लडीधूरा महोत्सव बाराकोट

लडीधूरा महोत्सव बाराकोट Ladidhura Mahotsav Barakot, Champawat(Uttarakhand)

*लड़ीधुरा मंदिर का इतिहास*
1800-1850 ईसवी के आसपास चंद राजाओं के शासनकाल में रण पाल (रामपाल) नामक राजा जोकि चंद राजाओं के शासन के अधीन थे, बाराकोट के आसपास का क्षेत्र उनके अधीन था। इसी बीच चंद राजाओं के ताम्रपत्र धारी प्रकांड ज्योतिषी जिनको बाद में जोशी कहा जाने लगा लटोली गांव चंपावत से बस्तौली बाराकोट आ गए और स्थानीय शासक रनपाल जो चंद साम्राज्य के अधीनस्थ थे, के राजपुरोहित बन गए। राजा ने 15 सौ ना

ली जमीन तथा काकड़, बाराकोट, खोला फरतोला आदि कई गांव की वृति यानी आचार्य अथवा पुरोहित पद भी उन्हें दे दिया।
लड़ीधुरा क्षेत्र के आसपास उन दिनों बानासुर न कि बाणासुर नामक राक्षसों, दुराचारियों का आतंक व्याप्त था। प्रजा भयभीत थी। राजा के मंत्रियों और स्थानीय लोगों की सलाह से राजपुरोहित श्री रुद्रबल्लभ जोशी को पूर्णागिरि से देवी की पिंडी लाकर स्थापित करना था। ताकि राक्षसों से बचाव किया जा सके।
हमारे पूर्वज स्वर्गीय रामचंद्र जोशी के पितामह श्री रुद्रबल्लभ जोशी पूर्णागिरि से दो पिंडी लेकर पैदल पैदल चले। उनके साथ कुछ स्थानीय लोग भी थे। बड़े ही नियम और शुद्धता के साथ देवी की पिंडीयों अर्थात प्रतीकात्मक पत्थर (विग्रह) कोरे गागर में लाया जा रहा था। तब लड़ी धुरा जहां आज मंदिर का पुनर्निर्माण चल रहा है उस स्थान से छोटा सा संकरा रास्ता था। जब वे क्वारकोली स्थान से थोड़ा ऊपर पहुंचे तो पुरोहित को यानी हमारे पूर्वज पुजारी को लघु शंका की इच्छा हुई। उन्होंने उसी स्थान पर स्थित एक ऐड़ी के मंदिर के अंदर देवी की पिंडी को रखा और लघु शंका करने के लिए नीचे खोलका यानी जिसे तल्ली बाराकोट कहते हैं वहां पानी था उसके नजदीक और कहीं भी पानी नहीं था। उन्होंने वहां पर स्नान किया वस्त्र बदले और पुनः पिंडी के पास पहुंचे। जैसे ही ऐड़ी मंदिर पहुंचे तो पिंडी गायब हो गई। सब लोग ऐड़ी को पिंडी गायब करने का दोषी मानने लगे, ऐड़ी देव भी नाराज होकर नीचे चले गए वो मंदिर आज भी फार्टोला के आस पास है, पिंडी न पाकर परेशान हाल सभी अपने अपने घर कल आकर देखेंगे ऐसा कहकर चले गए। उसी रात्रि श्री रुद्रबल्लभ जोशी जी को स्वप्न हुवा, जिसमें माता ने कहा, तुम मुझे इधर उधर मत खोजना, में अपने नियत स्थान पर पहुंच गई हूं, तुम्हें उसी जगह पर एक दूर से चमकने वाली वस्तु दिखाई देगी, जो पर्वत शिखर से थोड़ा नीचे होगी, मुझे वही पर स्थापित करो, मेरी स्थापना यहीं पर करो मैं यही रहना चाहती हूं। क्योंकि मेरी बहन सामने है।
मित्रों, आप ने कभी ध्यान दिया हो तो लड़ीधुरा मंदिर जहां आजकल काम चल रहा है ठीक सामने झुमाधुरी मंदिर है। पाटन गांव के ऊपर वह वहां से दिखता है। और झुमाधुरी से पूर्णागिरी मंदिर दिखता है । पूर्णागिरि से दूसरी नंदा देवी आदि मंदिर एक दूसरे से वैष्णो देवी तक देखते हैं।
*यह बात चारों तरफ फैल गई सबकी सहमति से अगले दिन विधि पूर्वक मां की स्थापना की गई साथ में महाकाली की भी स्थापना की गई । कुछ दिनों बाद ऊपर मंदिर मनाया गया तथा हिंगला देवी, जिनका झूला होता है उसमें लोग झूला झूलते हैं उनकी भी पूजा होती है।
दूसरे दिन सभी ऐड़ी मंदिर पहुंच कर तलाश करने लगे वहां से ऊपर पहाड़ी में एक दुर्गम स्थल जहां वर्तमान मंदिर है, एक दिव्य चमक दिखाई दी।
बमुश्किल वहां पहुंचने पर पिंडी के दर्शन हुए और वहीं पर मां भगवती की स्थापना की गई और साथ में भगवती की बहन मां महाकाली की भी इसी के बगल में स्थापना हुई।
यह बात सम्पूर्ण क्षेत्र में फैल गई सबकी सहमति से कुछ दिनों बाद ऊपर मंदिर मनाया गया तथा मंदिर में पूजा के समय यदि कोई महाकाली मां को बलि चढ़ाता है तो पर्दा लगाया जाता है क्योंकि भगवती सात्विक शाकाहारी है उनके सामने बलिदान नहीं किया जाता है।
मंदिर से नीचे पम्दा गांव की ओर जो रास्ता जाता है वहां पर ब्रिखम होता था।कुछ वर्ष पूर्व तक वहां भी बलि दी जाती थी धीरे धीरे वह प्रथा समाप्त हो गई है। देवी के प्रभाव से बानासुर आदि दुराचारियों का प्रकोप समाप्त हो गया। वैसे परियों का प्रभाव आज भी है वे परियां देवी की ही सेविकाएं मानी जाती हैं।

