सूचना विभाग बागपत

सूचना विभाग बागपत जिला सूचना अधिकारी- राहुल सिंह भाटी

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- राहुल भाटी, जिला सूचना अधिकारी, बागपत

कार्यालय: कक्ष संख्या 34, कलेक्ट्रेट, बागपत
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*जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की बैठक सम्पन्न**आयुष्मान कार्ड बनाने में बागपत प्रदेश में ...
31/08/2026

*जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की बैठक सम्पन्न*

*आयुष्मान कार्ड बनाने में बागपत प्रदेश में दूसरे स्थान पर, 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के कार्ड बनाने की गति बढ़ाने के निर्देश*

*स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर जिलाधिकारी सख्त, सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को गुणवत्ता मानकों पर खरा उतारने के निर्देश*

बागपत, 31 अगस्त 2026 --- जिले के लोगों को बेहतर इलाज और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की बैठक हुई। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की प्रगति को आंकड़ों के साथ परखा गया जिसमें संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अस्पताल पहुंचने वाले मरीज और गांव में रहने वाले लाभार्थी को दिखाई देना चाहिए। उन्होंने सभी स्वास्थ्य सेवाओं में समयबद्धता, गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

आयुष्मान भारत योजना में बागपत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिले में 5,23,368 लक्षित लाभार्थियों के सापेक्ष 3,62,564 के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। वहीं 97,933 लक्षित परिवारों में से 92,589 परिवारों में कम से कम एक सदस्य का कार्ड बन चुका है। परिवारों के कार्ड बनाने में बागपत प्रदेश में पहले स्थान पर है, जबकि लाभार्थियों के कार्ड निर्माण में जिला प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि शेष पात्र लोगों की पहचान कर उनका कार्ड बनाने का अभियान और तेज किया जाए, ताकि कोई पात्र परिवार इलाज की सुविधा से वंचित न रहे।

70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को आयुष्मान योजना से जोड़ने पर जिलाधिकारी ने विशेष जोर दिया। इस आयु वर्ग के 38,381 लक्षित वरिष्ठ नागरिकों में से 26,393 के कार्ड बनाए जा चुके हैं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष पात्र बुजुर्गों तक स्वास्थ्य विभाग की टीम और आशा कार्यकर्ता पहुंचें और उनका कार्ड प्राथमिकता से बनवाएं। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को योजना का लाभ दिलाने में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं होनी चाहिए। साथ ही पहचान संबंधी प्रक्रिया भी समय से पूरी कराने के निर्देश दिए।

किशोरियों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए चल रहे एचपीवी टीकाकरण अभियान में भी जिलाधिकारी ने कम प्रगति वाले क्षेत्रों पर सख्ती दिखाई। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार 375 टीकाकरण सत्रों में 4,245 टीके लगाए गए हैं। जिलाधिकारी ने कम प्रगति वाले विकासखंडों के चिकित्सा अधीक्षकों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालयों और महाविद्यालयों में अधिक से अधिक टीकाकरण सत्र आयोजित कराने तथा पात्र किशोरियों की पहचान कर उन्हें टीकाकरण से जोड़ने के निर्देश दिए, ताकि अभियान का लाभ अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंच सके।

टीबी से बचाव के अभियान में अब केवल मरीजों का उपचार ही नहीं, बल्कि उनके संपर्क में आने वाले बच्चों और अन्य पात्र लोगों को भी बीमारी से बचाने पर जोर दिया जा रहा है। जिले की 80 उच्च जोखिम वाली ग्राम पंचायतों में चल रहे अभियान की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सक्रिय निगरानी और जांच बढ़ाने के निर्देश दिए। जनवरी से जुलाई 2026 तक टीबी रोगियों के संपर्क में आए बच्चों में बचावात्मक दवा देने के लिए निर्धारित 423 बच्चों के लक्ष्य के सापेक्ष सभी 423 बच्चों की पहचान की गई। इसी प्रकार एचआईवी के साथ जीवन जी रहे लोगों में टीबी से बचाव के लिए पात्र सभी 16 लोगों को चिन्हित किया गया। दोनों कार्यों में शत-प्रतिशत उपलब्धि पर जिलाधिकारी ने शेष टीबी संबंधी लक्ष्यों को भी समय से पूरा करने और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए।

मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में किसी तरह की कमी न रहे, इसके लिए जिलाधिकारी ने लंबित कार्य तत्काल पूरा कराने के निर्देश दिए। जिन प्रथम संदर्भ इकाइयों में छोटे कार्य बाकी हैं, उन्हें शीघ्र पूरा कराकर चालू कराने तथा सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में शल्य प्रसव की सुविधा सुनिश्चित करने को कहा गया। जुलाई 2026 तक जिला संयुक्त चिकित्सालय में 345 और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिनौली में दो शल्य प्रसव कराए जाने की जानकारी दी गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन केंद्रों पर सुविधा कमजोर है, वहां आवश्यक व्यवस्था तत्काल पूरी कराई जाए, ताकि गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अनावश्यक रूप से दूर न जाना पड़े।

जननी सुरक्षा योजना के भुगतान में भी जिलाधिकारी ने तेजी लाने के निर्देश दिए। जुलाई 2026 तक 3,200 सरकारी प्रसव के सापेक्ष 2,294 लाभार्थियों को भुगतान किया गया है। कम भुगतान वाले खेकड़ा, पिलाना, जिला अस्पताल और बड़ौत क्षेत्र की प्रगति सुधारने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि प्रसव के बाद मिलने वाली सहायता के लिए महिला को इंतजार न करना पड़े। इसके लिए गर्भवती महिलाओं के बैंक खाते गर्भावस्था की जांच के समय ही खुलवाने और अभिलेखों की कमियां पहले ही दूर करने के निर्देश दिए गए।

टेली-कंसल्टेशन चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा को भी और मजबूत करने के निर्देश दिए गए। जुलाई 2026 में जिले में प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के स्तर पर औसतन पांच टेली-कंसल्टेशन चिकित्सकीय परामर्श दर्ज किए गए। जिलाधिकारी ने कम प्रगति वाले क्षेत्रों की अलग से निगरानी कर संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों को छोटी-छोटी चिकित्सकीय समस्याओं के लिए अनावश्यक रूप से दूर न जाना पड़े, इसके लिए उपलब्ध टेली-कंसल्टेशनसुविधा का अधिक से अधिक उपयोग कराया जाए।

