Barh - बाढ़ - باڑھ

Barh - बाढ़ - باڑھ उत्तरवाहिनी गंगा, बाबा उमानाथ और सूफ़ी संत की धरती बाढ़ में आपका स्वागत है। बाढ़ : बिहार का सर्वाधिक पुराना अनुमंडल है
http://www.barh.in/
(559)

26/07/2026
09/07/2026

बख़्तियारपुर का नाम नीतीश कुमार के नाम पर “नीतीश नगर” या फिर “सुशासनपुर” रखा जाना चाहिए, क्यूँकि पिछले एक हज़ार साल में बख़्तियारपुर में नीतीश कुमार के इलावा कोई दूसरा महान व्यक्ति पैदा ही नहीं हुआ है!

ऐतिहासिक चित्र: 1991 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार का समर्थन करने के लिए दुलारचंद से आग्रह करने के लिए मुख्यमंत्री लाल...
02/07/2026

ऐतिहासिक चित्र:
1991 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार का समर्थन करने के लिए दुलारचंद से आग्रह करने के लिए मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव खुद चलकर दुलारचंद के घर गए थे. यह चित्र उसी सभा की है जिसमे दुलारचंद ने नीतीश कुमार को अपना समर्थन देने के प्रतिक के रूप में उन्हें पगड़ी पहनाया था जबकि बगल में लालू यादव बैठे हैं.
क्या आप बता सकते हैं यह तस्वीर किस तिथि की है और किस स्थान का है ?

Via - Nitish Archive

अनंत सिंह और दिलिप सिंह 🦁🙏🏻
08/06/2026

अनंत सिंह और दिलिप सिंह 🦁🙏🏻

07/06/2026

बिहारी संस्कार

हाथीदह और मोकामा घाट की कहानी 😳
06/06/2026

हाथीदह और मोकामा घाट की कहानी 😳

Published in the Behar Herald on 30 October 1926, this East Indian Railway notice announced the relocation of the Mokameh Ghat Passenger Jetty to Hathidah Ghat due to changes in the course of the River Ganges.

To ensure seamless travel, a special shuttle train service was introduced between Mokameh Junction and Hathidah Ghat, helping passengers connect with B. & N.W. Railway steamers.

This fascinating notice highlights how railway operations in colonial India adapted to the dynamic geography of the Ganges over a century ago.

Follow -

बेली स्कूल बाढ़ के संस्थापक नवाब अमीर अली ख़ान बहादुर, गुलाब बाग
05/06/2026

बेली स्कूल बाढ़ के संस्थापक नवाब अमीर अली ख़ान बहादुर, गुलाब बाग

मोकामा शटल का 100 साल-हम लोग बचपन में जब पटना जाया करते थे, तब सबसे पहले प्रायोरिटी होती थी कि मोकामा शटल पकड़े और बिल्क...
04/06/2026

मोकामा शटल का 100 साल-

हम लोग बचपन में जब पटना जाया करते थे, तब सबसे पहले प्रायोरिटी होती थी कि मोकामा शटल पकड़े और बिल्कुल ही टाइम पर पटना पहुँच जाएं। बिल्कुल ही फ़िक्स टाइम था। उस वक़्त कभी ख़याल नहीं आया कि ये ट्रेन इतनी पुरानी है।

अभी हाल में एक दस्तावेज़ पलटते हुए पता चला कि 1 जून 1926 को मोकामा से पटना के लिए शटल ट्रेन शुरू हुई। पहले बार बार लगता था कि मोकामा से ही क्यों ? लेकिन अब पता है कि मोकामा की अहमियत उसके घाट की वजह कर है।

गंगा नदी के एक किनारे बसा मोकामा पटना ज़िला का हिस्सा है, और मोकामा शब्द maqaam मक़ाम مَقام से आया है, जिसका मतलब होता है, जगह, स्थान, पड़ाव, ठिकाना। यानी सफ़र के दौरान आराम करने के लिए ठहरने की जगह। पुरानी उर्दू किताब में भी मोकामा को मुक़ामा कह कर ही ख़िताब किया गया है।

