Dilip Kumar Pande's Political thoughts/consciousness

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Dilip Kumar Pande's Political thoughts/consciousness राजनीतिक जागरण चेतना मंच

13/01/2023

*इस्लाम और सेकुलर हमले से क्या हम भारत को बचा पायेगे ----?*
आज के बीस साल पहले कोई भी इस्लाम मतावलंबी अरबी वेश में दिखायी नहीं देता था, न ही सेकुलरिस्ट नेता हिंदुत्व के बिरोध में इतना मुखर होता था, पहले तो मुस्लिम नेता हिंदुत्व का बिरोध करते थे लेकिन राम जन्म भूमि आन्दोलन में जो नेता मुखर थे वे कालातीत हो गये। वह गावो में भारतीय पहनावा पहनता था लेकिन आज उसे अरबियन राष्ट्रबाद का भूत सवार है और सेकुलर नेता उनके समर्थन में खड़े है जिसका दुष्परिणाम भारत को जल्दी ही भुगतना पड़ेगा --पहले बुर्का, अरबी टोपी, उटंग पैजामा, असभ्य प्रकार की दाढ़ी परिवारों मे जस्ते के बर्तन, बधना बहुत कम दिखाई देता था, मस्जिदों पर तकरीर सैयमित होते थे, चिल्ला व जमात भी कम ही निकलता था मखतब- मदरसे यानी तालिबानी स्कूल भी कम थे ।
*बदलता परिदृश्य*:__ बीस साल बाद जब हम देखते है तो भारत का परिदृश्य बदला -बदला सा दिखाई देता है, इस्लामी कट्टरता प्रबल होती दिखाई देती है आज गाव -गाव में मखतब, मदरसों की भरमार हो गयी है कोई भी मुसलमान भारतीय वेश नहीं पहनता वह अब अरबियन वेश में ही गर्व महसूस करता है, उसे भारतीय पहिचानो से जैसे चिढ हो गयी हो उनके मदरसों में सिखाया जाता है कि तुलसी, पीपल तथा अन्य बनस्पतियो को नष्ट करना जिन्हें हिन्दू पूजते है, एक संत मुझसे मिले उन्होंने बताया कि एक मुस्लिम मदरसे के बच्चे ने बताया की ऐसा करने के लिए उसके मौलबी साहब मदरसे में तालीम देते है आज सड़क चौराहे पर सरे आम भारत बिरोध, हिन्दू बिरोध करने में कोई हिचक नहीं है क्योंकी उनके साथ सेकुलर नेता खड़े दिखाई देते है, बीस साल पहले मदरसों की संख्या भी कम थी उन कम मदरसों के बच्चो ने अब दुर्गा जी, सरस्वती जी की मूर्तियाँ तथा महावीरी झंडो को तोड़ने में कोई हिचक नहीं करते क्योंकि उनके कुरान व हदीश में ये सब कुफ्र है इन सारे घटना को पूरे मुस्लिम समुदाय का समर्थन उन्हें प्राप्त ही नहीं बल्कि वह समाज उन्हें पुरस्कृत भी करता है।
*मदरसों के परिणाम*--------
*[१]*- कश्मीर घाटी से हिन्दुओ को भगा दिया गया उन्हें अपनी धन संपत्ति छोड़कर आना पड़ा अपनी बहन- बेटियों को गवाया।
*[२]*- जिस बंगलादेश को हमने आजाद कराया आज वह भारत का सबसे बड़ा शत्रु बनकर खड़ा है हिन्दुओ की बहन -बेटी और संपत्ति सुरक्षित नहीं है।
*[३]*-अफगानिस्तान कटा भारत कई बार बटा।
*[४]*- आज बिहार के किशनगंज, कटिहार क्षेत्र में हिन्दुओ की जो दुर्दसा है वहा भारतीय संस्कृति ही खतरे में पण गयी है आप यदि वहा जाते है तो आप भारत में है यह समझ में नहीं आता।
*[५]*- एक लाख मदरसों का परिणाम क्या होगा --? क्या करोडो जेहादियों से हिन्दू समाज लड़ पायेगा --? या समर्पण करेगा उस स्थिती में अपनी बहन बेटियों का बलात्कार होता देखेगा हमें अपने इतिहास से सबक लेना होगा।
*[६]*- लव जेहाद के माध्यम से एक लाख हिन्दू लडकियों का प्रतिवर्ष इस्लामीकरण।
*सेकुलर क्या कर रहे है*--?
*[१]*- दाउद इब्राहीम जैसे अपराधी को पाकिस्तान सुरक्षित पहुचने में सहायता।
*(२]*- अफजल गुरु जैसे आतंकबादी को सुरक्षित रखना।
*[३]*- कसाब जैसे हमलावर की सुरक्षा और उस पर धन अपव्यय करना।
*[४]*- देश विभाजन की नीव रखने वाले अलीगढ वि.वि. की शाखा देश के बिभिन्न स्थानों पर खोलना।
*[५]*- समय-समय पर हिन्दू मान बिन्दुओ पर हमला करना।
इस समय देश में एक लाख से अधिक मदरसे है जिसमे करोणों मुस्लिम छात्र पढ़ते है उन्हें तालिबानी शिक्षा, भारत, हिन्दू विरोधी शिक्षा मिल रही है, वे कुरान के आधार पर शासन -सत्ता चाहते है, वे एक बार नहीं कई बार भारत के टुकड़े कर चुके है, अब वे पूरे भारत का इस्लामी करण करना चाहते है मुहम्मद साहब का जन्म दिन हो या मुहर्रम अब वे शक्ति प्रदर्शन करने लगे है, भाला -काता और तमाम अवैध हथियार लेकर प्रदर्शन, अखाड़ो के नाम पर सड़क जाम करना इस्लामी झंडो को केवल मुसलमानों के घर पर ही नहीं तो दुस्साहस इतना बढ़ गया है कि जबरदस्ती हिन्दुओ की दुकानों व घरो पर झंडे लगाना हिन्दुओ को डराना आम बात हो गयी है, वे युद्ध लड़ने को तैयार है कौन रोकेगा उन्हें---? क्या हम तैयार है? क्या हिंदुत्व की शिक्षा राष्ट्रवाद को लेकर हमने तैयारी की है--? कि केवल अपनी रोजी -रोटी के चक्कर में ही हम मस्त है यदि ऐसा है तो लाहौर, कराची और ढाका में भी हम थे वहा क्या हुआ--? हमें ध्यान नहीं --? यदि हमने तैयारी नहीं की तो जो दुर्दसा लाहौर और कराची में हुई हम उसके लिए भी तैयार रहे, आज जो ये नेता बोल रहे थे आज़ादी के समय यही बात कांग्रेस के नेता बोलते थे, जमात, चिल्ला, मखतब, मदरसे, मुल्ला, मौलबी, और बिभिन्न इस्लामिक सगठनो की फ़ौज पूरी तैयारी में है, यदि हम हाथ पर हाथ रख कर बैठे रहे तो हिन्दू समाज और भारत दस वर्ष में बचेगा या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं एक लाख मदरसों से निकले हुए करोणों तालिबानी मतांध छात्रो व लाखो मौलबियो से कौन लडेगा-? यह मानवता वादी संस्कृति जिसने मानव जीवन में चेतना का संचार किया विश्व को आध्यात्म दिया, पशु -पक्षी, यहाँ तक कंकड़ में भी इश्वर को देखता है ऐसी उदार, महान संस्कृति का क्या होगा -----?
*ये इस्लामिक हमला है, ये सेकुलर जमात का हमला है, ये वामपंथियो और देशद्रोहियों का हमला है और ये भारतीय संस्कृति पर हमला है* ------सावधान भारत ! सावधान हिन्दुओ ! सावधान राष्ट्र भक्तो !
*यदि हिन्दू नहीं सचेत हुआ तो मानवता ही खतरे मे पण जाएगी ।*