स्वास्थ्य केंद्रों पर मिलने वाली सुविधा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जिलाधिकारी ने सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को गुणवत्ता मानकों से जोड़ने के निर्देश दिए। जिले में अब तक 64 गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें जिला संयुक्त चिकित्सालय के साथ 63 आयुष्मान आरोग्य मंदिर शामिल हैं। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि शेष केंद्रों में जो कमियां हैं, उन्हें चिन्हित कर तत्काल दूर कराया जाए और गुणवत्ता प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि गांव के स्वास्थ्य केंद्र पर भी मरीज को साफ-सुथरी व्यवस्था, सही जांच और भरोसेमंद इलाज मिलना चाहिए।

भ्रूण लिंग जांच पर रोक के लिए अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी और कड़ी करने के निर्देश दिए गए। जिले में 49 अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हैं और अप्रैल 2026 से अब तक 27 निरीक्षण किए गए हैं। नियमों का उल्लंघन मिलने पर एक केंद्र को सील किया गया है। जिलाधिकारी ने निरीक्षण की संख्या बढ़ाने तथा नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि सलाहकार समिति की बैठकें नियमित रूप से हों और हर शिकायत की गंभीरता से जांच की जाए।

बच्चों के स्वास्थ्य की जांच में भी लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए गए। जुलाई 2026 में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की 12 टीमों ने विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों का भ्रमण किया। 24,924 बच्चों की जांच की गई और उपचार के लिए चिन्हित 1,008 बच्चों में से 933 बच्चों का उपचार कराया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन बच्चों में बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी कमी मिले, उनका उपचार बीच में न रुके और प्रत्येक चिन्हित बच्चे की नियमित निगरानी की जाए।

आशा कार्यकर्ताओं के काम की भी जिलाधिकारी ने गंभीरता से समीक्षा की। जुलाई 2026 में उनके कार्यों का श्रेणीवार मूल्यांकन किया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि हर आशा के काम की नियमित समीक्षा हो और अच्छा कार्य करने वाली कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित किया जाए। वहीं लगातार लापरवाही या अपेक्षित प्रगति न देने वाली कार्यकर्ताओं के कार्य की समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। परिवार नियोजन, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में आशा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी स्पष्ट करते हुए उन्होंने क्षेत्र में सक्रिय संपर्क बढ़ाने के निर्देश दिए।

गर्भवती महिलाओं और बच्चों का समय से पंजीकरण कराने पर भी जिलाधिकारी ने जोर दिया। जुलाई-अगस्त 2026 में जिले में गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण की उपलब्धि 93.41 प्रतिशत और बच्चों के पंजीकरण की उपलब्धि 94.47 प्रतिशत रही। जिलाधिकारी ने कम प्रगति वाले क्षेत्रों के अधिकारियों को घर-घर संपर्क बढ़ाने और शत-प्रतिशत पंजीकरण की दिशा में काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोई गर्भवती महिला या बच्चा स्वास्थ्य विभाग की निगरानी से बाहर नहीं रहना चाहिए।

मलेरिया समेत संचारी रोगों की रोकथाम के लिए भी जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए। जुलाई 2026 में 10,861 के लक्ष्य के सापेक्ष 9,609 मलेरिया जांच की गईं। जिलाधिकारी ने शेष लक्ष्य को समय से पूरा कराने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में जांच और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए। गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाव की तैयारियों की समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से दुरुस्त रखने को कहा गया।

परिवार कल्याण कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने महिला और पुरुष नसबंदी सहित परिवार नियोजन सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र दंपतियों को परिवार नियोजन के साधनों और उनके लाभ की पूरी जानकारी दी जाए तथा स्वास्थ्य कर्मी केवल लक्ष्य पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि परिवारों को सही परामर्श देकर उनकी सुविधा के अनुसार सेवाओं से जोड़ें। विश्व जनसंख्या पखवाड़े के दौरान किए गए कार्यों की भी समीक्षा की गई और जागरूकता गतिविधियां लगातार जारी रखने के निर्देश दिए गए।

मोतियाबिंद के मरीजों को समय से इलाज दिलाने, मधुमेह और उच्च रक्तचाप की जांच बढ़ाने तथा नवजात और कुपोषित बच्चों की देखभाल को लेकर भी जिलाधिकारी ने निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिस मरीज या बच्चे को उपचार की जरूरत है, उसे केवल जांच के बाद छोड़ न दिया जाए, बल्कि उपचार पूरा होने तक उसकी निगरानी की जाए। विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई और पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चों की स्थिति की नियमित समीक्षा करने तथा किसी भी कमी पर तत्काल सुधार कराने के निर्देश दिए गए।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं होगी। अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र समय से खुलें, मरीजों को निर्धारित सेवाएं मिलें, साफ-सफाई दुरुस्त रहे, स्वास्थ्य कर्मियों का व्यवहार शालीन और संवेदनशील हो तथा लंबित कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा कराया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक योजना की अगली समीक्षा में केवल प्रगति बताने के बजाय जमीनी परिणाम दिखना चाहिए। कम प्रगति वाले क्षेत्रों की अलग से निगरानी कर जिम्मेदारी तय करने और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अंतिम पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए।

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ तीरथ लाल, मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह सहित स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारी, चिकित्सा अधीक्षक, कार्यक्रम प्रभारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

*सूचना विभाग, बागपत*

*नराकास और सूचना विभाग ने शुरू की ‘बेमिसाल बागपत की तस्वीर’ फोटोग्राफी प्रतियोगिता**10 सितंबर तक भेजें फोटो, 05 विजेताओं...
31/08/2026

*नराकास और सूचना विभाग ने शुरू की ‘बेमिसाल बागपत की तस्वीर’ फोटोग्राफी प्रतियोगिता*

*10 सितंबर तक भेजें फोटो, 05 विजेताओं को मिलेगा सम्मान और राजभाषा विभाग की ‘कालिंदी धारा’ पत्रिका में स्थान*

*विरासत, संस्कृति, यमुना, प्रकृति, हुनर, प्रतिभा और बदलते बागपत की तस्वीरें भेजें—हर उम्र के नागरिक ले सकेंगे हिस्सा*

