20/08/2026
घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियमावली पर मंथन
इंदौर । मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग द्वारा घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम, 2005 के लगभग दो दशकों के क्रियान्वयन का आकलन, वर्तमान कमियों का विश्लेषण तथा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य-स्तरीय नियमावली एवं मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव एवं सदस्य श्रीमती साधना स्थापक के साथ अधिवक्ता अरविंद जैन एवं अभिजीत राठौर ने वक्ता के रूप में सहभागिता की। वक्ताओं ने घरेलू हिंसा से संबंधित मामलों में कानून के प्रावधानों के साथ-साथ उनके जमीनी क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर विस्तार से विचार रखा।
कार्यशाला में संरक्षण अधिकारियों, पुलिस, सेवा प्रदाताओं तथा न्यायालयों की भूमिका, शिकायत दर्ज होने से लेकर राहत आदेश तक की प्रक्रिया, अंतरिम राहत, निवास, संरक्षण, भरण-पोषण एवं क्षतिपूर्ति जैसे विषयों पर चर्चा हुई। ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में महिलाओं तक सेवाओं की पहुंच, विभागों के बीच समन्वय तथा अधिकारियों की जवाबदेही को भी प्रमुख चुनौती के रूप में रेखांकित किया गया।
समूह चर्चा में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि घरेलू हिंसा की पीड़िता को शिकायत से राहत तक की प्रक्रिया सरल, स्पष्ट, समयबद्ध और पीड़ित-केंद्रित रूप में उपलब्ध होनी चाहिए। आपातकालीन एवं जोखिम-आधारित हस्तक्षेप, केस ट्रैकिंग, डिजिटल रिकॉर्ड, आश्रय गृहों एवं सेवा प्रदाताओं के मानक तथा अधिकारियों के प्रशिक्षण को भी प्रस्तावित नियमावली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर सहमति व्यक्त की गई।
कार्यशाला के दौरान राज्य-स्तरीय नियमावली की संभावित संरचना, विभागवार जिम्मेदारियां, समय-सीमा, निगरानी एवं समीक्षा तंत्र पर समूह कार्य किया गया। प्रतिभागियों ने अपने सुझाव प्रस्तुत करते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई, जिसमें विभिन्न विभागों के बीच स्पष्ट समन्वय और जवाबदेही सुनिश्चित हो।
कार्यशाला के अंत में घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन में सामने आ रही प्रमुख कमियों की पहचान, पीड़ित-केंद्रित सुधारों की सूची तथा मध्य प्रदेश के लिए प्रस्तावित नियमावली/SOP का प्रारंभिक ढांचा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए। आयोग द्वारा इन सुझावों को समेकित कर संबंधित विभागों एवं हितधारकों से परामर्श के पश्चात अंतिम प्रारूप तैयार करने की कार्ययोजना बनाई गई।