13/01/2023

*तीन मूर्ति भवन नई दिल्ली*
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वैसे तो यह खबर आप अंबेडकर जयंती १४ अप्रैल को सुनेंगे पर इसकी पृष्ठभूमि अभी जान लीजिए।

१९४७ में आजादी के बाद तत्कालीन *वायसराय हाउस को राष्ट्रपति आवास* बना दिया गया। उसके बाद क्षेत्रफल और साज-सज्जा के अनुसार दूसरे नंबर पर *तीन मूर्ति भवन* था। नेहरू जी ने इसे अपना आवास बना लिया।

अगले १७ वर्षों तक सारे कर्म - इसी भवन में करते रहे। उनकी मृत्यु होने पर दूसरे प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जब तीन मूर्ति भवन में जाने लगे तो इंदिरा गांधी ने रोक दिया, कहा कि आपकी हैसियत नेहरू के भवन में रहने लायक नहीं है। सीधे-सादे शास्त्रीजी मान गए और अपने लिए एक बहुत छोटा सा बंगला चुना और वहीं रहने लगे।
उनकी रहस्यमय असामयिक मृत्यु के बाद तीन मूर्ति भवन को इंदिरा गांधी ने नेहरू संग्रहालय बना दिया, इसमें उनका गद्दा तकिया रजाई चश्मा घड़ी और उनके उपयोग के तमाम सारे सामान जिसमें एडविना की फोटो भी थी, लगा दिये।

बाद में जितने प्रधानमंत्री आए किसी का कोई संग्रहालय नहीं बना।

पी वी नरसिम्हा राव को तो इतना बेइज्जत किया कि उनका अंतिम संस्कार तक दिल्ली में नहीं करने दिया क्योंकि वे इंदिरा गांधी के गुलाम नहीं थे।
समय बीतता गया। प्रधानमंत्री आते गए और सबके बंगले सुरक्षित होते रहे।

इसी समय
राजनीति के फलक पर एक सितारे का उदय हुआ जिसे सब नरेंद्र मोदी के नाम से जानते हैं।

उन्होंने बिना हल्ला गुल्ला किये खामोशी से काम शुरू कर दिया। तीन मूर्ति भवन के एक एक करके सारे १८ कमरे खुलवा दिए और उनमें सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों की स्मरणीय वस्तुओं को रखवाकर उनके नाम से अलग - अलग संग्रहालय बनवा दिया। अब बारी थी नेहरू जी का नाम हटाने की।

अब तक इसका नाम केवल "जवाहरलाल नेहरू संग्रहालय तीन मूर्ति भवन दिल्ली' था।

मोदी जी ने अब नेहरू शब्द हटाकर इसका नया नामकरण कर दिया *"प्रधानमंत्री संग्रहालय"*।
इसका विधिवत उद्घाटन दिनांक 14-04-2022, अम्बेडकर जयंती पर करेंगे।

कांग्रेस में इसीलिए पीड़ा बढ़ गई है। रो भी नहीं सकती हंसने का तो सवाल ही नहीं उठता।
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13/01/2023

