22/09/2022
*ऐ बहुजन जमात!*
*तुम अगला चुनाव फिर से हार जाओगे....*
केंद्र में सरकार बनाने के लिए सिर्फ 38% वोट की जरूरत होती है।
तुम्हारी जनसंख्या 85% है।
फिर भी तुम आजतक सत्ता से दूर हो।
तुमने 2014 में उसको वोट दिया जो तुम्हारे खिलाफ (बहुजन के खिलाफ) नीतियाँ बनाकर तुम्हें तुम्हारे संवैधानिक हक और अधिकार से वंचित करता है ।
इतने से भी तुम्हारा पेट नहीं भरा।
तुमने 2019 में फिर से उसी को वोट दिया और उसी की सरकार बनवाई जो तुम्हारे हित-लाभ के खिलाफ जाकर काम करते हैं। जो सरकारी महकमों और देश के प्राकृतिक संसाधनों में तुम्हें अपने बराबरी का हक और अधिकार देने के खिलाफ काम करते हैं।
पिछड़े विरूद्ध अगड़े की लड़ाई के लिए तुम्हें आंबेडकर, पेरियार, मा. कांशीराम, महामना रामस्वरूप वर्मा, पेरियार ललई सिंह यादव, बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा, राष्ट्रपिता महात्मा ज्योतिबा फुले, कर्पूरी ठाकुर, लालू प्रसाद, शरद यादव, संतराम बीए जैसे अनेकों नेताओं ने जगाने का प्रयास किया। मगर तुम आज तक नहीं जागे। तुम्हारी कुंभकर्णी नींद नहीं खुली।
मुझे यकीन हीं नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि 2024 में भी तुम अपने पुराने दुश्मन को हीं वोट देकर जितवाओगे।
क्यों शातिरों ने तुम्हें धार्मिक गुलाम बना लिया है। शातिरों ने तुम्हारे अंदर सार्थक शिक्षा, निर्धनता से ऊबारने का मार्ग और आत्म सम्मान से जीने की अभिलाषा को पनपने हीं नहीं दिया है।
हालांकि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि तुम बकरी की तरह बार-बार कसाई को हीं अपना उद्धारक समझकर उसको सत्ता में बिठाते हो।
मगर मैं यह भविष्यवाणी करने के लिए विवश हूँ कि तुम भविष्य में भी अपने हक और अधिकार का हनन करने वालों को हीं वोट देकर सत्तासीन करोगे। क्योंकि लंबे अर्से (दशकों एवं सदियों) से चली आई धार्मिक गुलामी तुम्हारे खून के कतरे-कतरे में रच बस गया है।
अब आजादी मिलकर 75 वर्ष से अधिक बीत जाने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट में कोई तुम्हारा अपना जज बने, केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कोई तुम्हारा अपना प्रोफेसर और उपकुलपति बने, अयोध्या राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट में कोई तुम्हारा अपना शामिल किया जाय, एक शंकराचार्य कोई तुम्हारा अपना बने - ऐसी कामना तो तुम्हारे सपने में भी नहीं आती है।
मुझे यह लिखते हुए बहुत बुरा लग रहा है कि भारत का ओबीसी समाज अपने मानसिक गुलामी से आजादी के लिए आज भी कुछ नहीं कर रहा है। जो चंद लोग ओबीसी समाज के बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए प्रयास कर रहे हैं, ओबीसी समाज में मौजूद स्वर्ण वर्ग के गुलाम ओबीसी उनका विरोध करके उनके प्रयास को विफल कर रहे हैं।
मंडल कमीशन के लागू होने का विरोध भी ओबीसी समाज के बच्चों ने बिना जाने, बिना सोंचे, बिना समझे किया था। और बहुत सारे ओबीसी आज भी सवर्णों को दिए गए ईडब्ल्यूएस आरक्षण का समर्थन और ओबीसी को उसके जनसंख्या प्रतिशत के अनुपात में आरक्षण देने का विरोध करते हैं।
ऐ ओबीसी तुम्हारे अंदर आत्म-सम्मान नाम की कोई चीज पनपी हीं नहीं है। तुम सही मायने में ऊपर के तीन वर्णों का वफादार सेवक बन चुके हो। अपने हित और लाभ की आहुति देकर सवर्णों की सेवा करना हीं तुमने अपनी नियती मान लिया है।
ऐ बहुजन तुम अगला चुनाव फिर से हार जाओगे।
ऐ बहुजन तुम अगला चुनाव फिर से हार जाओगे।
तुम्हारा शातिर दुश्मन ऐन मौके पर तुम्हें फिर से बरगला देगा और तुम 2024 का चुनाव फिर से हार जाओगे।
ऐ बहुजन तुम्हें कोई और नहीं बल्कि तुम्हारे अपने बहुजन भाई हरायेंगे और तुम हार जाओगे।
ऐ बहुजन तुम अपनी जंग अपनों के हाथों हारोगे और जीतेगा तुम्हारा पारंपरिक परोक्ष शत्रु।
ऐ बहुजन तुम 2024 का चुनाव हार जाओगे.......
लोकतंत्र की जय हो!
जय विज्ञान!
जय संविधान!
जय भारत!
बोल 85 जय मूलनिवासी
भारत जिंदाबाद!
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