29/05/2026
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एआई चैटबॉट ‘खुशी’ बताएगी टीबी से बचने और ठीक होने का रास्ता, स्वास्थ्य विभाग का नया डिजिटल मिशन शुरू
• टीबी उन्मूलन अभियान को डिजिटल ताकत
• ‘टीबी मुक्त भारत’ ऐप से मरीजों को मिलेगी घर बैठे सहायता
• मरीजों, निक्षय मित्रों और स्वास्थ्यकर्मियों को एक मंच पर जोड़ेगा ऐप
छपरा। टीबी मुक्त परिकल्पना को साकार करने और लक्ष्य को गति देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने डिजिटल तकनीक का सहारा लेते हुए एक बड़ी पहल की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा विश्व टीबी दिवस के अवसर पर 24 मार्च 2026 को लॉन्च किया गया “टीबी मुक्त भारत” मोबाइल एप अब टीबी के खिलाफ चल रहे राष्ट्रीय अभियान का अहम हिस्सा बन गया है। यह एप्लिकेशन न केवल मरीजों को उपचार और परामर्श की सुविधा देगा, बल्कि सामुदायिक भागीदारी को भी मजबूत करेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अपर सचिव एवं मिशन निदेशक आराधना पटनायक द्वारा जारी निर्देश के अनुसार राज्य एवं जिला स्तर पर इस ऐप के व्यापक प्रचार-प्रसार और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सभी स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्यकर्मियों और सामुदायिक संगठनों को सक्रिय किया जा रहा है।
मरीजों, निक्षय मित्रों और स्वास्थ्यकर्मियों को एक मंच पर जोड़ेगा ऐप
यह मोबाइल एप एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है, जो टीबी रोगियों, निक्षय मित्रों, स्वयंसेवकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को एक मंच पर जोड़ता है। सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से सामुदायिक जागरूकता, शीघ्र जांच, उपचार अनुपालन और पोषण सहायता को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
एआई चैटबॉट ‘खुशी’ बनेगी मरीजों की ई-संगिनी
इस एप की सबसे खास विशेषता इसका एआई आधारित इंटरैक्टिव चैटबॉट “खुशी” है। यह चैटबॉट हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, गुजराती, ओड़िया, तमिल, तेलुगु, बंगाली, कन्नड़, उर्दू, पंजाबी और मलयालम सहित 12 भाषाओं में सहायता प्रदान करता है। “खुशी” चैटबॉट मरीजों और आम नागरिकों को टीबी के लक्षण, जांच, उपचार, पोषण, दवा सेवन और अक्सर पूछे जाने वाले सवालों की जानकारी टेक्स्ट और आवाज दोनों माध्यमों से उपलब्ध कराता है। इसे एक तरह से डिजिटल “ई-निक्षय मित्र” के रूप में विकसित किया गया है, जो मरीजों को मानसिक और सामाजिक सहयोग भी प्रदान करेगा।
मरीजों को मिलेगा दवा और जांच का रिमाइंडर
मोबाइल एप के जरिए टीबी मरीजों को दवा लेने के लिए दैनिक रिमाइंडर मिलेगा। साथ ही वे अपने उपचार की प्रगति भी देख सकेंगे और जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों से संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकेंगे। इससे मरीजों में उपचार छोड़ने की प्रवृत्ति कम होगी और समय पर इलाज पूरा होने की संभावना बढ़ेगी।
निक्षय मित्र और स्वयंसेवकों को भी मिलेगा लाभ
एप में निक्षय मित्रों और स्वयंसेवकों के लिए भी विशेष सुविधा दी गई है। इसके माध्यम से वे टीबी मरीजों को पोषण सहायता और मनोसामाजिक सहयोग प्रदान कर सकेंगे। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भू-टैग वाली तस्वीरें अपलोड करने की सुविधा भी दी गई है, जिससे सहायता कार्यों की निगरानी आसानी से हो सकेगी।
स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण देने का निर्देश
सरकार ने सभी जिलों और स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिया है कि इस ऐप का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाए। मेडिकल ऑफिसर, सीएचओ, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, निक्षय मित्र, माय भारत स्वयंसेवक, टीबी विजेता और सामाजिक संगठनों को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही “माय गवर्नमेंट” प्लेटफॉर्म पर टीबी प्रतिज्ञा अभियान भी चलाया जा रहा है, जिसमें लोगों से टीबी उन्मूलन के लिए सहयोग की अपील की जा रही है।
सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि “टीबी मुक्त भारत” मोबाइल ऐप के जरिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा और देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।