*मध्यकालीन भारत के इतिहास की हक़ीक़त* ........
बाबर ने मुश्किल से कोई 4 वर्ष राज किया। हुमायूं को ठोक पीटकर भगा दिया। मुग़ल साम्राज्य की नींव अकबर ने डाली और जहाँगीर, शाहजहाँ से होते हुए औरंगजेब आते आते उखड़ गया।
कुल 100 वर्ष (अकबर 1556ई. से औरंगजेब 1658ई. तक) के समय के स्थिर शासन को मुग़ल काल नाम से इतिहास में एक पूरे पार्ट की तरह पढ़ाया जाता है.... मानो सृष्टि आरम्भ से आजतक के कालखण्ड में तीन भाग कर बीच के मध्यकाल तक इन्हीं का राज रहा....!
अब इस स्थिर (?) शासन की तीन चार पीढ़ी के लिए कई किताबें, पाठ्यक्रम, सामान्य ज्ञान, प्रतियोगिता परीक्षाओं में प्रश्न, विज्ञापनों में गीत, .... इतना हल्ला मचा रखा है, मानो पूरा मध्ययुग इन्हीं 100 वर्षों के इर्द गिर्द ही है।
जबकि उक्त समय में मेवाड़ इनके पास नहीं था। दक्षिण और पूर्व भी एक सपना ही था।
अब जरा विचार करें..... क्या भारत में अन्य तीन चार पीढ़ी और शताधिक वर्ष पर्यन्त राज्य करने वाले वंशों को इतना महत्त्व या स्थान मिला है ?
अकेला विजयनगर साम्राज्य ही 300 वर्ष तक टिका रहा। हीरे माणिक्य की हम्पी नगर में मण्डियां लगती थीं
महाभारत युद्ध के बाद 1006 वर्ष तक जरासन्ध वंश के 22 राजाओं ने ।
5 प्रद्योत वंश के राजाओं ने 138 वर्ष , 10 शैशुनागों ने 360 वर्षों तक , 9 नन्दों ने 100 वर्षों तक , 12 मौर्यों ने 316 वर्ष तक , 10 शुंगों ने 300 वर्ष तक , 4 कण्वों ने 85 वर्षों तक , 33 आंध्रों ने 506 वर्ष तक , 7 गुप्तों ने 245 वर्ष तक राज्य किया । फिर विक्रमादित्य ने 100 वर्षों तक राज्य किया था ।
इतने महान् सम्राट होने पर भी भारत के इतिहास में गुमनाम कर दिए गए ।
उनका वर्णन करते समय इतिहासकारों को मुँह का कैंसर हो जाता है। सामान्य ज्ञान की किताबों में पन्ने कम पड़ जाते है। पाठ्यक्रम के पृष्ठ सिकुड़ जाते है। प्रतियोगी परीक्षकों के हृदय पर हल चल जाते हैं।
वामपंथी इतिहासकारों ने नेहरूवाद का मल भक्षण कर, जो उल्टियाँ की उसे ज्ञान समझ चाटने वाले चाटुकारों...! तुम्हे धिक्कार है !!!
यह सब कैसे और किस उद्देश्य से किया गया ये अभी तक हम ठीक से समझ नहीं पाए हैं और ना हम समझने का प्रयास कर रहे हैं।
एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत हिन्दू योद्धाओं को इतिहास से बाहर कर सिर्फ मुगलों को महान बतलाने वाला नकली इतिहास पढ़ाया जाता है। महाराणा प्रताप के स्थान पर अत्याचारी व अय्याश अकबर को महान होना लिख दिया है। अब यदि इतिहास में हिन्दू योद्धाओं को सम्मिलित करने का प्रयास किया जाता है तो कांग्रेस शिक्षा के भगवा करण करने का आरोप लगाती है।
*जय सनातन, जय भारत*

13/01/2023

*मजहबी- पुस्तकों में*, आफताब जैसे पवित्र योद्धाओं को यौन-सुखों और भोग- विलास के असामान्य विशेषाधिकार दिए गए हैं। यदि वे काफिरों के विरुद्ध इस्लामिक दायित्वों के निर्वाहन/लड़ाई के मैदान में जीवित रह जाते हैं तो उनके लिए गैर-मुसलमानों की स्त्रियां रखैलों के रूप में सुनिश्चित हो जाती हैं। यदि मारे जाते हैं तो वे हूरियों से भरे 'जन्नत' के अधिकारी हो जाते हैं। देखिए-
(1) "उनके (मुसलमानों) के लिए जानी बूझी रोज़ी है, मेवे, और उनका सम्मान किया जाएगा। नेमत भरी जन्नतों में तख्तों पर आमने-सामने बैठे होंगे। निथरी बहती (शराब का स्रोत्र) से मद्य पात्र भर-भर कर उनके बीच फिराए जाएंगे उज्ज्वल पीने वालों के लिए आस्वाद न उसमें कोई खराबी होगी और न वे उससे मतवाले होंगे और उनके पास निगाहें बचाने वाली (लजीली) सुन्दर आंखों वाली स्त्रियां होंगी ऐसी ( निर्मल) मानो छिपे हुए अण्डे हों।" (37:41-49)
(2) "निस्संदेह डर रखने वालों के लिए सफलता हो बाग है और अंगूर, और नवयुवतियां समान आयुवाली (उभरे उरोजों सहित) और छलकता मद्य-पात्र।" (78 : 31-34)
*इस बात की पुष्टि के लिए हदीस तिरमिजी, खंड 2 पृष्ठ 35-40 देखिए* :__-
(1) हूर एक अत्यधिक सुंदर युवा स्त्री है जिसका शरीर पारदर्शी होता है। उसकी हड्डियों में बहने वाला द्रव्य इसी प्रकार दिखाई देता है जैसे रुबी और मोतियों के अंदर की रेखाएं दिखती हैं। वह एक पारदर्शी सफेद गिलास में लाल शराब की भाँति दिखाई देती है।
(2) उसका रंग सफेद है, और साधारण स्त्रियों की तरह शारीरिक कमियों जैसे मासिक धर्म, रजोनिवृत्ति, मल व मूत्र विसर्जन, गर्भधारण इत्यादि संबंधित विकारों से मुक्त होती हैं।
(3) प्रत्येक हूर किशोर वय की कन्या होती है। उसके उरोज उन्नत, गोल और बड़े होते हैं जो झुके हुए नहीं हैं। हूरें भव्य परिसरों वाले महलों में रहतीं हैं।
(4) हूर यदि ' जन्नत ' में अपने आवास से पृथ्वी की ओर देखे तो सारा मार्ग सुगंधित और प्रकाशित हो जाता है।
(5) हूर का मुख दर्पण से भी अधिक चमकदार होता है। तथा उसके गाल पर कोई भी अपना प्रतिबिंब देख सकता है। उसकी हड्डियों का द्रव्य आंखों से दिखाई देता है।
(6) प्रत्येक व्यक्ति जो जन्नत में जाता है, उसको 72 हूरें दी जाएंगी। जब वह जन्नत में प्रवेश करता है, मरते समय उसकी उम्र कुछ भी हो, वहां 30 वर्ष का युवक हो जाएगा और उसकी आयु आगे नहीं बढ़गी।
(7)मगर ये धरती को जन्नत की उम्मीद में दोजख यहां बनाए हैं और वहाँ कहते हैं कि हूरें, लौंडे, मिलना सुनिश्चित है. धर्म के नाम पर किए गए पाप कभी मिटते नहीं है l

