10/03/2026
“कब तक कर्ज लेकर घी पियेगी भाजपा सरकार?”
मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लगातार कर्ज के दलदल में धकेलती जा रही है। ताज़ा जानकारी के अनुसार राज्य सरकार एक बार फिर 5800 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। चिंताजनक बात यह है कि पिछले एक वर्ष में यह 19वीं बार है जब सरकार बाजार से कर्ज उठा रही है।
होली से ठीक पहले भी सरकार 6300 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। इसका मतलब साफ है कि प्रदेश की सरकार अब विकास नहीं, बल्कि उधारी के सहारे शासन चला रही है।
आज स्थिति यह है कि मध्यप्रदेश पर कुल कर्ज 5 लाख 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। हर साल यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है और इसका सीधा बोझ प्रदेश की आम जनता और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।
भाजपा सरकार बड़े-बड़े विकास के दावे करती है, लेकिन सवाल यह है कि अगर प्रदेश में इतना विकास हो रहा है तो फिर हर कुछ हफ्तों में हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
कांग्रेस पार्टी सरकार से पूछना चाहती है:
क्या इस कर्ज से युवाओं को रोजगार मिला?
क्या किसानों की आय बढ़ी?
क्या शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत हुई?
क्या प्रदेश में उद्योग और निवेश बढ़ा?
अगर इन सवालों का जवाब “नहीं” है, तो साफ है कि भाजपा सरकार प्रदेश के भविष्य को गिरवी रखकर वर्तमान की राजनीति चला रही है।
आर्थिक विशेषज्ञ भी चेतावनी दे रहे हैं कि अगर इसी तरह कर्ज बढ़ता रहा तो आने वाले समय में राज्य की आय का बड़ा हिस्सा सिर्फ कर्ज और ब्याज चुकाने में ही खर्च होगा, जिससे विकास योजनाएं प्रभावित होंगी।
दुर्भाग्य की बात यह है कि भाजपा सरकार सच्चाई बताने के बजाय विज्ञापनों और प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, जबकि प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
अब समय आ गया है कि प्रदेश की जनता सवाल पूछे —
आखिर कब तक कर्ज लेकर घी पियेगी भाजपा सरकार?
अगर यही हाल रहा तो मध्यप्रदेश का आर्थिक भविष्य गंभीर संकट में पड़ सकता है।