31/05/2026
न्याय के लिए अडिग संघर्ष – तरुण तिवारी की एक उल्लेखनीय उपलब्धि
जब एक तथाकथित हाई-प्रोफाइल व्यक्ति अपने पद, प्रभाव और झूठी प्रतिष्ठा के दम पर लोगों का विश्वास जीतकर उन्हें नुकसान पहुँचा रहा था, तब अधिकांश लोग उसके खिलाफ बोलने से भी डरते थे। लेकिन जय हो फाउंडेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री तरुण तिवारी ने भय के बजाय सत्य का साथ चुना।
लगातार 2 वर्षों तक संघर्ष, साक्ष्यों के संकलन, पीड़ितों के साथ समन्वय और कानूनी प्रक्रिया में सहयोग के माध्यम से उन्होंने न्याय की लड़ाई को मजबूती दी। परिणामस्वरूप, आज वह व्यक्ति पिछले 13 महीनों से जेल में है और कानून के समक्ष जवाबदेह बना हुआ है।
यह उपलब्धि किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि उस सोच के विरुद्ध है जो यह मान बैठती है कि प्रभाव, पैसा या पद कानून से बड़ा है। श्री तरुण तिवारी ने यह साबित किया कि यदि कोई नागरिक धैर्य, साहस और सत्य के साथ खड़ा हो जाए, तो न्याय की राह कठिन अवश्य हो सकती है, लेकिन असंभव नहीं।
13 महीनों से जेल में होना , केवल एक कानूनी स्थिति नहीं, बल्कि यह संदेश है कि समाज के साथ छल करने वालों को अंततः अपने कर्मों का परिणाम भुगतना पड़ता है।
आज यह संघर्ष अनेक पीड़ितों के लिए प्रेरणा है और यह दर्शाता है कि एक जागरूक नागरिक समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
"सत्य को दबाया जा सकता है, हराया नहीं जा सकता।"
जय हो फाउंडेशन