Adhiwakta Kalyan Samiti Lalganj Pratapgarh U.P.

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25/08/2026

बाराबंकी में खाकी का खौफनाक रूप: सिपाही की खुलेआम धमकी—"तुम्हें दिनदहाड़े मारूंगा, कायदे से मारूंगा..."
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में एक पुलिस सिपाही एक नागरिक को सरेआम दिनदहाड़े पीटने और जान से मारने की धमकी देते हुए नजर आ रहा है. सिपाही के तेवर देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि उसे कानून या व्यवस्था का कोई खौफ ही नहीं है.
📋 घटना के मुख्य बिंदु:
▪️सिपाही की खुली धमकी: वीडियो में नजर आ रहा सिपाही गुस्से में कह रहा है— "तुम्हें दिनदहाड़े मारूंगा, कायदे से मारूंगा... श्रीमान कप्तान साहब के यहाँ या श्रीमान जज साहब के यहाँ जहाँ जाना हो चले जाना।"
▪️तैनाती और पहचान: मीडिया रिपोर्ट्स और वायरल वीडियो के अनुसार, यह मामला बाराबंकी के लखनऊ-अयोध्या हाईवे स्थित मेयू पुलिस चौकी का है, जहाँ तैनात सिपाही कपिल तिवारी का यह वीडियो बताया जा रहा है.
▪️विवाद की वजह: पुलिस के मुताबिक, यह घटना 21-22 अगस्त की दरमियानी रात की है जब गश्त के दौरान सरथना गांव के पास एक कार सवार (विशाल यादव) से कहासुनी हुई. पुलिस का दावा है कि संबंधित व्यक्ति पर पहले से कुछ मामले दर्ज हैं, हालांकि सिपाही द्वारा इस तरह की भाषा और धमकी देने के तौर-तरीके पर भारी सवाल खड़े हो गए हैं.
▪️उच्च अधिकारियों का एक्शन: वीडियो वायरल होने और मामला तूल पकड़ने के बाद एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं.
🛑अधिवक्ता कल्याण समिति, लालगंज (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश) कानून के रक्षकों द्वारा इस तरह की भाषा और धमकी देने की प्रवृत्ति की कड़ी निंदा करती है। खाकी वर्दी पहनकर कानून को अपने हाथ में लेने और न्यायपालिका या उच्च अधिकारियों को चुनौती देने वालों पर सख्त से सख्त विभागीय व विधिक कार्रवाई होनी चाहिए।
"सुरक्षा और कानून का पालन कराना खाकी का धर्म है, गुंडई और धमकी नहीं!"

23/08/2026

🛑मेरठ में दिल दहला देने वाला हादसा🛑
नशे में धुत जज साहब 🚨 ने कार से मारी टक्कर, गाड़ी के भीतर पैंट में पेशाब की हालत में मिले!
उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक बेहद चौंकाने वाली और प्रशासनिक व्यवस्था को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। दिल्ली से अपने घर खतौली लौट रहे आशु कुमार की गाड़ी को एक तेज रफ्तार गाड़ी ने गलत दिशा से आकर जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उनकी गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। जब पीड़ित ने दूसरी गाड़ी के चालक से पूछताछ की, तो मामला देखकर उनके होश उड़ गए।
📋 घटना का पूरा विवरण और सनसनीखेज खुलासे:
▪️ शराब के नशे में धुत जज साहब: टक्कर मारने वाली गाड़ी चला रहे व्यक्ति और उनके साथ मौजूद अन्य लोग अत्यधिक शराब के नशे में थे। हालात इतनी खराब थी कि गाड़ी चला रहे जज साहब नशे में इतने सुध-बुध खो चुके थे कि उनके पैंट में पेशाब तक निकल चुकी थी और उनके पैरों में चप्पल तक नहीं थी।
▪️ बदसलूकी और गाली-गलौज: पीड़ित आशु कुमार का आरोप है कि जब उन्होंने विरोध जताया और पुलिस से मेडिकल व अल्कोहल टेस्ट कराने की मांग की, तो मौके पर मौजूद लोगों ने उनके साथ बदसलूकी और गाली-गलौज की।
▪️ जज पत्नी का आना और फरार होना: हैरान करने वाली बात यह है कि दुर्घटना के कुछ ही मिनटों बाद वहां आरोपी जज साहब की पत्नी (जो खुद भी न्यायिक सेवा में जज हैं) अपने सुरक्षा गार्डों के साथ मौके पर पहुँचीं। पीड़ित का आरोप है कि उन्होंने अपने रसूख और सुरक्षाकर्मियों के बल पर अपने शराबी पति को वहां से चुपचाप सुरक्षित भगा दिया।
▪️ पुलिस की कथित मिलीभगत: पीड़ित का कहना है कि जब उन्होंने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मेडिकल जांच की मांग की, तो पुलिस ने उल्टे उन पर ही दबाव बनाया और आरोपी जज साहब व उनके साथियों को बचाने में पूरी मदद की।
वर्दी या न्यायिक पद की आड़ में इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना बर्ताव और कानून की धज्जियां उड़ाना समाज के लिए बेहद चिंताजनक है। इस मामले की उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए!

