दौरान उत्पन्न माना जाता है, जब तक इसके विपरीत सिद्ध न हो। 
इसके अलावा एक्स गनर सिनचेट्टी सत्यनारायण व अन्य प्रकरण में प्री-1973 मामलों के लिए सरकार द्वारा दी गई नीति/रियायत का भी उल्लेख किया, जिसके तहत 10 वर्ष की न्यूनतम सेवा से कम अवधि वाले मामलों में भी पात्रता का लाभ दिए जाने का निर्णय लिया गया था। 
तीन साल का एरियर देने का आदेश
ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि पेंशन का दावा “ लगातार कारण” होने के बावजूद अत्यधिक देरी होने पर एरियर सीमित किया जा सकता है। इसी आधार पर ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया कि पूर्व सैनिक को मूल आवेदन दायर करने की तिथि से पूर्व के तीन वर्षों की अवधि के लिए पेंशन का भुगतान किया जाए।