15/07/2026
आधुनिक कंदूनी के स्वप्नदृष्टा स्मृति शेष जय चौधरी की जयंती और उस समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाते सुपौत्र अरिंजय चौधरी
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कंदूनी जैसे गाँव को विश्व पटल पर स्थापित करने वाले शरद चौधरी के पूज्य् पिता और क्षेत्र के हर द्वार विकास और बदलाव के लिए संकल्पबद्ध अरिंजय चौधरी के पितामह कीर्ति शेष जय चौधरी जी की आज जन्मजयंती है ,
इसमे कोई संशय नही कि सुयोग्य पुत्र के फर्ज को निभाते हुए शरद जी ने कंदूनी को देश ही नही विश्व के विकसित गाँवों की पंक्ति मे खड़ा किया है और उनके पुत्र अरिंजय उस समृद्ध विरासत को लगातार आगे बढ़ाते हुए क्षेत्र के हर गाँव को कंदूनी जैसा बनाने के लिए प्रतिबद्ध है ,लेकिन यातार्थ ये भी है कि 17 वी शताब्दी की यशस्वी अर्जुन सिंह जी कि समृद्ध विरासत को संजोने ,सहेजने और देश दुनिया के बड़ लौटकर अपनी माटी को सहेजने और उसे व्यवस्तिथ रूप देने का असली ख्वाब और उसके लिए प्रारम्भिक पहल तो जय चौधरी जी ने ही की ,
अर्जुनगढ़ का वैभव जिस दौर मे अपने चरम पर था ,अंग्रेजो ने चौधरी परिवार की राष्ट्रभक्ति से कृद्ध होजर इसको अपना निशाना बना लिया ,1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के समय जिन भी रियासतो या जमींदारो ने गोरो कोईमुखाल्फत की ,अंग्रेजो ने पुनः काबिज होने के बाद सबसे पहले उन रियासतो की रिहाइश को निशाना बनाया ,जिसके रहते पूरे अर्जुनगढ की शानदार गढ़ी को ध्वस्त कर दिया गया ,धीरे धीरे एक सदी का लम्बा वक्त बीत गया ,देश आजाद हो गया ,लेकिन आजादी के बाद भी मुश्किलें कम कहा हुई ,जमींदारी उन्मूलन ने कंदूनी से लेकर सांडा सकरण तक फैली अर्जुनगढ रियासत की जमींदारी को सीमित कर दिया ,कागजो पर तो अभी भी बहुत कुछ था लेकिन अरसे से जड़ो से दूरी ने सब कुछ बेतरतीब कर दिया था ,ऐसे समय मे इस समृद्ध परम्परा के वारिस जय चौधरी ने अपने बुजुर्गो की इस भूमि की तरफ रुख किया ,2008-9 के दौर मे उन्होंने अर्जुनगढ की भूमि जो अंग्रेजो के कहर के बाद एक टीले मे तवदील हो चुकी थी ,उसे व्यवस्तिथ करने की पहल आरम्भ की ,मुझे स्मरण है ,मै उस दौर मे बिसवा बी आर सी समन्वयक था ,तभी वो अपनी भूमि संरक्षित करने की पहल कर रहे थे ,उनकी ये उदारता ही थी कि उन्होंने कहा स्कूल के लिए आपको जितनी भूमि चाहिए हो ले ले मै उसके अपनी बाउंड्री करु ,कोई और होता तो क्या इंच भर भी अपनी भूमि छोड़ता ,लेकिन ये था गाँव विकास के लिए उनकी प्रतिबद्धता,
वे ,विकास के इस सफऱ को आगे बढ़ा ही रहे थे कि उनका आकस्मिक देहावसान हो गया ,बाद मे उनके सुयोग्य पुत्र शरद जी ने इस सफऱ को आगे बढाकर यहां तक लाने का काम किया जो आज भी पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल है ,खुशी की बात तो ये है कि जय जी के पुत्र और सुपौत्र दोनो ही विकास के इस संकल्प को आगे बढ़ाने का काम् कर रहे है ,
जय चौधरी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी सम्पन्नता और जमींदारी के बावजूद उनकी सरलता और विनम्रता थी ,हर किसी से मित्रभाव और सहजता से मिलना उनका ऐसा गुण था जो हर किसी को अपना बना लेता था ,गाँव के ग्रामीणों से लेकर बन घुसरी के अति विपन्न परिवारों के साथ् अंजे मित्रवत संबंध थे ,जीस्जए स्मरण आज भी लोग करते है ,वाही गाँव और ग्रामवासियो के प्रति इस समर्पण के साथ ही वे कौमी एकजहती के भी बड़े पैरोकार थे ,ख्यातिप्राप्त फिल्म निर्माता जावेद अख्तर के साथ उनके निकटत्म् संबंधो को कौन नही जानता जिसने शोले फिल्म के संवाद लेखन मे अपने मित्र जय को रुपहले परदे पर उतार दिया ,
जय चौधरी जी की आज जन्मजयंती पर उनके सुपौत्र अरिंजय ने पूरे क्षेत्र के समग्र विकास का संकल्प लेकर अपने बाबाजी को सच्ची श्रद्धांजलि दी है ,
विकास के स्वप्नदृष्टा ,शिखर पुरुष आदरणीय जय चौधरी जी का आज उनकी जन्मजयंती पर पुण्य स्मरण और विनम्र श्रद्धांजलि !