23/08/2026

🛑बुराड़ी एसडीएम कार्यालय के बाहर वकीलों का जोरदार प्रदर्शन: प्रशासनिक रवैये और अभद्रता के खिलाफ फूटा वकीलों का गुस्सा!
दिल्ली के बुराड़ी एसडीएम कार्यालय के बाहर वकीलों ने बड़ी संख्या में एकत्रित होकर जोरदार प्रदर्शन और हंगामा किया है। वकीलों का आरोप है कि एसडीएम कार्यालय के भीतर सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं के साथ अभद्रता की गई, उन्हें धमकाया गया और कार्यालय के गेट बंद कर दिए गए।
📋 प्रदर्शन के मुख्य बिंदु व कारण:
▪️ वकीलों के साथ अभद्रता का आरोप: प्रदर्शनकारी वकीलों का कहना है कि सुनवाई के दौरान वकीलों की बात सुनने की बजाय उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने की कोशिश की गई।
▪️ कार्यालय को निजी संपत्ति बनाने का विरोध: वकीलों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी कार्यालय जनता के टैक्स से चलते हैं और यह किसी की पर्सनल प्रॉपर्टी नहीं है। एक अधिवक्ता होने के नाते लिटिगेंट (पैरवीकार) का पक्ष रखना हर वकील का अधिकार है, जिसके साथ किसी भी प्रकार की दबंगई या तानाशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
▪️ भ्रष्टाचार और मनमानी के खिलाफ रोष: वकीलों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक कार्यालयों में आम जनता और वकीलों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए चक्कर कटवाए जाते हैं और पारदर्शी व्यवस्था के बजाय मनमानी हावी है।
▪️ भारी पुलिस बल की तैनाती: वकीलों के गुस्से और उग्र प्रदर्शन को देखते हुए बुराड़ी एसडीएम ऑफिस के बाहर भारी पुलिस बल, एसीपी सिविल लाइन्स और स्थानीय पुलिस के साथ बैरिकेडिंग की गई थी।
🛑अधिवक्ता कल्याण समिति, लालगंज (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश) प्रशासनिक अधिकारियों की ऐसी तानाशाही और वकीलों के मान-सम्मान पर प्रहार करने वाली हर घटना की कड़ी निंदा करती है। न्याय परिसरों और प्रशासनिक कार्यालयों में अधिवक्ताओं की गरिमा और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
🚨 "वकीलों का सम्मान और न्यायसंगत प्रशासन हमारी पहली प्राथमिकता है!"🚨

मध्य प्रदेश के कटनी में खाकी पर बड़ा एक्शन: जमीन खरीद विवाद में फंसी सीएसपी (CSP) नेहा पचिसिया निलंबित!मध्य प्रदेश के कट...
22/08/2026

