06/06/2026
सोशल मीडिया में एक दूसरे से झगड़ने वालों और अंग प्रदर्शन करके उत्तराखंड की संस्कृति को धूमिल करने वालों को इनसे सीखना चाहिए..!
"तो नमस्कार दोस्तों मैं पहाड़ी बाघ!"
पिछले कुछ महीनों में शायद ये लाइन आपने भी सुनी होगी, उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के छौना गांव में रहने वाले सोशल मीडिया क्रिएटर पहाड़ी बाघ ने अपनी एक अलग तरह की फैन फॉलोइंग बनाई है और सलाम है ऐसे लोगों को भी जो इस बंदे की वीडियो देखते हैं। क्योंकि आजकल उत्तराखंड वाले ऐसे लोगों को देखने की इच्छा रखते हैं जो दिन भर फेसबुक पर क्लेश करते हैं, एक दूसरे के फॉलोवर बढ़ाने के लिए आपसे में उलझते हैं, गालियां बकते हैं और कई बार FIR FIR खेलते हैं।
पहाड़ी बाघ मुझे इसलिए पसंद है क्योंकि इस बंदे ने शहरों में नौकरी करने के बाद पहाड़ का रुख किया है क्योंकि एक बार शहर जाने के बाद वापस पहाड़ आना, नौकरी के उस कंफर्ट जोन से निकलना बहुत मुश्किल है।
लेकिन घर आकर भाई अपने मेहनत के दम पर सब्जी उत्पादन कर रहा है, रोज बागेश्वर सब्जी देता है। इसके अलावा गाय का दूध बेच रहा है, कई बार मजदूरी भी करता है लेकिन खाली नहीं बैठता। ऐसे लोग ही इस वक्त पहाड़ की जरूरत हैं। इनसे हम जैसों को भी कुछ करने की प्रेरणा मिलती है।
अपने दिनभर के काम करते हुए बीच-बीच में ये वीडियो बनाते हैं। बहुत सिंपल वीडियो, कोई दिखावा नहीं कोई एडिटिंग नहीं। इसके अलावा जब मन होता है गाते हैं और भाभी को गाना डेडिकेट करते हैं।
आज लोगों के पास लाखों रुपया है। शहर के सेठों के पास इतनी माया है कि उन्हें भी उसका हिसाब नहीं मगर इतना धन होने के बाद भी कई लोगों के जीवन में असली खुशी नहीं है। उन्हें बस यही चिंता है कि इस धन को दुगना कैसे करें ? जबकि पहाड़ी बाघ को देखकर पता चलता है कि जीवन में घर चलाने लायक कमाने वाला बंदा भी खुश रह सकता है। जियो दाज्यू !
जिसको भी ये पोस्ट अच्छी लगे कमेंट में जरूर बताना कि आपको पहाड़ी बाघ का काम कैसा लगता है ?
Champawat helping hand की ओर से पहाड़ी बाघ Pahadi Pahadi Bag को शुभकामनाएं, मेहनत करते रहो, हमेशा खुश रहिए।
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