25/07/2022
वह पथ क्या, पथिक कुशलता क्या,
जिस पथ पर बिखरे शूल न हों।
नाविक की धैर्य परीक्षा क्या,
जब धाराएं प्रतिकूल न हों।।
:- अज्ञात
जीवन में आप जब विपत्तियों से जूझ रहे हों तो ऐसे में कुछ इंसानों के भेष में छिपे सर्प अपने विष के समान वचनों को भी मुखारविंद से निकालने से बाज नहीं आते। ऐसे समय में आपका आत्मसंयम और कभी न हार मानने वाला व्यक्तित्व बहुत मायने रखता है। उन विषाक्त बाणों को आप तब ही असफ़ल कर पाएंगे जब आपने आत्म-विश्वास का आवरण ओढ़ रखा हो। हर समय आपका ध्यान उन लोगों के ऊपर न होकर स्वयं के उत्थान पर ही होना चाहिए। उन लोगों को अपने शब्दों से नहीं अपनी सफ़लता से आश्चर्यचकित कीजिए। ऐसे चमत्कारों से उन्हें अचंभित कीजिए जिनकी उन्होंने स्वप्न में भी कल्पना न की हो। स्वयं पर और उस परमशक्ति पर विश्वास कीजिए जो आपको कभी असफ़ल नहीं होने देगी। निश्चित ही विजय आपका आलिंगन करेगी।
जय श्री कृष्ण।