04/02/2026
डबरा शहर में ट्रैफिक व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पुलिस की सख्ती कहीं दिखाई नहीं दे रही। शुगर मिल गेट सहित संवेदनशील चौराहों पर एक दिन पहले ही लगाए गए गार्डर फिर से क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि इन्हीं स्थानों पर पुलिस का नियमित पहरा भी रहता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पुलिस मौके पर मौजूद है, तो फिर गार्डर टूटते कैसे हैं?
क्या यह लापरवाही है, या जानबूझकर की गई अनदेखी?
शुगर मिल गेट वह पॉइंट है जहां भारी वाहनों का दबाव रहता है और जहां पहले भी कई बार ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं की स्थिति बन चुकी है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने गार्डर लगवाए थे, ताकि यातायात नियंत्रित रहे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि एक दिन भी नहीं बीता और गार्डर फिर क्षतिग्रस्त हो गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों—जिन्हें आम बोलचाल में “फड़नवीसो” कहा जा रहा है—के लिए नियम अलग हैं।
👉 उनके वाहनों की आवाजाही में कोई रोक-टोक नहीं
👉 न चालान
👉 न सख्ती
👉 और न ही जिम्मेदारी तय
जबकि आम नागरिकों के लिए:
छोटे-छोटे नियमों पर चालान
दोपहिया पर हेलमेट चेकिंग
कागज़ों की सख्ती
तो सवाल उठना स्वाभाविक है—
आखिर फड़नवीसो पर डबरा पुलिस इतनी मेहरबान क्यों है?
अगर गार्डर टूट रहा है, तो:
जिम्मेदार कौन?
निगरानी में तैनात पुलिसकर्मी जवाबदेह क्यों नहीं?
क्या किसी दबाव में आंखें मूंदी जा रही हैं?
यह मामला अब सिर्फ ट्रैफिक व्यवस्था का नहीं रहा,
बल्कि कानून के समान पालन पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन चुका है।
डबरा की जनता यह जानना चाहती है कि:
क्या कानून सबके लिए बराबर है,
या कुछ खास लोगों के लिए नियम सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं?