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30/05/2026

प्रधानमंत्री को जीवित श्रद्धांजलि देने वाले को मुर्ख नहीं तों क्या स्वामी विवेकानंद कहोगे
मुर्खाधिराज के चेलों
😂🫣🤣

हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा हटाने का फैसला केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार और राजनीतिक प्रतिशोध की मा...
30/05/2026

हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा हटाने का फैसला केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार और राजनीतिक प्रतिशोध की मानसिकता का प्रतीक दिखाई देता है। जब कोई नेता लगातार जनता के मुद्दों को सड़क से लेकर संसद तक उठाता है, किसानों, युवाओं और आम लोगों की आवाज बनकर सरकार से सवाल पूछता है, तब उसका जवाब लोकतंत्र में तर्क और जवाबदेही से दिया जाना चाहिए, न कि दबाव और प्रताड़ना के संकेतों से।
जिस व्यक्ति ने वर्षों से सत्ता के गलत फैसलों को खुलकर चुनौती दी हो, जिसकी आवाज को लाखों लोग सुनते हों, उसकी सुरक्षा को राजनीति का हथियार बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ माना जाएगा। अगर सरकार को लगता है कि विरोध की आवाज सुरक्षा हटाने से कमजोर हो जाएगी, तो यह उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक भूल है। इतिहास गवाह है कि जनसमर्थन से खड़े हुए नेताओं को सरकारी सुविधाओं ने नहीं, बल्कि जनता के विश्वास ने मजबूत बनाया है।
आज सवाल केवल हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा का नहीं है, सवाल यह है कि क्या सरकार आलोचना और विरोध की आवाज को सम्मान देना चाहती है या उसे दबाने का संदेश देना चाहती है। लोकतंत्र में सत्ता की ताकत विरोधियों को कमजोर करने से नहीं, बल्कि आलोचना सुनने की क्षमता से मापी जाती है। यदि किसी नेता की आवाज से पूरी सरकार असहज हो जाती है, तो यह उस नेता की नहीं बल्कि सत्ता की बेचैनी का प्रमाण है। जनता सब देख रही है और समय आने पर हर फैसले का राजनीतिक हिसाब भी जरूर करेगी।
#मुर्खाधीराज

30/05/2026
29/05/2026

आज तक का इतिहास रहा है जो हनुमान से अड़ा है वो उल्टे मुँह गिर पड़ा है.....
उल्टी गिनती शुरू कर दो... कुछ ही दिन रह गए है इस पद पर #राजस्थान_का_CM_मुर्खाधिराज Bhajanlal Sharma है!
Hanuman Beniwal CMO Rajasthan
Rajasthan Police | Mukesh Kumar Jat Download the app → goliveindia.in/download

29/05/2026

मत छेड़ हनुमान की सेना को, ऐ मूर्खों के राजा मुर्खाधीराज,
ये वो कारवां है जो अन्याय के सिंहासन हिला देता है,
लड़ाई शुरू करना आसान है, जीतना तुम्हारे बस की बात नहीं। Rashtriya Loktantrik Party

कल जैसे ही नेताजी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को लेकर बयान दिया, पूरी बीजेपी अचानक एकजुट होकर मैदान में उतर आई। रातों-रात म...
28/05/2026

कल जैसे ही नेताजी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को लेकर बयान दिया, पूरी बीजेपी अचानक एकजुट होकर मैदान में उतर आई। रातों-रात मंत्री, विधायक, प्रवक्ता और पार्टी के तमाम नेता बयान देने लगे, मानो राजस्थान की सबसे बड़ी समस्या सिर्फ हनुमान बेनीवाल का बयान हो। लेकिन सवाल ये है कि आखिर ऐसी परिस्थितियां पैदा किसने की, जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री को “मुर्खाधीराज” जैसी उपाधि सुननी पड़ रही है? क्या ये सब बिना कारण हो रहा है? क्या जनता बिना दर्द के इतना आक्रोश दिखाती है?