सर्वसहमति से नियम बनाया गया की दोनों नवरात्रों में, पूर्णमासी को, शुक्ल पक्ष की एकादशी को नियमित रूप से मंदिर में पूजा होगी। इसके लिए पूजा की सामग्री आसपास के गांव से लाई जाएगी।
पठल्ती जोशी परिवार यानी पंडित रुद्रबललभ जोशी के वंशज ही इस धाम के पुरोहित व पुजारी रहेंगे। जब वो बाहर धूपबत्ती के लिए जाएंगे तब बत्ती की रखवाली यानी दीपक अखंड रहे, और रसोई के लिए सिमल्टा के पांडे जी को नियुक्त किया गया। उन्हें क्षेत्र के लोग नाली देंगे। जोशी परिवार को चढ़ावे के अलावा माना यानी चौथाई नाली बैगर के रूप में मिलेगी। प्रतिवर्ष कोजागरी पूर्णमासी को मेला लगेगा।पहले एक ही रथ काकड़ से मंदिर आता था, कालांतर में काकड़ और बाराकोट गांव से जोकि आपस में भाई भाई हैं दो रथ मंदिर में विधि विधान से लाए जाने लगे।काकड़ गांव के रथ का संबंध पम्दा गांव से रहेगा।इसीलिए आज भी चतुर्दशी का मेला बाराकोट काकड़ के अलावा पम्दा गांव में भी आयोजित होता है। काकड़ का रथ पम्दा गांव में धूनी की परिक्रमा करके त्यून्दरा देवता के मंदिर की परिक्रमा करके देवी के मंदिर को आता है। बाराकोट का रथ भी त्योंद्रा मंदिर की परिक्रमा करके आता है। एक नियम के अनुसार काकड़ का रथ पहले मंदिर में आएगा। बाराकोट का उसके बाद, इसका कारण कांकड़ के क्षत्रिय बड़े भाई और बाराकोट के छोटे भाई बताए जाते हैं। यह सम्मान की परंपरा है की बड़ा भाई पहले और छोटा भाई बाद में पहुंचेगा। रथ पहुंचने के बाद सभी डगरिया लोग पुजारी के साथ पूजा करते है और उसके बाद मंदिर में ही प्रसाद ग्रहण करते है।
यह मेला पूरे क्षेत्र का प्रसिद्ध मेला होता है। और साथ ही क्षेत्र में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। जो भी भक्त सच्चे मन से आकर मां के दर्शन करता है उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है।

