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27/12/2024

क्या लोग कितने दिनों तक धर्म की राजनीति करके राज करेंगे एक दिन तो जनता समझेगी

Facebook पर मुझे 3 साल पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा है. सपोर्ट करने के लिए आपका धन्यवाद. आपके सपोर्ट के बिना मेरे लिए ...
06/06/2023

Facebook पर मुझे 3 साल पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा है. सपोर्ट करने के लिए आपका धन्यवाद. आपके सपोर्ट के बिना मेरे लिए यह कर पाना संभव नहीं था. 🙏🤗🎉

सब इंसान बराबर हैं, चाहे वो किसी धर्म या जाति के हों। हमें ऐसा भारत बनाना है जहाँ सभी धर्म और जाति के लोगों में भाईचारा ...
28/04/2023

सब इंसान बराबर हैं, चाहे वो किसी धर्म या जाति के हों। हमें ऐसा भारत बनाना है जहाँ सभी धर्म और जाति के लोगों में भाईचारा और मोहब्बत हो, न कि नफ़रत और बैर हो। Like share comment

23 मार्च भारत की स्वतंत्रता के लिए खास महत्व रखता है. भारत इस दिन को हर वर्ष शहीद दिवस के रूप में मनाता है. वर्ष 1931 मे...
23/03/2023

23 मार्च भारत की स्वतंत्रता के लिए खास महत्व रखता है. भारत इस दिन को हर वर्ष शहीद दिवस के रूप में मनाता है. वर्ष 1931 में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को 23 मार्च के ही दिन फांसी दी गई थी. भारत ने इस दिन अपने तीन वीर सपूत को खोया था. उनकी शहादत की याद में शहीद दिवस (Shaheed Diwas) मनाया जाता है. देश की आजादी के लिए तीनों वीर सपूतों ने बलिदान दिया था. बताया जाता है कि असल में इन शहीदों को फांसी की सजा 24 मार्च को होनी थी, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत ने जल्द से जल्द फांसी (Hang) देने के लिए एक दिन पहले ही दे दिया था. जिसके चलते तीन वीर सपूतों को 23 मार्च को ही फांसी दी गई थी.

यह भी पढ़ें- शहीद दिवस 2020: सुखदेव के बलिदान को नहीं भूल पाएंगे लोग, जानें उनका पूरा सफर, अंग्रेजों से ऐसे लिया था लोहा

इस वजह से हुई थी फांसी

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने 1928 में लाहौर में एक ब्रिटिश जूनियर पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इसके बाद सेंट्रल एसेंबली में बम फेंक दिया. बम फेंकने के बाद वे भागे नहीं, जिसके नतीजतन उन्हें फांसी की सजा हुई थी. तीनों को 23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल के भीतर ही फांसी दे दी गई थी. जिस वक्त भगत सिंह जेल में थे, उन्होंने कई किताबें पढ़ीं थी. 23 मार्च 1931 को शाम करीब 7 बजकर 33 मिनट पर भगत सिंह और उनके दोनों साथी सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गई.

17/03/2023

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इश्क की गलियों में ना जाना इश्क बड़ा बदनाम है इश्क तु मेरा खुदा है आशिक मेरा नाम है
17/01/2021

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सपना पूरा करना है तो कड़ी मेहनत करना पड़ता है यारों ......A....S
11/01/2021

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10/01/2021

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