सच्चाई ये है कि पिछले ढाई साल में अगर बीजेपी सरकार ने प्रदेश के किसानों, युवाओं, साधु संतों, बेरोजगारों, व्यापारियों और आम जनता के मुद्दों पर गंभीरता से काम किया होता तो आज राजस्थान का माहौल ऐसा नहीं होता। जनता आज भी बिजली, पानी, बेरोजगारी, कानून व्यवस्था, किसानों की समस्याओं और भ्रष्टाचार से परेशान है। गांवों से लेकर शहरों तक लोग परेशान घूम रहे हैं, लेकिन सरकार को सबसे ज्यादा चिंता उस आवाज की हो रही है जो जनता के दर्द को खुलकर बोल रही है।

हनुमान बेनीवाल जी ने जो कहा वो सत्ता को कड़वा जरूर लगा होगा, लेकिन उससे भी ज्यादा कड़वी वो सच्चाई है जिसे राजस्थान की जनता रोज महसूस कर रही है। अगर सरकार ने काम किया होता तो आज किसी बयान से इतनी बेचैनी पैदा नहीं होती। मजबूत सरकारें आलोचना से नहीं घबरातीं, लेकिन जब सरकार जमीन पर कमजोर पड़ने लगती है तब एक नेता का बयान भी पूरी सत्ता को हिला देता है।

सबसे बड़ी बात ये है कि जितनी तत्परता से बीजेपी के मंत्री, विधायक और पूरी पार्टी हनुमान बेनीवाल जी का विरोध करने में जुटी हुई है, अगर उतनी ही तत्परता से प्रदेश के मुद्दों पर काम किया होता तो शायद आज हालात इतने खराब नहीं होते। जिस तेजी से बयान जारी हो रहे हैं, अगर उसी तेजी से किसानों की समस्याएं हल होती, युवाओं को रोजगार मिलता, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई होती और कानून व्यवस्था सुधरती तो जनता आज सरकार के खिलाफ इतना गुस्सा लेकर नहीं बैठी होती।

लेकिन सत्ता की सबसे बड़ी समस्या यही है कि उसे जनता का दर्द कम और अपनी आलोचना ज्यादा दिखाई देती है। इसलिए आज पूरा सिस्टम उस आदमी के पीछे पड़ा है जो सड़क से लेकर सदन तक लगातार जनता की आवाज उठा रहा है। और यही बात साबित करती है कि हनुमान बेनीवाल सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि वो नाम बन चुके हैं जिसकी आवाज सत्ता को सबसे ज्यादा बेचैन करती है।
Hanuman Beniwal

28/05/2026

कल Hanuman Beniwal द्वारा “मूर्खाधिराज” शब्द बोलने पर लोकतंत्र खतरे में दिखाई देने लगा था, लेकिन अब जब एक मंत्री खुलेआम “मां-बहन” की गालियां देते हुए अखबारों की सुर्खियों में हैं, तब वही दरबारी पत्रकार और सत्ता के चरणवंदन में लगे नेता अचानक मौन साधे बैठे हैं।
लगता है इनके लिए भाषा की मर्यादा व्यक्ति देखकर तय होती है। विपक्ष बोले तो अशोभनीय, और सत्ता पक्ष गाली दे तो गुस्से में निकल गया।
राजस्थान की राजनीति का दुर्भाग्य यही है कि कुछ दिहाड़ी पत्रकार और राग-दरबारी नेता सत्ता के आगे इतने नतमस्तक हो चुके हैं कि उन्हें भाजपा नेताओं की गालियों में भी संस्कार और प्यार नजर आने लगता है।
सवाल सिर्फ शब्दों का नहीं, दोहरे चरित्र का है। अगर “मूर्खाधिराज” लोकतंत्र का अपमान है, तो मां-बहन की गालियां क्या राजस्थान की संस्कृति का सम्मान हैं ?
100077064080806:2048:R L P chittorgarh Part 7

