18/08/2024
16 अगस्त 1974
मंझौल के हाईस्कूल का मैदान
हजारों छात्र ग्रामीणों की भीड़
सामने सीआरपीएफ के बंदूक़ ताने परीक्षा कराने तत्पर जवान
मंझौल मिडिल स्कूल परीक्षा केन्द्र में शांति
तब वहां अस्थायी रूप से रामचरित्र सिंह कालेज चलता था
छात्रों ने जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति के आह्वान पर परीक्षा के बहिष्कार का निर्णय लिया था।
मंझौल कालेज के प्राचार्य बोढन प्र सिंह कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े थे। उस समय सीपीआई कांग्रेस पार्टी के समर्थन में थी और जयप्रकाश नारायण को फासिस्ट कह उनके आंदोलन का विरोध कर रही थी। उस समय मंझौल जेपी आंदोलन का सबसे बड़ा गढ़ था और वहां के स्थानीय विधायक रामजीवन सिंह उसके राज्यस्तरीय नेतृत्वकर्ता थे। उन्हीं के गांव में उनको चुनौती देने के लिए कम्युनिस्टों और कांग्रेस नेताओं ने चाल चली। जिला मुख्यालय से परीक्षा केंद्र हटाकर मंझौल के मिडिल स्कूल को केन्द्र बनाया गया। मंझौल कालेज के प्रधानाचार्य बोढन प्र सिंह केन्द्राधीक्षक बने। जेपी के छात्र युवा संघर्ष वाहिनी ने परीक्षा बहिष्कार का नारा दिया। छात्रों के इस विरोध को देखते हुए बेगूसराय के तत्कलिक एसपी रामचंद्र खान और डीएम मंत्रेश्वर जा ने सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ की व्यवस्था कर डाली।
16 अगस्त के सवेरे से ही पूरे जिले से जेपी आंदोलन से जुड़े छात्र और युवक मंझौल में जुटने लगे। सड़कों पर नारे लगाए जाने लगे। परीक्षा केन्द्र के गेट पर परीक्षा देने रहे छात्रों को छात्राएं रोकने लगी। केन्द्र को चारों ओर से सीआरपीएफ के जवानों ने घेर रखा था। परीक्षा में कम ही छात्र शामिल हुए। ज्योंहि परीक्षा शुरू हुई कि हजारों की संख्या में उपस्थित छात्र युवा उग्र हो गए। ईंट पत्थरों की बरसात होने लगी। सड़कों पर टायर जलाकर आगजनी की गई। सीआरपीएफ के जवानों ने लाठीचार्ज किया। पिटने के बाद भी छात्र डटे रहे। मंझौल के स्कूल के आगे की सड़क और पीछे के मैदान रणक्षेत्र बन गए। अंत में पुलिस अश्रुगैस के गोले छोड़े। उसके बावजूद छात्र युवाओं की भीड़ परीक्षा बंद कराने पर आमदा रहे। पुलिस ने गोली चलाने की चेतावनी दी। उसके बाद भी ईंट पत्थर चलते रहे। अंत में गोली चली और अपने घर के आगे नजारा देख रहे 14 वर्ष का एक किशोर नित्यानंद साह को पुलिस की गोली लग गयी। वह वहीं गिर गया। बाद में पहुंचे बेगूसराय के एसपी और कलक्टर ने वहां कर्फ्यू लगा दिया। परीक्षा स्थगित कर दी गई। परीक्षा दे रहे छात्रों को पुलिस अभिरक्षा में घर पहुंचाया गया।
मंझौल में मातमी सन्नाटा पसर गया।लोग भयकंपित थे। मुझे आज भी उस गोली चलने की आवाज याद आ जाती है।
मृतक के शव पर फूल चढ़ाने गए प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी कामरेड ब्रह्मदेव नारायण सिंह और शिक्षक शिवशंकर सिंह को एसपी रामचंद्र खान ने हाथ बंधवाकर पुलिस से भरे ट्रक में फिंकवा दिया और बदतमीजी की। उन्हें जेल भेज दिया गया।
