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30/09/2026
28/09/2026

मिशन वात्सल्य के तहत बिलासपुर में 51 नए बच्चों को प्रायोजन योजना की मंजूरी

पहले से 109 बच्चे ले रहे योजना का लाभ, प्रत्येक बच्चे को प्रतिमाह चार-चार हजार रुपए की सहायता

बिलासपुर, 28 सितम्बर: जरूरतमंद एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला बिलासपुर में मिशन वात्सल्य के अंतर्गत 51 नए बच्चों को प्रायोजन योजना का लाभ देने की मंजूरी प्रदान की गई है। इस संबंध में प्रायोजन एवं पालन-पोषण देखभाल स्वीकृति समिति की बैठक उपायुक्त राहुल कुमार की अध्यक्षता में आयोजित की गई।

बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से प्रस्तुत मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके बाद जिले के विभिन्न विकास खंडों से संबंधित 51 बच्चों को योजना के तहत लाभ देने की स्वीकृति प्रदान की गई। इनमें सदर विकास खंड के 18, श्री नयना देवी जी के 15, झंडूता के 4 तथा घुमारवीं विकास खंड के 14 बच्चे शामिल हैं।

उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि बिलासपुर जिले में पहले से 109 बच्चे प्रायोजन योजना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। प्रत्येक बच्चे को प्रतिमाह चार हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। 51 नए बच्चों को स्वीकृति मिलने के बाद जिले में इस योजना से लाभान्वित होने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 160 हो जाएगी।

बैठक में बताया गया कि स्वीकृत 51 बच्चों को प्रारंभिक रूप से मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना के अंतर्गत लाभ प्रदान किया जाएगा। मिशन वात्सल्य के लिए धनराशि प्राप्त होने के बाद इन बच्चों को मिशन वात्सल्य के तहत प्रायोजन योजना का लाभ दिया जाएगा।

उपायुक्त ने कहा कि मिशन वात्सल्य का उद्देश्य कठिन एवं संवेदनशील परिस्थितियों में रह रहे बच्चों को आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाना तथा उन्हें उनके परिवार और सामाजिक परिवेश में सुरक्षित रखते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और समुचित विकास के अवसर प्रदान करना है। योजना के तहत पात्र बच्चों एवं परिवारों को चिकित्सा, शिक्षा तथा अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाती है।

उन्होंने बताया कि विधवा, तलाकशुदा अथवा परित्यक्त माता के बच्चे, विस्तारित परिवार के साथ रह रहे अनाथ बच्चे, गंभीर बीमारी से प्रभावित माता-पिता के बच्चे तथा ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता आर्थिक अथवा शारीरिक कारणों से उनकी देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं, प्रायोजन योजना के लिए पात्र हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त बाल श्रम, बाल विवाह, मानव तस्करी, शोषण, दुर्व्यवहार, सड़क पर रहने अथवा अन्य कठिन परिस्थितियों से प्रभावित बच्चों को भी योजना के तहत सहायता के लिए चिन्हित किया जा सकता है।

उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना का लाभ प्राप्त कर रहे बच्चों की समय-समय पर विभागीय दलों के माध्यम से जांच और उनकी स्थिति की जानकारी ली जाए। उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य एवं विकास की नियमित निगरानी करने तथा आवश्यकता पड़ने पर उनके स्वास्थ्य परीक्षण करवाने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं के माध्यम से मिशन वात्सल्य सहित बच्चों से संबंधित अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई जाए, ताकि पात्र बच्चों और उनके परिवारों की समय पर पहचान कर उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा सके।

उपायुक्त ने कहा कि बच्चों के संरक्षण एवं कल्याण के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई भी पात्र बच्चा सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे तथा जरूरतमंद बच्चों की पहचान के लिए पंचायत स्तर तक प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

बैठक में बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष तृप्ता ठाकुर, जिला बाल संरक्षण अधिकारी सत्या चंदेल, जिला कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र कुमार, बाल संरक्षण अधिकारी गैर-संस्थागत शैली गुलरिया, जिला समन्वयक नीलम डोगरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।000.

24/09/2026

ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए पंचायत और ब्लॉक स्तर पर बढ़ाएं खेल आयोजन: डीसी

बिलासपुर, 24 सितंबर: जिला खेल परिषद की बैठक आज उपायुक्त कार्यालय बिलासपुर में उपायुक्त राहुल कुमार की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में लुहणु स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में उपलब्ध खेल सुविधाओं को और बेहतर बनाने, खेल ढांचे के रखरखाव तथा खिलाड़ियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के दौरान स्पोर्ट्स हॉस्टल में खिलाड़ियों को उपलब्ध करवाई जा रही मूलभूत सुविधाओं की भी समीक्षा की गई। खिलाड़ियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हॉस्टल में शौचालय, प्रकाश, पेयजल सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जिला खेल परिषद की ओर से आवश्यक धनराशि व्यय करने को स्वीकृति प्रदान की गई। उपायुक्त ने कहा कि खेल परिसरों और स्पोर्ट्स हॉस्टल में खिलाड़ियों को बेहतर वातावरण तथा आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाना प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि खिलाड़ी बिना किसी असुविधा के अपने खेल प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि लुहणु स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही खेल प्रतिभाओं के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में उभर रही प्रतिभाओं को भी आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध करवाया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक बच्चे विभिन्न खेलों में प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में उनकी प्रतिभा को समय पर पहचानकर उन्हें उचित अवसर और मार्गदर्शन प्रदान किया जाना चाहिए।