बागपत, 31 अगस्त 2026 -- बागपत की पहचान सिर्फ नक्शे पर दर्ज एक जनपद की नहीं, बल्कि यहां की मिट्टी, इतिहास, विरासत, संस्कृति, मेहनत और प्रतिभाओं में बसती है। किसी के लिए बागपत खेत-खलिहान की हरियाली है, किसी के लिए यमुना की धारा, किसी के लिए ऐतिहासिक-पौराणिक विरासत और किसी के लिए गांव की सादगी, लोकजीवन और अपने लोगों का हुनर। अब बागपत की इसी पहचान को अपनी नजर और अपने कैमरे से सामने लाने का मौका है। बेमिसाल बागपत की तस्वीर ऑनलाइन फोटोग्राफी प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है।

राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार की नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति बागपत के तत्वावधान में सूचना विभाग के सहयोग से आयोजित इस प्रतियोगिता में बागपत जनपद के सभी आयु वर्ग के नागरिक भाग ले सकते हैं। खास बात यह है कि प्रतियोगिता के लिए कोई सीमित विषय निर्धारित नहीं है। बागपत की मिट्टी और पहचान, ऐतिहासिक एवं पौराणिक विरासत, धार्मिक स्थल, संस्कृति और परंपराएं, मेले-त्योहार, कला और लोकसंगीत, गांव-देहात और खेत-खलिहान, यमुना और प्रकृति, स्थानीय खान-पान और बाजार, रोजमर्रा का जीवन, मेहनतकश लोग और हुनरमंद चेहरे, किसान और कारीगर, खिलाड़ी और युवा प्रतिभाएं, महिला शक्ति, उद्यमिता, नए व्यवसाय, नवाचार, उपलब्धियां और विकास—बागपत की कोई भी ऐसी तस्वीर भेजी जा सकती है, जो अपने जिले की पहचान, खूबसूरती या बदलाव पर गर्व का अहसास कराती हो।

इस प्रतियोगिता को खास बनाता है तस्वीर के साथ उसकी कहानी बताने का अवसर। प्रतिभागी फोटो के साथ उसके बारे में 100 शब्दों तक का विवरण भी भेज सकेंगे। यानी तस्वीर केवल एक दृश्य नहीं होगी, बल्कि उसके पीछे की जगह, व्यक्ति, परंपरा, हुनर, उपलब्धि या उस पल से जुड़ी कहानी भी सामने आएगी। अलग-अलग लोगों की नजर से सामने आने वाली ये तस्वीरें मिलकर बागपत के उन रंगों को दर्ज करेंगी, जो रोज हमारे आसपास होते हुए भी कई बार कैमरे में कैद नहीं हो पाते।

*गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग की पत्रिका 'कालिंदी धारा’ में तस्वीर के साथ दर्ज होगी कहानी*

प्रतियोगिता में चुनी जाने वाली तस्वीरों के लिए ‘कालिंदी धारा’ पत्रिका में प्रकाशन का अवसर भी मिलेगा। चयनित तस्वीरें प्रतिभागी के नाम एवं फोटो-स्टोरी के साथ पत्रिका में प्रकाशित की जाएंगी। इस तरह प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागी की तस्वीर केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बागपत की पहचान और स्थानीय जीवन को दस्तावेज के रूप में सामने लाने वाली सामग्री का हिस्सा बन सकेगी। यह उन नागरिकों के लिए भी खास अवसर है, जो अपने कैमरे की नजर से बागपत की कोई अनदेखी, अनकही या यादगार कहानी सामने लाना चाहते हैं।

प्रतियोगिता में कुल 05 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इनमें प्रथम, द्वितीय, तृतीय तथा दो प्रोत्साहन पुरस्कार शामिल हैं। विजेताओं को सितंबर माह में प्रस्तावित नराकास, बागपत की बैठक में सम्मानित किया जाएगा। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए अपनी फोटो ई-मेल [email protected] एवं व्हाट्सऐप नंबर 9557178303 पर भेजी जा सकती है। प्रविष्टि के साथ नाम, मोबाइल/व्हाट्सऐप नंबर, गांव, ब्लॉक एवं जनपद का नाम तथा फोटो के बारे में 100 शब्दों तक की कहानी/विवरण भेजना होगा। प्रविष्टि भेजने की अंतिम तिथि 10 सितंबर 2026 है।

तो कैमरा उठाइए, अपनी नजर से बागपत को देखिए और वह तस्वीर भेजिए, जिसे देखकर दूसरे भी कह उठें—यही है हमारा बेमिसाल बागपत। तस्वीर आपकी, नजर आपकी और कहानी भी आपकी।

*सूचना विभाग बागपत*

नराकास और सूचना विभाग ने शुरू की ‘बेमिसाल बागपत की तस्वीर’ फोटोग्राफी प्रतियोगिता10 सितंबर तक भेजें फोटो, 05 विजेताओं को...
31/08/2026

नराकास और सूचना विभाग ने शुरू की ‘बेमिसाल बागपत की तस्वीर’ फोटोग्राफी प्रतियोगिता

10 सितंबर तक भेजें फोटो, 05 विजेताओं को मिलेगा सम्मान और राजभाषा विभाग की ‘कालिंदी धारा’ पत्रिका में स्थान

विरासत, संस्कृति, यमुना, प्रकृति, हुनर, प्रतिभा और बदलते बागपत की तस्वीरें भेजें—हर उम्र के नागरिक ले सकेंगे हिस्सा

बागपत, 31 अगस्त 2026 -- बागपत की पहचान सिर्फ नक्शे पर दर्ज एक जनपद की नहीं, बल्कि यहां की मिट्टी, इतिहास, विरासत, संस्कृति, मेहनत और प्रतिभाओं में बसती है। किसी के लिए बागपत खेत-खलिहान की हरियाली है, किसी के लिए यमुना की धारा, किसी के लिए ऐतिहासिक-पौराणिक विरासत और किसी के लिए गांव की सादगी, लोकजीवन और अपने लोगों का हुनर। अब बागपत की इसी पहचान को अपनी नजर और अपने कैमरे से सामने लाने का मौका है। बेमिसाल बागपत की तस्वीर ऑनलाइन फोटोग्राफी प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है।

राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार की नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति बागपत के तत्वावधान में सूचना विभाग के सहयोग से आयोजित इस प्रतियोगिता में बागपत जनपद के सभी आयु वर्ग के नागरिक भाग ले सकते हैं। खास बात यह है कि प्रतियोगिता के लिए कोई सीमित विषय निर्धारित नहीं है। बागपत की मिट्टी और पहचान, ऐतिहासिक एवं पौराणिक विरासत, धार्मिक स्थल, संस्कृति और परंपराएं, मेले-त्योहार, कला और लोकसंगीत, गांव-देहात और खेत-खलिहान, यमुना और प्रकृति, स्थानीय खान-पान और बाजार, रोजमर्रा का जीवन, मेहनतकश लोग और हुनरमंद चेहरे, किसान और कारीगर, खिलाड़ी और युवा प्रतिभाएं, महिला शक्ति, उद्यमिता, नए व्यवसाय, नवाचार, उपलब्धियां और विकास—बागपत की कोई भी ऐसी तस्वीर भेजी जा सकती है, जो अपने जिले की पहचान, खूबसूरती या बदलाव पर गर्व का अहसास कराती हो।

