Bharmour the land of god

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a beautiful city bharmour (manimhesh)
मणिमहेश कैलाश के 12 महीने दर्शन कराने का प्रयत्न🔱
भरमौर के दैविक स्थानों से अबगत करवाने की छोटी सी पहल 🕉🕉🔱
जय बाबा बर्फ़ानी

मणिमहेश यात्रा: जम्मू-कश्मीर से भरमौर पहुँचा पहला जत्था, नंगे पांव पैदल यात्रा पर निकले श्रद्धालु​भरमौर/चंबा:उत्तर भारत ...
28/08/2026

मणिमहेश यात्रा: जम्मू-कश्मीर से भरमौर पहुँचा पहला जत्था, नंगे पांव पैदल यात्रा पर निकले श्रद्धालु
​भरमौर/चंबा:
उत्तर भारत की प्रसिद्ध श्री मणिमहेश यात्रा के लिए जम्मू-कश्मीर से शिव भक्तों के जत्थों का आगमन शुरू हो गया है। इसी कड़ी में श्रद्धालुओं का पहला जत्था चंबा जिले के भरमौर स्थित ऐतिहासिक 84 परिसर पहुँचा। 84 परिसर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद यह जत्था मणिमहेश के लिए आगे रवाना होगा।
​नंगे पांव तय कर रहे यात्रा
जम्मू-कश्मीर से आए इन श्रद्धालुओं में यात्रा को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। कठिन पहाड़ी रास्तों, चढ़ाई और मौसम की कड़ी चुनौतियों के बावजूद कई भक्त भरमौर से मणिमहेश डल झील तक की पैदल यात्रा नंगे पांव ही तय कर रहे हैं। पूरे यात्रा मार्ग पर 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है।
​शिव को अपना 'जमाई' मानते हैं श्रद्धालु
इस यात्रा के साथ बेहद अनूठी धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हैं। जम्मू-कश्मीर के शिव भक्त स्वयं को माता पार्वती के वंशज से जोड़कर देखते हैं और इस नाते भगवान शिव को अपना जमाई (दामाद) मानते हैं। परंपरा के अनुसार, सर्दियों के आगमन से पहले भक्त भगवान भोलेनाथ को जम्मू-कश्मीर आने का निमंत्रण देने और अपने क्षेत्र में पधारने का आग्रह करने के लिए इस कठिन यात्रा पर निकलते हैं।
​मणिमहेश यात्रा क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आमद से स्थानीय लोगों और अन्य यात्रियों के बीच जबरदस्त आत्मीय मिलन देखने को मिल रहा है।

रक्षा बंधन पर बढ़ी मणिमहेश यात्रियों की संख्या, 387 श्रद्धालुओं ने पैदल और 104 ने हेली टैक्सी से की मणिमहेश यात्रारक्षा ...
28/08/2026

रक्षा बंधन पर बढ़ी मणिमहेश यात्रियों की संख्या, 387 श्रद्धालुओं ने पैदल और 104 ने हेली टैक्सी से की मणिमहेश यात्रा
रक्षा बंधन के पावन अवसर पर श्री मणिमहेश यात्रा-2026 में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। पवित्र झील के दर्शन के लिए शुक्रवार को सैकड़ों श्रद्धालु पैदल यात्रा मार्ग से रवाना हुए, जबकि बड़ी संख्या में यात्रियों ने हेली टैक्सी सेवा का भी लाभ उठाया।

उपमंडल अधिकारी (नागरिक) भरमौर अजय कुमार सिंह ने बताया कि शुक्रवार को हड़सर से श्री मणिमहेश धाम के लिए 387 श्रद्धालु पैदल रवाना हुए। श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और अन्य व्यवस्थाओं की सतत निगरानी बनाए रखी।

