The Muslim Jaat

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मुस्लिम जाट अपने इतिहास को जाने और मुस्लिम जाटों के इस्लामीक  धार्मिक गुरु मरहूम मुफ्ती मेहरबान साहब  निवासी बड़ौत जिला ...
19/01/2024

मुस्लिम जाट अपने इतिहास को जाने और मुस्लिम जाटों के इस्लामीक धार्मिक गुरु मरहूम मुफ्ती मेहरबान साहब निवासी बड़ौत जिला बागपत द्वारा लिखी गई मुस्लिम जाटों की इस्लामीक तारीख पर यह वीडियो अगर इस वीडियो में उनकी किताब से अलग कुछ बातें बताई है तो जरूर बताएं और आज हमें अपने इतिहास को खोजना पड़ेगा और याद करना पड़ेगा अपने महापुरुषों को भी और अपने धार्मिक गुरु को भी और अपने सामाजिक राजनीतिक हर तरह के लोगों को हमें सामने लाने आज की जरूरत है वरना हम दूसरे महापुरुषों को और दूसरे लोगों की जन्मतिथि पुण्यतिथि ही मानते रहेंगे और आज का युवा और कल के बच्चों के भविष्य में भी यही लोग उनके आइडियल और पूर्वज होंगे जो उनको आज दिखाए जा रहे हैं बताए जा रहे हैं.

चौधरी राकिब खोखर समाजसेवी शिक्षाविद.

मुस्लिम जाटों की महान शख्सियत जिन्होंने खुद भी शिक्षा में काफी बड़ा मुकाम हासिल किया और अपने परिवार के हर सदस्य को शिक्ष...
21/12/2023

मुस्लिम जाटों की महान शख्सियत जिन्होंने खुद भी शिक्षा में काफी बड़ा मुकाम हासिल किया और अपने परिवार के हर सदस्य को शिक्षा की अहमियत और शिक्षा के प्रति समय समय पर जागरूक करके कामयाब किया आईए जानते हैं उनके बारे में.
डॉ, फिरोज खान के संघर्ष और सफलता की बात,,✏️✏️

सभी विधार्थी स्टूडेंट 20 या 25 साल में थक जाते है पढ़ते हुवे,,
मेरे हिसाब से डॉ, साहब ने लगभग 53 वर्षों तक पढा़ई की है ,,✏️✏️

फिरोज खान का जन्म 1943 में यूपी के बागपत जिले के असारा तहसील बड़ौत में निजामुद्दीन सुपुत्र जनाब करीम बख्श के घर में हुआ था। आपका खानदान रोगन दान है जोकी फारसी का शब्द है ,,✏️✏️

उनकी मां का नाम चांद शहजादी सुपुत्री श्री हीरा खान था - हालांकि उनका बचपन बेहद गरीबी में बीता, लेकिन उनकी मां चांद शहजादी ने उन्हें पालने के लिए कड़ी मेहनत की,,✏️✏️

13 वर्ष की आयु में, उन्होंने 1956 में मुस्लिम इंटर कॉलेज असारा से विज्ञान में उत्कृष्ट अंकों के साथ मैट्रिक की परीक्षा पास की - विज्ञान की शिक्षा जारी रखने के हित में, दो महीने के बाद, उन्हें वैश्य,,✏️✏️

कॉलेज शामली में 11 वीं कक्षा में प्रवेश मिला जहां अल्लाह ने उनके लिए पांच समय की नमाज़ पड़ना अनिवार्य करदिया इस तरह, अल्लाह की रहमत ने जीवन को एक खुशहाल मोड़ दिया,,✏️✏️

अब सिर्फ शिक्षा प्राप्त करने की चिंता करने की जरूरत नहीं थी - क्योंकि हिंदी मस्जिद के इमाम हाफिज जरीफ अहमद थानवी के संरक्षण में मस्जिद में ही रहने और खाने की व्यवस्था हो गई,,✏️✏️