इस प्रतियोगिता को खास बनाता है तस्वीर के साथ उसकी कहानी बताने का अवसर। प्रतिभागी फोटो के साथ उसके बारे में 100 शब्दों तक का विवरण भी भेज सकेंगे। यानी तस्वीर केवल एक दृश्य नहीं होगी, बल्कि उसके पीछे की जगह, व्यक्ति, परंपरा, हुनर, उपलब्धि या उस पल से जुड़ी कहानी भी सामने आएगी। अलग-अलग लोगों की नजर से सामने आने वाली ये तस्वीरें मिलकर बागपत के उन रंगों को दर्ज करेंगी, जो रोज हमारे आसपास होते हुए भी कई बार कैमरे में कैद नहीं हो पाते।

*गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग की पत्रिका 'कालिंदी धारा’ में तस्वीर के साथ दर्ज होगी कहानी*

प्रतियोगिता में चुनी जाने वाली तस्वीरों के लिए ‘कालिंदी धारा’ पत्रिका में प्रकाशन का अवसर भी मिलेगा। चयनित तस्वीरें प्रतिभागी के नाम एवं फोटो-स्टोरी के साथ पत्रिका में प्रकाशित की जाएंगी। इस तरह प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागी की तस्वीर केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बागपत की पहचान और स्थानीय जीवन को दस्तावेज के रूप में सामने लाने वाली सामग्री का हिस्सा बन सकेगी। यह उन नागरिकों के लिए भी खास अवसर है, जो अपने कैमरे की नजर से बागपत की कोई अनदेखी, अनकही या यादगार कहानी सामने लाना चाहते हैं।

प्रतियोगिता में कुल 05 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इनमें प्रथम, द्वितीय, तृतीय तथा दो प्रोत्साहन पुरस्कार शामिल हैं। विजेताओं को सितंबर माह में प्रस्तावित नराकास, बागपत की बैठक में सम्मानित किया जाएगा। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए अपनी फोटो ई-मेल [email protected] एवं व्हाट्सऐप नंबर 9557178303 पर भेजी जा सकती है। प्रविष्टि के साथ नाम, मोबाइल/व्हाट्सऐप नंबर, गांव, ब्लॉक एवं जनपद का नाम तथा फोटो के बारे में 100 शब्दों तक की कहानी/विवरण भेजना होगा। प्रविष्टि भेजने की अंतिम तिथि 10 सितंबर 2026 है।

तो कैमरा उठाइए, अपनी नजर से बागपत को देखिए और वह तस्वीर भेजिए, जिसे देखकर दूसरे भी कह उठें—यही है हमारा बेमिसाल बागपत। तस्वीर आपकी, नजर आपकी और कहानी भी आपकी।

सूचना विभाग बागपत

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27/08/2026
*नए यूपी में मातृशक्ति के सम्मान से आसान हो रही आगे बढ़ने की राह, रक्षाबंधन पर महिलाओं को मुफ्त सफर की बड़ी सौगात**बेटी ...
26/08/2026

*नए यूपी में मातृशक्ति के सम्मान से आसान हो रही आगे बढ़ने की राह, रक्षाबंधन पर महिलाओं को मुफ्त सफर की बड़ी सौगात*

*बेटी के जन्म से शिक्षा, सुरक्षा से स्वावलंबन और घर से सार्वजनिक जीवन तक बढ़ी भागीदारी; अब रोडवेज में गर्व के साथ सफर करेगी महिला शक्ति*

*कलेक्ट्रेट सभागार में 400 महिलाओं का सम्मान, साड़ी-मिठाई देकर बढ़ाया उत्साह; लखनऊ से मा. मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण*

*प्रदेश सरकार की नई घोषणाओं से मातृशक्ति को संबल, बागपत के नवाचार भी दोहरा रहे नारी वंदन का संकल्प*

*लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा शुरू होने पर गूंजी तालियां, 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को 29 अगस्त के बाद भी निशुल्क बस यात्रा*

बागपत, 26 अगस्त 2026 ---- नए उत्तर प्रदेश में मातृशक्ति के सम्मान को सुविधा, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन से जोड़कर महिलाओं के आगे बढ़ने की राह अब आसान हो रही है। बेटी के जन्म को उत्सव बनाने से लेकर उसकी पढ़ाई, सुरक्षा और सम्मान, परिवार में उसकी पहचान, विवाह के समय सहारा, पक्के आवास में भागीदारी और सार्वजनिक जीवन में सुरक्षित आवागमन तक महिला-केंद्रित प्रयासों की कड़ी लगातार विस्तार पा रही है।

इसी कड़ी में रक्षाबंधन से पहले प्रदेश सरकार की ओर से महिलाओं को निशुल्क बस यात्रा की बड़ी सौगात मिली। त्योहार पर महिलाओं का सफर आसान होगा, वहीं 60 वर्ष से अधिक उम्र की माताओं-बहनों के लिए 29 अगस्त के बाद भी निशुल्क यात्रा का संबल बना रहेगा। सम्मान के साथ सुविधा और सुविधा के साथ आगे बढ़ने का आत्मविश्वास मातृशक्ति के लिए इस पहल का प्रमुख संदेश रहा।

लखनऊ में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना का शुभारंभ किया और विशेष बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसका सीधा प्रसारण बागपत कलेक्ट्रेट सभागार में देखा गया। जिले की महिलाएं, जनप्रतिनिधि और अधिकारी मुख्यमंत्री के संबोधन से जुड़े। राज्यस्तर पर हुई घोषणाओं का बागपत में सजीव प्रसारण के जरिए सीधा संदेश पहुंचा और महिलाओं को नई सुविधाओं की जानकारी मिली।

