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Dr.R.RajeshKumar-IAS Secretary – Housing, Estate Department, Commissioner – Housing, Chief Administrator – Uttarakhand Housing and Urban Development Authority, Govt.

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 #समाचार_पत्रों_के_माध्यम_से      सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कसी विकास प्राधिकरणों की लगाम, मास्टर प्लान से RERA तक कार्...
25/08/2026

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सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कसी विकास प्राधिकरणों की लगाम, मास्टर प्लान से RERA तक कार्यों की समीक्षा, अधिकारियों को दिए दिशा-निर्देश

धामी सरकार का विकास पर फोकस, मास्टर प्लान से अवैध निर्माण तक सचिव आवास ने की समीक्षा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों पर सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने विकास कार्यों और योजनाओं की समीक्षा कर अधिकारियों को दिए जरूरी दिशा-निर्देश
देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने आवास विभाग से संबंधित राज्य के सभी प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष व सचिवों के साथ ही अन्य अधिकारियों के साथ विभिन्न योजनाओं और और प्राधिकरण द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न विकास कार्यों को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक में शहरों के सुनियोजित विकास, मास्टर प्लान, प्रधानमंत्री आवास योजना, नागरिक शिकायतों के त्वरित निस्तारण, नजूल नीति, एकल समाधान योजना (OTS), अवैध निर्माण पर कार्रवाई और RERA से जुड़े कार्यों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। सचिव ने अधिकारियों को योजनाओं में तेजी लाने के साथ कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति और संचालित योजनाओं की उपलब्धियों की जानकारी ली गई। साथ ही आने वाले समय के लिए विभाग की भविष्य की कार्ययोजना और विजन पर भी चर्चा हुई। सचिव ने कहा कि विकास योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने के लिए विभागीय स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग जरूरी है। योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

मास्टर प्लान को मिलेगी गति
समीक्षा बैठक में विभिन्न जनपदों और नगरों के मास्टर प्लान की प्रगति और अद्यतन स्थिति पर विशेष चर्चा हुई। शहरों के सुनियोजित और संतुलित विकास के लिए मास्टर प्लान को महत्वपूर्ण आधार बताते हुए सचिव ने संबंधित अधिकारियों से इसकी प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि मास्टर प्लान से जुड़े कार्यों को निर्धारित समयसीमा में आगे बढ़ाया जाए और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नियोजित विकास पर फोकस किया जाए।

पीएम आवास योजना पर भी जोर
बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए पात्र लाभार्थियों तक आवासीय सुविधाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया। सचिव ने योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

शिकायतों का हो त्वरित समाधान
नागरिक शिकायतों और आवंटियों से संबंधित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण को लेकर भी सचिव ने अधिकारियों को गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम जनता से जुड़े मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और प्रत्येक प्रकरण का नियमानुसार समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।

नजूल नीति, OTS और अवैध निर्माण पर नजर
समीक्षा बैठक में नजूल नीति और एकल समाधान योजना (OTS) से जुड़े मामलों की भी जानकारी ली गई। साथ ही अवैध निर्माण पर की जा रही कार्रवाई की समीक्षा करते हुए सचिव ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। शहरों में अनियोजित और अवैध निर्माण पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए लगातार निगरानी की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

RERA के कार्यों की भी समीक्षा
बैठक में भू नियामक एवं विकास प्राधिकरण (RERA) से जुड़े कार्यों की प्रगति पर भी चर्चा हुई। रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, परियोजनाओं की निगरानी और संबंधित प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप आवास विभाग से जुड़ी योजनाओं और विकास कार्यों को गति देने के साथ ही आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पूरे किए जाएं।

 #समाचार_पत्रों_के_माध्यम_से
25/08/2026

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 #समाचार_पत्रों_के_माध्यम_से     उत्तराखंड देवीधुरा में अब नहीं सताएगा जाम, बनेगी मल्टी लेवल पार्किंगदेवीधुरा में अब नही...
25/08/2026

#समाचार_पत्रों_के_माध्यम_से





उत्तराखंड देवीधुरा में अब नहीं सताएगा जाम, बनेगी मल्टी लेवल पार्किंग
देवीधुरा में अब नहीं सताएगा जाम, बनेगी मल्टी लेवल पार्किंग
₹9.80 करोड़ की परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी, 83 कारों की पार्किंग के साथ शौचालय और केयरटेकर रूम की भी होगी व्यवस्था
चम्पावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों पर प्रदेश के धार्मिक और पर्यटन स्थलों में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। चम्पावत के प्रसिद्ध देवीधुरा क्षेत्र में लंबे समय से महसूस की जा रही पार्किंग की समस्या के समाधान का रास्ता साफ हो गया है

ग्राम देचमार, तहसील पाटी में प्रस्तावित मल्टी लेवल पार्किंग परियोजना को विभागीय व्यय समिति ने ₹980.23 लाख यानी करीब 9.80 करोड़ रुपये की औचित्यपूर्ण लागत पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है। अब प्रस्ताव को वित्त विभाग को भेजा जाएगा। पार्किंग बनने के बाद बग्वाल मेले समेत वर्षभर देवीधुरा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को वाहनों की पार्किंग के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और सड़क पर लगने वाले जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है।