उन्होंने बताया कि भरमौर–गौरीकुंड हेली टैक्सी सेवा के तहत शुक्रवार को 21 उड़ानें संचालित की गईं। इन उड़ानों के माध्यम से 104 श्रद्धालु भरमौर से गौरीकुंड पहुंचे, जबकि 87 श्रद्धालुओं ने गौरीकुंड से भरमौर लौटने के लिए हवाई सेवा का लाभ उठाया।

एसडीएम ने कहा कि रक्षा बंधन जैसे पावन पर्व पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखते हुए प्रशासन सभी व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है, ताकि प्रत्येक यात्री को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव मिल सके।

उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि यात्रा के दौरान प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें तथा मणिमहेश यात्रा मार्ग पर स्वच्छता बनाए रखते हुए कूड़ा-कचरा केवल निर्धारित स्थानों पर ही डालें।

28/08/2026

धनछो
मणिमहेश यात्रा 2026

जय श्री मणिमहेश कैलाश जी की Yatra 2026श्री मणिमहेश कैलाश दर्शन शिव कुंड से 🙏🏻🙏🏻महादेव की की नगरी की नगरी शिव कुंड 🙏🏻Late...
28/08/2026

जय श्री मणिमहेश कैलाश जी की
Yatra 2026
श्री मणिमहेश कैलाश दर्शन शिव कुंड से 🙏🏻🙏🏻

महादेव की की नगरी की नगरी शिव कुंड 🙏🏻

Latest Shri Manimahesh Kailash Darshan

मणिमहेश यात्रा मार्ग को बहाल करने में PWD ने झोंकी पूरी ताकत100 से अधिक कर्मचारी दिन-रात डटे, एसडीओ संजीव कुमार, जूनियर ...
28/08/2026

मणिमहेश यात्रा मार्ग को बहाल करने में PWD ने झोंकी पूरी ताकत
100 से अधिक कर्मचारी दिन-रात डटे, एसडीओ संजीव कुमार, जूनियर इंजीनियर बिजेंद्र और धनीराम की अगुवाई में कठिन हालात के बीच तैयार हुआ सड़क मार्ग

रविवार को हुई बारिश और जगह-जगह हुए भूस्खलन से मणिमहेश यात्रा मार्ग को काफी नुकसान पहुंचा। कई स्थानों पर सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि कुछ हिस्सों में नए सिरे से सड़क का निर्माण करना पड़ा। ऐसे मुश्किल हालात में लोक निर्माण विभाग ने युद्धस्तर पर मोर्चा संभालते हुए यात्रा मार्ग को बहाल करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी।

मणिमहेश यात्रा को देखते हुए लोक निर्माण विभाग के 100 से अधिक कर्मचारी और मशीनरी लगातार सड़क बहाली के कार्य में जुटे रहे। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिन-रात मौके पर डटे रहकर कठिन परिस्थितियों के बीच सड़क को पैदल योग्य बनाने का कार्य किया। लगातार बारिश, भूस्खलन और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद विभाग की टीम ने काम को रुकने नहीं दिया।

अधिकारियों ने खुद संभाली मौके की कमान

सड़क बहाली के इस अभियान में सहायक अभियंता संजीव कुमार, कनिष्ठ अभियंता बिजेंद्र और कनिष्ठ अभियंता धनीराम ने मौके पर लगातार निगरानी रखी। अधिकारियों ने कर्मचारियों और मशीनरी के साथ समन्वय बनाकर संवेदनशील स्थानों पर सड़क बहाली का कार्य करवाया। कई जगह सड़क को केवल मलबा हटाकर बहाल करना संभव नहीं था, ऐसे में क्षतिग्रस्त हिस्सों में नए सिरे से सड़क तैयार करनी पड़ी।

अधिकारियों की टीम ने दिन-रात एक कर काम को आगे बढ़ाया और यात्रा मार्ग को जल्द से जल्द सुरक्षित बनाने का प्रयास किया। कठिन परिस्थितियों में अधिकारियों के मौके पर लगातार डटे रहने की स्थानीय लोगों ने भी सराहना की है।

