BSP - The Voice of Marginalized

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Social Justice, Economic Empowerment

एक मंच जहाँ समाज के हाशिए पर रहने वालों की आवाज़ सुनी जाती है। हम सामाजिक न्याय, समानता और बहुजन हित के मुद्दों को उजागर करते हैं।"

14/04/2026

बाबा साहब अम्बेडकर 🙏🙏🌺🌺

14/04/2026
14/04/2026
भारत रत्न, बोधिसत्व, परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर मैं उन्हें कोटि-कोटि नमन करता हूँ और पुष्पां...
14/04/2026

भारत रत्न, बोधिसत्व, परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर मैं उन्हें कोटि-कोटि नमन करता हूँ और पुष्पांजलि एवं श्रद्धा-सुमन अर्पित करता हूँ।

बाबा साहेब ने भारत के संविधान में देश के गरीबों, उपेक्षितों, शोषितों तथा जातिवाद एवं सामंतवाद से पीड़ित महिलाओं सहित समस्त 'बहुजन समाज' की सुरक्षा, सम्मान एवं विकास को सुनिश्चित किया।

हम नौजवान बाबा साहेब के 'सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति' के कारवाँ को जारी रखेंगे।

जय भीम, जय भारत

*RBI की स्थापना में बाबा साहब डा. भीमराव आम्बेडकर जी का योगदान*हिल्टन यंग कमीशन को सुझाव: 1925-26 में जब 'रॉयल कमीशन ऑन ...
01/04/2026

*RBI की स्थापना में बाबा साहब डा. भीमराव आम्बेडकर जी का योगदान*
हिल्टन यंग कमीशन को सुझाव: 1925-26 में जब 'रॉयल कमीशन ऑन इंडियन करेंसी एंड फाइनेंस' (जिसे हिल्टन यंग कमीशन भी कहा जाता है) भारत आया, तो बाबासाहेब ने उसके सामने एक केंद्रीय बैंक की स्थापना के लिए ठोस दिशा-निर्देश और सुझाव पेश किए थे।
प्रसिद्ध पुस्तक का प्रभाव: RBI की परिकल्पना काफी हद तक बाबासाहेब की किताब 'द प्रॉब्लम ऑफ द रुपी: इट्स ओरिजिन एंड इट्स सॉल्यूशन' (The Problem of the Rupee: Its Origin and Its Solution) में दिए गए सिद्धांतों पर आधारित थी। कहा जाता है कि कमीशन के हर सदस्य के पास यह किताब संदर्भ के रूप में मौजूद थी।
आर्थिक विशेषज्ञता: बाबासाहेब केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि एक प्रशिक्षित अर्थशास्त्री भी थे। उन्होंने एक ऐसी स्वतंत्र संस्था की वकालत की थी जो देश की मुद्रा और साख (credit) को नियंत्रित कर सके, जिससे आगे चलकर 1935 में RBI अस्तित्व में आया।

यूपी व देश का राजनीतिक इतिहास इस बात का गवाह है कि जब-जब और जहाँ-जहाँ बी.एस.पी. मज़बूत हुई है तब-तब सर्वसमाज में से ख़ास...
23/03/2026

यूपी व देश का राजनीतिक इतिहास इस बात का गवाह है कि जब-जब और जहाँ-जहाँ बी.एस.पी. मज़बूत हुई है तब-तब सर्वसमाज में से ख़ासकर दलितों, आदिवासियों, ओबीसी, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के करोड़ों शोषित पीड़ित लोगों को उनका संवैधानिक अधिकार मिलना सुनिश्चित हुआ है अर्थात् जीवन के हर क्षेत्र में स्वाभाविक तौर पर उन सबका भरपूर भला हुआ है। चाहे ओबीसी समाज को मण्डल आयोग की सिफारिश के मुताबिक सरकारी नौकरी व शिक्षा में 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मुद्दा हो, देश में पहली बार अन्य पिछड़ा वर्ग मंत्री व मंत्रालय बनाने की पहल हो, पार्टी व सत्ता में उनकी भागीदारी का मामला हो या फिर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को 'भारतरत्न' की उपाधि से सम्मानित करने का मामला हो, यह सब कुछ बी. एस.पी. की स्थापना, उसकी मज़बूती व यूपी में पार्टी की अब तक चार बार बनी सरकार बनने पर ही संभव हो पाया है।

देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले अमर शहीदों भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन...
23/03/2026

देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले अमर शहीदों भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। वतन की आन-बान-शान के लिए समर्पित उनका जीवन हमेशा हमें प्रेरणा देता रहेगा।

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।

#शहीद_दिवस

सवाल पानी का नहीं बल्कि मानव अधिकारों की स्थापना का है” - बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकरआज ही के दिन 20 मार्च 1927 को महार...
20/03/2026

सवाल पानी का नहीं बल्कि मानव अधिकारों की स्थापना का है” - बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर

आज ही के दिन 20 मार्च 1927 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के महाड़ में दलितों को सार्वजनिक चावदार तालाब से पानी पीने और इस्तेमाल करने का अधिकार दिलाने के लिए बाबासाहेब ने महाड़ सत्याग्रह की शुरुआत की थी। ये वंचित तबके के अधिकारों और आत्मसम्मान की लड़ाई को आगे बढ़ाने का ऐतिहासिक संघर्ष था।

आजादी के बाद पहली बार बिहार से कोई चमार जाति से राज्यसभा जा रहा है। ऐसा इस न्यूज पोर्टल का कहना है। हालाँकि एक या दो और ...
19/03/2026

आजादी के बाद पहली बार बिहार से कोई चमार जाति से राज्यसभा जा रहा है। ऐसा इस न्यूज पोर्टल का कहना है। हालाँकि एक या दो और भी है।

जबकिं चमार जाति की जनसँख्या बिहार में 6% के लगभग है।

हर जगह यह ही हाल था। मूंछो पर ताव देकर आजादी से चलने वालों को समझना चाहिए कि उत्तत प्रदेश में भी ऐसे हालात होने के बाद सीधा चार बार सरकार बनाई और राज्यसभा भेज ने का आग्रह की जगह दुसरो को भेजने वाले बने।

क्या यह आसान था। मान्यवर व बहनजी की कुशलता है कि उन्होंने इसे आसान कर दिया।

विकास कुमार जाटव

मान्यवर कांशीराम साहब के लिए भारत रत्न की मांग करना वस्तुतः सूरज को दिया दिखाने जैसा है। यह मांग सुनने में सम्मानजनक लग ...
17/03/2026

मान्यवर कांशीराम साहब के लिए भारत रत्न की मांग करना वस्तुतः सूरज को दिया दिखाने जैसा है। यह मांग सुनने में सम्मानजनक लग सकती है, लेकिन बहुजन आंदोलन की वैचारिक परंपरा के संदर्भ में यह एक गहरी उलझन को जन्म देती है।
कांग्रेस हो बीजेपी या अन्य विपक्षी दल, उनके लिए यह केवल प्रतीकात्मक राजनीति का विषय हो सकता है, क्योंकि उन्हें बहुजन दर्शन तथा कांशीराम साहब के विचारों की गहराई का उतना ज्ञान नहीं है। लेकिन बहुजन समाज का जागरूक कैडर और बहुजन समाज पार्टी अच्छी तरह जानते हैं कि मान्यवर कांशीराम साहब स्वयं ऐसे राज्य पुरस्कारों के पक्ष में नहीं थे।
जब बाबा साहेब अम्बेडकर को भारत रत्न दिया गया था, तब कांशीराम साहब ने स्पष्ट कहा था कि इस पुरस्कार की हमारे लिए कोई विशेष महत्ता नहीं है। उन्होंने यह तक कहा था कि अवसर आने पर हम महात्मा गांधी को यह पुरस्कार दे देंगे। उनका आशय साफ था बाबा साहब का व्यक्तित्व और उनका ऐतिहासिक योगदान किसी भी सरकारी सम्मान से कहीं अधिक बड़ा है। यही मापदंड साहेब कांशीराम के लिए भी लागू होता है।
ऐसे में आज यदि बहुजन समाज पार्टी का नेतृत्व कांशीराम साहब के लिए भारत रत्न की मांग उठाता है, तो वह इस वैचारिक उलझन को दूर करने के बजाय और बढ़ा रहा है। क्योंकि इससे यह सवाल उठता है कि क्या आज का नेतृत्व स्वयं कांशीराम साहब की वैचारिक स्पष्टता और राजनीतिक दृष्टि को समझ पा रहा है या नहीं।
कांशीराम साहब ने बहुजन आंदोलन को पुरस्कारों की राजनीति नहीं सिखाई थी। उन्होंने बहुजन समाज को यह सिखाया था कि “सत्ता ही मास्टर चाबी है” और सामाजिक परिवर्तन की असली लड़ाई सत्ता, संगठन और वैचारिक स्पष्टता से लड़ी जाती है, न कि सरकारी सम्मानों की प्रतीक्षा से।

इसलिए बहुजन आंदोलन के सामने असली प्रश्न यह नहीं है कि कांशीराम साहब को भारत रत्न मिले या नहीं। असली प्रश्न यह है कि क्या हम उनके मिशन 'बहुजन समाज को संगठित कर सत्ता परिवर्तन की दिशा में ले जाने' को आगे बढ़ा पा रहे हैं या नहीं। यह मांगने की राजनीति साहेब की रणनीति का निषेध है।

#कांशीराम

औवेशी व बसपा के विधायक ने;"आरजेडी महागठबंधन के राज्यसभा प्रत्याशी को वोट दिया"लेकिनस्वयं आरजेडी का 1 विधायककोंग्रेस के 3...
17/03/2026

औवेशी व बसपा के विधायक ने;

"आरजेडी महागठबंधन के राज्यसभा प्रत्याशी को वोट दिया"

लेकिन

स्वयं आरजेडी का 1 विधायक
कोंग्रेस के 3 विधायक गायब मिले।

वोट डालने नही आये।।

जब जब इन धरा पर;

"भाजपा संकट में आई है, तब-तब कोंग्रेस अवतार बनकर भाजपा की रक्षक बनकर आई है"

☺️😊☺️😊☺️😊

शोषकों के विरुद्ध, शोषितों की ललकार: मान्यवर साहब कांशीराम! 💙​आज भारतीय राजनीति के महान रणनीतिकार, बहुजन चेतना के प्रतीक...
15/03/2026

शोषकों के विरुद्ध, शोषितों की ललकार: मान्यवर साहब कांशीराम! 💙

​आज भारतीय राजनीति के महान रणनीतिकार, बहुजन चेतना के प्रतीक और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के संस्थापक मान्यवर साहब कांशीराम जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
​कांशीराम जी ने हमें सिखाया कि:-
​"सत्ता की चाबी उसी के पास होती है, जिसके पास संगठित समाज होता है।"
​साहब के जीवन के प्रमुख पड़ाव:--
संगठन की शक्ति: BAMCEF और DS4 के माध्यम से उन्होंने शिक्षित वर्ग को समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी (Pay Back to Society) का अहसास कराया।
शासक बनने का सपना: उन्होंने 'याचक' (Beggar) बने समाज को 'शासक' (Ruler) बनने का हुनर सिखाया।
मजबूत नेतृत्व: 1984 में BSP की स्थापना कर राजनीति में बहुजन सत्ता का नया अध्याय लिखा।
त्याग की मिसाल: अपना घर, नौकरी और निजी जीवन त्याग कर समाज को समर्पित कर दिया।
​साहब का अमर संदेश: "जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी!"
​आज के दिन हम संकल्प लेते हैं कि साहब के अधूरे सपनों को पूरा करेंगे और समाज को वैचारिक व राजनीतिक रूप से और अधिक सशक्त बनाएंगे।
​जय भीम! जय भारत! जय कांशीराम!

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