महेश भारती।दूसरा
जेपी छात्र आंदोलन और मंझौल 1974
16 अगस्त के परीक्षा बहिष्कार,एक अबोध छात्र नित्यानंद की सीआरपीएफ की गोली से मौत और कर्फ्यू के बाद मंझौल का वातावरण भय से भरा रहा। जिसे जिधर हुआ भागने लगा। छात्रों की भीड़ तितर बितर हो गई। सड़कों पर ईंट पत्थरों के ढेर लगे थे। पुलिस ने पुस्तकालय चौक से पंचवटी तक रोसड़ा रोड पर कब्जा कर लिया था। लोगों का घर से निकलना मुश्किल कर दिया गया।गनीमत रही कि पुलिस ने गांव में प्रवेश नहीं किया। हल बैल लेकर आ रहे एक किसान युवक को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। घंटों पुलिस का तांडव चलता रहा।
उस समय के प्रसिद्ध नेता और स्वतंत्रता सेनानी कामरेड ब्रह्मदेव और शिक्षक शिवशंकर सिंह जब पुलिस गोली से मारे गए नित्यानंद के शव पर फूल चढ़ाने पहुंचे तो एसपी रामचंद्र खान ने कहा- पहले बच्चों को उकसाकर पत्थर चलवाते हो और मरने के बाद फूल चढ़ाने का नाटक। उन दोनों के हाथ बांध दिए गए और सिपाहियों ने उठाकर पुलिस गाड़ी के पीछे फेंक दिया। चर्चा हुई कि एसपी ने दोनों को बुरी तरह अपने से पीटकर हाथ-पैर बांधकर पुलिस संरक्षा में ले गई है। बेगूसराय ले जाकर उन्हें जेल भेज दिया गया। जो भी बहिष्कार जुलूस या बलवा में शामिल थे ।उनके नाम की चर्चा होती कि पुलिस उन्हें पकड़कर मार देगी। पकड़ लेगी।लोग घबराए थे।
रामजीवन सिंह जो उस समय विधायक थे और जेपी आंदोलन के बड़े नेता थे। घटना के समय जयमंगला हाईस्कूल के प्रधानाचार्य बलराम सिंह के आवास में थे और विरोध प्रर्दशन को संचालित करवा रहे थे।गोली और अश्रुगैस चलने के बाद वे पीछे के रास्ते से खूटन बीचखन्ना के खेत के रास्ते से भागते हुए डाक्टर चंद्रदेव के आवास में छिप गए। और वहां से भागकर छिपते पटना गए। जहां जयप्रकाश नारायण और कर्पूरी ठाकुर आदि नेताओं को घटना से अवगत कराया। बाद में उनकी गिरफ्तारी हुई और सारा दोष उनपर मढ़ा गया।
बेगूसराय के छात्र संगठन के नेता मिथिलेश सिंह,शशि, रामाशीष,अनिल चौधरी सहित नेतृत्व कर रहे जयमंगला हाईस्कूल के एक शिक्षक जो आरएसएस से जुड़े थे रूपनारायण चौधरी के नाम हवा में उछल रहे थे। मंझौल के जयमंगला हाईस्कूल और रामचरित सिंह कालेज में पढ़ने वाले कई छात्र नेताओं के नाम भी टारगेट में थे।
रातभर पुलिस की गाड़ियां दौड़ती रही।पूरे मंझौल में लोग भयकंपित रहे। कांग्रेस और कम्युनिस्ट नेताओं की आलोचना होते रही। कालेज की परीक्षा संचालित कराने वाले बोढन सिंह पर लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर था।
शाम को रेडियो की प्रादेशिक खबर के साथ बीबीसी ने भी मंझौल की इस घटना को खबर में शामिल किया।
क्रमशः
महेश भारती 17-8-2020
तीसरी किश्त
वर्ष 1974
