23/10/2025
‼ देशाणे री व्यथा ‼
माँ करणी रो ओ गाँव है प्यारो, नित मेळा अठे भरे है।
डोकरी रे आशीर्वाद सूं ही अठे दिन उगे और रात ढळै है।।
जगत विख्यात है देशाणो धाम, दूर सूं भगत आवे है।
डोकरी री किरपा सूं सगळा, जग में फूले और फळै है।।
अब ई गाँव ने नज़र लाग गी, झूठा लोभी भेळा होग्या।
मतलब रा खातर नित नूई बातां, गोडां माथे घड़ै है।।
कोई भी एक-दूजे ने देख र राज़ी नहीं है।
अठे तो सामी बेंवतां री आँख्यां लड़ै है।।
अठे दूसरे री तरक्की सूं कोई खुश नहीं है।
बी सूं मांयां रे मांयां, भयंकर रूप सूं जळै है।।
भायां आपरी चिंता फ़िकर बिल्कुल सही है।
आंपांरो गाँव देशाणों देखो चौतरफा सड़ै है।।
नाळ्यां भर गी, रस्ता टूट्या, गळ्यां में बदबू फैले है।
झूठे लोगां ने जिताया, बीरी ही सजा गाँव झेले है।।
घणो चांदणो करण सूं सरकार ने ही घाटो है।
जिम्मेदार सूता रैवे, दिन में बत्याँ फालतू बळै है।।
मन्दिर, गाँव, ग़रीबां रा बेजां रुपिया खा ग्या।
पण हिसाब किताब देणे करणे सूं टळै है।।
शिकायतां फाईलां री कोई कदर नहीं है।
बे पड़ी देशनोक नगरपालिका में गळै है।।
सरकार और प्रशासन कोई अठे सुध नहीं लेवे।
लेकिन चुनावां में देखो, वोट खातर पगां में पड़ै है।।
चापलूस और चमचा री अठे घणी काठी भरमार है।
लागे है, ई चमचागिरी सूं ही आंरो परिवार पळै है।।
जिका ई गाँव री सुध-बुध राखता, बे लोग अबे कठे है।
हाथ जोड़ र केऊं प्रबुद्ध जणा ने - थां री जरूत अठे है।।
ओ गाँव म्हारो है, ए गळ्यां म्हारी है, ए लोग म्हारा है।
पण गाँव री दुर्दशा देख र "अविनाश" ने केणो पड़ै है।।
जय माताजी री सा..जय माँ करणी
✍️ रचनाकार
अविनाश उपाध्याय
”देशाणा” जयपुर
📞 9024074080
✨ टिप्पणी: यह कविता “देशाणे री व्यथा” हमारे गाँव की सच्चाई, समाज की निष्क्रियता और माँ करणी के आशीर्वाद के बावजूद बिगड़ती स्थिति को उजागर करती है।
इसमें गाँव के गौरव, वर्तमान हालात और जनजागरण — इन तीनों का सशक्त संदेश निहित है।
मैंने अपनी भावनाएँ इस कविता के माध्यम से व्यक्त की हैं। यदि मेरे विचारों से आप सहमत या असहमत हैं, तो कृपया अपने विचार अवश्य साझा करें। आपकी प्रतिक्रिया ही मेरे इस प्रयास की सच्ची प्रेरणा है।
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