जैसे ही रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं के लिए निशुल्क बस यात्रा की घोषणा हुई, कलेक्ट्रेट सभागार तालियों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 27 अगस्त सुबह छह बजे से 29 अगस्त की मध्यरात्रि तक हर उम्र की महिला एक सहयात्री सहित उत्तर प्रदेश परिवहन निगम और सिटी बस सेवा में निशुल्क यात्रा कर सकेगी। रक्षाबंधन को देखते हुए विशेष बसों की व्यवस्था की गई है। इस दौरान सभागार में मौजूद महिलाओं के चेहरों पर खुशी नजर आई। वहीं 29 अगस्त के बाद उत्तर प्रदेश की निवासी 60 वर्ष या अधिक आयु की महिलाएं आधार कार्ड या वोटर कार्ड दिखाकर निशुल्क यात्रा की सुविधा ले सकेंगी। उनके लिए बस किराया नहीं लिया जाएगा। इससे बुजुर्ग महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन में आने-जाने के लिए किराये की चिंता से राहत मिलेगी। इलाज, रिश्तेदारी, धार्मिक स्थल या अन्य जरूरी काम से यात्रा करने वाली माताओं के लिए यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी होगी।

निशुल्क यात्रा की सुविधा से महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन का सफर आसान होगा। प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए वाहन लोकेशन ट्रैकिंग, इमरजेंसी अलर्ट, पैनिक बटन और सीसीटीवी जैसी व्यवस्थाओं को सुरक्षा तंत्र से जोड़ा गया है। मिशन शक्ति, महिला पुलिस बीट और सेफ सिटी जैसी पहलों से महिलाओं की सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

मा. मुख्यमंत्री ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के लोककल्याण और सेवा भाव को मातृशक्ति के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि महिलाओं के लिए सुविधा बढ़ाना समाज की प्रगति से जुड़ा विषय है। रक्षाबंधन पर निशुल्क बस सेवा के साथ 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए आगे भी निशुल्क यात्रा की सुविधा जारी रखने को उन्होंने मातृशक्ति के प्रति सम्मान का कदम बताया। वहीं कामकाजी महिलाओं के लिए बनने वाले छात्रावासों की योजना को भी लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के नाम से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अक्टूबर-नवंबर में स्नातक की पढ़ाई कर रहीं प्रदेश की 50 हजार बेटियों को स्कूटी उपलब्ध कराने की घोषणा भी की। इससे कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए आवागमन आसान होने के साथ उच्च शिक्षा को आगे बढ़ाने का संबल मिलेगा।

वहीं कलेक्ट्रेट सभागार में मा. राज्यमंत्री केपी मलिक ने कहा कि जिस भूमि पर मातृशक्ति का सम्मान होता है, वहां देवताओं का निवास होता है। उन्होंने महिलाओं के सम्मान को प्रदेश की समृद्धि और परिवार-समाज की मजबूती से जोड़ते हुए कहा कि मातृशक्ति को सम्मान, सुरक्षा और सुविधाएं मिलने से उनकी भागीदारी प्रदेश के विकास में निरंतर बढ़ रही है। रक्षाबंधन के अवसर पर निशुल्क यात्रा की सुविधा को महिलाओं के लिए बड़ी सौगात बताते हुए उन्होंने उपलब्ध योजनाओं का लाभ लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

बागपत में इस अवसर पर करीब 400 महिलाओं का सम्मान कर उन्हें रक्षाबंधन का उपहार दिया गया। कलेक्ट्रेट सभागार में महिलाओं को एक-एक साड़ी और मिठाई का डिब्बा भेंट किया गया। एक ओर लखनऊ से मुख्यमंत्री का कार्यक्रम लाइव देखा जा रहा था, दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर मातृशक्ति के सम्मान का आयोजन चल रहा था। मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर तालियां और महिलाओं के चेहरों पर खुशी के बीच जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने उनका उत्साह बढ़ाया।

साड़ी और मिठाई के सम्मान तथा मुफ्त सफर की घोषणा पर महिलाओं के बीच यही चर्चा रही कि सरकार हो तो ऐसी, जो त्योहार पर सम्मान के साथ सुविधा भी दे। महिलाओं ने कहा कि बेटियों की पढ़ाई, सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी योजनाओं के साथ अब रोडवेज में मुफ्त सफर की सुविधा से मायके, रिश्तेदारी और जरूरी काम के लिए आना-जाना और आसान होगा।

माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महिला सम्मान और सशक्तीकरण के विजन को बागपत प्रशासन भी जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में स्थानीय नवाचारों के जरिए आगे बढ़ा रहा है। बेटी का नाम-घर की शान से बेटियों को घर की पहचान, मेरी बेटी मेरी कुलदीपक और कन्या जन्मोत्सव से बेटी के जन्म व बेटियों वाले परिवारों का सम्मान, बुनकर महिलाओं को जीआई कार्ड से पहचान और स्वयं सहायता समूहों से आर्थिक भागीदारी के अवसर दिए गए। किशोरियों के स्वास्थ्य के लिए एचपीवी टीकाकरण को गति मिली, निरा कॉटन पैड से स्वच्छ माहवारी, आंचल स्तनपान कक्ष से माताओं को गरिमापूर्ण सुविधा और किशोरी का पिटारा से बेटियों को अपनी बात रखने का मंच मिला। खाप पंचायतों के साथ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संवाद और विवाह समारोह में आठवां वचन, कांवड मेले में महिला हितैषी सुविधाएं जैसी पहलें भी इसी कड़ी को आगे बढ़ा रही हैं।

इस तरह बेटी के जन्म और स्वास्थ्य से शुरू होकर शिक्षा, पहचान, सुरक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी तक पहुंची महिला-केंद्रित पहल अब महिलाओं के सुगम सार्वजनिक आवागमन से भी जुड़ गई है। रक्षाबंधन पर मिली निशुल्क बस यात्रा की सौगात इसी कड़ी में मातृशक्ति के लिए सम्मान, सुविधा और आत्मविश्वास का नया संबल बनकर सामने आई है।

इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वित्त/राजस्व विनीत कुमार उपाध्याय, परियोजना निदेशक राहुल वर्मा, एआरएम हाकिम सिंह और एआरटीओ विपिन कुमार ,यशपाल सिंह सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

*सूचना विभाग, बागपत*

जनपद बागपतप्रेस विज्ञप्ति दिनांक-  25.08.2026 "05 विधिक नमूने संग्रहित किए तथा  210 कि.ग्रा.मावा (मूल्य ₹ 56710/-) नष्ट ...
25/08/2026

जनपद बागपत
प्रेस विज्ञप्ति
दिनांक- 25.08.2026

"05 विधिक नमूने संग्रहित किए तथा 210 कि.ग्रा.मावा (मूल्य ₹ 56710/-) नष्ट कराया , 43 कि. ग्रा. स्किम्ड मिल्क पाउडर (मूल्य ₹ 12900/-) को सीज किया एवं FIR दर्ज कराई"