मध्य प्रदेश के कटनी में खाकी पर बड़ा एक्शन:
जमीन खरीद विवाद में फंसी सीएसपी (CSP) नेहा पचिसिया निलंबित!
मध्य प्रदेश के कटनी जिले से प्रशासनिक अमले और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है। कटनी शहर की नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पचिसिया पर जमीन खरीद-फरोख्त के मामले में पद का दुरुपयोग करने, धोखाधड़ी करने और एक परिवार पर दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए हैं।
📋 घटना का पूरा विवरण:
▪️ क्या है पूरा मामला: मीडिया रिपोर्ट्स और प्रशासनिक जांच के अनुसार, सीएसपी नेहा पचिसिया पर आरोप है कि उन्होंने जिले में एक जमीन की डील को तय करवाने के लिए पुलिस तंत्र (Police Machinery) और अपने आधिकारिक पद का गलत इस्तेमाल किया।
▪️ परिवार पर दबाव: आरोप है कि उन्होंने एक परिवार को डरा-धमकाकर और अनुचित दबाव बनाकर लगभग 18 लाख रुपये की जमीन की इस डील को अंजाम देने के लिए मजबूर किया।
▪️ मुख्यमंत्री का कड़ा एक्शन: मामले की शिकायत और प्राथमिक तथ्यों के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्य सचिव को शुक्रवार को तत्काल प्रभाव से निलंबन आदेश जारी करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने दो-टूकर शब्दों में संदेश दिया है कि कानून-व्यवस्था और प्रशासन में किसी भी स्तर पर लापरवाही, दबाव या पद का दुरुपयोग (Abuse of power) बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अधिवक्ता कल्याण समिति, लालगंज (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश) कानून के राज, प्रशासनिक पारदर्शिता और न्याय की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पद और वर्दी की आड़ में आम नागरिकों या किसी परिवार पर दबाव बनाकर इस तरह के कृत्य करने वालों पर सख्त कार्रवाई होना ही न्यायोचित है।

22/08/2026

रोहिणी कोर्ट और दिल्ली उच्च न्यायालय परिसर की कैंटीनों में मनमानी पर उठे सवाल:-
वकीलों के मान-सम्मान वा बैंड पर हमला बर्दाश्त नहीं!
न्यायिक परिसरों और अदालतों की कैंटीनों को लेकर वकीलों के बीच भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। कैंटीनों के संचालन में बढ़ती अनियमितताओं और हाल ही में रोहिणी कोर्ट परिसर में वकीलों के साथ हुई एक गंभीर घटना के बाद विधिक जगत में सनसनी फैल गई है।
📋 मुख्य बिंदु एवं चिंताएं:
भ्रष्टाचार के अड्डे: वकीलों और जानकारों का कहना है कि आज के समय में कई अदालती परिसरों की कैंटीनें भ्रष्टाचार और मनमानी का मुख्य केंद्र बनती जा रही हैं, जहाँ आम नियमों को ताक पर रखकर काम हो रहा है।
वकीलों के बैंड और गरिमा पर हमला: रोहिणी कोर्ट परिसर में वकीलों के अधिकारों और उनके मान-सम्मान को ठेस पहुँचाने वाली घटना सामने आई है। वकीलों का साफ कहना है कि गाउन और बैंड पहनने वाले अधिवक्ताओं के बीच इस तरह का अनुचित व्यवहार और मनमाने तरीके से कैंटीन चलाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। चाहे कितनी भी ऊंची पहुंच वाला व्यक्ति क्यों न हो, वकीलों के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
🛑बार एसोसिएशन की चुप्पी पर सवाल: इस गंभीर प्रकरण पर रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन के कई पदाधिकारियों की चुप्पी को लेकर भी वकीलों में रोष है कि ऐसे समय में कड़ा रुख क्यों नहीं अपनाया जा रहा।
🛑न्यायिक हस्तक्षेप की मांग: वायरल वीडियो और प्राथमिक साक्ष्यों से इस घटना की गंभीरता स्वतः स्पष्ट होती है। मांग की जा रही है कि दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) और रोहिणी कोर्ट के जिला जज (District Judge) इस पूरे मामले पर तत्काल संज्ञान लें, ताकि व्यवस्था और वकीलों की सुरक्षा पर कोई आंच न आए।
🛑अधिवक्ता कल्याण समिति, लालगंज (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश) अदालती परिसरों की गरिमा, वकीलों के आत्मसम्मान और न्याय प्रणाली की शुचिता से जुड़े हर विषय पर पूरी तरह मुखर है। वकीलों के अधिकारों पर प्रहार करने वाली ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई बेहद आवश्यक है।
"वकीलों का सम्मान और न्याय परिसरों की मर्यादा सर्वोपरि है!"