��जै मां भगवती ����

17/08/2026

दुःखद ॐ शांति मंजुल शर्मा के निधन से हर आंख नम, मंजुल शर्मा के निधन से बाराकोट में पसरा मातम, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल।

पहले छोटे पुत्र, अब बड़े बेटे की मौत; परिवार पर दुखों का पहाड़।

बाराकोट निवासी एवं सेवानिवृत्त प्रवक्ता भुवन चंद्र शर्मा के 32 वर्षीय बड़े पुत्र मंजुल शर्मा का आकस्मिक निधन हो गया। मंजुल शर्मा पिछले कुछ दिनों से पीलिया रोग से ग्रसित थे।

परिजन उन्हें बेहतर उपचार के लिए दिल्ली ले जा रहे थे, लेकिन चंपावत के पास अचानक उनकी तबीयत अत्यधिक बिगड़ गई। आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल चंपावत ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

बताया जा रहा है कि करीब दो वर्ष पूर्व भुवन चंद्र शर्मा के छोटे पुत्र की भी सड़क दुर्घटना में असामयिक मृत्यु हो गई थी। अब बड़े पुत्र के निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना से बाराकोट क्षेत्र में शोक की लहर है।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

ॐ शांति! 🙏


APNA CSC Barakot Lohaghat ki wadiya Lohaghat Champawat Tanakpur Champawat helping hand Lohaghat & Champawat - Pithoragarh - Uttarakhand

15/08/2026

स्वतंत्रता दिवस की आपको हार्दिक शुभकामनाएं🇮🇳

सारे जहाँ से अच्छा देश है हमारा,हम बुलबुलें हैं इसकी, ये गुलसिताँ हमारा।❤️🤍💚

भारत माता की जय!

जय हिन्द! 🇮🇳 वंदे मातरम्! 🇮🇳

वीर शहीद जवानों को नमन 💐🙏

#

26/07/2026

ग्राम सभा बाराकोट वासियों के लिए यह अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है कि लंबे अंतराल के पश्चात हमारे क्षेत्र में हवनात्मक शतचंडी महायज्ञ का भव्य एवं दिव्य आयोजन पूर्ण वैदिक विधि-विधान के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

यह पावन अनुष्ठान ग्राम सभा बाराकोट की समस्त जनता, मातृशक्ति, बहनों, युवा साथियों, बुजुर्गों तथा सभी श्रद्धालुओं के तन, मन और धन से मिले अमूल्य सहयोग का परिणाम है। आप सभी के समर्पण, सेवा, अनुशासन और श्रद्धा ने इस महायज्ञ को सफल बनाया।

हम माँ जगदम्बा से प्रार्थना करते हैं कि उनकी कृपा सदैव हमारे गाँव, क्षेत्र और समस्त जनमानस पर बनी रहे। सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, आपसी प्रेम, भाईचारा और खुशहाली का वास हो तथा हमारा गाँव निरंतर उन्नति और विकास के पथ पर अग्रसर रहे।

इस पुण्य कार्य में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले प्रत्येक ग्रामवासी का हम हृदय की गहराइयों से आभार व्यक्त करते हैं। आप सभी का यह सहयोग सदैव स्मरणीय रहेगा।

जय माँ भगवती।
जय शतचंडी महायज्ञ।



जिला पंचायत फरतोला APNA CSC Barakot G I C Barakot Devidhura ,Champawat,Uttarakhand

26/07/2026

कारगिल के वीर शहीदों को शत-शत नमन और भावपूर्ण श्रद्धांजलि, जिन्होंने 1999 में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका अदम्य साहस, शौर्य और त्याग हमेशा देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।कारगिल के वीरों को नमन 💐🎤🙏

#𝙅𝙖𝙞𝙃𝙞𝙣𝙙

29/06/2026

पंकज जोशी पुत्र श्री सतीश चंद्र जोशी ग्राम पम्दा (खाल) के निवासी हैं, लखनऊ में जो भयानक अग्निकांड हुआ वहाँ पर वह अपने ऑफिस में कार्य कर रहे थे, पंकज जोशी स्व० श्री टीकाराम जोशी (पूर्व रोडवेज इंचार्ज टनकपुर) के पौत्र है,