13/01/2023

*राजनीतिक इस्लाम और साम्यवाद*
भारत सहित पूरी दुनिया में शांति और विकास के लिए खतरा बन चुके राजनीतिक इस्लाम और साम्यवाद (कम्युनिज्म) की चुनौतियों को समझना अत्यंत आवश्यक है। राजनीतिक इस्लाम तो पिछली कई सदियों से मानवता को तबाह और बर्बाद करने में जुटा हुआ है, जबकि साम्यवाद ने पिछले 100 वर्षों के दौरान अपना एकाधिकार स्थापित करने के लिए खून की नदियां बहाई हैं। साम्यवाद भले ही पूंजीवाद से हार गया हो, लेकिन एक मानसिकता के रूप में वह दुनिया के कई देशों में मौजूद है और इस वजह से उसके खतरे को कम करने नहीं आंका जा सकता है। शंकर शरण द्वारा संकलित पुस्तकइस्लाम और कम्युनिज्म : तीन चेतावनियां इन दोनों विचारधाराओं के खतरे के प्रति चेतावनी देती है और उनसे लड़ने के रास्ते भी बताती है।
यह पुस्तक राजनीतिक इस्लाम और साम्यवाद के स्वरूपों पर भिन्न देशों के तीन बड़े विद्वानों बिल वार्नर, रिचर्ड बेंकिन और अलेक्जेंडर सोल्झेनित्सिन के प्रामाणिक आकलनों की एक प्रस्तुति है। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थिति को समझने में भी यह सहायक है। सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि भारत इन दोनों मतवादों का अधिक या कम शिकार रहा है और आज भी निशाने पर है, लेकिन दोनों के प्रति भारतीय राजनीतिक बौद्धिक वर्ग में भारी भ्रम है। दरअसल, इस्लामी हिंसा पर दृष्टि संकुचित किए रखने के कारण इसके असली खतरे के प्रति लापरवाही बढ़ती जा रही है। वास्तव में केवल हिंसात्मक उग्रवाद का मुकाबला करने के बजाय प्रशासन को राजनीतिक इस्लाम द्वारा प्रस्तुत खतरे को परिभाषित करना चाहिए। उसके मतवाद के संपूर्ण तंत्र को समझना जरूरी है, जो नागरिक स्वतंत्रताओं के खिलाफ है।
पुस्तक के अनुसार, बुद्धिजीवियों का एक वर्ग राजनीतिक इस्लाम को समझने में सबसे बड़ी भूल यह करता है कि वह मुसलमानों के एक हिस्से को उदार मानकर चलता है, जबकि यह सच्चाई से कोसों दूर है। हर मुसलमान रोज फातिहा पढ़ते हुए गैर मजहबी लोगों को कोसता है। कुरान में गैर मुस्लिमों को गंदा, घृणित, बंदर आदि तक कहा गया है, लेकिन गैर मुसलमान उसी तरह से मुसलमानों को कुछ नहीं कह सकते हैं और न ही इस्लाम की आलोचना कर सकते हैं। केवल इसलिए कि छुरे और बम की धमकी दी जाती है। सारी जिहादी हिंसा इसी के नाम पर होती है।
कर्नाटक के स्कूलों में हिजाब के नाम पर जिस तरह की राजनीति की जा रही है, उससे भी समझ जाना चाहिए कि आखिर इस्लाम का लक्ष्य क्या है। यह मत न तो कानून को मानता है और न ही संविधान को। उसके लिए कुरान और शरीयत से बढ़कर कुछ नहीं है। कुरान में लिखा है कि काफिर को आतंकित किया जा सकता है। उसे अपनामित भी किया जा सकता है। इसलिए जब कोई मुसलमान किसी गैर मजहबी व्यक्ति की हत्या करता है तो उसे इसका कोई पछतावा नहीं होता है, क्योंकि वह इसे सहज इस्लामी कर्तव्य समझता है।
पुस्तक में यह भी बताया गया है कि इस्लाम मत में सुधार संभव है, लेकिन सिर्फ तभी, जब इसे राजनीतिक इस्लाम के मतवाद से अलग किया जाए। बहरहाल, सबसे बड़ी परेशानी है कि यह काम मुसलमान ही कर सकते हैं। सौभाग्य से सुधारवादी मुसलमानों की संख्या बढ़ रही है। इसके बावजूद आसन्न खतरे से आंखें मूंदना संभव नहीं है। राजनीतिक इस्लाम का लक्ष्य स्वतंत्र समाजों की राजनीतिक संस्थाओं को छिन्न-भिन्न करके हर कहीं शरीयत कानून का शासन स्थापित करना है।
राजनीतिक इस्लाम की तरह ही कम्युनिज्म यानी साम्यवाद भी एक खतरनाक विचारधारा है, जो दूसरों को खत्म कर देने को गलत नहीं मानती है। पुस्तक में रूसी साम्यवाद के प्रखर आलोचक अलेक्जेंडर सोल्झेनित्सिन के वर्ष 1975-76 के दौरान अमेरिका और इंग्लैंड में दिए गए व्याख्यानों और इंटरव्यू के अंशों को पढऩे से पता चलता है कि उन्होंने बहुत पहले ही साम्यवाद की विद्रूपता का अनुमान लगा लिया था। उन्होंने जो चेतावनियां दी थी, आज वह अक्षरश: सत्य साबित हो रही हैं।
*[पुस्तक का नाम: इस्लाम और कम्युनिज्म : तीन चेतावनियां; लेखक: -शंकर शरण; प्रकाशक:- अक्षय प्रकाशन]*

