Vimal Pathak

Vimal Pathak Experienced IT Professional having 32 years of IT experience in area of program management.

26/09/2025

USA का 50% से ज्यादा परमाणु USA ने पाकिस्तान में भंडारण किया हुआ है। (जहां इंडियन आर्मी की मिसाइल्स हिट कर चुकी थी, सिर्फ एक से दो दिन और मिलते इंडियन आर्मी को, तो पाकिस्तान के साथ USA का परमाणु भंडारण भी स्वाहा होता और नुकसान की तो कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। बस यहीं से जोकर ट्रंप का रोना शुरू हुआ और लाखों नहीं करोड़ों की जान बचाने के लिए मोदीजी को स्ट्राइक रोकनी पड़ी थी। वैसे *ऑपरेशन*🔴*सिंदूर*.अभी.जारी.है*

सिर्फ चार दिन की लड़ाई,
फिर खुले लंबे लंबे रहस्य..
रहस्य भी ऐसे की सुनकर उड़ गए दुनिया के होश....

ऑपरेशन सिंदूर के बाद जो खुलासे हुए, वो केवल पाकिस्तान की हार की कहानी नहीं थे, ये अमेरिका की छुपी रणनीति और चीन की मिली भगत की भी परतें उधेड़ गए।

अब यह साफ हो चुका है कि पाकिस्तान के पास अपना कोई परमाणु हथियार था ही नहीं। जो परमाणु शक्ति पाकिस्तान दशकों से दिखा रहा था, वो दरअसल अमेरिका की गोपनीय तिजोरी थी, जिसे 1998 में पाकिस्तान में छुपाया गया था।

अमेरिका को ये जगह इसलिए मुफीद लगी, क्योंकि अगर कभी कोई हमला हो, तो नुक़सान एशिया को हो, अमेरिका को नहीं।

भारत जब 11 मई और 13 मई 1998 में परमाणु परीक्षण कर रहा था और अमेरिका प्रतिबंध की धमकियाँ दे रहा था, तभी अमेरिका ने ठीक 14 दिन बाद यानि 15वें दिन 28 मई 1998 को पाकिस्तान से परीक्षण करवाकर दुनिया को भ्रमित किया कि अब पाकिस्तान भी परमाणु शक्ति है। यही नहीं, पाकिस्तान की इस नकली परमाणु छवि से भारत को डराने का खेल शुरू हुआ, जिसमें देश के अंदर बैठे अमेरिकी भक्त भी पाकिस्तान की ताकत का डर दिखाते रहे।

लेकिन युग बदला और सत्ता पहुँची उस नेता के हाथ में जो डरता नहीं, जवाब देता है। मोदी सरकार ने पहले भारत को आत्मनिर्भर बनाया, अमेरिका को मित्रता में बाँधा और पाकिस्तान को धैर्य से देखा।

लेकिन जब पहलगाम में हिन्दुओं का रक्त बहाया गया, तो भारत सरकार ने वही किया जिसका किसी ने अनुमान भी नहीं लगाया था—सीधा आक्रमण।

भारतीय सेना ने मिसाइलों से पाकिस्तान की नींव हिला दी, और जब हमारी मारक क्षमता उन परमाणु ठिकानों तक पहुंची जो अब तक ‘अदृश्य’ माने जा रहे थे,

तब अमेरिका की नींद टूटी....

उसे डर सता गया कि अगर भारत ने हमला जारी रखा, तो उसके खुद के हथियार खाक हो जाएंगे। और वो कभी दुनिया के सामने अपना चेहरा नहीं दिखा पाएगा।

अब अमेरिका न बोल सकता था, न रोक सकता था। वो चुपचाप भारत को दोस्ती का वास्ता देने लगा। मोदी जी ने वक्त की नजाकत समझी, चार दिन में दुश्मन को धूल चटाई, और शर्तों के साथ युद्ध विराम किया। पाकिस्तान को पूरी दुनिया के सामने नंगा कर दिया और अमेरिका को चुपचाप अपना जखीरा समेटने पर मजबूर कर दिया।

आज अमेरिका पाकिस्तान से परमाणु हथियार हटाने की कवायद में लगा है। मोदी जी ने ट्रंप को खुद उसका काम याद दिला दिया है।

अब अमेरिका झुका हुआ है, चीन चुप है,
और पाकिस्तान हिल चुका है। सूत्रों से पता चला है कि अमेरिका पाकिस्तान से अपने परमाणु हथियार उठाने जा रहा है। और अपनी साख बचाने के लिए इसे नाम देगा पाकिस्तान का परमाणु सरेंडर...