लेबर ने भी निभाई अहम भूमिका

सड़क बहाली में मशीनरी के साथ विभाग के फील्ड कर्मचारियों और लेबर की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। मलबा हटाने, क्षतिग्रस्त हिस्सों को दुरुस्त करने, सड़क की कटिंग और नए हिस्सों को तैयार करने में कर्मचारियों ने पूरी मेहनत से काम किया। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच हाथों से ही जरूरी कार्य किए गए।

आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई थी सड़क

बारिश और भूस्खलन के दौरान मणिमहेश यात्रा मार्ग को कई स्थानों पर भारी नुकसान पहुंचा था। सड़क के कुछ हिस्सों में मलबा आने से यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ, जबकि कई जगह सड़क की सतह और किनारे क्षतिग्रस्त हो गए थे। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए मार्ग की जल्द बहाली प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रही।

PWD ने चुनौती को देखते हुए मरम्मत कार्य को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया। जहां सामान्य मरम्मत से काम चल सकता था, वहां सड़क को दुरुस्त किया गया, जबकि अधिक क्षतिग्रस्त स्थानों पर नए सिरे से सड़क तैयार की गई।

यात्रा से पहले सड़क तैयार करना बड़ी चुनौती

मणिमहेश यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालु हड़सर से आगे पैदल यात्रा करते हैं। ऐसे में मार्ग की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। PWD की टीम ने इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए सड़क बहाली का काम लगातार जारी रखा, ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आवाजाही में परेशानी न हो।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने जिस तरह दिन-रात मौके पर रहकर काम किया, वह सराहनीय है। उनका कहना है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम के बीच सड़क को कम समय में य
पैदल हुआ घोड़ा खच्चर योग्य बनाना विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि है।

सड़क बहाली से यात्रा तैयारियों को मिली मजबूती

मणिमहेश यात्रा के सफल और सुरक्षित संचालन में सड़क व्यवस्था की अहम भूमिका है। PWD की इस मेहनत से यात्रा मार्ग को सुरक्षित एवं सुचारु बनाने की दिशा में प्रशासन को बड़ी राहत मिली है। विभाग की टीम अभी भी संवेदनशील स्थानों पर नजर बनाए हुए है, ताकि मौसम खराब होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।

बहरहाल, मणिमहेश यात्रा से पहले PWD की टीम ने जिस तरह विपरीत परिस्थितियों में मोर्चा संभालकर सड़क को बहाल किया है, उसने एक बार फिर साबित किया है कि आपदा के समय सरकारी मशीनरी की असली परीक्षा मौके पर होती है—और विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने इस परीक्षा में पूरी ताकत के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई है।

28/08/2026

हरि हर महादेव पर नया छत्र 🙇🏼🕉️🕉️

28/08/2026

श्री मणिमहेश यात्रा : 70 किलो से अधिक वजन पर देना होगा अतिरिक्त किराया
हेलीटैक्सी में 80 किलो वजन पर ₹500 और 85 किलो वजन पर देने होंगे ₹1000 अतिरिक्त

मणिमहेश यात्रा से पहले शाही स्नान की तैयारी, 12 सितंबर को निकलेगी छड़ी यात्रा, छह दिनों तक होगी पैदल यात्रा
28/08/2026

मणिमहेश यात्रा से पहले शाही स्नान की तैयारी, 12 सितंबर को निकलेगी छड़ी यात्रा, छह दिनों तक होगी पैदल यात्रा

28/08/2026

जय महाकाल 🙇🏼🕉️🚩

मणिमहेश यात्रा में कुली और घोड़े-खच्चरों की दरें निर्धारित, सुरक्षा का रखें मणिमहेश यात्रा-2026 के दौरान श्रद्धालुओं की ...
27/08/2026