28/05/2026

कल Hanuman Beniwal द्वारा “मूर्खाधिराज” शब्द बोलने पर लोकतंत्र खतरे में दिखाई देने लगा था, लेकिन अब जब एक मंत्री खुलेआम “मां-बहन” की गालियां देते हुए अखबारों की सुर्खियों में हैं, तब वही दरबारी पत्रकार और सत्ता के चरणवंदन में लगे नेता अचानक मौन साधे बैठे हैं।
लगता है इनके लिए भाषा की मर्यादा व्यक्ति देखकर तय होती है। विपक्ष बोले तो अशोभनीय, और सत्ता पक्ष गाली दे तो गुस्से में निकल गया।
राजस्थान की राजनीति का दुर्भाग्य यही है कि कुछ दिहाड़ी पत्रकार और राग-दरबारी नेता सत्ता के आगे इतने नतमस्तक हो चुके हैं कि उन्हें भाजपा नेताओं की गालियों में भी संस्कार और प्यार नजर आने लगता है।
सवाल सिर्फ शब्दों का नहीं, दोहरे चरित्र का है। अगर “मूर्खाधिराज” लोकतंत्र का अपमान है, तो मां-बहन की गालियां क्या राजस्थान की संस्कृति का सम्मान हैं ?
100077064080806:2048:R L P chittorgarh Part 6

28/05/2026

कल Hanuman Beniwal द्वारा “मूर्खाधिराज” शब्द बोलने पर लोकतंत्र खतरे में दिखाई देने लगा था, लेकिन अब जब एक मंत्री खुलेआम “मां-बहन” की गालियां देते हुए अखबारों की सुर्खियों में हैं, तब वही दरबारी पत्रकार और सत्ता के चरणवंदन में लगे नेता अचानक मौन साधे बैठे हैं।
लगता है इनके लिए भाषा की मर्यादा व्यक्ति देखकर तय होती है। विपक्ष बोले तो अशोभनीय, और सत्ता पक्ष गाली दे तो गुस्से में निकल गया।
राजस्थान की राजनीति का दुर्भाग्य यही है कि कुछ दिहाड़ी पत्रकार और राग-दरबारी नेता सत्ता के आगे इतने नतमस्तक हो चुके हैं कि उन्हें भाजपा नेताओं की गालियों में भी संस्कार और प्यार नजर आने लगता है।
सवाल सिर्फ शब्दों का नहीं, दोहरे चरित्र का है। अगर “मूर्खाधिराज” लोकतंत्र का अपमान है, तो मां-बहन की गालियां क्या राजस्थान की संस्कृति का सम्मान हैं ?
100077064080806:2048:R L P chittorgarh Part 5

28/05/2026

कल Hanuman Beniwal द्वारा “मूर्खाधिराज” शब्द बोलने पर लोकतंत्र खतरे में दिखाई देने लगा था, लेकिन अब जब एक मंत्री खुलेआम “मां-बहन” की गालियां देते हुए अखबारों की सुर्खियों में हैं, तब वही दरबारी पत्रकार और सत्ता के चरणवंदन में लगे नेता अचानक मौन साधे बैठे हैं।
लगता है इनके लिए भाषा की मर्यादा व्यक्ति देखकर तय होती है। विपक्ष बोले तो अशोभनीय, और सत्ता पक्ष गाली दे तो गुस्से में निकल गया।
राजस्थान की राजनीति का दुर्भाग्य यही है कि कुछ दिहाड़ी पत्रकार और राग-दरबारी नेता सत्ता के आगे इतने नतमस्तक हो चुके हैं कि उन्हें भाजपा नेताओं की गालियों में भी संस्कार और प्यार नजर आने लगता है।
सवाल सिर्फ शब्दों का नहीं, दोहरे चरित्र का है। अगर “मूर्खाधिराज” लोकतंत्र का अपमान है, तो मां-बहन की गालियां क्या राजस्थान की संस्कृति का सम्मान हैं ?
100077064080806:2048:R L P chittorgarh Part 4

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