उन्होंने निर्देश दिए कि जिला बिलासपुर का कोई भी बच्चा खेल क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करता है तो जिला खेल परिषद की ओर से उसे प्रोत्साहित एवं सम्मानित किया जाए। उन्होंने प्रतिभावान खिलाड़ियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा।

उपायुक्त ने जिला खेल अधिकारी को पंचायत और ब्लॉक स्तर पर अधिक से अधिक खेल प्रतियोगिताएं एवं खेल गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल आयोजनों की संख्या बढ़ने से स्थानीय स्तर पर छिपी प्रतिभाओं को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा तथा उन्हें जिला और राज्य स्तर पर आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच प्राप्त होगा।

बैठक में खिलाड़ियों के खेल गतिविधियों के दौरान चोटिल होने की स्थिति में उन्हें तत्काल और प्राथमिकता के आधार पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाने पर भी चर्चा की गई। उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग को खिलाड़ियों के लिए आपातकालीन एवं प्राथमिकता स्वास्थ्य सुविधा की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि चोट लगने की स्थिति में खिलाड़ियों को उपचार के लिए अनावश्यक रूप से इधर-उधर न भटकना पड़े और उन्हें समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा मिल सके।

बैठक में जिला खेल परिषद के पदाधिकारी एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।000.

23/09/2026
08/09/2026

बिलासपुर जिला में आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं एवं ढाबों में परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों की अधिकतम खुदरा दरें निर्धारित

बिलासपुर, 08 सितंबर: जिला दण्डाधिकारी बिलासपुर राहुल कुमार ने हिमाचल प्रदेश जमाखोरी एवं मुनाफाखोरी निवारण आदेश, 1977 के क्लॉज 3(1)(ई) के अंतर्गत पूर्व में जारी सभी अधिसूचनाओं का स्थान लेते हुए जिले में आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं तथा ढाबों एवं अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में परोसे जाने वाले विभिन्न खाद्य पदार्थों की अधिकतम खुदरा कीमतें तत्काल प्रभाव से निर्धारित कर दी हैं।

जारी अधिसूचना के अनुसार जिले में बकरे/भेड़ का मांस 550 रुपये प्रति किलोग्राम, सूअर का मांस 300 रुपये प्रति किलोग्राम, ड्रेस्ड चिकन एवं ब्रॉयलर ड्रेस्ड 250 रुपये प्रति किलोग्राम, बिना तली मछली 230 रुपये प्रति किलोग्राम, तली हुई मछली 450 रुपये प्रति किलोग्राम तथा जीवित चिकन 200 रुपये प्रति किलोग्राम की अधिकतम दर निर्धारित की है।

इसी तरह ढाबों एवं अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में तंदूरी चपाती की अधिकतम कीमत 10 रुपये प्रति चपाती तथा तवा चपाती 7 रुपये प्रति चपाती निर्धारित की गई है। स्टफ्ड परांठा (पूर्ण आकार) 30 रुपये प्रति परांठा, पूर्ण भोजन (चावल, चपाती, दाल एवं सब्जी) तथा बिलासपुरी धाम (पाँच व्यंजनों सहित) 100 रुपये प्रति थाली, चावल की पूरी प्लेट 50 रुपये, तली हुई दाल 60 रुपये, मीट कड़ी (200 ग्राम शुद्ध मांस एवं कम से कम पाँच टुकड़े तथा 100 ग्राम ग्रेवी सहित) 130 रुपये प्रति प्लेट, चिकन कड़ी (200 ग्राम शुद्ध चिकन एवं कम से कम पाँच टुकड़े तथा 100 ग्राम ग्रेवी सहित) 110 रुपये प्रति प्लेट, स्पेशल सब्जी 80 रुपये प्रति प्लेट, मटर/पालक पनीर (कम से कम 100 ग्राम पनीर सहित) 100 रुपये प्रति प्लेट, दो भटूरे के साथ सब्जी/चना एवं दही 60 रुपये प्रति प्लेट तथा रायता 50 रुपये प्रति डिश की अधिकतम दर निर्धारित की है।

अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैकेटबंद दूध सभी ब्रांडों के मुद्रित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर ही बेचा जाएगा। खुला पनीर 350 रुपये प्रति किलोग्राम तथा खुला दही 80 रुपये प्रति किलोग्राम की अधिकतम दर पर उपलब्ध होगा। सभी ब्रांडों के शीतल पेय भी मुद्रित अधिकतम खुदरा मूल्य के अनुसार ही बेचे जाएंगे।

जिला दण्डाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि मीट एवं चिकन कड़ी की प्रत्येक प्लेट में 200 ग्राम शुद्ध मांस तथा कम से कम पाँच टुकड़े एवं 100 ग्राम ग्रेवी होना अनिवार्य होगा। इसी प्रकार मटर पनीर, पालक पनीर आदि व्यंजनों में न्यूनतम 100 ग्राम पनीर होना आवश्यक होगा। पैकेट बंद वस्तुओं जैसे दूध एवं ब्रेड आदि का विक्रय विधिक माप विज्ञान (वेट्स एंड मेजर्स) एवं संबंधित प्रावधानों के अनुरूप मुद्रित मूल्य पर किया जाएगा।

सभी दुकानदारों, होटल संचालकों एवं ढाबा संचालकों को निर्देशित किया गया है कि वे निर्धारित मूल्य सूची को अपने प्रतिष्ठान के प्रवेश द्वार पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें तथा ग्राहक की मांग पर नकद रसीद अथवा बिल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
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