मणिमहेश यात्रा में कुली और घोड़े-खच्चरों की दरें निर्धारित, सुरक्षा का रखें
मणिमहेश यात्रा-2026 के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हड़सर से मणिमहेश तथा यात्रा मार्ग के विभिन्न पड़ावों के बीच कुली और घोड़े-खच्चरों से यात्रियों व सामान की ढुलाई के लिए दरें निर्धारित की गई हैं। निर्धारित दरों के अनुसार श्रद्धालु यात्रा के दौरान सामान ढुलाई अथवा घोड़े-खच्चर की सवारी की सुविधा ले सकते हैं।

मणिमहेश न्यास द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार हड़सर से धणछो तक कुली का किराया 500 रुपये, 70 किलोग्राम तक सामान के लिए घोड़ा/खच्चर का किराया 800 रुपये तथा सवारी के लिए 1100 रुपये प्रति सवारी निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार हड़सर से सुंदरासी तक कुली 900 रुपये, सामान ढुलाई 1000 रुपये तथा सवारी 1700 रुपये प्रति सवारी निर्धारित है।

हड़सर से गौरीकुंड तक कुली का किराया 1100 रुपये, 70 किलोग्राम तक सामान ढुलाई के लिए 1200 रुपये और घोड़े-खच्चर की सवारी के लिए 2500 रुपये प्रति सवारी निर्धारित किए गए हैं। हड़सर से मणिमहेश तक कुली का किराया 1300 रुपये, सामान ढुलाई 1450 रुपये तथा सवारी का किराया 2800 रुपये प्रति सवारी है।

इसके अलावा धणछो से गौरीकुंड तक कुली 700 रुपये, सामान ढुलाई 800 रुपये और सवारी 1300 रुपये प्रति सवारी; धणछो से मणिमहेश तक कुली 850 रुपये, सामान ढुलाई 950 रुपये और सवारी 1600 रुपये प्रति सवारी निर्धारित है।

सुंदरासी से गौरीकुंड तक कुली का किराया 350 रुपये, सामान ढुलाई 400 रुपये और सवारी 800 रुपये प्रति सवारी, जबकि सुंदरासी से मणिमहेश तक कुली 500 रुपये, सामान ढुलाई 550 रुपये और सवारी 950 रुपये प्रति सवारी निर्धारित है। गौरीकुंड से मणिमहेश तक कुली का किराया 200 रुपये, सामान ढुलाई 250 रुपये और सवारी का किराया 300 रुपये प्रति सवारी निर्धारित किया गया है। उपलब्ध दर सूची में हड़सर से मणिमहेश और वापसी के लिए घोड़ा/खच्चर की सवारी का किराया 4700 रुपये प्रति सवारी दर्शाया गया है।

घोड़े-खच्चरों से यात्रा के दौरान सुरक्षा का रखें ध्यान

उपमंडलाधिकारी भरमौर अजय कुमार सिंह ने यात्रियों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि मणिमहेश यात्रा के दौरान अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग पर घोड़े और खच्चरों की आवाजाही के दौरान श्रद्धालु सावधानी बरतें। घोड़े अथवा खच्चर से गिरने तथा उसकी चपेट में आने से बचने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करें कि उनकी वजह से मार्ग पर चल रहे अन्य यात्रियों को धक्का न लगे।

उन्होंने श्रद्धालुओं से निर्धारित दरों का ध्यान रखने और किसी प्रकार की समस्या अथवा अधिक वसूली होने पर संबंधित नियंत्रण कक्ष में शिकायत दर्ज करवाने की अपील की है। यात्रा मार्ग पर भीड़ और घोड़े-खच्चरों की आवाजाही को देखते हुए यात्रियों से एक-दूसरे की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए संयम और सावधानी से यात्रा करने का आग्रह किया गया है।

उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान निर्धारित दरों की जानकारी रखें, घोड़े-खच्चरों की आवाजाही के समय पर्याप्त सावधानी बरतें और स्वयं के साथ-साथ मार्ग पर चल रहे अन्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा का भी ध्यान रखें।

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