Chaudhary Devi Lal

Chaudhary Devi Lal Chaudhary Devi Lal (also known as "Tau") was an Indian Politician. He became the Deputy Prime Minister of India in 1989

05/09/2024

युवा सोच और युवा जोश के साथ...

पूरे भारत में बुढ़ापा पेंशन लागू करने वाले चौ. देवीलाल जी पहले मुख्यमंत्री थे।उस समय की एक दुर्लभ तस्वीर। विरोधियों ने इ...
15/09/2023

पूरे भारत में बुढ़ापा पेंशन लागू करने वाले चौ. देवीलाल जी पहले मुख्यमंत्री थे।
उस समय की एक दुर्लभ तस्वीर। विरोधियों ने इस घोषणा का बहुत विरोध किया था लेकिन जननायक ने अपना वादा निभाया और पेंशन लागू की। आज पूरे भारत देश में राज्य सरकारें पेंशन देती और इसका श्रेय चौधरी देवीलाल जी को जाता है।

21/06/2023
Tau 🙏
25/09/2022

Tau 🙏

06/04/2022

#ताऊ_तुझे_सलाम
भारत के पूर्व उपप्रधानमंत्री स्वर्गीय जननायक चौधरी देवी लाल जी की पुण्यतिथि पर उन्हें हम सब की ओर से शत शत नमन।

चौधरी देवीलाल जी ने हरियाणा ही नहीं बल्कि देश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी। वो किसान, खेतिहर मजदूरों और गरीब गुरबों की आवाज उठाने वाले नेता के तौर पर जाने जाते थे। हरियाणा के मुख्यमंत्री से लेकर देश के उप-प्रधानमंत्री तक बने, लेकिन किसान राजनीति को नहीं छोड़ा और राष्ट्रीय कृषि नीति व जल नीति बनवाने में अहम भूमिका अदा की।

चौधरी देवीलालचौधरी देवी लाल के पिता का नाम चौधरी लेख राम था व माता जी का नाम श्रीमती शुंगा देवी था । उनका जन्म हिसार जिल...
06/04/2022

चौधरी देवीलाल

चौधरी देवी लाल के पिता का नाम चौधरी लेख राम था व माता जी का नाम श्रीमती शुंगा देवी था । उनका जन्म हिसार जिले के तेजाखेड़ा गांव में 25 सितंबर 1914 को हुआ था। देवी लाल की पैतृक जड़ें राजस्थान के बीकानेर से जुडी हुई थी, जहाँ से उनके परदादा तेजराम चले गए थे। 1919 में जब लाल पाँच साल के थे, तब उनके पिता लेखराम, चौटाला गाँव आ गए ।चौधरी देवी लाल ने अपने स्कूल की दसवीं की पढ़ाई छोड़कर सन् 1929 से ही राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया था।

राजनीतिक जीवन

उन्होंने भारतीय राजनीतिज्ञों के सामने अपना जो चरित्र रखा वह वर्तमान दौर में बहुत प्रासंगिक है। चौधरी देवीलाल उन कुछ चुनिंदा राजनीतिज्ञों में से हैं जो आजादी के बाद तथा आजादी के पहले दोनों ही समय में भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। देश की आजादी के बाद जब पहली बार चुनाव हुए तब हरियाणा पंजाब राज्य का हिस्सा था और वहां हुए विधानसभा चुनावों में चौधरी देवीलाल पहली बार सन1952 में पंजाब विधानसभा के सदस्य और 1956 में पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। उसके बाद पुनः 1957 तथा 62 मैं भी पंजाब विधानसभा के सदस्य रहे। 1962 से 1966 तक हरियाणा को पंजाब से अलग राज्य बनवाने में निर्णायक भूमिका निभाई। प्रदेश के निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले चौधरी देवीलाल को हरियाणा निर्माता के तौर पर जाना जाने लगा। देवी लाल 1971 तक कांग्रेस में थे । 1977 में वो जनता पार्टी में आ गए ।

देवी लाल जी ने सन् 1977 से 1979 तथा 1987 से 1989 तक हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में जनकल्याणकारी नीतियों के माध्यम से पूरे देश को एक नई राह दिखाई। केन्द्र में प्रधानमंत्री के पद को ठुकरा कर भारतीय राजनीतिक इतिहास में त्याग का नया आयाम स्थापित किया।

