13/09/2025
एक बार जरूर पढ़ें
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मेरे प्रिय ब्रह्मपुर के देवतुल्य भाइयों,बहनों एवं मेरे प्यारे युवा साथियों।
आज, जब हमें आजाद हुए 78 साल पूरे हो गए और हम जश्न मना रहे हैं, तो मेरे मन में कुछ भावनाएं हैं जिन्हें मैं आपके साथ साझा करना चाहता हूँ। मुझे नहीं पता कि आप मेरी भावनाओं को समझेंगे या नहीं, लेकिन मैं अपनी बात आप तक पहुंचाना चाहता हूँ।
ब्रह्मपुर, जो बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ की पावन भूमि है, जहाँ हर साल करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यह दियरांचल का कृषि संपन्न क्षेत्र है, जहाँ अधिकतर लोग अपनी आजीविका खेती पर ही निर्भर हैं।
आज, जब हमारा देश इतना आगे बढ़ गया है, तब भी हमारे किसानों को अपने बच्चों को मजबूरी में निजी स्कूलों में भेजना पड़ता है। अगर परिवार में कोई बीमार हो जाता है, तो हमें अपने यहाँ के सरकारी अस्पतालों में सही इलाज नहीं मिलता। हमें अक्सर पटना या वाराणसी रेफर कर दिया जाता है, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का बोझ पड़ता है।
घर की गरीबी देखकर, हमारे युवाओं को अपने परिवार का पेट पालने के लिए अपने घर और गाँव से दूर जाना पड़ता है। वहीं, हमारे नेताओं के बच्चे विदेशों के बड़े-बड़े शिक्षण संस्थानों में पढ़कर आते हैं और फिर से उन्हीं पदों पर काबिज हो जाते हैं, और हम आम लोग वैसे ही शोषित होते रहते हैं।
अभी हाल ही में जब बाढ़ आई, तो हमारे वर्तमान प्रतिनिधि चुपचाप कान में रूई डालकर सो गए। बिहार में 12 जिलों को बाढ़ प्रभावित घोषित कर उन्हें लाभ पहुंचाया गया, लेकिन यह दुर्भाग्य है कि गंगा नदी सबसे पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश के बाद बिहार के जिस जिले में प्रवेश करती है, वह बक्सर है, फिर भी हमें कोई लाभ नहीं मिला। ऐसे प्रतिनिधि जो सदन में जाकर हमारी आवाज उठाने के बजाय सोते हैं, उनका होना हमारे लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
अब चुनाव का समय आ गया है, और आपके पास वो शक्ति है जिससे आप बदलाव ला सकते हैं। आप जिसको चाहेंगे उसे कुर्सी पर बिठा सकते हैं और अपने हक के लिए आवाज उठा सकते हैं। इस बार सिर्फ नेता नहीं, बल्कि ऐसा बेटा चुनिए जिसके पास अपने क्षेत्र के विकास के लिए एक स्पष्ट मिशन और विजन हो। ऐसा इंसान जो हमेशा आपके बीच रहे, आपके सुख-दुख में आपके साथ खड़ा हो, और ब्रह्मपुर को एक नई दिशा दे सके।
इस बार, हमें अपनी दशा बदलने का मौका मिला है। आइए, मिलकर ब्रह्मपुर को एक विकसित और समृद्ध क्षेत्र बनाएँ।
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