Mufti Nadim Akhtar saqafi

Mufti Nadim Akhtar saqafi shahar qazi Bundi. Rajasthan
Public figure
An Islamic scholar
KHATEEB/MUQARRIR
8209024075

23/06/2025
जुल्फ  देखी  है  कि नजरों  ने घटा देखी हैलूट गया जिसने मोहम्मद की अदा देखी हैअपने  चेहरे  को  छुपाना   ना मेरे  आक़ाबाद ...
17/09/2024

जुल्फ देखी है कि नजरों ने घटा देखी है
लूट गया जिसने मोहम्मद की अदा देखी है
अपने चेहरे को छुपाना ना मेरे आक़ा
बाद मुद्दत के मरीजों ने शिफा देखी है

जशने ईद मिलादुन्नबी का अजीमुश्शान जलसा सम्पन्नहुज़ूर की मोहब्बत ही असली जिन्दगी - मुफ्ती नदीम अख्तरबूंदी। जशने ईद मिलादुन...
16/09/2024

जशने ईद मिलादुन्नबी का अजीमुश्शान जलसा सम्पन्न
हुज़ूर की मोहब्बत ही असली जिन्दगी - मुफ्ती नदीम अख्तर
बूंदी। जशने ईद मिलादुन्नबी (स.अ.व.) के मुबारक मौके पर एक अजीमुश्शान जलसे का आयोजन बरोज इतवार बाद नमाज़ इशा, जेत सागर रोड़ स्थित मीरा का बाग बड़ी इदगाह में किया गया। जलसे की शुरूआत नावेद रज़ा कादरी शत्तारी ने तिलावते कुरआन से की। मुकरिरे खुसूसी मेहमान हजरत अल्लामा मौलाना मुफ्ती कासिम-उल-कादरी काशीपुर (उत्तराखंड) ने अपनी नुरानी तकरीर में कहा कि पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद स.अ.व. सबके लिए मोहब्बत का पैग़ाम दिया है, सारें जहां में अमन चैन और भाई चारे का संदेश दिया। आज लोग अपने फायदे के लिए इस्लाम को बदनाम करने की नापाक कोशिशें कर रहे है। लेकिन इस्लाम कभी दहशतगर्दी का हिस्सा नहीं रहा। इस्लाम इंसानियत की भलाई के लिए का करने और अपने वतन के लिए शहादत तक का हुकम दिया है। जलसे की सदारत कर रहे शहरकाजी मुफ्ती नदीम अख्तर सक्काफी ने कहा कि हुज़ूर स.अ.व. की मोहब्बत ही असली जिन्दगी है। हुजूर की जिन्दगी पर जिसने अमल किया उसने मौहब्बत, अमन और भाईचारे का पैग़ाम दिया। उन्होने कहा कि हमें आज हमारे पैग़म्बर कि योमें विलादत के मौके पर उनके बताये गये राहे रास्ते पर चल कर सच्चाई, इमानदारी, वफादारी जैसे मुकाम हासिल करना चाहिये। उन्होने कहा की लोगों को तकलीफ के वक़्त सब्र करना चाहिए जैसे अल्लाह के प्यारे बंदों ने किया। मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का पैगाम है कि इंसानों को नफ्स की, झूंठ बोलने की, हराम कमाने की, दूसरे का हक़ दबान कीे, भाई बहनो से रिश्तें तोड़ने की, तक्ब्बूर और घमंड की, आपसी दूश्मनी करने जैसी बुराईयों की ख़त्म करना चाहिए। हमें हमेशा सच बोलने की कोशिश करनी चाहिए और सच्चों का साथ खुलकर देना चाहिये। खुसुसी नात ख्वां शायरे इस्लाम बागें मदीना हज़रत मीर अफ्फान वाहिदी उदयपुर, नात ख्वां शायरे इस्लाम तूतिये राजस्थान मौलाना मुश्ताक अहमद अज़ीज़ी कैथून जिला कोटा, मकामी नात ख्वां नावेद रज़ा कादरी शत्तारी बून्दी, नात ख्वां मौलाना इकबाल हुसैन बून्दी, हाफिज़ निसार अहमद, हाफिज ततहीर, कारी मोहम्मद अकरम, हाफिज़ निसार,मौलाना जमील, हाफिज़ जमील, हाफिज मोहम्मद उमर, हाफिज मोहम्मद अयान, हाफिज़ वसीउद्दीन ने एक से बढ़कर एक नातिया कलाम पैश किया। जलसे की निजामत मौलाना नूर मोहम्मद नायब शहर काजी बूंदी ने की। सलातो सलाम के साथ जलसे का इख्तताम किया गया। इस मौके पर जलसा कमेटी के इब्राहीम बराकाती, हसन भाई, जफरुद्दीन, नूर मौलाना, खलील भाई, जफर बख्श, सैफ अली, जहीरूद्दीन, हमीद, फकरूद्दीन, फेजान आदी मौजूद थे।

(ए नबी) मेरे बंदों को ख़बर दे दीजिए कि मैं बहुत दर गुज़र करने वाला और रहम करने वाला हूं।
02/09/2024

(ए नबी) मेरे बंदों को ख़बर दे दीजिए कि मैं बहुत दर गुज़र करने वाला और रहम करने वाला हूं।

अपना मामला अल्लाह के सुपुर्द करदो अल्लाह बेहतर हिसाब करने वाला है                            हूकूकुल इबाद वह जिम्मेदारी ...
22/08/2024

अपना मामला अल्लाह के सुपुर्द करदो अल्लाह बेहतर हिसाब करने वाला है
हूकूकुल इबाद
वह जिम्मेदारी जो अल्लाह ने एक बन्दे पर दूसरे के लिए लाज़िम की हैं। उनको हूकूकुल इबाद कहा जाता है।
बंदों के हक़ इस एतबार से ज्यादा अहम हैं के उन में अगर कोताही हो जाय और बंदा अगर उनको अदा ना कर सके तो सिर्फ तौबा से माफ़ नहीं होते जब तक के उनको अदा ना करदे।
आका करीम ने इर्शाद फरमाया शहीद का हर गुनाह माफ़ कर दिया जाता है सिवाय कर्ज के.(मुस्लिम शरीफ)जब तक किसी का हक़ नहीं लोटाया तब तक वो माफ़ नहीं हो सकता फिर चाहे वो कितना ही बड़ा अमल करले चाहे राहे खुदा में जान ही क्यूँ ना देदे.
और इसकी सज़ा दुनिया में तो मिलती ही है कभी जानी कभी माली नुकसान की शक़्ल में ब्लकि आखिरत में भी बड़ा नुकसान हे इर्शाद ए नबी है. के तुम लोग जानते हो फ़कीर कोन है? सहाबा ने अर्ज किया फकीर वो है जिसके पास माल नहीं है। आप ने फर्माया मेरी उम्मत में फ़कीर वो है जो कल क़यामत के दिन नमाज़ रोजा इबादात लेकर हाजिर होगा लेकिन दुनिया में किसी को गाली दी थी किसी पर झूटा इल्ज़ाम लगाया था किसी का नाहक माल लिया था. किसी की इज्ज़त पर हमला किया था, अब क़यामत के दिन हर हर मजलूम आदमी उस ज़ालिम की इबादात के सवाब से ज़ुल्म के मुताबिक सवाब ले जायगा अगर ज़ालिम के नेक आमाल से मजलूमों हक अदा हो गया तो ठीक वर्ना बाकी मजलूमों के गुनाहों को समेट कर उस ज़ालिम पर डाल दिया जायगा और जहन्नुम में ढकेल दिया जायगा। (मुस्लिम)
والله تعالي اعلم

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