13/01/2023

ये 4 वीर बच्चों के सम्मान में 14 नवम्बर को हम * #राष्ट्रीय_बाल_दिवस मनाते* हैं,
सन 1705 में गुरु गोविन्द सिंह के बड़े दो पुत्र तो चमकौर के युद्ध में शहीद हो गए थे, और दो छोटे पुत्र जोरावर सिंह (आयु 8 साल) और फतह सिंह (आयु 5 साल) जब अपनी दादी के साथ सिरसा नदी पार कर रहे तो अपने लोगों से बिछड़ गए थे जिनको मुसलमान सूबेदार वजीर खान ने ठन्डे बुर्ज में सरहिंद में कैद कर लिया था। वजीर खान ने पहले तो बच्चों को इस्लाम कबुल करने के लिए लालच दिया, जब बच्चे नहीं माने तो मौत की धमकी भी दी, लेकिन बच्चों ने कहा कि, "हमारे दादा जी ने धर्म कि रक्षा के लिए Delhi में अपना सर कटवा लिया था. हम मुसलमान कैसे बन सकते हैं ? (गुरु तेगबहादुर ने 1675 में हिन्दू धर्म कि रक्षा के लिए अपना सर कटवा लिया था) बच्चों का जवाब सुनकर वजीर खान आग बबूला हो गया, उसने दौनों बच्चों को एक दीवाल में जिन्दा चिनवाने का आदेश दे दिया और उन्हें शहीद कर दिया। जब गुरू गोविन्द सिंह को बच्चों के दीवाल में चिनवाए जाने की खबर मिली तो वह हताश नहीं हुए. गुरुजी चाहते थे कि लोग अपनी कायरता को त्याग करके निर्भय होकर अत्याचारी मुगलों का मुकाबला करें, तभी धर्म कि रक्षा हो सकेगी, इसके लिए गुरूजी ने अस्त्र -शस्त्र की उपासना की रीति चलाई. देश के गद्दारों ने राष्ट्रीय बाल दिन अपने नाम पर हाई-जेक कर लिया, असली बाल दिन तो ये चार बच्चों के नाम पर ही रहेगा...!!