मंझौल के 16, अगस्त के परीक्षा बहिष्कार के निर्णय पहले ही ले लिए गए थे। छात्र युवा संघर्ष वाहिनी
बेगूसराय में मीटिंग कर चुकी थी। बेगूसराय में 4अगस्त 1974 को जयप्रकाश नारायण की मीटिंग हुई थी ।उनके साथ इंडियन एक्सप्रेस के विशेष संवाददाता अजीत भट्टाचार्य भी थे। वे रात को एन एच स्थित लोकनिर्माण विभाग के आईबी में ठहरे। शहर के प्रसिद्ध अधिवक्ता
इंद्रमोहन प्रसाद के घर से उनका भोजन आया। जीडी कालेज में विशाल मीटिंग हुई। जिसकी अध्यक्षता कामरेड ब्रह्मदेव सिंह ने की और स्वागत भाषण रामजीवन सिंह ने दिया। रामजीवन सिंह ने छात्र आंदोलन के पक्ष में बिहार विधानसभा से इस्तीफा दे दिया।
जेपी के इस मीटिंग में कम्युनिस्टों और कांग्रेस के विरोध के बावजूद काफी लोग जुटे। भीड़ देख जेपी भी गदगद थे। जिले के छात्र युवाओं का जोश भी चरम पर था। इस मीटिंग की सफलता के बाद ही परीक्षा बहिष्कार का निर्णय कर छात्र युवाओं ने कालेजों में मीटिंग कर शुरू कर दी। इधर जेपी की सफल मीटिंग से आहत कांग्रेस और सीपीआई के नेताओं ने नई चाल के तहत मंझौल के मिडिल स्कूल को इंटर की परीक्षा का केन्द्र बनाया। जयप्रकाश आंदोलन से जुड़े छात्र युवा संघर्ष वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने विरोध के लिए कमर कस लिया। पूरे जिले के छात्र मंझौल में परीक्षा बहिष्कार आंदोलन में भागीदारी को पहुंचे। सीआरपीएफ की टुकड़ी की सुरक्षा में परीक्षा संचालित की गई। बहिष्कार कर रहे नेताओं को पहले से अनुमान था कि प्रर्दशन उग्र होगा तो गोली चलेगी। गोली चली भी ।एक छात्र नित्यानंद गोली से मारा गया।
गोली चलने की घटना के बाद पुलिस आंदोलन में शामिल नेताओं की तलाश में छापेमारी करने लगी। अधिकांश नेता भूमिगत हो गए। पुलिस ने चेरियाबरियारपुर के विधायक रामजीवन सिंह पर बलवा कराने का मुख्य आरोप मढ़ते हुए 11 नामजद और सैकड़ों अन्य पर मुकदमा दर्ज किया। रामजीवन सिंह फरार हो गए और छिप छिपकर सरकार के विरुद्ध मीटिंग करने लगे। जयमंगला हाईस्कूल के एक शिक्षक रूपनारायण चौधरी छात्रों के लोकप्रिय नेता बनकर उभरे। रामजीवन सिंह पटना चले गए और और वहीं छिपकर रहने लगे। सूचना मिली की क्षेत्र में बाढ़ आयी है। वे लौटे और साईकिल से ही क्षेत्र की तरफ कूच कर गए। पुलिस और सीआईडी पीछे लगी ही थी। उस समय कांग्रेस और सीपीआई वाले पुलिस की मुखबिरी करते थे। छौराही के भोजा गांव में पुलिस ने एक घर में सोते हुए इन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्हें खोदाबंदपुर थाना लाया गया और फिर चेरियाबरियारपुर। उसके बाद बेगूसराय जेल और वहां से भागलपुर जेल भेजा गया। फिर हजारीबाग और वहां से पटना के बांकीपुर । उनपर आरोप था कि पांच हजार की जुलूस का नेतृत्व करते रामजीवन सिंह पश्चिम से पूरब की ओर गए और पुलिस पर पत्थरबाजी करवाए। उन्हेंं हाईकोर्ट से जमानत मिली।
महेश भारती 18-8-2020
चौथी किस्त
