Youth For Swaraj MadhyaPradesh

Youth For Swaraj MadhyaPradesh A Organization for Youth & Student Politics

11/03/2026

जब देश के असली मुद्दों पर सवाल उठाने का समय होता है, तब कुछ मीडिया सच दिखाने के बजाय सत्ता की दलाली में लग जाती है। लोकतंत्र में मीडिया का काम जनता की आवाज़ बनना है, ना कि सरकार की ढाल बनना। देश में अगर समस्याएँ बढ़ रही हैं तो उन्हें दिखाना और सवाल पूछना ही असली पत्रकारिता है।





06/03/2026

जब देश की विदेश नीति इतनी कमजोर हो जाए कि अपने हितों के फैसले भी किसी दूसरे देश की “इजाज़त” पर निर्भर लगने लगें, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
भारत एक संप्रभु राष्ट्र है—हमारे फैसले हमारे राष्ट्रीय हितों के आधार पर होने चाहिए, न कि किसी वैश्विक ताकत की कृपा से।
मजबूत राष्ट्र वही होता है जो आत्मसम्मान के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक फैसले ले सके।

#राष्ट्रीयस्वाभिमान
#विदेशनीति
#भारतकीआवाज़
#सवालजरूरीहै
#देशहित

06/03/2026

आज से आवेदन शुरू
जन-गण-मन
एक सिलसिला मन वचन और कर्म का

पाँच हफ़्ते ऑनलाइन चर्चा
फिर एक हफ़्ता रूबरू सत्संग

योगेन्द्र यादव के संग
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर, उनके लिए

आवेदन करें: www.janaganamana.co.in

आवेदन 10 मार्च 2026 तक

24/02/2026

जिस देश का किसान कर्ज़, मौसम और बाज़ार—तीनों से जूझ रहा हो,
वहाँ विदेशी फसलों के लिए दरवाज़े खोलना सीधी वादाखिलाफी है।

MSP की गारंटी मांगते किसान सालों से सड़कों पर हैं,
और सरकार अमेरिका से ट्रेड डील कर अपने ही अन्नदाता की मेहनत सस्ती कर रही है।

यह सिर्फ़ व्यापार का फैसला नहीं —
यह देश के किसानों के भविष्य से किया गया समझौता है।
कुर्सी बचाने के लिए खेत कुर्बान नहीं होने चाहिए।





24/02/2026

जन-गण-मन

एक सिलसिला मन वचन और कर्म का
उनके लिए जो संविधान की आत्मा के मुरीद हैं
जिनकी आस्था लोकतंत्र में है
 जिन्हें नाज़ है हिन्द पर

जल्द ही 

यूँ ही नहीं ख़त्म होता लोकतंत्र लोक की चुप्पी से तंत्र कब्ज़ा करता है जुमला नहीं है ‘हम भारत के लोग’ पब्लिक ही बचाएगी रि...
24/02/2026

यूँ ही नहीं ख़त्म होता लोकतंत्र
लोक की चुप्पी से तंत्र कब्ज़ा करता है

जुमला नहीं है ‘हम भारत के लोग’
पब्लिक ही बचाएगी रिपब्लिक को

इसलिए जन-गण-मन

जल्द ही

17/02/2026

थोड़ी सी शर्म कीजिए सब दरकिनार कर,
पगड़ी तो रख ही दीजिए वरना उतार कर!
इल्जाम आप सर पे तो लेने से अब रहे,
कुर्सी ही छोड़ दीजिए नैतिक आधार पर।।





17/02/2026

वक्त की धारा के साथ राजनीति के मायने कुछ इस तरह बदलेंगे, इसका शायद ही किसी को अंदाजा था। एक समय था जब उम्मीदें विकसित और सुनहरे भविष्य की थीं, लेकिन आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो मंजर कुछ और ही नजर आता है।

​जनता के विश्वास और लोकतंत्र की गरिमा को जिस तरह से परखा जा रहा है, वह हर जागरूक नागरिक के लिए चिंता का विषय है। कूटनीति के नाम पर दिखावा और संकट की घड़ी में जनता को अकेला छोड़ देना, एक मजबूत लोकतंत्र की निशानी नहीं हो सकती।

​"उम्मीदें तो बहुत थीं इस सफर में, मगर हकीकत के आईने ने कुछ और ही दिखाया। काश! आने वाला कल इन कड़वी यादों को बदलने का साहस जुटा पाए और हम एक ऐसे भारत की ओर बढ़ें जहाँ सत्य और न्याय की जीत हो।"





16/02/2026

थाने की चारदीवारी के भीतर अगर महिलाओं को अपमान, धमकी और डर का सामना करना पड़े —
तो सवाल सिर्फ कानून का नहीं, इंसानियत का भी होता है।

जब आवाज़ उठाने वाली बेटियों को चुप कराने की कोशिश हो,
और रक्षक ही दर्शक बन जाएँ —
तो समझिए, संविधान नहीं… सत्ता बोल रही है।

यह जंग किसी एक नाम की नहीं,
यह हर उस महिला की है जो अन्याय के सामने झुकने से इंकार करती है।
हम चुप रहे — तो ज़ुल्म बोलेगा।





वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 17.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज़ लेने की खबर कई सवाल खड़े करती है। क्या यह कर्ज़ देश के विकास, ...
16/02/2026

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 17.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज़ लेने की खबर कई सवाल खड़े करती है। क्या यह कर्ज़ देश के विकास, रोजगार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, या आने वाली पीढ़ियों पर बोझ बढ़ाएगा? जनता को यह जानने का हक है कि इतना बड़ा कर्ज़ किस योजना और किस लाभ के लिए लिया जा रहा है।
या "कर्ज खाओ, मौज करो" की नीति पर चलकर देश की अर्थव्यवस्था का बंटाधार किया जा रहा है?





15/02/2026

"क्या 'विश्वगुरु' का सपना अपने ही आँगन में सिमट रहा है? मोदी सरकार के पिछले 11 वर्षों का रिपोर्ट कार्ड गवाह है कि हमने अपने सबसे भरोसेमंद पड़ोसियों को दुश्मन की गोद में बिठा दिया है। मालदीव से 'इंडिया आउट' के नारे, बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद बढ़ती दूरियाँ, और नेपाल-श्रीलंका में चीन का अभेद्य होता चक्रव्यूह—यह कूटनीतिक जीत नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक विफलता है। विदेश नीति केवल इवेंट मैनेजमेंट और फोटो-ऑप्स से नहीं चलती; जब पड़ोसी ही साथ छोड़ दें, तो वैश्विक मंच पर जय-जयकार केवल एक खोखला शोर बनकर रह जाती है। अहंकार की राजनीति ने भारत के सामरिक घेरे को असुरक्षित कर दिया है।"





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