आयुक्त महोदया खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तर प्रदेश, लखनऊ एवं जिलाधिकारी महोदया, बागपत के आदेश के अनुपालन में आगामी त्यौहार रक्षाबंधन के दृष्टिगत आम जनमानस को खाद्य एवं पेय पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिनांक- 24.08.2026 की मध्यरात्रि एवं 25.08.2026 को सहायक आयुक्त खाद्य ll डी. पी. सिंह के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम द्वारा छापेमारी कार्यवाही की गई,कृत प्रवर्तन कार्यवाही का विवरण निम्नवत है ...
1. बड़ौत से आ रही गाड़ी संख्या DL 1L-AG 5122 आईसर कैंटर , को टटीरी टोल प्लाजा के पास रोककर जाँच की गई, जिसमें रामकुमार पुत्र रतन सिंह, ओमबीर पुत्र चरण सिंह, नीतू पुत्र बाबूराम, रवि पुत्र किशन लाल का मावा ले जाया जा रहा था । पकड़ी गई गाड़ी में मावा अस्वच्छकर-अस्वस्थकर परिस्थितियों में विक्री के लिए दिल्ली ले जाए जा रहा था, मिलावट की शंका के आधार पर मावा के 04 विधिक नमूने एवं अस्वच्छकर- अस्वस्थकर परिस्थितियों में ले जाए रहे 210 कि.ग्रा. मावा (मूल्य ₹ 56700/-) को मौके पर ही नष्ट करा दिया।

2. तहसील बड़ौत स्थित ग्राम बिजवाड़ा में नौशाद पुत्र नूरुद्दीन की मावा भट्टी से (निर्माण स्थल) स्किम्ड मिल्क पाउडर का विधिक नमूना लिया गया एवं 43 कि.ग्रा. स्किम्ड मिल्क पाउडर (अनुमानित कीमत ₹12900/-)को मौके पर ही नष्ट करा दिया गया।
3. गाड़़ी संख्या UP 17 BT 9972 को मिलावटी मावा ले जाने के संदेह के आधार पर निरीक्षण करने हेतु सचल दल द्वारा रोकने का प्रयास किया गया। किन्तु गाड़ी के चालक महताब पुत्र वाहिद, तथा मावा भट्टी संचालक-मीर हसन पुत्र वाहिद, निवासीगण- सिल्वर नगर धनौरा, बागपत द्वारा सचल दल के साथ अभद्रता करते हुए बलपूर्वक गाड़ी लेकर फरार होने के पश्चात् उपरोक्त के विरूद्ध थाना-बागपत में बी.एन. एस. की सुसंगत धाराओं में तहरीर दी गयी।
उपरोक्त संग्रहित विधिक नमूनों को जाँच हेतु खाद्य प्रयोगशाला प्रेषित किया जा रहा हैं । जाँच रिपोर्ट प्राप्त होने पर नियमानुसार अग्रिम ‌विधिक कार्यवाही की जायेगी ।

खाद्य सुरक्षा टीम में सहायक आयुक्त (खाद्य) ll डी.पी.सिंह ,मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार,खाद्य सुरक्षा अधिकारी यज्ञ दत्त आर्य एवं निधि रानी उपस्थित रहीं।

सहायक आयुक्त (खाद्य)-II
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन,

*सड़क हादसों पर अब बागपत में ‘रिएक्शन’ नहीं, एक्शन होगा, कारण ट्रैक से ब्लैक स्पॉट सुधार तक बनेगा पूरा रोडमैप**जिला सड़क ...
25/08/2026

*सड़क हादसों पर अब बागपत में ‘रिएक्शन’ नहीं, एक्शन होगा, कारण ट्रैक से ब्लैक स्पॉट सुधार तक बनेगा पूरा रोडमैप*

*जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने विभिन्न बिंदुओं पर समीक्षा कर दिए आवश्यक दिशा-निर्देश*

*सड़क पर हर सफर सुरक्षित हो: स्कूल वाहन, स्कूल वाहनों की जांच से ब्लैक स्पॉट सुधार और त्वरित उपचार तक चलेगा अभियान*

*बागपत में सड़क सुरक्षा का 4ई फॉर्मूला: शिक्षा-प्रवर्तन-सड़क सुधार से लेकर उपचार तक फोकस*

*जिलाधिकारी के निर्देशन में परिवर्तन योजना मिशन मोड में लागू, एआरटीओ-पुलिस-यातायात-ईओ की संयुक्त टीम संभालेगी मोर्चा*

बागपत, 25 अगस्त 2026 – जिले में सड़क सुरक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए अब हर हादसे के कारण से लेकर उसके समाधान तक की निगरानी होगी। हादसा कहां हुआ, क्यों हुआ और उसे दोबारा रोकने के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं, इसका पूरा ट्रैक तैयार किया जाएगा। इसी सोच के साथ जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने सड़क सुरक्षा के लिए बागपत मॉडल को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में उन्होंने सड़क सुरक्षा के 4ई प्लान—Education, Enforcement, Engineering और Emergency Care को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। यानी लोगों को जागरूक करने से लेकर यातायात नियमों के पालन, सड़क की खामियां दूर करने और दुर्घटना के बाद घायल को समय पर उपचार दिलाने तक पूरी व्यवस्था को एक साथ मजबूत किया जाएगा।

बैठक में सामने आए आंकड़ों ने इसकी जरूरत भी स्पष्ट कर दी। जुलाई 2025 में जिले में 35 सड़क हादसे हुए थे, जो जुलाई 2026 में बढ़कर 43 हो गए। हादसों में 18.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मृतकों की संख्या 16 से बढ़कर 21 पहुंच गई, जो 23.81 प्रतिशत अधिक है। जुलाई 2026 के 43 हादसों में 21 लोगों की मौत और 39 लोग घायल हुए। जुलाई तक के क्रमिक आंकड़ों में भी वर्ष 2025 के 224 हादसों के मुकाबले 2026 में 273 हादसे दर्ज हुए हैं। मृतकों की संख्या 106 से बढ़कर 110 हुई है। जिलाधिकारी ने इन आंकड़ों को केवल समीक्षा तक सीमित न रखते हुए दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान और उसी आधार पर सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा।

