13/01/2015
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (संक्षिप्त-एबीवीपी या विद्यार्थी परिषद) विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन हैं। इसकी स्थापना छात्र हित और छात्रों को उचित दिशा देने के लिए किया गया। विद्यार्थी परिषद का नारा है - ज्ञान, शील और एकता ।
स्थापना
अखिल भारतीय विद्यार्थी की स्थापना मुंबई में ९ जुलाई १९४९ को हुई थी। इसकी स्थापना का श्रेय प्रोफेसर ओमप्रकाश बहल को दिया जाता है।
उद्देश्य
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की स्थापना का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय पुनर्निर्माण है। विद्यार्थी परिषद के अनुसार, छात्रशक्ति ही राष्ट्रशक्ति होती है। राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए छात्रों में राष्ट्रवादी चिंतन को जगाना ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का मूल उद्देश्य है। देश की युवा छात्र शक्ति का यह प्रतिनिधि संगठन है। इसकी मूल अवधारणा राष्ट्रीय पुनर्निर्माण है। इसका नारा है - छात्र शक्ति-राष्ट्रशक्ति। वैसे एवीवीपी का आधिकारिक स्लोगन - ज्ञान, शील, एकता - परिषद् की विशेषता है।
संगठन
राष्ट्रवादी छात्रों के इस संगठन की हर वर्ष देशव्यापी सदस्यता होती है। देश के सभी विश्वविद्यालयों और अधिकांश कॉलेजों में परिषद की इकाईयां हैं। अधिकांश छात्रसंघों पर परिषद का ही अधिकार है। संगठन का मानना है कि आज का छात्र कल का नागरिक है। हर वर्ष होने वाले प्रांतीय और राष्ट्रीय अधिवेशनों के द्वारा नई कार्यसमिति गठित होती हैं और वर्ष भर के कार्यक्रमों की घोषणा होती है। यह एकमात्र संगठन है जो शैक्षणिक परिवार की अवधारणा में विश्वास रखता है और इसी कारण परिषद के अध्यक्ष पद पर प्रोफेसर हीं चुने जाते हैं। इसकी चार स्तरीय इकाईयां होती है। पहली कॉलेज इकाई, दूसरी नगर इकाई, तीसरी प्रांत इकाई और चौथी राष्ट्रीय इकाई। अब कई स्थानों पर जिला इकाई भी बनने लगी है।
मुखपत्र
हिंदी में नई दिल्ली से प्रकाशित 'राष्ट्रीय छात्रशक्ति' अ.भा. विद्यार्थी परिषद् का मुखपत्र है। यह शिक्षा क्षेत्र की अग्रणी पत्रिका है। इसके संपादक आशुतोष हैं। अवनीश सिंह राजपूत, संजीव कुमार सिन्हा संपादक मंडल के सदस्य हैं।
राष्ट्रीय पदाधिकारी
अ.भा. विद्यार्थी परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं प्रा.नागेश जी एवं श्री श्रीहरि बोरीकर राष्ट्रीय महामंत्री हैं।
संघ एवं विद्यार्थी परिषद
विद्यार्थी परिषद के बारे में अक्सर लोग घड़ल्ले से कह देते हैं कि ये भाजपा का छात्र संगठन है। लेकिन ये तथ्य पूरी तरह आधारहीन है। इसे समझने के लिए एक उदाहरण पर्याप्त है कि परिषद की स्थापना १९४९ में हुई थी और तब भाजपा तो क्या जनसंघ (१९५१) का भी जन्म नहीं हुआ था। विद्यार्थी परिषद की अपनी सदस्यता होती है, पदाधिकारियों का चुनाव होता है। इसमें भाजपा से संबंधित कोई भी व्यक्ति इसका किसी प्रकार का सदस्य नहीं होता। भाजपा में जाने से पहले उसे परिषद की सदस्यता छोड़नी होती है। हां वैचारिक स्तर पर संघ यानि आरएसएस से इसकी निकटता जगजाहिर है। कुछ अंशों में इसे संघ की छात्र शाखा कह सकते हैं। देश में परिषद के कार्यकर्ता अपना स्थापना दिवस ९ जुलाई को राष्ट्रीय छात्र-दिवस के रूप में मनाते हैं।