16 अगस्त की घटना के बाद पुलिस का दमन तेज हो गया। मंझौल सहित आंदोलन से जिलेभर के छात्र युवा और नेताओं की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी रही। कामरेड ब्रह्मदेव की गिरफ्तारी हो गई थी। मंझौल के रामजीवन सिंह, सोशलिसट भोला,, फुलेना सिंह, शिक्षक रूपनारायण चौधरी, शालिग्राम सिंह,अरूण कुमार, पहसारा गांव के शंभूऊ सिंह, नावकोठी के शशि सिंह, लावा गांव के रामाशीष सिंह, रामदीरी के नरेश सिंह,छबीला जी, जयप्रकाश सिंह ,सिकरहुला के राम सुमिरन सिंह, पबडा के अनिल चौधरी , शामहो के मिथिलेश सिंह आदि का नाम उभरकर आया। एसपी रामचंद्र खान किसी भी कीमत पर आंदोलन में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए कटिबद्ध थे। कांग्रेस और सीपीआई के स्थानीय और जिलास्तरीय नेता आंदोलन कारियों को पकड़वाने में मुखबिर का काम करते थे।
सबसे महत्त्वपूर्ण गिरफ्तारी शिक्षक रूपनारायण चौधरी की हुई। रूपनारायण चौधरी दरभंगा जिले के पंचोभ गांव के निवासी थे और मंझौल के जयमंगला हाईस्कूल में शिक्षक थे। वे आरएसएस और जनसंघ से जुड़े थे। मंझौल में आरएसएस की शाखा लगवाते थे। बड़े ही ओजस्वी वक्ता और अच्छे शिक्षक थे। छात्रों पर उतनी ही पकड़ थी और प्रभाव भी। जेपी आंदोलन में इस इलाके के सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में उभरे थे। पूरा आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे।वे मेरे घर के बगल के स्वतंत्रता सेनानी बादल बाबा के दरवाजे पर रहते थे और उनके पोतों को पढ़ाते थे।
मुझे याद है।एक रात बड़ी जोर का हल्ला हुआ। लोगों ने समझा उधर सांप निकला है और मारने के लोग लाठी चला रहे हैं। पटापट लाठियां चल रही थी। बाद में पता चला कि मास्टर साहब रूपनारायण चौधरी को पुलिस पकड़ ले गई। हर रास्ते को पुलिस ने घेर रखा था। बड़ी पिटाई की गई। सवेरे से पूरे गांव में हलचल तेज हो गई। गांव के एक कांग्रेसी और सीपीआई वाले पर पकड़वाने की शंका जाहिर की गई। सवेरे शनिवार का दिन था। स्कूल में छात्र जुटे। मंझौल के जयमंगला हाईस्कूल, बालिका स्कूल,कालेज के छात्र जमा हो गए।स्कूल कालेज का बहिष्कार कर दिया। सभी सड़क पर आ गए।एक कांग्रेस समर्थक की पिटाई कर दी गई। पता चला कि रूपनारायण चौधरी को चेरियाबरियारपुर थाना हाजत में रखा गया है।
छात्रों का जुलूस नारे लगाते पांच किलोमीटर दूर चेरियाबरियारपुर थाना की ओर कूच कर गया। हजारों की संख्या में छात्र थाना के आगे नारेबाजी करने लगे। छात्राओं की भीड़ आगे थी।वीणा झा,उषा आदि नेतृत्व कर रही थी। एकाएक नारा लगा जेल का फाटक टूटेगा रूपनारायण चौधरी छूटेगा। छात्राओं की भीड़ आगे बढ़ी। थाने के सिपाही पीछे हटे। छात्रों ने हाजत का गेट तोड़ दिया और छात्राओं ने चौधरी जी को घेरे में लेकर बाहर ले आया। फिर चौधरी जी छात्रों के दल के साथ काबर टाल की तरफ बढ़ गए और फरार हो गए। रामचंद्र खान की पुलिस देखती रह गई।