अब सबको पता है कि पाकिस्तान के पास न्युक्लियर पॉवर था ही नहीं, तो सरेंडर क्या करेगा? अमेरिका का है उठा ले जाओ।

और ये जो पाकिस्तान को IMF द्वारा बेरोकटोक बेलआउट पैकेज/ ऋण दिया जा रहा था, दरअसल वो ऋण नहीं अमेरिकी परमाणु हथियारों को पाकिस्तान में रखने का किराया था।

चार दिन की इस लड़ाई ने भारत को नया दर्जा दिया है। अब भारत सिर्फ एक देश नहीं, परिणाम देने वाली विश्व शक्ति है।

इस कहानी में सबसे बड़ी सीख ये है—

जब नेतृत्व मज़बूत हो, तो दुनिया झुकती है।

जय भारत जय भारती🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

29/07/2025

जाको राखे साइयां मार सके ना कोई को चरितार्थ करते हुए अमेरिका के टेक्सास में एक अत्याधुनिक फाइटर जेट लैंडिंग के वक्त हादसे का शिकार हो गया और हादसे में पायलट ने खुद सुरक्षित बाहर निकालने में सफल रहा।

29/07/2025

"अरे! भाई बुढापे का कोई ईलाज नहीं होता . अस्सी पार चुके हैं . अब बस सेवा कीजिये ." डाक्टर पिता जी को देखते हुए बोला .
"डाक्टर साहब ! कोई तो तरीका होगा . साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है ."
"शंकर बाबू ! मैं अपनी तरफ से दुआ ही कर सकता हूँ . बस आप इन्हें खुश रखिये . इस से बेहतर और कोई दवा नहीं है और इन्हें लिक्विड पिलाते रहिये जो इन्हें पसंद है ." डाक्टर अपना बैग सम्हालते हुए मुस्कुराया और बाहर निकल गया .
शंकर पिता को लेकर बहुत चिंतित था . उसे लगता ही नहीं था कि पिता के बिना भी कोई जीवन हो सकता है . माँ के जाने के बाद अब एकमात्र आशीर्वाद उन्ही का बचा था . उसे अपने बचपन और जवानी के सारे दिन याद आ रहे थे . कैसे पिता हर रोज कुछ न कुछ लेकर ही घर घुसते थे . बाहर हलकी-हलकी बारिश हो रही थी . ऐसा लगता था जैसे आसमान भी रो रहा हो . शंकर ने खुद को किसी तरह समेटा और पत्नी से बोला -
"सुशीला ! आज सबके लिए मूंग दाल के पकौड़े , हरी चटनी बनाओ . मैं बाहर से जलेबी लेकर आता हूँ ."
पत्नी ने दाल पहले ही भिगो रखी थी . वह भी अपने काम में लग गई . कुछ ही देर में रसोई से खुशबू आने लगी पकौड़ों की . शंकर भी जलेबियाँ ले आया था . वह जलेबी रसोई में रख पिता के पास बैठ गया . उनका हाथ अपने हाथ में लिया और उन्हें निहारते हुए बोला -
"बाबा ! आज आपकी पसंद की चीज लाया हूँ . थोड़ी जलेबी खायेंगे ."
पिता ने आँखे झपकाईं और हल्का सा मुस्कुरा दिए . वह अस्फुट आवाज में बोले -
"पकौड़े बन रहे हैं क्या ?"
"हाँ, बाबा ! आपकी पसंद की हर चीज अब मेरी भी पसंद है . अरे! सुषमा जरा पकौड़े और जलेबी तो लाओ ." शंकर ने आवाज लगाईं .
"लीजिये बाबू जी एक और . " उसने पकौड़ा हाथ में देते हुए कहा.
"बस ....अब पूरा हो गया . पेट भर गया . जरा सी जलेबी दे ." पिता बोले .
शंकर ने जलेबी का एक टुकड़ा हाथ में लेकर मुँह में डाल दिया . पिता उसे प्यार से देखते रहे .
"शंकर ! सदा खुश रहो बेटा. मेरा दाना पानी अब पूरा हुआ ." पिता बोले.
"बाबा ! आपको तो सेंचुरी लगानी है . आप मेरे तेंदुलकर हो ." आँखों में आंसू बहने लगे थे .
वह मुस्कुराए और बोले - "तेरी माँ पेवेलियन में इंतज़ार कर रही है . अगला मैच खेलना है . तेरा पोता बनकर आऊंगा , तब खूब खाऊंगा बेटा ."
पिता उसे देखते रहे . शंकर ने प्लेट उठाकर एक तरफ रख दी . मगर पिता उसे लगातार देखे जा रहे थे . आँख भी नहीं झपक रही थी . शंकर समझ गया कि यात्रा पूर्ण हुई .