इस भीषण अग्निकांड में बड़े संयम से अपनी और अपने साथियों की जान बचायी, माँ काली माँ भगवती का ही आशीर्वाद है, की वह हम सब के बीच शकुशल हैं, हमें हमेशा घबराना नहीं है जब भी परिस्थिति आपके अपने पक्ष में ना लगे तो बड़े संयमित योजना से काम लेना चाहिए🙏🎤

हमेशा अपने ईष्ट देवों का पवित्र नाम जप करते रहना चाहिए ❤



Lohaghat Champawat Tanakpur जिला पंचायत फरतोला Lohaghat ki wadiya Champawat News 24×7 Lohaghat & Champawat - Pithoragarh - Uttarakhand District Administration Champawat

04/06/2026

संघर्ष मेहनत और हौसले की मिसाल बनीं पूजा फर्त्याल

चम्पावत जिले के बाराकोट ब्लॉक के बापर गांव की होनहार बेटी पूजा फर्त्याल का चयन राज्य कर अधिकारी (State Tax Officer) पद पर होने से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। यह उपलब्धि केवल एक परीक्षा में सफलता नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों से लड़कर सपनों को साकार करने की प्रेरणादायक कहानी है।

माता-पिता के असमय निधन के बाद भी पूजा ने हिम्मत नहीं हारी। ताऊ रघुवर सिंह फर्त्याल और ताई कलावती देवी ने माता-पिता का स्नेह देकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। पूजा ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प से साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, सफलता का रास्ता हमेशा खुला रहता है।

पूजा की इस शानदार सफलता पर पूरे चम्पावत जिले और क्षेत्रवासियों को गर्व है। हम उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं।


🎉👏🌺

Tanakpur Lohaghat ki wadiya Lohaghat & Champawat - Pithoragarh - Uttarakhand t लडीधूरा महोत्सव बाराकोट Champawat News 24×7 जिला पंचायत फरतोला Lohaghat Champawat

30/05/2026

अपने बच्चों और परिवार जनों का ख्याल रखें, जिस तरह स्मार्ट फोन ने मानव से स्मार्ट का टैग छीन लिया है और परिवार मे ही यह कलह का कारण बनता जा रहा है, कई नौजवानों का भविष्य खत्म कर दिया है, और कई लोगों को बर्बादी के रास्ते लगा दिया है, स्मार्ट फोन का यूज स्मार्ट तरीके से करें तो यह आपके और आपके परिवार के लिए वरदान है अगर स्मार्ट तरीके से नहीं करते हो तो यह अभिशाप है 🎤🙏



Phc Barakot Lohaghat Champawat Lohaghat APNA CSC Barakot Tanakpur Lohaghat ki wadiya Devidhura ,Champawat,Uttarakhand

28/05/2026

बड़े भाई स्वo ललित वर्मा ग्राम फरतोला जिन्होंने बाराकोट क्षेत्र को नई ऊचाई में ले जाने की सकरात्मक सोची थी,लेकिन अल्प काल मै उनकी मृत्यु हो जाने के कारण वह सब धरी की धरी रह गयी, आज उनके पुत्र भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती होकर देश सेवा करेंगे, त्रियांशु वर्मा ढाई किलोमीटर की खड़ी चढाई चढ़कर अध्यन के लिए आते थे, उनकी कड़ी मेहनत और अपने चाचा( अनिल वर्मा फार्मसिस्ट )और चाची (प्रियंका वर्मा अध्यपिका alpine convent school )के मार्गदर्शन व ईष्ट देवता के आशीर्वाद से सफलता हासिल कर गांव और पूरे बाराकोट क्षेत्र का नाम रोशन किया 🙏

माँ भगवती माँ काली की कृपा दृष्टि सदैव आप पर बनी रहे आप निरंतर नये आयामो को छुए 💐🙏

APNA CSC Barakot Phc Barakot G I C Barakot जिला पंचायत फरतोला

26/05/2026
23/05/2026

माँ लड़ी धूरा महोत्सव मेला 2024 की कुछ यादें माँ भगवती माँ काली की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे ❤🙏



APNA CSC Barakot Lohaghat Champawat Tanakpur Lohaghat ki wadiya Phc Barakot Devidhura ,Champawat,Uttarakhand

Address

Barakot
Champawat

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when लडीधूरा महोत्सव बाराकोट posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share

Category