22/08/2026

🛑बार काउंसिल ऑफ इंडिया में घमासान: मनन कुमार मिश्रा ने ठुकराया इस्तीफा, विरोधियों पर किया पलटवार!
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के भीतर छिड़ा घमासान अब खुलकर आमने-सामने की जंग बन चुका है। को-चेयरमैन वाई.आर. सदाशिव रेड्डी द्वारा 15 दिन के भीतर इस्तीफे की मांग और गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब देते हुए BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने तीखा पलटवार किया है।
📋 मनन कुमार मिश्रा के बयान और मुख्य बातें:
▪️ आरेपों को बताया बेबुनियाद: मनन मिश्रा ने सदाशिव रेड्डी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें "बुनियादहीन" (Baseless) बताया है और इस्तीफे की मांग को पूरी तरह ठुकरा दिया है।
▪️ सदस्यता पर सवाल: उनका दावा है कि सदाशिव रेड्डी अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य तक नहीं हैं और आगामी चुनावों में लड़ने की हिम्मत न होने के कारण ऐसे निराधार आरोप लगा रहे हैं।
▪️ राजनीतिक विरोध का दावा: मनन मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया है कि सदाशिव रेड्डी राजनीतिक रूप से उनके विरोधी हैं और किसी अन्य दल से ताल्लुक रखते हैं।
▪️ समर्थन का दावा: उन्होंने खुद को वकीलों के बीच पूरी तरह ईमानदार बताते हुए दावा किया है कि देश के लाखों वकीलों का समर्थन उनके साथ है।
अधिवक्ता कल्याण समिति, लालगंज (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश) का मानना है कि देश की सर्वोच्च विधिक संस्था के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के बीच आपसी कलह और इस तरह के गंभीर आरोप-प्रत्यारोप न्याय जगत और वकीलों की साख के लिए बेहद चिंताजनक हैं। वकीलों के हित और संस्था की पारदर्शिता सर्वोपरि होनी चाहिए!

22/08/2026

अयोध्या में लेखपालों का प्रदर्शन:
एंटी करप्शन कार्रवाई के विरोध में सदर तहसील में धरना!
हाल ही में सोहावल तहसील क्षेत्र के कैल पारा गांव में एंटी करप्शन टीम द्वारा 10,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए लेखपाल उत्कर्ष दीप का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। लेखपाल संघ ने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए मोर्चा खोल दिया है।
⚖️ प्रमुख मांगें:
लेखपाल उत्कर्ष दीप के खिलाफ की गई कार्रवाई को तुरंत वापस लिया जाए।
उन्हें ससम्मान पुनः सेवा में बहाल किया जाए।
जनपद में लेखपालों के खिलाफ चल रही अन्य कार्रवाइयों को भी समाप्त किया जाए।
⚠️ संघ की चेतावनी: > उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने दो-टूक चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन और धरना जारी रहेगा।
⚖️अधिवक्ता कल्याण समिति, लालगंज (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश) प्रशासनिक और विधिक क्षेत्र की हर बड़ी घटना और उससे जुड़े सेवा संघों के रुख पर अपनी पैनी नजर रखती है।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया में बगावत तेज: को-चेयरमैन वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को पत्र लिखकर मांगी 15...
22/08/2026

बार काउंसिल ऑफ इंडिया में बगावत तेज: को-चेयरमैन वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को पत्र लिखकर मांगी 15 दिन में इस्तीफे की मांग!
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के भीतर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। BCI के को-चेयरमैन और सीनियर एडवोकेट वाई.आर. सदाशिव रेड्डी (Y.R. Sadasiva Reddy) ने BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को एक कड़ा पत्र लिखकर 15 दिनों के भीतर उनके इस्तीफे की मांग की है।
📋 पत्र में उठाए गए प्रमुख गंभीर बिंदु:
▪️ NALSAR विवाद: हाल ही में NALSAR यूनिवर्सिटी के 2026 के ग्रेजुएटिंग बैच के एनरोलमेंट पर रोक लगाने के निर्देश (जो बाद में वापस ले लिए गए थे) का बिना काउंसिल की सहमति और चर्चा के उपयोग किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई गई है।
▪️ फंड ट्रांसफर के आरोप: BCI के लगभग 150 करोड़ रुपये के फंड को कथित तौर पर एक प्राइवेट ट्रस्ट ('BCI Trust PEARL-First') में ट्रांसफर किए जाने का गंभीर मुद्दा उठाया गया है।
▪️ भाई-भतीजावाद और नियुक्तियां: काउंसिल के पदों और प्रशासनिक व्यवस्था में परिवार के सदस्यों तथा व्यक्तिगत रूप से जुड़े लोगों की नियुक्ति के आरोप लगाए गए हैं।
▪️ लंबे कार्यकाल पर सवाल: मनन कुमार मिश्रा के साल 2012 से लगातार इस पद पर बने रहने और संस्थान के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
इस मामले की विस्तृत जानकारी के लिए आप प्रमुख समाचार पोर्टलों जैसे LawBeat, Business Standard और Hindustan Times की रिपोर्ट देख सकते हैं।
अधिवक्ता कल्याण समिति, लालगंज (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश) विधिक संस्थानों की पारदर्शिता, वित्तीय शुचिता और अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा से जुड़े हर घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर रखती है।