आपने अपने टिचर उस्ताद का इतना अदब अहतराम किया के, थानाभवन के हाफिज जरीफ अहमद साहब को इंताकाल के बाद असारा मे अपनी माँ की कब्र के बराबर मे कब्रिस्तान में तदफीन कराया,,✏️✏️

उन्होंने गणित में डिस्टिंक्शन के साथ 12 वीं कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण की यह फिरोज खान को छोड़कर स्कूल में किसी अन्य छात्र द्वारा हासिल नहीं किया जा सका,, ✏️✏️

किसान कॉलेज शामली से बीएससी (पहला बैच) प्रथम श्रेणी के साथ उत्तीर्ण जो पूरे गांव का रिकॉर्ड है। इसी तरह, केवल 19 साल की उम्र में, उन्होंने मेरठ कॉलेज से एमएससी भौतिकी पास की..... यह भी अपने आप में एक रिकॉर्ड है, ,✏️✏️

विज्ञान के क्षेत्र में अपनी स्वर्णिम उपलब्धियों के साथ, फिरोज खान साहब ने चिकित्सा के क्षेत्र में भी अपनी उल्लेखनीय क्षमता दिखाई। एमडी होम्योपैथी। RMP होम्योपैथी MBBS होम्योपैथी - सिल्वर जुबली कॉलेज कलकत्ता और RMP UNANI RMP आयुर्वेद - आयुर्वेद रतन यानी एबीएमएस अल्लाहाबाद से,,✏️✏️

इलाहाबाद न केवल आपकी कड़ी मेहनत और बुद्धिमत्ता और क्षमता का एक उदाहरण है, बल्कि आपकी कृपा से सैकड़ों लोगों ने सरकारी मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन भी कराया जैसे,, ✏️✏️

डॉ। नसीब-उद-दीन, डॉ। एलए खान, डॉ। वक़ील अहमद, डॉ। शकील अहमद, डॉ। मुहम्मद इस्माइल, डॉ। मास्टर रईस अहमद और अन्य उनमें से कुछ महत्वपूर्ण नाम हैं,,✏️✏️

- रोजगार की शुरुआत सितंबर 1962 में, उन्हें दिल्ली सरकार में पीजीटी के पद पर नियुक्त किया गया, जो गाँव में रोजगार का सर्वोच्च मानक था ,,✏️✏️

1966 में यूपी बोर्ड से 10 वीं कक्षा उत्तीर्ण की,,✏️✏️

1967 में दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएड पास किया,,✏️✏️

1972 में, उन्होंने हिंदी विश्वविद्यालय, इलाहाबाद से,,✏️✏️ एबीएमएस प्राप्त किया और 1976 में जामिया उर्दू अलीगढ़ से आदिब कामिल प्राप्त कियाकिया,,✏️✏️

1986 में वाइस प्रिंसिपल और 1992 में प्रिंसिपल नियुक्त हुए और एक साथ दो स्कूलों के प्रिंसिपल के रूप में सेवा की।सुबह की पाली में जामा मस्जिद स्कूल और शाम की पाली में माता सुंदरी रोड स्कूल और मटिया महल स्कूल। ये अपने आप में एक मिसाल है नौकरी पर विभिन्न प्रशिक्षणों में भाग लिया,,✏️✏️

(1) ऑडियोविजुअल उपकरण प्रशिक्षण,,✏️✏️

(२) फोटोग्राफी प्रशिक्षण,,✏️✏️

(3) समर इंस्टीट्यूट ट्रेनिंग इन फिजिक्स, आगरा विश्वविद्यालय 1967 में, 1973 दिल्ली पीएससीसी भौतिकी में अमेरिका से पीएल 480 के तहत अमेरिका,,️✏️
विभागीय ग्रीष्मकालीन संस्थान 1978, 1992, 1994
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ,,✏️✏️
जोनल और केंद्रीय कार्यक्रमों में प्रथम पुरस्कार जीता और हमेशा उर्दू अकादमी की वार्षिक प्रतियोगिताओं में पहला पुरस्कार जीता और 200
ट्राफियां स्कूल की शान बन गईं,,✏️✏️

