27/08/2020
इसे जरूर पढ़े 👇आदिवासी हिन्दू नहीं हैआदिवासी आर्यधर्म/ब्राह्मणधर्म से (हिन्दू) नहीं..----------------------------------------------------------संदर्भ प्रमाण-विभिन्न न्यायालय के निर्णय, भारतीय संविधान ,आदिवासी संस्कृति, बोली-भाषा, देवी-देवता संबंधी मान्यता, पूजा पद्धति, परंपरा, रीति-रिवाज, पुरातत्वीय शोध, मानव वंश शास्त्र, शरीर रचना विज्ञान, नस्ल वंशीय इतिहास, DNA research इत्यादि सभी तरह से सिद्ध हुआ है, कि आदिवासी आर्यधर्म/ब्राह्मण धर्म (हिन्दू)नहीं है।महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय-
1. मा.सुप्रीम कोर्ट- case no.10367/ 2010 (5 Jan.2011) (भील)
2. मा. हाईकोर्ट जबलपूर(मध्यप्रदेश) रेवन्यू निर्णय 100/1990 रामगुलाम बनाम नारायण (बहेलिया)
3. मध्यप्रदेश रेवन्यू निर्णय क्रं.191/1980 रामवती बनाम सहोदरी बाई (हल्बा)
4-मा. हाईकोर्ट जबलपूर(मध्यप्रदेश) कुलसिया बाई बनाम पत्ती अपील संख्या-188/1972 में माननीय जज एस एन मिश्रा ने कहा आदिवासी हिन्दू नहीं |
5. मा. कुटुंब न्यायालय बालोद(छ.ग.)बनिहारीन बाई बनाम जोहरुराम भोयर (हल्बा) प्रकरण क्रं.03/07 दि.06/10/20096. सूचना के अधिकार (R.T.I.) के तहत आदिवासी हल्बा समाज बालोद महासभा के प्राप्त दस्तावेज - सु.अ./9/64 दि.15 सितबंर 20097. मध्यप्रदेश लो जनरल प्रकरण क्रं.21/1971 त्रिलोक सिह विरूद्ध गुलबासिया बाई(गोंड)
8. आदिवासी कमिटि के सदस्य के रुप मे जयपाल सिह मुंडा का संविधान सभा मे भाषण संविधान सभा की चर्चाए, ओफिसिअल रिपोर्ट खं-9, खंड-11 (प्रकाशक लोकसभा सचिवालय नई दिल्ली 1999)
9-शारदा एक्ट 1928, हिन्दू मैरिज एक्ट 1955, हिन्दू कोड बिल 1956 आदिवासियों पर प्रभावी नहीं है | हिन्दू होते तो प्रभावी होता | पढ़े हिन्दू मैरिज एक्ट 1955 धारा -2(2) Not with standing anythingcontained in sub section (1),nothing contained in this Act shall apply to the member of any scheduled tribe (ST)within the meaning of close (25) of article 366 of the constitution unless the central Government by notification in the official Gazette .
10. जबलपुर उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश श्री एस पी सेन ने अपने निर्णय में निर्धारित किया की आदिवासी जातिया हिन्दुओं में नहीं आती है | निर्णय में स्पष्ट करते हुए कहा की मूलनिवासी आदिकाल से रहने वालेअनार्य है |वे इस धरा के शासक थे वे आर्यों की वर्ण व्यवस्था का हिस्सा नहीं अवर्ण है।
11. ‘द कैंब्रिज हिस्ट्री ऑफ इंडिया’ (वॉल्यूम-1)पृष्ट-539 वर्ष 1894-95 के माध्यम से रेपसन ने यही साबित किया गया है, कि द्रविडों के आने से पहले भी यहां पर आदिवासी रहते थे और वर्तमान मुंडा, भील, मीना आदि उनके ही वंशज हैं।
12. डॉ.ए पी करमाकर ने ''the Religions indiap.149 पर उल्लेख किया है, कि प्रोटो इन्डियन लोगो में मछली का महत्वपूर्ण स्थान था मीन नाम द्रविड़ो ने दिया आर्यों ने मत्स्य कहा।
13. बी.जी गोखले ने ''असेंट इण्डिया '' में उल्लेख किया है की मत्स्य संभवतः भारत के प्राचीन आदिवासी थे इसके अतिरिक्त इनके आर्य होने का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है (पृष्ट-198 आदिवासी संस्कृति और प्रथाए -प्रकाश चन्द्र मेहता )
14. पृथ्वी सिंह मेहता विद्यालंकार ने'हमारा राजस्थान ' ग्रन्थ में लिखा है ''आर्यों के पूर्व वर्तमान राजस्थान में वहां के मूलनिवासी आडावला (अरावली) के पहाड़ों और पूर्वी राजस्थान में थे। उनका आर्यकरण करने के कई प्रयास किये गए।
15. दशराज्ञ युद्ध जो रावी नदी के तट परआर्यों और अनार्यों में हुआ, जिसका वर्णन ऋग्वेद के दसवें मंडल में किया गया है, के सम्बन्ध में डॉ नवल वियोगी ने अपने पुस्तक के पृष्ट-138 पर लिखा है, कि इस युद्ध में एक अनार्य जाति मत्स्य शामिल थी जो वर्तमान राजस्थान के भरतपुर,अलवर,जयपुर के क्षेत्र में निवास करती थी।
16. यहाँ हिन्दू शब्द की उत्पत्ति और परिभाषा में न जाये क्योंकी यहाँ हन्दू शब्द आर्य धर्म, ब्राह्मण धर्म के संदर्भ में प्रयोग किया गया है।➡आर्य धर्म/ब्राह्मण धर्म (हिन्दू धर्म) के चारो वर्ण ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र मे से आदिवासी किसी भी वर्ण मे नहीं आते। हम आदिवासियों की कोई भी प्रथा, परंपरा,देवी देवताओं का उल्लेख हिन्दू धर्मग्रंथो मे नहीं है। कुछ प्रभाव जोदिखने लगा है वो लम्बे समय से संपर्क के कारण,हिन्दुकरण.आर्यकरण का प्रभाव है कुछ आदिवासी परम्पराओ को भी उन्होंने अपनाया है | इसे आदिवासी संस्कृति दूषित होना या उसका अपहरण भी कह सकते है |इसलिए आदिवासी हिन्दू नही है। वह प्रक्रितिजिवी है उसकी अपनी संस्कृति,मान्यताये और परम्पराए है जो समृद्ध है | िवासी
Source_ the Indian Robin hood face book page