04/04/2026
🤔चीफ जस्टिस साहब, रात 2 बजे तक जागने के मौके पहले भी आए थे
लेकिन जजों पर हमला हुआ तब ही नींद उड़ी ।
👉 बंगाल के मालदा में 7 जजों पर भीड़ ने बंधक बना कर हमला किया - उन 7 में से 3 तो महिला जज थी ।
और ममता बनर्जी ने सफाई दे दी कि उसको तो इस घटना का पता ही नहीं था और राज्य का Law & Order तो वैसे भी अब उसके हाथ में नहीं है (मतलब वह अब चुनाव आयोग के हाथ में है) ।
अगर वह ममता सरकार के हाथ में नहीं है तो कपिल सिब्बल और अन्य वकील कैसे सुप्रीम कोर्ट में उसकी सरकार की तरफ से खड़े थे - चीफ जस्टिस को आदेश देना चाहिए कि उन वकीलों की फीस राज्य सरकार की तरफ से न दी जाए ।
♦️ चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विपुल पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच से सुनवाई की -
👉चीफ जस्टिस ने कहा
This was not a routine incident. It was ex facie a calculated well - planned and deliberate move to demoralise the judicial officers and impact the ongoing process of adjudication of objections”
उन्होंने यह भी कहा कि वो रात 2 बजे तक मामले की monitoring कर रहे थे और he had never seen such a “politically polarised state like west Bengal - बेंच ने कहा the incident is a “complete failure of administration” and a direct challenge to authority -
⭕️सुप्रीम कोर्ट ने इन अधिकारियों को virtually कोर्ट में पेश होने को कहा -
👉Chief Secretary of West Bengal
👉Director General of Police (DGP) of West Bengal
👉District Magistrate (DM) of Malda
👉Superintendent of Police (SSP/SP) of Malda
🔴 इन लोगों से सीधा सवाल पूछा जाना चाहिए कि आपने किसके कहने पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की -
क्या चुनाव आयोग ने रोका या ममता ने रोका - उनसे सवाल जरूर होने चाहिए, कहीं ऐसा न हो, बस बुला के बिठा लिया और जिरह वकीलों से होती रहे -
चंद्रचूड़ ने मणिपुर के DGP को बुला कर ऐसा ही किया था - पूरा दिन वह कोर्ट में बैठे रहे किसी जज ने एक सवाल नहीं पूछा -
चीफ जस्टिस का कहना कि इस घटना ने
सीधा “authority” को चुनौती दी है लेकिन
सच तो यह है कि ममता अपने आपको राज्य में
supreme authority मानती है
जो सुप्रीम कोर्ट से भी ऊपर है।
✊चीफ जस्टिस साहब ममता राज में लोगों पर खासकर हिंदुओं पर अनेक घोर अत्याचार हुए हैं जिनके लिए भी आपको रात रात भर जाग कर monitoring करनी चाहिए थी ।
लेकिन वह आपने केवल तब किया जब judicial officers पर हमले हुए ।
एक बड़ा सीधा सा सिद्धांत (कानून) है कि सरकारी अधिकारी के काम में बाधा डालना और उसे काम करने से रोकना अपराध है ।
वह अपराध ममता ने IPAC की ED की रेड में किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट उस मामले को भी अभी तक लिए बैठा है जबकि ममता ने माना वह वहां गई लेकिन पार्टी अध्यक्ष के नाते।
लेकिन कोई भी हो वह ED के काम में रुकवाट नहीं डाल सकता - उस पर तो निर्णय दिया होता।
🎯बहुत लोगों का कहना है केंद्र को बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए - केंद्र को ऐसा करने में कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन अब ठीक चुनाव से पहले किया नहीं जा सकता ।
पहले किया जाता तब यही सुप्रीम कोर्ट जो आज उबल रहा है सवाल उठाता कि जिस सरकार के पास करीब तीन चौथाई बहुमत है आपने उसे कैसे गिरा दिया - और फिर जनता भी ममता को “पीड़ित” मानकर फिर उसे वोट देती ।
🔴इतना ही नहीं जब 2 मई, 2021 को चुनाव नतीजे आए तो उसी दिन से हिंदुओं पर हमले शुरू हो गए और 80 हजार लोगों को घर से बेघर होना पड़ा ।
उसके लिए भी PIL दायर हुई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया - उस दिन जो भी चीफ जस्टिस था उसे नींद नहीं आनी चाहिए थी ।
एक बात तो निश्चित है इस महीने के चुनाव में
ममता अगर जीत गई तो 2021 की तरह फिर
हिंदुओं पर हमले होंगे और उसके लिए
यह नहीं देखा जाएगा कि
कौन दलित है, आदिवासी है, OBC है या सवर्ण है ।
✍️ Subhash Chandra जी
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