मोकामा की दूसरी जानिब तिरहुत का बेगूसराय है, जिसके नाम में सराय जुड़ा हुआ है, जो कभी किसी बेगम या बेग के नाम पर बसा एक सराय था।

जब मोकामा के हथिदह पर सिमरिया (राजेंद्र सेतु) पुल नहीं बना था, तब लोग नाव और स्टीमर से गंगा नदी पार किया करते थे। और अधिकतर स्टीमर रेलवे द्वारा चलाया जाता था। ये जगह नार्थ और साउथ बिहार के इलाक़े को जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण जगह थी। इसलिए यहाँ पर राजेंद्र सेतु नामक पुल बनाया गया, इसके बाद पटना के अंदर गांधी और जेपी सेतु बना।

मोकामा शटल का मोकामा से चलने की असल वजह ये है कि राजधानी पटना जाने के लिए लोग बेगूसराय से नाव और स्टीमर से मोकामा आयेंगे और फिर ट्रेन पकड़ पटना जाएँगे। और इसी वजह कर इस इलाक़े मंडी, बाज़ार और कारख़ाने काफ़ी फले फूले। आज मोकामा शटल का रूट पूरे 100 साल का हो चुका है तो एक पोस्ट तो बनता ही है।

अब तो मोकामा शटल हर हॉल्ट पर रुकती है, पहले मोकामा से खुलने के बाद बाढ़, बख़्तियारपुर, फ़तुहा, पटना सिटी और फिर पटना जंक्शन जाती थी। उस वक़्त वो सुबह 9 बजे खुलती थी और 12:55 में पहुँचा देती थी।

04/06/2026

📜 A Century-Old Glimpse into Bihar’s Railway History

On 5 June 1926, The Behar Herald published a notice announcing the introduction of a Shuttle Train Service between Mokameh Junction and Patna Junction, effective from 1 June 1926.

🚂 The train connected key stations including Barh, Bakhtiyarpur, Fatuha, and Patna City, stopping at all stations along the route. According to the published timetable, it departed Mokameh at 9:00 AM and arrived at Patna Junction at 12:55 PM.

At a time when railways were the lifeline of communication and commerce, this service marked a significant step in improving regional connectivity across Bihar. What we now call daily commuter rail services had their foundations laid nearly a century ago through initiatives like this.

📖 Featured here is the original notice issued by the East Indian Railway and published in The Behar Herald on 5 June 1926, a fascinating reminder of how Bihar’s railway network evolved over the decades.

Follow -

उन्नीसवीं सदी में बाढ़ से जोधन सिंह कुरसेला ( आज के कटिहार जिले का हिस्सा ) चले गए और वहां अपनी जमींदारी को स्थापित किया...
01/06/2026

उन्नीसवीं सदी में बाढ़ से जोधन सिंह कुरसेला ( आज के कटिहार जिले का हिस्सा ) चले गए और वहां अपनी जमींदारी को स्थापित किया । उन्होंने कहा जाता है कि किसी साधु के बोलने पर अपने नाम को बदल अयोध्या सिंह रख लिया ।

इन्हीं के पुत्र रघुवंश सिंह ( तस्वीर इन्हीं की है ) ने भूदान आंदोलन में आचार्य विनोबा भावे को भूमिहीनों के लिए 4000 एकड़ खेती योग्य उपजाऊ जमीन दान में दी थी ।

पटना जिले के बाढ़, अथमलगोला एवं बख्तियारपुर प्रखंड में फैले दर्जनों सिसोदिया (खाती) राजपूतों का गांव है। पोस्ट में वर्णित जोधन बाबू इन्हीं गांवों में से एक जहींगरा गांव से कुरसैला गये थे। जोधन बाबू के लड़के स्व. रघुवंश बाबू हुए और पोते श्री दिनेश कुमार सिंह कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे।आज भी इन सभी गांवों में एक कहावत खुब प्रचलित है -- "इधर उधर सब कोई गेल,
जोधन सिंह नीयन कोई न भेल।।"

Address

Court Area Barh
Barh
803213

Telephone

7301004210

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Barh - बाढ़ - باڑھ posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Barh - बाढ़ - باڑھ:

Shortcuts

Share