1996 में उन्होंने 50 छात्रों और 5 शिक्षकों के साथ कलकत्ता में दूसरे राष्ट्रीय युवा महोत्सव में भाग लिया, जिसमें मुख्यमंत्री श्री साहब सिंह वर्मा स्वयं उपस्थित थे,,✏️✏️

कव्वाली और समूह गान में कई पुरस्कार जीते,,✏️✏️

उन्होंने युवा संसद के सफल प्रदर्शन में भाग लिया, जिसमें सांसदों ने भाग लिया और उन्हें 16 अंकों का पहला पुरस्कार मिला,,✏️✏️

व्यक्तिगत उपलब्धियां और पुरस्कार,,✏️✏️

(१) सर्वश्रेष्ठ प्राचार्य पुरस्कार एक ही समय में दो विद्यालयों के सफल पर्यवेक्षण के लिए,,✏️✏️

(2) माननीय मुख्यमंत्री शीला दीक्षित द्वारा इंदिरा गांधी पुरस्कार-सर्वश्रेष्ठ
स्कूल प्रिंसिपल सिल्वर ट्रॉफी 11,000 रुपये, ,✏️✏️

(३) उर्दू अकादमी पुरस्कार - श्री साहिब सिंह वर्मा, मुख्यमंत्री, दिल्ली सरकार द्वारा २१,००० रुपये के साथ सर्वश्रेष्ठ उर्दू स्कूल प्रिंसिपल ट्रॉफी,,✏️✏️

(4) एसोसिएशन ऑफ टीचर्स एंड पेरेंट्स द्वारा सिल्वर ट्रॉफी और नकद पुरस्कार से दिल्ली के पुराने स्कूलों में बेस्ट प्रिंसिपल अवार्ड श्री शोएब इकबाल और राष्ट्रपति द्वारा मीना बाज़ार बाज़ार,,✏️✏️

आउटडोर यात्रा और विदेशी दौरे अल्लाह की मेहरबानी से वह अपनी पत्नी के साथ 9 बार हज यात्रा पर गए और रमजान उमराह् 15 बार पर अपने बेटे और पौते के साथ गए
वह सौभाग्यशाली थे कि वे अरब देशों में गए,,✏️✏️

इराक बगदाद शहर,,✏️✏️

(१) पिरान पीर अब्दुल कादिर जिलानी रहमतुल्लाह का रोज़ा

(२) इमाम मूसा काज़िम का तीर्थ (अल्लाह उस पर रहम करे)

(३) इमाम अल-ग़ज़ाली मकबरा (अल्लाह की उस पर दया हो सकती है)

(४) खलीफा हारून रशीद की पत्नी जुबेदा बेगम का मकबरा

(५) गुरु नानक का कमरा

(६) श्री बहलोल दाना की तीर्थयात्रा जहाँ हर समय कस्तूरी की गंध निकलती है

मोसुल शहर,,✏️✏️

(१) बड़ा मकबरा यहाँ जो सद्दाम हुसैन द्वारा बनाया गया था

(२) इमाम मेहदी इस स्थान पर दिखाई देंगे
३) औलाद -ए मुस्लिम की कब्रें जिन्हें चार सौ साल बाद फिर से बनाया गया कूफा

