26/01/2021
खली खली न्यूज़ ' एक झूठ की दुकान '
दीपेंद्र हुड्डा व MB की दलाली की दुकान हुई बेनकाब
- क्या यह सही है कि इस दुकान के मालिक दीपेंद्र हुड्डा व MB के हाथों में खेल रहे हैं?
- क्या यह सही है कि एक षड्यंत्र के तहत इस दुकान के माध्यम से दिग्विजय चौटाला को किया जा रहा है विशेष रूप से टारगेट?
- क्या यह सही है कि इस दुकान के मालिक की महत्वाकाक्षाएं बड़ी व नाजायज थी जो दुष्यंत ने पूरी करने से मना कर दिया?
- क्या यह सही है कि यह दुकानदार अपने आका के इशारे पर दुष्यंत व उनके परिवार को बदनाम करने के लिए पूरा जोर लगाए हुए है?
- क्या यह सही है कि खली खली एक न्यूज प्लेटफॉर्म के नाम पर MB की राजनीतिक दलाली का एक अड्डा बनकर रह गया है?
- क्या यह सही है कि इस दुकान का मालिक जेजेपी के खिलाफ झूठे प्रोपेगेंडा चलाने का सस्ता व फुस्स हथियार बनकर रह गया है?
- क्या यह सही है कि इस दुकान की हकीकत जनता के सामने आ चुकी है व लोगों के बीच अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह खो चुका है?
- क्या यह सही है कि इस न्यूज़ व दलाली की दुकान वालों ने लगातार थूक कर चाटा है?
- क्या यह सही है कि इस चैनल के झूठे प्रोपेंगेंडे की हकीकत लगातार जनता के सामने आती रही है?
- क्या यह सही है कि ये दुकान न्यूज़ एजेंसी के नाम पर एक कलंक है?
उपरोक्त सभी सवालों के जवाब हां में हैं।
हरियाणा की राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले सभी लोग जानते हैं कि सबसे फर्जी, प्रोपेगेंडा, झूठी कहानियों व षडयंत्रकारी खबरों से भरा कंटेंट इस दुकान पर देखने को मिलता है। इस तथाकथित न्यूज एजेंसी के चरित्र व कार्यपद्धति से राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले व सोशल मीडिया पर सक्रिय लोग जानते हैं। इस न्यूज़ प्लेटफॉर्म रूपी दुकान व दलाली के अड्डे के मालिक की तथाकथित पत्रकारिता का हमेशा निष्पक्षता से हटकर एक निश्चित एजेंडा रहा है। जो लोग इस दुकान व इसके मालिक को शुरू से जानते हैं उन्हें पता है कि इस प्लेटफॉर्म पर शुरू दिन से ही निष्पक्ष खबरों के अलावा सब कुछ मिलता है। इस दुकान के मालिक शुरू से ही समय समय पर अपने विचारों को बदलते, अपनी बात से पलटते अर्थात थूक कर चाटते रहे हैं।
बात करते है शुरू से, जब इस दुकान में सामान नहीं हुआ करता था। ये बात सर्वविदित है कि हरियाणा के सभी नेताओं में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के समर्थक सोशल मीडिया पर सबसे अधिक मजबूत व सक्रिय है। इन्होंने देखा कि अगर दुष्यंत चौटाला के बारे में अच्छा लिखना शुरू करेंगे तो उनके समर्थकों के माध्यम से नई नई दुकान का अच्छा खासा प्रचार प्रसार हो जाएगा। दुष्यंत चौटाला के समर्थकों के प्रचार प्रसार व समर्थन से इस दुकान के मालिक को इतना हौंसला मिला कि वह अपनी औकात ही भूल गए। दुष्यंत चौटाला के डिप्टी सीएम बनने के बाद इन्हें सरकार में किसी बेहद मोटी भूमिका व उसके माध्यम से लूट खसोट की पूरी पूरी तमन्ना थी। अब दुष्यंत ठहरे नए जमाने के मंझे हुए नेता, उन्होंने सरकार के शुरुआती कुछ महीनों में ही उनके मंसूबों को पहचान लिया व उनके सभी नाजायज कामों को करने से मना कर दिया। इस बात से इस दुकान के मालिक इतने बिफर गए कि सरकार बनने के 100 दिन के अंदर ही पूरी पूरी पलटी मार गए अर्थात अपनी पुरानी आदत के अनुसार थूक कर चाट गए। आलम यह हुआ कि विपक्षियों व सत्ता के दलालों के इशारों पर दुष्यंत व उनके परिवार को बदनाम करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
ये इतने पर ही नहीं रुके, इन्होंने लोगों के बीच दुष्यंत चौटाला के परिवार को लेकर भी तरह तरह का झूठा माहौल बनाने की कोशिश की। लेकिन झूठ के कोई पांव नहीं होते, इनके सभी दावे बेहद खोखले, झूठे और बिना किसी सबूत के थे और इनके हर नए प्रोपेगेंडा, झूठ व दावे इनकी हक़ीक़त भी जनता के सामने लाते चले गए। आज हरियाणा की राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले सोशल मीडिया पर सक्रिय लोग जानते हैं कि मसालेदार राजनीतिक झूठ व प्रोपेगेंडा इस प्लेटफॉर्म पर ही मिलता है। अपने आप को न्यूज़ एजेंसी कहने वाली इस दुकान के मालिक को दीपेंद्र हुड्डा व
MB की दलाली करने के सिवा पत्रकारिता का 'प' भी नहीं आता। इस दुकान के मालिक के बड़े बड़े सपने और महत्वाकांक्षा तो थी लेकिन दुष्यंत चौटाला की राजनीतिक दूरदर्शी, पारदर्शी व विकास शील सोच व उनके उसूलों के सामने उसकी एक न चली।
लेकिन इन्होंने तुरंत थूक कर चाटने की ऐसी मिसाल पेश की कि गिरगिट भी शरमा जाए। इस दुकान के मालिक यह भूल गए कि अपनी टीस निकालने के लिए जो बिना सिर पैर की बात वो लिखते हैं, इससे उनकी दुकान का ही स्तर गिरता है।
खरी खरी बात ये है कि अब यह चैनल अपने आकाओं के लिए राजनीतिक दलाली व डिप्टी सीएम और उनके परिवार को बदनाम करने का एक फुस्स हुआ हथियार बनकर रह गया है। खरी खरी बात यह भी है कि अब समय आ गया है इस दुकान के मालिकों को इसके नाम से न्यूज़ हटाकर राजनीतिक दलाली की दुकान लिख लेना चाहिए क्योंकि दलाली, चाटुकारिता, झूठा प्रोपेगेंडा ही इस प्लेटफॉर्म की वास्तविकता है। अब इस दुकान के मालिकों के लिए समय है कि अपने मुंह से पत्रकारिता का मुखौटा हटाएं और अपनी शक्तियों का सही इस्तेमाल करते हुए फुल टाइम दीपेंद्र हुड्डा व MB की दलाली में उतर जाएं। इससे पत्रकारिता का धर्म व कार्य भी कलंकित ना हो और अपने आका के लिए राजनीतिक दलाली का काम पूरा मन लगाकर प्रभावी तौर पर कर पाएं।
🖋️ आपके शुभचिंतक