23/05/2021
वर्तमान माहौल में मैं महसूस कर रही हूँ कि दवाओं के साथ - साथ लोगों को शब्दों की भी जरूरत है. हमने किसी से बात कर ली, उसे ढांढस बंधा दिया और उसे महसूस करा दिया कि I'm With You तो निश्चित तौर पर उस व्यक्ति को परेशानी भरे समय से निकलना थोड़ा आसान हो जाएगा. बहुत पहले लिखे गए ये शब्द आज साझा कर रही हूँ :
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माना कि रास्ता कठिन और पथरीला है
मगर हम चलना तो नहीं छोड़ देंगे ना
माना कि नैनों में नमी ही ज्यादा है
मगर हम हँसना तो नहीं छोड़ देंगे ना
माना कि दुआ अनसुनी भी रह जाती है
मगर हम दुआ करना तो नहीं छोड़ देंगे ना
माना कि हर लड़ाई का अंजाम जीत नहीं होता
मगर हम लड़ना तो नहीं छोड़ देंगे ना
माना कि हर आशा पूरी हो ये जरूरी नहीं
मगर हम आशा करना तो नहीं छोड़ देंगे ना
- शीला दाहिमा