आज के दौर में कल्पना करना मुश्किल है कि भारत में ऐसा कोई नेता रहा है जो बहुमत से संसदीय दल का नेता मान लिए जाने के बाद भी अपनी जगह किसी दूसरे शख़्स को प्रधानमंत्री बना देता हो । लेकिन हरियाणा के चौधरी देवीलाल ने ये कर दिखाया था, पहली दिसंबर, 1989 को आम चुनाव के बाद नतीजे आने के बाद संयुक्त मोर्चा संसदीय दल की बैठक हुई और उस बैठक में देवीलाल धन्यवाद देने के लिए खड़े ज़रूर हुए लेकिन सहज भाव से उन्होंने कहा, “मैं सबसे बुजुर्ग हूं, लोग मुझे ‘ताऊ’कहकर बुलाते है इसलिए मुझे ताऊ ही रहने दिया जाए और मैं ये पद विश्वनाथ प्रताप को सौंपता हूं”। देवीलाल के इस वक्तव्य और जिंदादिली को आज भी लोग पसंद करते हैं । चौधरी देवीलाल वी.पी.सिंह सरकार में उप प्रधानमंत्री रहे, वीपी सिंह ने बाद में देवीलाल को अपने मंत्रिमंडल से हटा दिया । 11 महीने बाद ही वीपी सिंह की सरकार गिर गई । बाद में जब चंद्रशेखर ने जनता दल का विभाजन कराया और राजीव गांधी के सहयोग से चार महीने की समाजवादी सरकार के प्रधानमंत्री बने । तब देवीलाल ने भी चंद्रशेखर गुट को अपना समर्थन दिया और चंद्रशेखर की सरकार में भी उप प्रधानमंत्री बने । उन्होंने वी पी सिंह और चंद्र शेखर की सरकारों में 1989 से 1991 तक भारत के 6 वें उप प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।

सन 1972 में हरियाणा में विधानसभा चुनाव हुए और देवीलाल भजनलाल और बंसीलाल दोनों से नाराज हो गए । नाराज होकर उन्होंने आदमपुर और तोशाम दोनों ही सीटों से निर्दलीय पर्चा भर दिया और दोनों सीटों पर चुनाव हार गए ।

कुछ किस्से देवीलाल के

देवीलाल के राजनीतिक जीवन से कई रोचक किस्से जुड़े हैं, उनमें से एक है बलराम जाखड़ को हराना था. बात उन दिनों की है जब 1989 में उन्होंने राजस्थान के सीकर से खड़े होकर बलराम जाखड़ को लोकसभा चुनाव में हराया था. बलराम जाखड़ लोकसभा स्पीकर हुआ करते थे और अपने क्षेत्र में कहा करते थे कि प्रधानमंत्री भी मुझसे पूछकर बोलते हैं. पर देवीलाल ने नारा बुलंद किया- चारा चोर, कमीशनखोर, सीकर छोड़, सीकर छोड़. ये भारी पड़ गया.
आपातकाल के समय चौ. देवीलाल को जब गिर तार कर महेन्द्रगढ़ के किले में बंद कर दिया गया था। एक छोटी सी कालकोठरी में जहां दो व्यक्ति भी नहीं सो सकते, चौधरी देवीलाल, मनीराम बागड़ी, सहित तीन व्यक्तियों को कोठरी में बंदी बनाया गया। ऐसे में संतरी शाम को 6 बजे कोठरी में ताला लगाता था और प्रात: 9 बजे ताला खोलता था। एक साथ कोठरी में दो व्यक्ति को लेटना पड़ता था तथा तीसरा व्यक्ति कपड़े से हवा झोलता था, क्योंकि कोठरी में जहां एक ओर दो ही व्यक्तियों के लेटने की व्यवस्था थी, वहीं दूसरी ओर मोटे-मोटे मच्छरों की भरमार थी। बिजली-पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। कोठरी में केवल एक ही छेद था, जिसमें से रोशनी आती थी। इतना ही नहीं वहां पर शौचालय की भी सुविधा नहीं थी। वे कभी भी कठिन से कठिन परिस्थितियों में मुर्झाए नहीं और उन्होंने विपरित से विपरित परिस्थितियों में संघर्ष करने की प्रेरणा दी। उन्हें विश्वास था कि एक दिन हमारा संघर्ष रंग लाएगा और हरियाणा की जनता को न्याय मिलेगा।

चौधरी देवी लाल अक्सर कहा करते थे कि भारत के विकास का रास्ता खेतों से होकर गुजरता है, जब तक ग़रीब किसान, मज़दूर इस देश में सम्पन्न नहीं होगा, तब तक इस देश की उन्नति के कोई मायने नहीं हैं। इसलिए वो अक्सर यह दोहराया करते थे- “हर खेत को पानी, हर हाथ को काम, हर तन पे कपड़ा, हर सिर पे मकान, हर पेट में रोटी, बाकी बात खोटी“

ताऊ का था अंदाज निरालागांव गरीब का था रखवाला...
22/07/2019

ताऊ का था अंदाज निराला
गांव गरीब का था रखवाला...

श्रद्धांजलि व नमन।
29/05/2019

श्रद्धांजलि व नमन।

Address

Chandigarh

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Chaudhary Devi Lal posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share