26/10/2025
गरीब जनता किन मुसीबतों और तकलीफों से गुजरती है, इसका अंदाजा कॉरपोरेट और खानदानी नेताओं को बिल्कुल भी नहीं है! फिर भी वही लोग वर्षों से गरीबों के हक की लड़ाई लड़ने का दावा करते आ रहे हैं।
सोचने की बात ये है कि — गरीबों के हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते पूरा खानदान अमीर हो गया, हर कोई सांसद, विधायक या मंत्री बन गया, लेकिन गरीब आज भी वहीं का वहीं है!
अब वक्त आ गया है कि जनता खुद ऐसे नेताओं को खोजे
जो जनहित में स्वतंत्र होकर काम करें, क्योंकि पार्टियों द्वारा खोजकर जनता को सौंपे गए नेता ज़्यादातर या तो कॉरपोरेट होते हैं, या उसी खानदानी सियासत के शतरंज के मोहरे होते हैं!