मार्गवार समीक्षा में भी साफ हुआ कि दुर्घटनाओं का दबाव सभी सड़कों पर एक जैसा नहीं है। जुलाई में कुल 43 हादसों में राष्ट्रीय राजमार्ग और कुछ अन्य प्रमुख मार्ग अधिक संवेदनशील सामने आए, जबकि एक्सप्रेसवे पर हादसे शून्य रहे। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन मार्गों पर हादसों का दबाव अधिक है, वहां केवल चालान बढ़ाने के बजाय सड़क की डिजाइन, मोड़, साइनेज, रिफ्लेक्टर, प्रकाश और यातायात संचालन से जुड़ी कमियों को तलाशकर दूर किया जाए।

इसी कड़ी में जिले के 25 ब्लैक स्पॉट पर विशेष फोकस किया गया है। बागपत, बड़ौत, रमाला, बालैनी, छपरौली, सिंघावली अहीर, खेकड़ा, चांदीनगर, दोघट और बिनौली क्षेत्र के दुर्घटना संभावित स्थान इसमें शामिल हैं। कलेक्ट्रेट, गुफा मंदिर, गोरीपुर मोड़, काठा, रमाला मिल, जीवाना टोल, टोल प्लाजा बालैनी, छपरौली चुंगी, शाहपुर बडौली, बबौली, सिंघावली अहीर पुलिया, हिसावदा कट, डोला, रटौल के पास, लहचौड़ा, बामनौली क्षेत्र, गडबरा मोड़, शेखपुरा मोड़, चांदायन मोड़ और बिजरौल-मेरठ रोड समेत चिन्हित स्थानों पर सड़क सुरक्षा उपायों की समीक्षा हुई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि ब्लैक स्पॉट चिन्हित करना ही पर्याप्त नहीं है, वहां सुधार के बाद हादसों में कमी भी दिखाई देनी चाहिए।

सड़क इंजीनियरिंग के स्तर पर प्रमुख मार्गों और जंक्शनों पर ट्रैफिक कॉमिंग उपाय, चेतावनी व दिशासूचक साइनेज, रिफ्लेक्टर और प्रकाश व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए। राष्ट्रीय राजमार्गों से संबंधित 123.30 किलोमीटर मार्ग तथा लोक निर्माण विभाग के राज्य राजमार्ग, एमडीआर और ओडीआर मार्गों की स्थिति की समीक्षा हुई। बैठक में सड़क सुरक्षा से जुड़े 161 ट्रैफिक कॉमिंग कार्य पूरे होने की जानकारी भी दी गई। जिलाधिकारी ने सड़क की बनावट, मोड़, कट, प्रकाश और संकेतकों जैसी कमियों को दूर करने को हादसे रोकने की रणनीति का अहम हिस्सा बताया।

यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की तस्वीर भी बैठक में रखी गई। जुलाई में पुलिस ने बिना हेलमेट के 5,475 चालान किए। बिना लाइसेंस वाहन चलाने पर 934 और बिना फिटनेस वाहन चलाने पर 11 चालान किए गए। मोडिफाइड साइलेंसर और तेज हार्न के मामलों में 193 चालान हुए। बिना सीट बेल्ट, रांग साइड, ओवर स्पीडिंग, वाहन चलाते समय मोबाइल के इस्तेमाल और शराब पीकर वाहन चलाने के मामलों में भी कार्रवाई की गई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि चालान का उद्देश्य संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि हादसों का कारण बनने वाले व्यवहार पर रोक लगाना है।

परिवहन विभाग ने जुलाई की कार्रवाई में ओवर स्पीडिंग के 506, बिना हेलमेट के 558, बिना सीट बेल्ट के 91, रांग साइड के 180 और वाहन चलाते समय मोबाइल के इस्तेमाल के 60 चालान किए। मालवाहक वाहनों में ओवरलोडिंग के 98 चालान किए गए, जबकि क्रमिक संख्या 625 रही। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से ओवरलोड भूसे वाले वाहनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। ऐसे वाहनों में रिफ्लेक्टर लगाने और ओवरलोडिंग रोकने पर जोर दिया गया, ताकि रात में वाहन दूर से दिखाई दें और दुर्घटना का खतरा कम हो।

स्कूल वाहनों की स्थिति की समीक्षा में सामने आया कि जिले में 794 स्कूल वाहन हैं, जिनमें 604 फिट हैं, जबकि 29 अनफिट मिले हैं। जिलाधिकारी ने अनफिट वाहनों को शीघ्र फिट कराने के निर्देश दिए। प्रत्येक विद्यालय में सड़क सुरक्षा समिति अथवा रोड सेफ्टी क्लब गठित कर उसे सक्रिय रखने को कहा गया। विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ स्कूल वाहनों की फिटनेस और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित जांच पर भी जोर दिया गया।

रोडवेज बसों की सुरक्षा को लेकर जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाया। जिले की 220 रोडवेज बसों में से 185 चालक-परिचालकों ने स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराया है। उन्होंने हर सप्ताह स्वास्थ्य परीक्षण कराने के निर्देश दिए। जो चालक-परिचालक परीक्षण के लिए नहीं पहुंचते हैं, उन्हें कार्य से हटाने की कार्रवाई करने को कहा गया। यात्रियों की सुरक्षा के लिए चालक-परिचालकों की स्वास्थ्य स्थिति को भी सड़क सुरक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी माना गया।

दुर्घटनाओं के कारणों को ट्रैक करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल को भी महत्वपूर्ण कड़ी बनाया गया है। पुलिस विभाग को 45 दुर्घटना घटनाओं को पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए गए। डेटा अपडेट में लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय करने को कहा गया। हादसे का स्थान, कारण और स्थिति सही दर्ज होने पर ही यह तय किया जा सकेगा कि संबंधित स्थान पर ब्लैक स्पॉट सुधार, साइनेज, रिफ्लेक्टर अथवा यातायात नियंत्रण में किस तरह के उपाय की जरूरत है। इस व्यवस्था के जरिए हादसे के कारण से लेकर उसके समाधान तक पूरी प्रक्रिया को जोड़ा जाएगा।

वंदना चौक और बड़ौत समेत प्रमुख स्थानों पर यातायात सुचारु रखने के लिए भी स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए। जहां नगर निकाय की भूमिका है, वहां अधिशासी अधिकारी की जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी। यातायात में बाधा बनने वाले कारणों को तत्काल दूर करने पर जोर दिया गया। वहीं बड़ौत-मुजफ्फरनगर मार्ग पर बामनौली में बने बस स्टैंड पर रोडवेज बसों के नियमित ठहराव की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि स्कूली विद्यार्थियों को परेशानी न हो।