13/01/2023

*🔥हिन्दुओं के देश भारत में हिन्दू गुलाम क्यों ???🔥*
🔥अंग्रेजों की कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की साजिश से देश के बटवारा के बाद भी हिन्दुओं के आजाद देश भारत में भी हिन्दुओं को ही फिर से गुलाम रखने की साजिश व हिन्दू गुलाम क्यों है ???🔥
🔥सोचो🔥 ___ डा० भीमराव रामजी आम्बेडकर जी ने कहा मैं आर्य हूं तो....
🔥कौन सा खौफनाक सच जो आर्य वंशी डा० भीमराव रामजी आम्बेडकर जी को दर्द दे रहा था ???
🔥देश हित की कौन सी पीड़ा में तड़पे डा० आम्बेडकर जी ???🔥
🔥डा० आम्बेडकर जी का लिखा भी पढ़ो और सच जानने की भी सदा कोशिश करो !!!!🔥
🔥केवल 01 वोट पाकर जो शातिर जिहादी संदिग्ध जवाहर लाल नेहरू 14 वोट पाने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल जी को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया सोचो वो संदिग्ध जवाहर लाल नेहरू कितना शातिर व हिन्दुओं को आपस में लड़ाकर गजवाहिन्द के तहत पाकिस्तान और बंग्लादेश तथा अफगानिस्तान की तरह से भारत से भी पूरी तरह से हिन्दुओं को खत्म करना चाहता था तभी तो इस जिहादी जवाहर लाल नेहरू ने मुसलमानों के लिये मुस्लिम वक्फ बोर्ड बनाया था इस तरह से हिन्दुओं को आपस में लड़ाने हेतु ही भारत का संविधान जवाहर लाल नेहरू ने लागू कराया था आदालतों में आज भी अंग्रेजों के कानून क्यों चल रहे हैं देश में आजादी के बाद गुलामी का कानून क्यों लागत है? इस तरह से जवाहर लाल नेहरू हिन्दुओं का सबसे बड़ा दुश्मन था और अंग्रेजों द्वारा बनायी गयी कांग्रेस जवाहर लाल नेहरू के द्वारा तय नीतियों पर चलकर सन् 2025 ई० तक भारत के हिन्दुओं को खत्म करने की तैयारी कर रही है लेकिन दुर्भाग्य से केन्द्र में नरेन्द्र मोदी जी की सरकार आ गयी तो अब हिन्दुओं की सफाये का समय सन् 2030 रखा है देखो जब कोई मौलाना धमकी देता है तो ये कहता है कि सन् 2030 ई० तक रूको उसके बाद हिन्दुओं को बतायेगे ये गोपनीय तैयारी किसके खात्मे के लिये चल रही है ???🔥
🔥गलत है डाक्टर भीमराव रामजी आम्बेडकर को कोई नहीं जान पाया । कुछ लोग इसाईयों और कम्युनिस्टों तथा जिहादी मुस्लिमों के जाल में फंसे हैं ये कुछ लोग डा० भीमराव राम जी आम्बेडकर जी की सोच से अलग होकर स्वार्थ में राजनीति कर रहे हैं । पाकिस्तान में इनकी नहीं चली , बंग्लादेश में इनकी नहीं चली भारत के 8 राज्य में हिन्दू नहीं हैं वहां इनकी नहीं चलती है । पाकिस्तान से आये गरीब अनुसूचित जाति के लोगों को भारत की नागरिकता इन्हें बरदाश्त नहीं है ये स्वार्थी हैं । शुरूआत में सच को डा० आम्बेडकर जी अंग्रेजों और मुगलों तथा कांग्रेस की साजिश नहीं जान पाये जब जान गये तो डा० भीमराव रामजी ने राज सभा में 2 सितम्बर को सन् 1953 ई० में भारत के संविधान को जलाने की बात तक किया था सोचो क्यों ???🔥
🔥हिन्दुओं बताओ जब संदिग्ध जवाहर लाल नेहरू ने मुसलमानों की एकता और मजबूती के लिये मुस्लिम वक्फ बोर्ड बनाया और अल्पसंख्यक का दर्जा देकर विशेष अधिकार दिया और इन्दरा गांधी ने मुसलमानों को की एकता और मजबूती के लिये मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड बनाया था तो हिन्दुओं की मजबूती के और जातिवाद की घृणा को खत्म करने और हिन्दुओं की एकता के लिये जवाहर लाल नेहरू और इन्दरा गांधी तथा कांग्रेस के लोगों ने क्या बनाया था ???🔥
🔥सिखों को हिन्दुओं से अलग कांग्रेस ने किया तथा बौद्धों और जैनियों को सदा हिन्दुओं से अलग रखने की कोशिश कांग्रेस करती है , कर्नाटक में सन् 2018 ई० में विधानसभा के चुनाव के पहले लिंगायत समुदाय को हिन्दुओं से बांटने का प्रयास कांग्रेस की सरकार ने क्यों किया था ??? झूठे भीम वादी और जातिवादी नेताओं को बनाकर हिन्दुओं को बटवाने का सदा प्रयास कांग्रेस क्यों करती है ??? अंग्रेजों के झूठे इतिहास के बल पर कांग्रेस आज भी हिन्दुओं को बांटने का पूरा प्रयास क्यों कर रही है जब डाक्टर भीमराव रामजी आम्बेडकर जी सच जान पाये तब तक कांग्रेस हर जगह खेल खेल चुकी थी । हिन्दुओं जागो और खुद को और हिन्दुओं को और भारत देश को एकजुट होकर बचा लो । जागो हिन्दुओं और अब अन्तिम युद्ध की तैयारी करो !!!!🔥
🔥डा० आम्बेडकर ने ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य , शूद्र वर्ण को आर्य ही माना था तथा डा० भीमराव रामजी आम्बेडकर जी ने अपनी किताब में खुद अपने को आर्य स्वीकार किया है वास्तव में आर्य वंशी डा० भीमराव रामजी आम्बेडकर जी अंग्रेजों की कुटिल घिनौनी चाल व साजिश तथा कांग्रेस और कम्युनिस्ट की हिन्दुओं को आपस में बांटकर कमजोर करने की घिनौनी कुटिल चाल न समझ पाये सीधे साधे व्यक्ति थे जब समझे तब उन्होंने सब सच को स्वीकार किया और अपनी किताब में भी काफी बातें लिखकर स्वीकार किया था । सोचो फर्जी जाति नेहरू जो खुद को हिन्दू ब्राह्मण मानता था आर्य को सदा विदेशी ही मानता था जवाहर लाल नेहरू ने हिन्दुओं को सदा ही मूरख बनाया था इस तरह से अब धीरे धीरे देश जिहादी मुसलमानों और इसाई मिशनरियों और कम्युनिस्टो तथा झूठे भीम वादियों के जाल में फंस गया अब गजवाहिन्द के तहत भारत में भी सभी हिन्दुओं को खत्म किया जायेगा पाकिस्तान और बंग्लादेश और अफगानिस्तान के बाद भारत में ये जिहाद चल रहा है । सनातनी हिन्दुओं बताओ जवाहर लाल नेहरू ने पाकिस्तान के साथ समझौता किया था कि हम दोनों देश अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करेंगे तब पाकिस्तान में हिन्दू अल्पसंख्यक की जनसंख्या आजादी के समय 27% थी तो अब केवल पाकिस्तान में 1% हिन्दू ही बचे हैं तो पाकिस्तान में 26% हिन्दू कहां हैं ??? बंग्लादेश में हिन्दुओं की जनसंख्या 38% थी अब केवल 7% हिन्दू ही लगभग बंग्लादेश में बचे हैं , तो सोचो बंग्लादेश में 31% हिन्दुओं कहां हैं ??? पाकिस्तान व बंग्लादेश में हिन्दुओं की हत्या जारी है अब ये जिहादी लोग भारत में भी हिन्दुओं को खत्म करने की साजिश कर रहे हैं ।
सोचो हिन्दुओं सोचो । अगर देश को बचाना है तो सनातनी हिन्दुओं को एक होना ही होगा ।🔥
भारत के मौजूदा संविधान को बनाने में केवल जवाहर लाल नेहरू की ही मनमानी चली जवाहर लाल नेहरू ने कहा कि हमारे पास समय कम है तथा अंग्रेजों के द्वारा बनाये कानून को ज्यादातर भारत के संविधान में रखवाया जो निम्नलिखित है --
1)- इसलिए अंग्रेजों के द्वारा लागू गुलामी के कानून इन्डियन गवर्नमेंट एक्ट 1935 के 256 आर्टिकल।🔥
2)- अमेरिका के संविधान से-- 35 आर्टिकल ।🔥
3)- ब्रिटेन के संविधान से-- 22 आर्टिकल ।🔥
4)- आयरलैंड के संविधान से-- 18 आर्टिकल ।🔥
5)- कनाडा के संविधान से-- 24 आर्टिकल ।🔥
6)- आस्ट्रेलिया के संविधान से-- 16 आर्टिकल ।🔥
7)- जर्मनी के संविधान से-- 08 आर्टिकल ।🔥
8)- साउथ अफ्रीका के संविधान से-- 01 आर्टिकल ।🔥
🔥टोटल-- 256 +124 = 380 आर्टिकल इस तरह से अन्य जगह से लिया गया है ।🔥
🔥भारत के संविधान में टोटल 395 आर्टिकल में से 380 आर्टिकल अन्य जगह से लिया गया है तो ये भारत के लोगों का सविधान कैसे है ???🔥
🔥भारत का संविधान भारत के लोगों का संविधान नहीं है ये संविधान किसी भी तरह से भारतीय नहीं है !
🔥भारत का संविधान में 125 आर्टिकल बाहरी देशों की भावनाओं के अनुरूप बना है तथा भारत के संविधान में 256 आर्टिकल तो भारत के गुलाम लोगों के ऊपर जो उक्त 256 आर्टिकल अंग्रेजों ने गुलाम भारत के लोगों पर शासन करने के लिये लागू किया था पूरी तरह से आजादी के बाद भी भारत के संविधान में उक्त 256 आर्टिकल लागू क्यों लागू किया ???🔥
🔥इस तरह से भारत के संविधान में टोटल 395 आर्टिकल में से टोटल 380 आर्टिकल निकालने के बाद मात्र 15 आर्टिकल भी केवल जो जवाहर लाल नेहरू ने लागू कराया है वो पूरी तरह से केवल हिन्दुओं तथा सिखों एवं बौद्धों और जैनियों को इसाई समाज और मुसलमानों का गुलाम बनाने की साजिश में लिखवाया है।🔥
🔥उदाहरण -- क्या आर्टिकल 370 तथा 35 ए कश्मीर में गजवाहिन्द के तहत धीरे धीरे भारत से पूरी तरह से सन् 2025 ई० तक हिन्दुओं को खत्म करने की नीयत से लागू था ??? धर्मनिरपेक्षता वाले देश में अल्पसंख्यक के नाम पर आर्टिकल 370 से पाकिस्तानी जिहादी कश्मीर की लड़कियों से शादी करके कश्मीर का नागरिकता प्राप्त करके भारत की नागरिकता प्राप्त करके भारत में जिहाद कर सकता था । सोचो भारत के किसी भी क्षेत्र का व्यक्ति कश्मीर की लड़की से शादी करता तो वह कश्मीर का नागरिकता नहीं प्राप्त कर सकता था उल्टे कश्मीर की लड़की अपनी कश्मीर की नागरिकता भी खो देती थी तो बताओ भारत के लोगों ये कैसा कानून बनाया था संदिग्ध जवाहर लाल नेहरू ने और आर्टिकल 370 तथा 35ए जबरदस्ती क्यों कश्मीर में जवाहर लाल नेहरू ने लागू कराया था ???🔥
🔥इस तरह आजादी के बाद उक्त इस भारत के संविधान से भारत के लोगों को खुशी कैसे होगी ???🎂
🎂इसीलिये आजादी के बाद लागू भारत के संविधान से दुखी होकर डा० भीमराव रामजी आम्बेडकर जी ने दिनांक- 2 सितम्बर सन् 1953 ई० को भारत के संसद की राज सभा में कहा कि भारत के संविधान में भारत के लोगों के लिये कुछ भी नहीं है भारत का संविधान भारत के लोगों के साथ न्याय नहीं करेगा इस तरह से भारत का संविधान भारत के लोगों का भला नहीं करेगा अगर मौका मिले तो मैं भारत के संविधान को जलाने वाला मैं पहला व्यक्ति होऊंगा ।🔥
🔥सोचो अगर डा० भीमराव रामजी आम्बेडकर जी ने अगर संविधान बनाया होता तो दिनांक 2 सितम्बर सन् 1953 ई० को भारत के संसद की राज सभा में भारत के मौजूदा संविधान को ही डा० भीमराव रामजी आम्बेडकर जी जलाने की बात क्यों करते ???🔥
🔥नोट-- इस सन्देश को बार बार शेयर जरूर करो और सभी देशभक्त लोगों को भारत के संविधान का सच बताओ !!!!🔥

