शहीद भगतसिँह पुस्तकालय लूम्ब - बाग़पत

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शहीद भगतसिँह पुस्तकालय लूम्ब - बाग़पत जनता को बदलने के लिए साहित्य से अधिक कारगर कोई और माध्यम नही हो सकता - लू शुन

16/05/2026
*बाढ़ पीड़ित सहयोग के लिए*क्रांतिकारी अभिवादन!साथियो,पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश...
23/09/2025

*बाढ़ पीड़ित सहयोग के लिए*
क्रांतिकारी अभिवादन!
साथियो,
पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आयी बाढ़ की तबाही से हजारों लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं और उन्हें तत्काल राहत की आवश्यकता है। हम निवेदन करते हैं कि आप बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य के लिए सहायता करें। अधिक जानकारी या आर्थिक सहयोग देने के लिये निम्नलिखित विवरण का उपयोग करें:
UPI: asutos@cnrb
Mob. No. 7275720663

UPI: utkarsh232109@okaxis
Mob. No. 8005239942
धन्यवाद और शुभकामनाएं,
*जारीकर्ता: मजदूर संघर्ष संगठन (MSS)*

पत्रिका( देश विदेश)के बारे मेंएक ऐसे दौर में जब छात्र नौजवान अपने को मोटिवेट,इंस्पायर करने के लिए चंद मिनटों की वीडियो क...
19/07/2025

पत्रिका( देश विदेश)के बारे में

एक ऐसे दौर में जब छात्र नौजवान अपने को मोटिवेट,इंस्पायर करने के लिए चंद मिनटों की वीडियो का सहारा लेते हो,समस्या को सुलझाने के लिए ढोंगी पीर,फकीर,बाबाओं का कहना मान ऊल जलूल काम करते हो,अमीर बनने की फिराक में सटेलची बनने से लेकर अपराधी बनने का सफर तय करते हो,
इतिहास को समझने के लिए यूट्यूब पर बनी वीडियो देखते हो,यानी चारों तरफ जब इंसान को अक्ल का अंधा बनाने की हररोज नई नई प्रक्रिया इज़ात की जा रही हो उस दौर में #देश–विदेश का 48वा अंक हमारे हाथों में है,

आप और हम लोगों के लिए पत्रिका पढ़नी इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाती है कि पत्रिका बताती है कि ऊपर लिखी बात की जड़े कहां है,ये पैदा कैसे होती है,
पत्रिका बताती है,
क्यों आज के दौर में शिक्षा की हालत इतनी खस्ता है,
हमारे हक की कमाई,हमारे हिस्से का रोजगार,हमारे हिस्से का घर मकान, ईलाज,शिक्षा,बेहतर पर्यावरण,पौष्टिक खाना आदि कौन छीन रहा है,
पत्रिका बताती है किस तरह तमाम राजनीतिक पार्टियों ने हमको छला है,
बदले में हमको दिया है युद्ध,

पत्रिका बताती है कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में आम इंसान को किस तरह प्रभावित करती है,
देश के साथ साथ विदेश में बैठे चंद भेड़ियों का आम इंसान किस तरह शिकार बनता है,

पत्रिका अनियतकालीन है,पाठकों के आर्थिक सहयोग से लगभग 3 महीने में निकलती रहती है,
सहयोग राशि 30 रुपए है,

पत्रिका के कामकाज(अवैतनिक) में लगे तमाम साथियों का शुक्रिया अदा करता हूँ,
क्योंकि आपके बलबूते पर ही इतना शानदार कंटेंट हम लोगो तक पहुंच पाता है

किताब कितनी अनोखी चीज़ है। यह पेड़ से बनी और लचीले हिस्‍सों वाली एक सपाट सी वस्‍तु है जिस पर रेंगने से बनी गहरी रेखाओं क...
08/07/2025

किताब कितनी अनोखी चीज़ है। यह पेड़ से बनी और लचीले हिस्‍सों वाली एक सपाट सी वस्‍तु है जिस पर रेंगने से बनी गहरी रेखाओं की तरह कुछ अजीबोगरीब छपा होता है। परन्‍तु बस एक नज़र डालने की देर है और आप एक दूसरे व्‍यक्ति के दिमाग में चले जाते हैं, भले ही वह व्‍यक्ति हज़ारों साल पहले ही चल बसा हो। सहस्‍त्राब्दियों के फासले के बावजूद, लेखक आपके मस्तिष्‍क से स्‍पष्‍ट और गुपचुप तरीके से बाते कर रहा होता है, वह सीधे आप से बातें कर रहा होता है। लेखन शायद मनुष्‍य का महानतम आविष्‍कार है जो एक दूसरे से अनजान दो भिन्‍न युगों में रहने वाले नागरिकों को एक डोर से बांध देता है। किताबें समय की बेड़ि‍यों को तोड़ देती हैं। किताब एक ज़िन्‍दा सबूत है कि मनुष्‍य जादू करने में सक्षम है।
✍️ कार्ल सैगन ( विश्‍वविख्‍यात खगोलशास्‍त्री एवं लेखक)

What an astonishing thing a book is. It's a flat object made from a tree with flexible parts on which are imprinted lots of funny dark squiggles. But one glance at it and you're inside the mind of another person, maybe somebody dead for thousands of years. Across the millennia, an author is speaking clearly and silently inside your head, directly to you. Writing is perhaps the greatest of human inventions, binding together people who never knew each other, citizens of distant epochs. Books break the shackles of time. A book is proof that humans are capable of working magic."

[Cosmos, Part 11: The Persistence of Memory (1980)]
✍️ Carl Sagan

, कात्यायनी की कविता, मुक्ति की चाहत को सपनों की दुनिया से बाहर लाना होगा।मुक्ति की चाहत को बस चाहत ही बने रहने देना बूढ़...
30/06/2025

, कात्यायनी की कविता,
मुक्ति की चाहत को
सपनों की दुनिया से
बाहर लाना होगा।
मुक्ति की चाहत को
बस चाहत ही बने रहने देना
बूढ़ा कर देगा।
मुक्ति की चाहत को
अदम्य लालसा ही नहीं
दुर्निवार ज़रूरत बनाना होगा।
उसे एक आदत में
ढालना होगा।
कविता का लिबास उतारकर
उसे रोज़मर्रे की
ज़रूरत बनाना होगा।
और फिर उसके लिए
वैसा ही उद्यम करना होगा
जैसा कि हम ताउम्र करते हैं
अपनी रोज़मर्रे की ज़रूरतें
पूरी करने के लिए
और
थकते नहीं हैं।

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Main Ramala Tandda Road Canara Bank Ke Peeche Loomb
Baghpat
250623

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