08/06/2026
“शिक्षा वह दीपक है जो अभाव, कठिनाइयों और सीमाओं के अंधकार को दूर कर आत्मविश्वास, स्वाभिमान और सफलता का मार्ग प्रकाशित करता है।”
“वंचित और आवश्यकता वाले विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुँचाना केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला है।”
लीला कंवर ने कहा कि एक सच्चे गुरु का कर्तव्य केवल ज्ञान देना नहीं होता, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी की परिस्थितियों को समझते हुए उसे आगे बढ़ने का अवसर देना भी होता है। यही भावना माधव महाविद्यालय, बाड़मेर और उसके निदेशक गोपाल सिंह राजपुरोहित के कार्यों में दिखाई देती है। उन्होंने सदैव यह प्रयास किया है कि आर्थिक, सामाजिक या शारीरिक चुनौतियाँ किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बनें।
कार्यक्रम में हापों की ढाणी, बाड़मेर निवासी लीला कंवर पुत्री श्री भूर सिंह ने शिक्षा और मानवता के प्रति अपनी भावनाएँ व्यक्त करते
हुए माधव महाविद्यालय, बाड़मेर तथा निदेशक Singh Rajpurohit के प्रति हृदय से कृतज्ञता प्रकट की।
एक अकल्पनीय दुर्घटना में अपने दोनों हाथ खो देने के बावजूद लीला कंवर ने हार नहीं मानी और शिक्षा को अपना सबसे बड़ा सहारा बनाया। उन्होंने स्नातक की शिक्षा माधव महाविद्यालय, बाड़मेर से पूर्ण की, जहाँ उन्हें निःशुल्क शिक्षा प्रदान कर समाज के प्रति संवेदनशीलता और सेवा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया गया।