(1) शानदार ग्रैंड मस्जिद और नूह का तंदूर

(२) इमाम मुस्लिम के मक़बरा और दक्षिण की ओर अन्य इमाम

(३) मस्जिद के पश्चिम में हज़रत अली (आरए) का घर जिसमें पाँच कमरे हैं Ash नजफ अशरफ

(1) हज़रत अली (र.अ.) का मकबरा

करबला,,✏️✏️

(२) हज़रत इमाम हुसैन (आरए) की कब्र और शहादत का स्थान

बाबुल का शहर २,,✏️✏️

(१) किले के भग्नावशेष और वह कुआँ जिसमें हरुत और मस्त लटकाए गए हैं

सीरिया का दौरा
(१) बाजार श्याम और मस्जिद बानी उमैय्या यानी यज़ीद का महल

(२) वह शेल्फ जहाँ इमाम हज़रत हुसैन का सिर रखा गया था

(३) हज़रत ज़ैनब का मक़बरा (अल्लाह उस पर प्रसन्न हो) जहाँ हम १० वीं मुहर्रम की रात को गए थे जॉर्डन

(१) सीज़ का मकबरा (उस पर शांति) जो नौ गज लंबा है

(२) जंग-ए-मुता का एक स्थान जहाँ यह बहुत ठंडा और धुंधला होता है और साहबी जाफ़र त्यार का मकबरा और एक बड़ी मस्जिद है।

(३) और गुफा के साथियों की गुफा जिसमें गुफा का द्वार दक्षिण की ओर है

( घर अस्हाब-ऐ-कैफ़ ) ,,✏️✏️
(४) मृत सागर इज़राइल और फिलिस्तीन

(1) पैगंबर मूसा की कब्र और मस्जिद (उस पर शांति हो)

(2) यरूशलेम में द डोम ऑफ द रॉक और अंदर स्प्रिंग गोल्डन बिल्डिंग
(३) मौलाना मुहम्मद अली जौहर का मकबरा हमने चट्टान के गुंबद में नमाज़-ए-मग़रिब अदा की और मस्जिद-ए-अक्सा में नमाज़-ए-ईशा अदा की

(४) पास में इमरान और मरयम (अ.स.) का घर है और चट्टान के नीचे ७० क़दम कदम के भीतर उनकी कब्र है

(५) जैतून का पहाड़ जिस पर हज़रात ईसा अलैहस्सलाम द्वारा लगाए गए ९ जैतून के पेड़ आज भी जीवित हैं।

(६) वह स्थान जहाँ से हज़रात सालैहस्सलाम को स्वर्ग में बुलाया गया था, सुरक्षित है

रोने की दीवार,,✏️✏️

ऊपरी तरफ एक खिड़की है जिसे जमीन पर बुराक खिड़की कहा जाता है। यहूदियों ने अपनी प्रार्थना की और दीवार के छेद के अंदर अपनी मांगों को रखा।डेविड का किला नीचे डेविड का मकबरा है, लगभग चार गज लंबा, जिस पर एक ज़बूर रखा गया है ऊपर एक मीनार मस्जिद है और नीचे एबुलेंस रूम है

यह वह मस्जिद है जहाँ यहूदियों ने ईसा अलैहस्सलाम और उनके शिष्यों को क्रूस पर चढ़ाने का आदेश दिया था। अन्य शहरों में विभिन्न विभागीय शिविर लगाए गए,,✏️✏️

(१) सिक्किम, दार्जिलिंग, नेपाल में बीरगंज, जल पिगरी पर्यटन

(2) तमिलनाडु में कोयम्बटूर, कर्नाटक में कुनूर टाउन, नीलगिरी हिल्स और ऊटी सिटी में टॉय ट्रेन का आनंद लिया जा सकता है

(३) नैनीताल में एक महीने रहने के बाद नई शिक्षा पर एक सेमिनार में भाग लिया
अन्य प्रस्ताव,,✏️✏️

1964 में यूके में सरकारी सेवा के लिए

1970 में बोर्नियो नाइजीरिया में शिक्षा अफसर के लिये

1976 में, उन्हें दार एस सलाम, तंजानिया में एक शिक्षा अधिकारी के रूप में

सेवा करने का अवसर मिला,,✏️✏️

अन्य प्रस्तावों ने माता-पिता की कमजोरी के कारण स्वीकार करने की अनिच्छा दिखाई और वे बाहर नहीं गए,,✏️✏️