माँ बाप का सम्मान करें और उन्हें जीते जी खुश रखे।
✍️विमल

22/06/2025

अमेरिका ने ईरान पर हमला कर फोर्डो, नातांज और इस्फहान के परमाणु ठिकानों पर बम गिराए। राष्ट्रपति ट्रंप के कदम ने तीसरे विश्वयुद्ध शुरू किया। सभी विश्व शक्तियों से अपील है कि आगे आकर इस विनाश को रोकें। राष्ट्रपति ट्रंप अपनी उम्र जी चुके है और नई पीढ़ी को आग में झुकने का काम कर रहे है। इस समय
राष्ट्रपति ट्रंप धृतराष्ट्र का रोल अदा कर रहे जोकि भविष्य की आने वाली परेशानी के प्रति अंधे हो रहे है। इनको तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।

*ये है कौशांबी के रामबाबू तिवारी के केस की सच्चाई।सुनेंगे तो मानवता के कंधे शर्म से झुक जाएंगे।*  *ज़मीन के विवाद में आठ...
10/06/2025

*ये है कौशांबी के रामबाबू तिवारी के केस की सच्चाई।सुनेंगे तो मानवता के कंधे शर्म से झुक जाएंगे।*

*ज़मीन के विवाद में आठ साल की बच्ची का इस्तेमाल किया गया। उससे बलात्कार की झूठी कहानी कहलाई गई* ।

उस मासूम ने मजिस्ट्रेट के सामने सब कुछ बयां कर दिया कि जो उसकी मां ने सिखाया था, वही उसने पुलिस को बताया।

फिर क्या था। प्रधान के रसूख और पुलिसिया सांठ-गांठ से रामबाबू तिवारी के बेटे पर पोस्को लगाकर जेल भेज दिया गया।

रामबाबू तिवारी गुहार लगाते रहे। अपने सीने में निर्दोष बेटे के जेल जाने के दर्द का शूल लिए भटकते रहे। निरंकुशता, स्वार्थ और द्वेष के शापित तंत्र से गुहार करते रहे कि एक बार जांच तो कर लो मामले की।

मगर जोड़-तोड़ और अहमन्यता की ईंटों से सजी व्यवस्था के निर्जीव शरीर में ज़रा भी हलचल नहीं हुई। एक पिता और क्या करता!! उसने लाचारगी के हाथों से असहाय विकल्पहीनता का ज़हर लिया और पीकर मर गया।

अपने पेट पर सुसाइड नोट की शक्ल में कौशांबी पुलिस के लिए स्वर्ण पट्टिकाओं में फ्रेम कराने वाला एक प्रशस्ति पत्र छोड़ गया।

पुलिस इतने पर ही नहीं रुकी। वो तो अहंकार और निरंकुशता के दिग्विजय का अश्व बन चुकी थी। सो पिता के पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार में जेल भेजे गए बेटे को बुलाए जाने की मांग कर रहे परिजनों पर लाठी चली, लात चली।

रामबाबू तिवारी के बेटे अक्षय तिवारी की पत्नी तक को चौकी पर बिठा लिया।

रामबाबू तिवारी के बेटे अक्षय ने टॉप सीक्रेट को बताया कि उनके परिवार पर पुलिसिया तंत्र का ऐसा कहर टूटा कि पिता की लाश को कंधा देने के लिए भी घर पर कोई शेष नहीं था।