क्रमशः
महेश भारती 19-8-2020
पांचवीं किस्त
वर्ष 1974 का अगस्त महीना उथल-पुथल भरा रहा। रूपनारायण चौधरी के अस्पताल हाजत से भगा ले जाने की घटना से क्षेत्र में सनसनी फ़ैल गई। पुलिस का दमन भी तेज हो गया। छात्र नेताओं और उनसे सहानुभूति रखने वाले पर पुलिस की पैनी नजर रहने लगी। छात्र नेताओं के घरों पर छापेमारी की जाने लगी। रूपनारायण चौधरी जिनके यहां रहते थे उनके यहां पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी होती थी। रूपनारायण चौधरी बहुत दिनों तक काबर में किसानों के डेरे पर छिपकर रहे। आंदोलन से जुड़े कई छात्र नेता उनके साथ रहते थे।छात्र नेताओं के घर से भोजन आता था। बाद में वे फरार हो गए।
कक्षा परीक्षा बहिष्कार के जयप्रकाश नारायण के आहृवान का बेगूसराय और मंझौल क्षेत्र में पूरा असर रहा। कई नेताओं कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। रामजीवन सिंह ने जेपी के आह्वान पर एमएलए पद से बिहार विधानसभा से इस्तीफा देकर आंदोलन का नेतृत्व किया। मंझौल गोली काण्ड में उनपर आरोप लगा कि वे पांच हजार से अधिक लोगों का जुलूस लेकर आए और पुलिस पर पत्थर बरसाने लगे।इस जुलूस में शामिल असामाजिक, हथियार बंद लोगों ने पुलिस पर हमला किया । रामजीवन सिंह घटना के बाद छिपते छिपाते पुलिस से बचते आंदोलनकारियों को दिशा-निर्देश देते रहे। वे साईकिल या पैदल भेष बदलकर आंदोलन कारियों के बीच पहुंचते रहे।
रूपनारायण चौधरी को पकड़वाने में कालेज के प्रधानाचार्य बोढन प्रसाद सिंह जो सीपीआई समर्थक थे और गांव के ही एक कट्टर कांग्रेसी का नाम आया। उनके खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्र युवा संघर्ष वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने विशाल जुलूस निकाला। उतना आक्रोशित और लंबा जुलूस मंझौल के इतिहास में कभी नहीं निकला। जयमंगला हाईस्कूल के छात्र,आरसीएस कालेज के छात्र और दीनानाथ बालिका उच्च विद्यालय की छात्राओं ने स्कूल कालेज का बहिष्कार लगातार जारी रखा।वे कक्षाओं का बहिष्कार करते। नारेबाजी करते। सड़कों पर छात्रों की नारेबाजी लगातार जारी रही। पुलिस आती। छात्र नेता फरार हो जाते। आम छात्रों को पुलिस तितर बितर कर देती। जयमंगला हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक थे बलराम सिंह।काफी अनुभवी अनुशासन प्रिय।स्कूल का गेट लगा देते। पुलिस की हिम्मत नहीं कि बिना प्रधानाध्यापक की अनुमति के प्रवेश करती। आंदोलनकारियों को मूक समर्थन हासिल था।
घटना के डेढ़ महीने बाद 28 सितंबर को रामजीवन बाबू की गिरफ्तारी हो गई। वे भागलपुर जेल भेज दिए गए। आंदोलन से जुड़े कई और नेताओं की गिरफ्तारी हुई। मंझौल का जयमंगला हाईस्कूल जेपी आंदोलन के छात्रों और नेताओं का गढ़ बन गया। जिले के सारे आंदोलन से जुड़े छात्र युवा नेता बराबर मंझौल का दौरा करते।
महेश भारती 20-8-2020