08/08/2026
#उत्तराखंड के हिमालय में खिला दुर्लभ 'पदमचाल' फूल, 7–15 साल में एक बार करता है पुष्पित; औषधीय गुणों से भी भरपूर.....
उत्तराखंड के ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में इन दिनों एक बेहद दुर्लभ पौधा पदमचाल (Padamchal) लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। सोशल मीडिया पर इसे कई जगह 'डायमंड फ्लावर' कहा जा रहा है, हालांकि इसका वैज्ञानिक नाम Rheum nobile (नोबल रूबार्ब) है। यह पौधा समुद्र तल से लगभग 4,000 से 4,800 मीटर की ऊंचाई पर कठिन हिमालयी परिस्थितियों में उगता है।
इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत इसकी अनोखी बनावट और लंबा जीवन चक्र है। इसकी ऊंचाई करीब 3 से 6.5 फीट तक हो सकती है और यह लगभग 7 से 15 वर्षों में एक बार पुष्पित होता है। फूल आने के बाद इसका जीवन चक्र धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है, इसलिए इसे मोनोकार्पिक पौधा भी कहा जाता है।
पदमचाल अत्यधिक ठंड, तेज़ पराबैंगनी (UV) किरणों, कम ऑक्सीजन और बर्फीले मौसम जैसी कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहने की क्षमता रखता है। इसके हल्के पीले, पारदर्शी आवरण अंदर के फूलों को प्रतिकूल मौसम से सुरक्षा प्रदान करते हैं। यही अनोखी विशेषताएं इसे हिमालय के सबसे दुर्लभ पौधों में शामिल करती हैं।
स्थानीय समुदाय लंबे समय से इसे पारंपरिक औषधीय पौधे के रूप में जानते हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार इसका उपयोग सिरदर्द, अपच, सूजन और हड्डी से जुड़ी समस्याओं में किया जाता रहा है। हालांकि किसी भी औषधीय उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है।
उत्तराखंड में यह दुर्लभ पौधा फूलों की घाटी (Valley of Flowers), हेमकुंड साहिब क्षेत्र, गंगोत्री नेशनल पार्क सहित कुछ ऊंचाई वाले हिमालयी इलाकों में देखा जा सकता है। इसके अलावा यह सिक्किम, नेपाल, भूटान और तिब्बत के हिमालयी क्षेत्रों में भी पाया जाता है।
यह दुर्लभ पौधा हिमालय की जैव विविधता का एक अनमोल हिस्सा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ट्रेकिंग के दौरान यह दिखाई दे तो इसे केवल दूर से निहारें और किसी भी तरह से नुकसान न पहुंचाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी प्रकृति के इस अद्भुत चमत्कार को देख सकें....