23/08/2026
अमर शहीद रामफल मंडल
वतन की राह में जिसने, लहू अपना बहाया है,
वही मिटकर भी इतिहासों में, अमर कहलाया है।
न उम्र देखी, न जीवन के सुनहरे ख़्वाब देखे,
माँ भारती की ख़ातिर जिसने, स्वयं को मिटाया है।
ग़ुलामी की अँधेरी रात से, जब देश घबराया था,
किसी नौजवान ने बनकर मशालों को जलाया है।
न झुका सिर फिरंगियों के, न आँखों में था डर कोई,
शहादत को भी उसने हँसते-हँसते अपनाया है।
वह तेईस अगस्त की तारीख़, कभी भूली न जाएगी,
उसी दिन एक वीर सपूत ने, भारत को जगाया है।
गिरी जब गोलियों से देह, पर हिम्मत न झुक पाई,
शरीर मिट गया लेकिन, इरादा अमर पाया है।
वह केवल एक नाम नहीं, वह क्रांति की धड़कन है,
हर सोई हुई नस्लों को, जिसने फिर जगाया है।
धानुक जाति के इतिहास में, वह गौरव का उजाला है,
जिसे हर पीढ़ी ने अपने हृदय में दीप बनाया है।
वह हमसे कह रहा है अब—उठो, शिक्षा की लौ लेकर,
अँधेरों से लड़ो, जिसने हमें यह पाठ सिखाया है।
चलो एकता के रस्ते पर, चलो संगठन बन जाएँ,
यही संदेश शहीदों ने, लहू से लिखवाया है।
नमन उस वीर रामफल को, नमन उसके बलिदान को,
जिसने भारत की मिट्टी पर, अपना शीश चढ़ाया है।
जो देश के लिए मिट जाए, उसे कौन मिटा पाए,
रामफल का नाम भारत ने, अमरता से सजाया है।
©️✍️शशि धर कुमार
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