जब शोर हुआ। आवाज़ें गूंजीं। मीडिया में तस्वीरें आना शुरू हुईं। उच्चाधिकारियों ने पूछना शुरू किया। तब जाकर बेपरवाही की कालीन पर अभयदान का पंखा चलाकर सो रही पुलिस की नींद टूटी।

मामले की जांच की गई। देखते ही देखते सच का अंखुआ झूठ की ज़मीन का माथा फोड़कर बाहर आ गया। रामबाबू तिवारी के बेटे से पोस्को हटा। उसकी जेल से जमानत हुई।

वो घर आया। मां से लिपटकर रोया। उसने बाप के कंधे पर भी सर रखकर रोना चाहा। मगर बाप तो तस्वीर में बदल चुके थे।

यूपी पुलिस को इस तस्वीर को अपने हेडक्ववार्टर में जगह देनी चाहिए और उत्तर प्रदेश के SC/ST के कोटे से बने प्रधान अपनी दबंगई, तानाशाही से ब्राह्मण समाज को SC/ST act की धमकी देकर परेशान करते रहते है। ज्यादातर ग्राम प्रधान अंगूठा छाप है!!!!





27/05/2025

“मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः।
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत।।”

अर्थात्, “हे कुन्तीपुत्र! सर्दी-गर्मी और सुख-दुख इंद्रियों के स्पर्श से उत्पन्न होते हैं और अस्थायी होते हैं, इन्हें धैर्यपूर्वक सहन करना चाहिए।”

यह श्लोक भगवद्गीता का हम सभी के लिए एक गहरा संदेश देता है, जिसमें जीवन के उतार-चढ़ावों, सुख-दुख और प्रतिकूलताओं को धैर्यपूर्वक सहने की शिक्षा दी गई है। यह संदेश विशेष रूप से नेतृत्व में अत्यंत प्रासंगिक है चाहे वह नेतृत्व परिवार का हो, समाज का हो या किसी संस्था का हो । एक सच्चा लीडर वही होता है जो परिस्थिति कैसी भी हो—सर्दी-गर्मी जैसी बदलती स्थिति हो या जीवन के सुख-दुख—उनसे विचलित हुए बिना सूर्य की भांति प्रतिदिन नवीन ऊर्जा, उत्साह और संकल्प के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है। जैसे सूर्य अपने प्रकाश से अंधकार मिटाकर सबको जीवन देता है, वैसे ही एक लीडर अपने दृष्टिकोण, साहस और सकारात्मकता से अपनी टीम को दिशा देता है। धैर्य, स्थिरता और सहनशीलता ही नेतृत्व की असली परीक्षा होती है, और जो इन कसौटियों पर खरा उतरता है, वही समय का सच्चा पथप्रदर्शक बनता है।
✍️विमल

25/05/2025

आजकल जो भी छात्र टॉप कर रहे हैं या 99% से अधिक अंक प्राप्त कर रहे हैं, वे अधिकांशतः सोशल मीडिया से दूर रहते हैं। आज के समय में आम लोग प्रतिदिन 2–3 घंटे और हर महीने लगभग 60 घंटे सोशल मीडिया पर बर्बाद कर देते हैं। इससे होने वाले नुकसान का अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है। सरकार ने कौशल विकास के अनेक कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिनका सही लाभ तभी मिल सकता है जब सोशल मीडिया से दूरी बनाई जाए। इसलिए, समय की बर्बादी रोकने और आत्मविकास को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग सीमित या बंद कर देना चाहिए।✍️विमल

07/05/2025

घर में घुसकर मारा है, कब्र तुम्हारी खोदी है,
भारत की गद्दी पर बैठा, बाप तुम्हारा मोदी है। 💪

जय हिंद, जय भारत की सेना। जय मां भारती 🙏
06/05/2025

जय हिंद, जय भारत की सेना। जय मां भारती 🙏

संयुक्त परिवार केवल एक छत के नीचे कई लोगों का साथ रहना नहीं होता, यह जीवन जीने की एक संपूर्ण पाठशाला होती है। इसमें हर उ...
06/05/2025