क्रीमिया परिवार के रूप में जाने वाले इस प्रतिष्ठित परिवार में 10 शिक्षक, 15 डॉक्टर, 3 नर्स, 3 पुलिस अधिकारी, दस व्यवसायी, एक व्यवसायी महिला, तीन पीएच.डी,,✏️✏️

एक हाफिज मौलवी, पांच टेक्निशंस, 5 निजी सेवा, 1 कार्यकर्ता, 1 ठेकेदार, 4 इंजीनियर, 3 MCA, MBA, M.Pharma और दस D फार्मा व्यक्ति हैंहैं,,✏️✏️

मुस्लिम जाट
21/12/2023

मुस्लिम जाट

मुस्लिम जाट समाज के लिए पोस्टअल्पसंख्यक अधिकार परिषद असारा के पदाधिकारी और प्रोग्राम में पहुंचे सोशल एक्टिविस्ट और मदरसा...
19/12/2023

मुस्लिम जाट समाज के लिए पोस्ट
अल्पसंख्यक अधिकार परिषद असारा के पदाधिकारी और प्रोग्राम में पहुंचे सोशल एक्टिविस्ट और मदरसा इस्माइल अरेबिक कॉलेज असारा के प्रधानाचार्य चौधरी आबिद साहब के द्वारा आज 18 दिसंबर को अल्पसंख्यक दिवस मनाया और उनके स्कूल के बच्चों के द्वारा तैयार किए गए प्रोजेक्ट स्पीच और अल्पसंख्यक दिवस पर ब निबंध कंपटीशन में प्रथम द्वितीय और तृतीय आने वाले बच्चों को ट्रॉफी और मेडल के साथ सम्मानित किया गया यह कार्य होता है संस्थाओं का कुछ संस्थाएं निरंतर लगातार अपना कार्य कर रही है समाज को जगाने के लिए और बच्चों को शिक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए उनके अच्छे मुस्तबिल के लिए मैं शुक्रगुजार हूं मास्टर आबिद साहब का जिन्होंने यह प्रोग्राम कराया और अब तक के समाजसेवीयो में मुस्लिम जाट बिरादरी के सब से बड़े शुभचिंतक मरहूम चौधरी युसूफ साहब असारवी के पद चिन्हो पर चलते हुए निरंतरण प्रोग्राम कर कर उनके सपनों को जिंदा रखने की पूरी पूरी कोशिश कर रहे हैं बहुत ही अच्छा लगा छोटे-छोटे बच्चे और बड़े बच्चों के द्वारा तैयार किए गए प्रोजेक्ट को देखकर और जितने भी योजनाएं अल्पसंख्यकों के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार दे रही है उन सभी के बारे में हमने विस्तार से बताया और आगे भी इन बच्चों को अल्पसंख्यक की तरफ से मिलने वाली हर योजना के बारे में बच्चों को बताया जाएगा और लाभ दिलाया जाएगा.
चौधरी राकिब खोखर समाजसेवी शिक्षाविद.

स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष पर बड़े हर्ष का विषय है कि द मुस्लिम जाट फेसबुक पेज 15 अगस्त 2023 कि आज सुबह मे इसकी शुरुआत हो...
15/08/2023

