मस्ती की पाठशाला

मस्ती की पाठशाला Gudhanathawatan

शिक्षा मानव का एक महत्वपूर्ण आभूषण होता है लेकिन सही और सच्ची सीख से आज भी ज्यादातर लोग महरूम है। जागरूकता एवं जानकारी के अभाव में कई लोग आज भी शोषित पीड़ित है और तथाकथित उच्च वर्ग उन दीन हीन लोगों को नजरअंदाज कर सभ्य होने का ढोंग करते है।

अजगर...
20/08/2026

अजगर...

भारी भरकम अजगर का सफल रेस्क्यू।
बून्दी। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन की भोपतपुरा रेंज के खेराड़िया गांव के खेतों से बुधवार को वन विभाग ने एक अजगर को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा। जानकारी के अनुसार अजगर आबादी के पास खेतों में आ गया था। सुबह जब किसान खेतों में पहुंचे तो भारी भरकम अजगर को देखकर डर गए। ग्रामीणों की सूचना पर भोपतपुरा के रेंज अधिकारी जनक सिंह के निर्देशन में वन विभाग की टीम मोके पर पहुंची तथा ग्रामीणों के सहयोग से करीब 12 फ़ीट लंबे अजगर को रेस्क्यू किया। बाद में अजगर को जंगल में सुरक्षित छोड़ा गया। इस दौरान अजगर को पकड़ने में रेस्क्यू टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। रेस्क्यू ऑपरेशन में नाका प्रभारी हरदयाल सिंह, लालाराम जाट, सुरेश मीणा, रेस्क्यू एक्सपर्ट बंसी लाल गुर्जर व गृह रक्षा दल के भगवान सिंह गुर्जर शामिल थे।

20/08/2026

भालू की बुद्धिमानी...

26/07/2026

हमारा जंगल हमारा गौरव...

15/07/2026

With Bundi Tiger – I'm on a streak! I've been a top fan for 3 months in a row. 🎉

कालदां की कालका..
15/07/2026

कालदां की कालका..

रणथंभौर की आक्रामक बाघिन बूंदी के जंगलों में हुई शांत, एक साल पहले आज ही के दिन किया था युवा बाघिन को जंगल में आजाद।
लगातार लंबी दूरी तय करने वाली इस बाघिन ने, बूंदी शहर, बूंदी फोर्ट सूरज छतरी व कालदां के निर्जन वनों को बनाया अपना नया ठिकाना।

(पृथ्वी सिंह राजावत)

बूंदी। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में एक साल पहले 15 जुलाई दोपहर को मेज नदी किनारे बने बजाल्या एनक्लोजर से युवा बाघिन को खुले जंगल में छोड़ा गया था। आरवीटी 8 के नाम से पहचानी जाने वाली इस बाघिन ने आजाद होते ही मृत बाघिन आरवीटी-2 की बेटियों आरवीटी 5 व 6 की टेरेटरी से निकलकर रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र छोड़ दिया था यह बाघिन बफर जोन में बूंदी शहर से सटी टाइगर हिल पर दो-तीन महीने रही लेकिन यहां पहले से मौजूद बाघिन आरवीटी-3 ने इसको टिकने नहीं दिया। एक महीने तक बाघिन का मूवमेंट बूंदी शहर की तलहटी में भी होने लगा तथा एक दो बार तो यह नैनवां रोड़ व राष्ट्रीय राजमार्ग 12 पर भी आ गई थी। वन विभाग ने इसके आबादी में संभावित प्रवेश को रोकने के लिए ट्रेंकुलाइज करने की भी तैयारी कर ली थी। बाद में यह बाघिन राष्ट्रीय राजमार्ग 12 को पार कर कालदां के जंगलों में पहुंच गई। बीच बीच में बाघिन भीमलत के जंगलों तक जाती रहती है तथा कॉरिडोर की बाधाएं खत्म हो तो यह मुकुन्दरा टाइगर रिजर्व में भी जा सकती है। कालदां का जंगल अभी टेरिटोरियल उपवन संरक्षक के अधीन है जो टाइगर रिजर्व का बफर जोन भी है तथा समृद्ध जैवविविधता वाला निर्जन वन क्षेत्र है। प्रारंभ के दो महीनों को छोड़कर बाघिन का व्यवहार एकदम शांत व जंगल के अनुकूल रहा है और लगातार मूवमेंट करती रहती है और आबादी क्षेत्र से दूर रहने लगी है। गौरतलब है कि रणथंभौर की बाघिन एरोहेड के तीन युवा शावकों ने त्रिनेत्र गणेश मंदिर क्षेत्र व फोर्ट इलाके में अपना आशियाना बना रखा था। गत वर्ष हुई तीन घटनाओं में एक बच्चे सहित तीन लोगों को मौत के घाट उतारने की घटनाओं में भी इन्ही बाघ शावकों के शामिल होने की आशंका के चलते विभाग ने इन्हें रणथंभौर से अन्यत्र शिफ्ट करने का निर्णय किया था। इनमें से एक नर बाघ को धौलपुर करोली टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया तथा मादा बाघिन को आरबीटी 2508 को 13 माह पहले रामगढ़ में शिफ्ट किया गया था। इनकी एक बहिन कनकटी को मुकुन्दरा टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया है। #रामगढ़_विषधारी_टाइगर_रिजर्व

15/07/2026

सुंदर वन

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