संयुक्त परिवार केवल एक छत के नीचे कई लोगों का साथ रहना नहीं होता, यह जीवन जीने की एक संपूर्ण पाठशाला होती है। इसमें हर उम्र के सदस्य होते हैं — दादा-दादी से लेकर बच्चों तक — और हर किसी की भूमिका अनमोल होती है। एक संयुक्त परिवार में बच्चे सिर्फ किताबों से नहीं, अनुभवों से सीखते हैं। वे बड़ों का आदर करना, छोटों से प्रेम करना, संघर्ष में साथ देना और खुशी में एकजुट रहना इन्हीं रिश्तों के बीच रहकर सीखते हैं।

संयुक्त परिवार में हर दिन कोई नई सीख होती है — कभी धैर्य की, कभी त्याग की, तो कभी साझेदारी की। यह एक ऐसी 'यूनिवर्सिटी' है जहाँ न कोई परीक्षा होती है और न कोई डिग्री, लेकिन जो ज्ञान यहाँ मिलता है, वह जीवन भर साथ रहता है। संस्कार, अनुशासन और सह-अस्तित्व की शिक्षा एक संयुक्त परिवार ही सच्चे रूप में दे सकता है। चार दिन की ज़िंदगी है खुशी खुशी जी लो इस संसार को छोड़ने के बाद कोई अपना और पराए की पहचान नहीं रह जाती , भगवान फिर नए सिरे से रिश्ते जोड़ते है।
✍️विमल

01/05/2025

हमारे देश के वीर सैनिक न केवल अपनी जान की आहुति देते हैं, बल्कि अपने परिवार को भी इस बलिदान की राह पर छोड़ जाते हैं। शहीद होने पर उनकी पत्नी गहरे दुःख से गुजरती हैं, लेकिन उन्हें "विधवा" कहकर पुकारना उनके गौरवशाली त्याग की भावना को कम कर देता है।

यदि उन्हें "वीरवधु" कहा जाए, तो यह न केवल उनका सम्मान बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें एक सशक्त और प्रेरणादायक पहचान देगा। "वीरवधु" का अर्थ है वीर की पत्नी—जो न केवल बलिदान की साक्षी हैं, बल्कि स्वयं भी साहस और संघर्ष का प्रतीक हैं।

हमारे इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई से लेकर आज की शहीदों की पत्नियाँ तक, सभी ने समाज के लिए मिसाल कायम की है। ऐसे में "वीरवधु" शब्द उनके मनोबल को बढ़ाएगा और समाज को याद दिलाएगा कि वे असहाय नहीं, बल्कि सम्मान और प्रेरणा की मूर्ति हैं।

अब समय आ गया है कि हम अपनी भाषा और दृष्टिकोण बदलें—शहीदों की पत्नियाँ "विधवा" नहीं, "वीरवधु" हैं!
✍️विमल




03/04/2025

एक विवाहित स्त्री जो आपको आकर्षक और सुंदर लगती है
याद रखिए, उसकी सुंदरता भले ही
जन्मजात हो, लेकिन उस सौंदर्य को
बरकरार रखने में उसके पति के प्रेम
और समर्पण का बड़ा योगदान होता है।

कभी गौर से देखिए उन स्त्रियों का चेहरा जिनके विवाह सफल नहीं हुए या जिनके पति जल्दी उन्हें छोड़कर चले गए। आप समझ जाएंगे कि एक स्त्री के जीवन में पुरुष का क्या महत्व होता है।

शारीरिक रूप से एक स्त्री भले ही कई पुरुषों की प्रेमिका हो सकती है, लेकिन उसे अपने जीवन की रानी बनाकर सम्मान देना, सर का ताज बनाना और गृहलक्ष्मी का दर्जा देना हर पुरुष के बस की बात नहीं है।
वो परिवार की धुरी हो सकती है, लेकिन उसे भी अपनी पहचान, स्वच्छंदता और सम्मान चाहिए।

याद रखिए, जब आप किसी विवाहित महिला के बारे में कहते हैं कि उसकी उम्र देखकर ये नहीं लगता कि वह शादीशुदा है या बच्चों की मां है, तो इसमें सबसे बड़ा योगदान उस पुरुष का होता है, जो किसी की राजकुमारी को अपने घर की रानी बनाकर रखता है।

पिता के बाद पति ही वो शख्स होता है,
जो अपनी पत्नी के लिए हमेशा
अमीर होता है।

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