13/01/2023

*[ #पंजाब में ये सात दिन हर परिवार जमीन पर सोता था !]*
400 वर्ष पूर्व 20 से 27 दिसम्बर तक। इन्ही सात दिनों में गुरु गोबिंद सिंह जी का पूरा परिवार बलिदान हो गया था। इधर हिन्दुस्तान Christmas के जश्न में डूबा एक दूसरे को बधाइयां देता है। एक वह वक्त भी था जब पंजाब में ये सात दिन हर परिवार जमीन पर सोता था।
क्योंकि माता गूजरी ने ये रातें, दोनों छोटे बच्चो के साथ सरहिन्द के किले में, ठंडी बुर्ज में गुजारी थी खाली फर्श पर।
जब वो नवाब वजीर खां की गिरफ्त में थीं। यह सात दिन भारत के इतिहास में शोक का सप्ताह होता है, उत्सव का नही।
आज पंजाब समेत पूरा हिन्दुस्तान जश्न में डूब जाता है।
गुरु गोबिंद सिंह जी के बलिदान को इस अहसान फरामोश कुछ लोग ने सिर्फ 300 साल में भुला दिया। जो सभ्यता अपना इतिहास, अपने नायकों के बलिदान को भूल जाती हैं वो खुद विस्मृत इतिहास बन जाती है। यह वक्त कोरल संगीत का नही..
बलिदानी गुरु के शोक और स्मृति में डूबने का है !

13/01/2023

विश्व का *आठवां, नवां और दसवां* आश्चर्य सिर्फ "भारत" में हैं।
😎 *आठवां आश्चर्य*: मुस्लिम से शादी कर के "करीना कपूर" के बच्चे "मुसलमान" पैदा हुए, *परन्तु "फिरोज़ खान" से शादी कर के "इंदिरा" के बच्चे "ब्राह्मण" हो गए ?*
🥸 *नौवां आश्चर्य* : जिस "अजीत जोगी" को ईसाई धर्मानुसार दफना दिया गया था। उसके पुत्र "अमित जोगी" ने नर्मदा जी में अपने दिवंगत पिता की "अस्थियां" विसर्जित की ? *जिसे जलाया ही नहीं उसकी "अस्थियां" कहाँ से आयीं ?️* परंतु "कांग्रेस" कुछ भी कर सकती है, *वो "खान या वाड्रा" को जब "गांधी" बना सकती है तो यह क्या असंभव है ?️*😅😅
#️⃣ *दसवां आश्चर्य* : "नेहरू" से पहले न कोई "नेहरू" था और न "नेहरू" के बाद कोई "नेहरू" हुआ l किन्तु "नेहरू" वंश की महिलाएं चाहे किसी से भी "शादी" करें *वो "गांधी" को ही जन्म देती हैं।* ये विचित्र "प्रजनन" देख कर विश्व के सभी जेनेटिक इंजीनियर भी हैरान हैं !!
*आख़िर "भारत" महान जो है !!जय हो*