सिविल जज सीधी भर्ती: सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य वकालत के अनुभव को 3 साल से घटाकर किया 1 साल!न्यायिक सेवा (Judicial Servic...
21/08/2026

सिविल जज सीधी भर्ती: सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य वकालत के अनुभव को 3 साल से घटाकर किया 1 साल!
न्यायिक सेवा (Judicial Services) की तैयारी करने वाले युवाओं और विधि जगत के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के फैसले में संशोधन करते हुए सिविल जज (जूनियर डिविजन) की सीधी भर्ती के लिए अनिवार्य वकालत के अनुभव को 3 साल से घटाकर 1 साल कर दिया है। यह नया नियम 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद आने वाली नोटिफिकेशन्स पर लागू होगा।
📋 इस ऐतिहासिक फैसले के मुख्य बिंदु:
▪️ बेंच का गठन: यह महत्वपूर्ण निर्णय चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ द्वारा रिव्यू याचिकाओं पर सुनाया गया है (इस पीठ में जस्टिस के. विनोद चंद्रन की असहमति रही)।
▪️ ट्रांजिशन पीरियड (Transition Period): 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी होने वाली नोटिफिकेशन्स के लिए लॉ ग्रेजुएट्स बिना पूर्व प्रैक्टिस के आवेदन कर सकेंगे और उन्हें 1 साल की एक्टिव प्रैक्टिस पूरा मान लिया जाएगा।
▪️ ट्रेनिंग और क्लर्कशिप मॉडल: चयनित उम्मीदवारों को 1 साल स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी में ट्रेनिंग और उसके बाद 1 साल की संरचित क्लर्कशिप (6 महीने जिला जज और 6 महीने हाईकोर्ट जज की निगरानी में) पूरी करनी होगी।
▪️ संबंधित मामला: यह फैसला Bhumika Trust v. Union of India & Connected Cases मामले में आया है।
अधिवक्ता कल्याण समिति, लालगंज (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश) का मानना है कि अनुभव की सीमा को व्यावहारिक बनाने से अधिक से अधिक योग्य युवा वकीलों को न्याय व्यवस्था में अपनी सेवा देने का अवसर मिलेगा।
क्या आपके अनुसार 1 साल की प्रैक्टिस और 2 साल की ट्रेनिंग का यह नया संतुलन न्यायिक सेवा के लिए एक सही दिशा में उठाया गया कदम है? अपनी राय जरूर साझा करें!

21/08/2026

वकीलों का प्रदर्शन: 'रमन शर्मा' ने BCI चेयरमैन के खिलाफ उठाई आवाज और उठाए तीखे सवाल!
नई दिल्ली में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) कार्यालय के बाहर चल रहे वकीलों के प्रदर्शन के दौरान एक वीडियो सामने आया है, जिसमें रमन शर्मा (अधिवक्ता) ने खुलकर BCI चेयरमैन के खिलाफ मोर्चा खोला है। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी बात रखी।
📋 रमन शर्मा के बयान के मुख्य बिंदु :
▪️ लीगल फ्रेटर्निटी की अनदेखी: रामान शर्मा ने कहा कि यह विरोध किसी व्यक्तिगत बात के लिए नहीं, बल्कि पूरी लीगल फ्रेटर्निटी के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए है। उनका कहना था कि 14 साल से अधिक समय से पद पर आसीन रहने के बावजूद वकीलों की जमीनी समस्याओं और विधिक मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया।
▪️ संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल: उन्होंने कहा कि वकीलों के खिलाफ जिस तरह का रवैया अपनाया जा रहा है और बार काउंसिल के स्तर पर जो नीतियां बन रही हैं, वे वकीलों के हितों के विपरीत हैं।
▪️ चेयरमैन के इस्तीफे की मांग: हाथों में तख्तियां ("Resign BCI Chairman - Manan Mishra") लिए प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने साफ किया कि जब तक वकीलों की आवाज और उनकी चिंताओं का समाधान नहीं होता, तब तक यह विरोध जारी रहेगा।
अधिवक्ता कल्याण समिति, लालगंज (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश) विधिक संस्थाओं में पारदर्शिता, वकीलों के मान-सम्मान और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा मुखर रही है।

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