बैठक में सबसे बड़ा फैसला एनसीआर की ‘परिवर्तन’ यानी नया सफर योजना को लेकर हुआ। बागपत में इसे मिशन मोड में लागू करने के लिए एआरटीओ, पुलिस, यातायात और नगर निकाय के ईओ की विशेष संयुक्त टीम गठित की गई है। टीम योजना के क्रियान्वयन की संयुक्त निगरानी करेगी। इसके तहत एनसीआर में 10 और 15 वर्ष की आयु पूरी कर चुके पात्र पुराने वाहनों को स्क्रैपिंग के लिए प्रेरित किया जाएगा और निर्धारित आयु सीमा पूरी कर चुके वाहनों को जिले में स्थापित आरवीएसएफ सेंटर तक पहुंचाने की कार्रवाई होगी। परिवहन विभाग, अधिकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा संचालकों, बैंक और संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आवेदन तथा अन्य बाधाओं का समयबद्ध समाधान किया जाएगा। जिलाधिकारी या उनके नामित अधिकारी की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के साथ नियमित समन्वय बैठकें कर योजना की प्रगति की निगरानी भी होगी।

‘परिवर्तन’ योजना का मकसद केवल पुरानी गाड़ी हटाना नहीं, बल्कि वाहन मालिकों को नई और स्वच्छ तकनीक अपनाने का अवसर देना तथा एनसीआर की हवा को प्रदूषण से राहत दिलाना है। योजना के तहत दिल्ली-एनसीआर में चल रहे पात्र पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाणिज्यिक ट्रकों और बसों को हटाकर बीएस-VI मानक या इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा। बागपत के लिए इसका महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि जिले के ट्रक और बसें दिल्ली, हरियाणा तथा एनसीआर के दूसरे हिस्सों में नियमित रूप से आते-जाते हैं। योजना में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र शामिल हैं तथा अनुमान है कि 19 लाख से अधिक ट्रक और 16 हजार से अधिक बसें इसके दायरे में आ सकती हैं।

वहीं जुलाई में 13 जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से 8,267 लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया, जबकि क्रमिक रूप से 40,178 लोगों तक संदेश पहुंचाया गया। गुड सेमेरिटन योजना के संबंध में भी 3,259 लोगों को जागरूक किया गया। जिलाधिकारी ने गांवों, स्कूल-कॉलेजों और आम लोगों तक योजना की जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए, ताकि दुर्घटना के बाद घायल की मदद करने में लोग पीछे न हटें। योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल की तत्काल मदद कर जान बचाने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित किया जाता है और मददगार को अनावश्यक कानूनी परेशानी से बचाने का प्रावधान है।

हादसा होने के बाद उपचार में देरी न हो, इसके लिए जिले में 102 की 17 और 108 की 15 एंबुलेंस क्रियाशील हैं। इनका रिस्पांस टाइम क्रमशः 6.17 और 6.40 मिनट दर्ज हुआ है। एनएच-709बी पर पांच और एनएच-334बी पर एक एंबुलेंस की उपलब्धता दर्ज है। जिलाधिकारी ने एंबुलेंस और एनएचएआई की एंबुलेंस के बीच समन्वय मजबूत करने, दुर्घटना स्थल तक त्वरित पहुंच और गंभीर घायलों को समय से उच्च चिकित्सा संस्थान पहुंचाने पर जोर दिया।

अस्पतालों की तैयारी की भी समीक्षा की गई। बड़ी दुर्घटना की स्थिति में 633 बेड, 861 मानव संसाधन और 356 उपकरण उपलब्ध होने की जानकारी दी गई। गंभीर घायलों के रेफरल के लिए एनएचएआई मेडिकल एड पोस्ट, सीएचसी और उच्च चिकित्सा संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय तथा डिजिटल अस्पताल नोटिफिकेशन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया, ताकि दुर्घटना के बाद उपचार की अगली कड़ी में देरी न हो।

हिट एंड रन के मामलों में पीड़ित परिवारों तक सहायता पहुंचाने की स्थिति भी देखी गई। जिले में कुल 58 हिट एंड रन प्रकरण हैं, जिनमें 23 मामलों में भुगतान पूरा हो चुका है। शेष मामलों में प्रपत्रों की जांच कर पात्र मामलों में आगे की कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए, ताकि सहायता पहुंचाने में अनावश्यक देरी न हो।

राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और प्रमुख मार्गों पर आवारा एवं घूमंतू पशुओं से होने वाले हादसों को रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। संवेदनशील स्थानों की पहचान, उच्च और मध्यम जोखिम वाले क्षेत्रों का वर्गीकरण, पशुओं की संख्या का आकलन और उन्हें सड़क से हटाने के साथ अस्थायी व स्थायी आश्रय, चारा-पानी और पशु चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की जाएगी। कैटल कैचर वाहन, निगरानी दल और नियमित निरीक्षण के साथ पशु मालिकों की पहचान भी व्यवस्था का हिस्सा होगी।
हाईवे और प्रमुख सड़कों पर अतिक्रमण व अनधिकृत पार्किंग के खिलाफ भी कार्रवाई जारी रहेगी। बैठक में 21 स्थानों से अतिक्रमण हटाए जाने की जानकारी दी गई। राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित सूचना और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए 1033, 108, 1076 और 14449 हेल्पलाइन के प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया।

कुल मिलाकर बैठक में सड़क सुरक्षा को विभागवार कार्रवाई के बजाय एकीकृत व्यवस्था के रूप में लागू करने की दिशा तय हुई। हादसे का डेटा, ब्लैक स्पॉट सुधार, यातायात प्रवर्तन, वाहनों की फिटनेस, जागरूकता, सड़क इंजीनियरिंग और दुर्घटना के बाद त्वरित उपचार—इन सभी कड़ियों को आपस में जोड़कर काम किया जाएगा। जिलाधिकारी का फोकस साफ रहा कि सड़क सुरक्षा की सफलता केवल चालान या बैठकों की संख्या से नहीं, बल्कि हादसे कम होने, संवेदनशील स्थानों में सुधार और दुर्घटना के बाद घायल को समय पर मदद मिलने के परिणाम से दिखाई देनी चाहिए।

इस अवसर पर सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी विपिन कुमार, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी अतुल कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार यादव, पीटीओ संदीप जायसवाल सहित आदि उपस्थित रहे।

*सूचना विभाग, बागपत*

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