13/01/2023

*सनातन समाज ही क्यों ???*
*सनातन समाज ही सबको आजादी देता है।*सोचो सनातन समाज ही संसार में साबित हो रहा है।*
*हे संसार के मानवों उठो जागो और 2800 वर्ष के अन्दर बने सभी ईश्वर /अल्लाह /गाड तथा सभी नये धर्म/समाज/रिलिजियन/मत/पंथ का त्याग करो उठो सनातन समाज को अपनाओ और आजादी पाओ और सभी मानवों के कल्याण के लिये काम करो उठो आजादी पाओ गुलामी छोड़ो।*
*याद रखो ईसाई मसीह (यीशू) के मरने के लगभग 300 वर्ष बाद बाइबिल लिखा गया था और साबित है ईसाई मसीह येरुशलम से भारत शिक्षा लेने आये थे क्योंकि 7 वर्ष से 20 वर्ष तक ईसा मसीह (यीशू) कहां थे इसे ईसाई लोग छिपाते क्यों हैं ???*
*येरुशलम में जब क्रास पर ईसा मसीह (यीशू) लटकाये गये तो रात में उनके अनुयाई आये और ईसा मसीह (यीशू) को उतार कर गोपनीय तरीके से भारत लेकर चले आये थे और भारत में ही ईसा मसीह काफी दिन तक पूजा पाठ व सत्संग और तप किया जब ईसा मसीह ( यीशू ) भारत में मृतक हुये तो ईसा मसीह ( यीशू ) को भारत के कश्मीर में दफनाया गया था, भारत के कश्मीर में ईसा मसीह (यीशू) की कब्र अभी भी मौजूद है।*
*सोचो मुहम्मद से बड़े उनके सगे चाचा महादेव के भक्त थे और कविताएं लिखते थे उन कविताओं को ईरान ने छपवाया था अभी हाल में सौदिया अरब में मंदिर व यज्ञशाला मिला है जो लगभग 8000 वर्ष पुराना है जो साबित करता है कि संसार में पहले केवल सनातन समाज ही था।मुहम्मद जब 50 वर्ष के थे तो उसके पहले पूरे अरब क्षेत्र में महादेव की पूजा होती थी और सनातन समाज का बोलबाला पूरे अरब में था। मुहम्मद ने खुद किसी तरह से इस्लाम बनाया और कुरान बनाया लेकिन मुहम्मद के मरने के लगभग 300 वर्ष के बाद कुरान को लिखा गया था।*
*हे पृथ्वी के श्रेष्ठ जीव मनुष्यों अल्लाह/गाड/भगवान के नाम पर गुलाम कौन बनाता है और आजादी कौन देता है शुद्ध विवेक और बुद्धि से विचार जरूर करो???*
*सनातन क्यों कहते हैं ? सनातन का मतलब होता है निरन्तर, निरन्तर कौन है परमात्मा ही निरन्तर है जो सास्वत है वही निरन्तर होता है , हम सृष्टि के अंग हैं और शरीर भी हमारी खत्म नहीं होती है क्योंकि शरीर का देहान्त के बाद 5 तत्वों में शरीर चली जायेगी शरीर तो 5 तत्वों की है आत्मा जो परम ऊर्जा परमात्मा का अंश है जब तक अपने सृष्टि के कर्म बन्धन से मुक्त होकर शुद्ध व सत्य व सास्वत नहीं होगी तब तक मुक्त नहीं होगी इसके लिये जो सृष्टि करते वक्त संकल्प बने हैं उसी के रास्ते चलकर मुक्त होना होगा। परमात्मा को प्राप्त करने का रास्ता एक है परन्तु साधन अलग हो सकता है। जाति का बोध सृष्टि का संकल्प नहीं ये समाज को चलाने का तरीका है आज जिसे जाति कहते हो वो पहले सनातन समाज को चलाने का तरीका मतलब समाज द्वारा योग्यता के आधार पर बांटा गया काम था जो पैदा हुआ है उसे काम दिया गया रोजगार दिया गया था। मनुष्य समाज बनाकर रहता है मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। हे पृथ्वी के श्रेष्ठ जीव मानव विचार करो ईसा मसीह (यीशू) और मुहम्मद पहले पैदा हुते इनका अल्लाह व परमात्मा व समाज बाद में पैदा हुआ। ईसाई मसीह (यीशू) की कब्र भारत के कश्मीर में है मुहम्मद जब 50 वर्ष के होगे गये तो तब तक उसके पहले तक लगभग हर जगह अरब में महादेव की पूजा होती थी , सोचो सौदिया अरब में अभी जल्दी में ही 8000 वर्ष पुराना मंदिर व यज्ञशाला भी मिला है जो प्रमाणित करता है कि सौदिया अरब तथा सम्पूर्ण अरब क्षेत्र में भी महादेव की पूजा होती थी और सनातन समाज की संस्कृति अरब क्षेत्र में भी मौजूद थी ।शुद्ध बुद्धि व विवेक से विचार करके सोचो मुहम्मद से काफी बड़े उनके चाचा महादेव की पूजा करते थे उन्होंने महादेव की पूजा सदा किया और कविताएं भी लिखा था उनकी कविता ईरान ने ही छपवाया था। हर जगह शुद्ध बुद्धि और विवेक से विचार करोगे तो संसार का आधार केवल सनातन समाज की संस्कृति को ही पाओगे। हर मानव खुद विचार करे क्या सच है ? क्या आत्मा के कल्याण के लिये सही है सनातन दबाव नहीं करता है सनातन समाज केवल उपदेश और शिक्षा देता है अपने विचार से ही परमात्मा को अपनाना चाहिए, इसीलिए कहता हूं सनातन समाज को अपनाओ और आजादी पाओ।*
*जय सनातन, जय भारत, वन्देमातरम्।*

13/01/2023

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