स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष पर बड़े हर्ष का विषय है कि द मुस्लिम जाट फेसबुक पेज 15 अगस्त 2023 कि आज सुबह मे इसकी शुरुआत हो रही है अपने प्राचीन कुल गौरव और जाति इतिहास को जानने की जिज्ञासा संभावित रूप से प्रत्येक मानव के मन में होती है अगली पीढ़ी को समाज का गौरवशाली इतिहास गोत्र व परंपराओं का ज्ञान कराना आवश्यक है किसी भी समाज के जाति के विकास और उन्नति में इतिहास का स्थान सदा से ऊंचा रहा है कोई भी जनसमुदाय बिना इतिहास के अपने असिस्तव को सुरक्षित नहीं रख सकता जिस समाज का इतिहास नष्ट हो जाता है उसके कुल उद्धार में अनेकों कठिनाई आती है इतिहास जिन सिद्धांतों को प्रदर्शित करता है वे कसौटी पर उतरते हुए होते हैं भूतकाल में समाज और देश के नेताओं ने जिस रीति से समाज का मार्ग प्रशस्त किया वही इतिहास है जो अपने समाज और प्राचीन इतिहास को नेताओं तथा उनके सहायकों की स्मृति को सुरक्षित ना रख सके उसे विफलता समझा जाना चाहिए और अपमानित ही होता है इसलिए आज हमें जरूरत है अपने प्राचीन इतिहास को जानने की वर्तमान स्थिति को जानने की और भविष्य में क्या संभावनाएं इस समाज की हो सकती है उस पर विचार विमर्श करने की तो आइए आज से ही इस पेज के साथ जुड़कर अपने मुस्लिम जाट समाज को गर्व महसूस कराते हैं. मैंने स्वयं समस्त मुस्लिम जाट की उन्नति के लिऐ इस कार्य को अपने सिर माथे लिया यह बड़ा ही सौभाग्य का विषय है कि है यह काम में अपनी मुस्लिम जाट बिरादरी के लिए इतिहास संकलन एवं लेखन का कार्य और फेसबुक पर फेसबुक के माध्यम से आप तक पहुंचाने का कार्य कर रहा हूं
.चौधरी राकिब खोखर समाजसेवी शिक्षाविद.

77 वे स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष पर बड़े हर्ष का विषय है कि द मुस्लिम जाट फेसबुक पेज 15 अगस्त 2023 कि आज इसकी शुरुआत हो र...
15/08/2023

77 वे स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष पर बड़े हर्ष का विषय है कि द मुस्लिम जाट फेसबुक पेज 15 अगस्त 2023 कि आज इसकी शुरुआत हो रही है अपने प्राचीन कुल गौरव और जाति इतिहास को जानने की जिज्ञासा संभावित रूप से प्रत्येक मानव के मन में होती है अगली पीढ़ी को समाज का गौरवशाली इतिहास गोत्र व परंपराओं का ज्ञान कराना आवश्यक है किसी भी समाज के जाति के विकास और उन्नति में इतिहास का स्थान सदा से ऊंचा रहा है कोई भी जनसमुदाय बिना इतिहास के अपने असिस्तव को सुरक्षित नहीं रख सकता जिस समाज का इतिहास नष्ट हो जाता है उसके कुल उद्धार में अनेकों कठिनाई आती है इतिहास जिन सिद्धांतों को प्रदर्शित करता है वे कसौटी पर उतरते हुए होते हैं भूतकाल में समाज और देश के नेताओं ने जिस रीति से समाज का मार्ग प्रशस्त किया वही इतिहास है जो अपने समाज और प्राचीन इतिहास को नेताओं तथा उनके सहायकों की स्मृति को सुरक्षित ना रख सके उसे विफलता समझा जाना चाहिए और अपमानित ही होता है इसलिए आज हमें जरूरत है अपने प्राचीन इतिहास को जानने की वर्तमान स्थिति को जानने की और भविष्य में क्या संभावनाएं इस समाज की हो सकती है उस पर विचार विमर्श करने की तो आइए आज से ही इस पेज के साथ जुड़कर अपने मुस्लिम जाट समाज को गर्व महसूस कराते हैं. मैंने स्वयं समस्त मुस्लिम जाट की उन्नति के लिऐ इस कार्य को अपने सिर माथे लिया यह बड़ा ही सौभाग्य का विषय है कि है यह काम में अपनी मुस्लिम जाट बिरादरी के लिए इतिहास संकलन एवं लेखन का कार्य और फेसबुक पर फेसबुक के माध्यम से आप तक पहुंचाने का कार्य कर रहा हूं
.चौधरी राकिब खोखर समाजसेवी शिक्षाविद.

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