राज्य सचिवालय में मंगलवार को सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में परियोजना के तकनीकी, वित्तीय और भूमि संबंधी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में क्षेत्र की वास्तविक जरूरत को देखते हुए पार्किंग की प्रस्तावित संरचना में भी बदलाव किया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि दोपहिया वाहन पार्किंग और दुकानों-कैफे का प्रावधान हटाकर मुख्य रूप से कार पार्किंग पर फोकस किया जाए। संशोधित प्रस्ताव में 83 कारों के लिए पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

बग्वाल मेले में बढ़ जाता है वाहनों का दबाव

देवीधुरा धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से चम्पावत का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां प्रसिद्ध बग्वाल मेला आयोजित होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। मेले के दौरान वाहनों का दबाव अचानक बढ़ने से सीमित पार्किंग व्यवस्था के कारण सड़क किनारे वाहन खड़े करने पड़ते हैं। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ ही कई बार जाम की स्थिति पैदा होती है। वर्षभर भी देवीधुरा आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए व्यवस्थित पार्किंग की जरूरत महसूस की जा रही थी।

ग्राम देचमार, तहसील पाटी में प्रस्तावित मल्टी लेवल पार्किंग परियोजना को विभागीय व्यय समिति ने ₹980.23 लाख यानी करीब 9.80 करोड़ रुपये की औचित्यपूर्ण लागत पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है। अब प्रस्ताव को वित्त विभाग को भेजा जाएगा। पार्किंग बनने के बाद बग्वाल मेले समेत वर्षभर देवीधुरा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को वाहनों की पार्किंग के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और सड़क पर लगने वाले जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है।

प्रस्तावित मल्टी लेवल पार्किंग के निर्माण से वाहनों को निर्धारित स्थान पर खड़ा करने की सुविधा मिलेगी। इससे मुख्य सड़क पर अनियंत्रित पार्किंग कम होगी और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में मदद मिलेगी। परियोजना का लाभ स्थानीय लोगों के साथ ही देवीधुरा आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी मिलेगा।

परियोजना के लिए पहले ₹994.80 लाख का आगणन तैयार किया गया था। चूंकि आगणन पांच करोड़ रुपये से अधिक था, इसलिए नियोजन विभाग के तकनीकी संप्रेक्षा प्रकोष्ठ (TAC) से इसका परीक्षण कराया गया। परीक्षण के बाद ₹980.23 लाख की धनराशि परियोजना के लिए औचित्यपूर्ण पाई गई। इसी राशि पर विभागीय व्यय समिति ने सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है। बैठक में बताया गया कि पार्किंग के लिए ग्राम देचमार पट्टी देवीधुरा में 0.88 हेक्टेयर पंचायत वन भूमि चिन्हित की गई है। यह भूमि खाता-खतौनी संख्या 16 के खसरा संख्या 1864 में दर्ज है और देवीधुरा मेला क्षेत्र के निकट सड़क से लगी हुई है। वन विभाग की ओर से भी प्रकरण पर सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।

राज्य सचिवालय में मंगलवार को सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में परियोजना के तकनीकी, वित्तीय और भूमि संबंधी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में क्षेत्र की वास्तविक जरूरत को देखते हुए पार्किंग की प्रस्तावित संरचना में भी बदलाव किया गया।

कैंपा की धनराशि भी मूल लागत में शामिल

परियोजना में पर्यावरणीय प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। प्रभागीय वनाधिकारी, चम्पावत की ओर से एनपीवीओ, क्षतिपूरक वनीकरण, Soil and Moisture Conservation Plan (SMCP) और Wildlife Management Plan (WMP) के लिए ₹34,66,057 की धनराशि कैंपा कोष में जमा किए जाने की अपेक्षा की गई है। बैठक में स्पष्ट किया गया कि यह धनराशि मूल आगणन में ही शामिल कर दी गई है। इसके लिए अतिरिक्त धनराशि की मांग नहीं की जाएगी। परियोजना के निर्माण से पहले सहायक भू-वैज्ञानिक, चम्पावत की भूगर्भीय निरीक्षण आख्या को भी संज्ञान में लिया जाएगा। अधिकारियों ने परियोजना की तकनीकी आवश्यकताओं और सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखने के निर्देश दिए।

श्रद्धालुओं-पर्यटकों को मिलेगी राहत- डॉ. आर. राजेश कुमार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप प्रदेश के धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर नागरिकों और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। देवीधुरा में मल्टी लेवल पार्किंग क्षेत्र की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इससे बग्वाल मेले सहित अन्य अवसरों पर बढ़ने वाले यातायात दबाव को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। परियोजना में अनावश्यक व्यावसायिक गतिविधियों को हटाकर क्षेत्रीय आवश्यकता के अनुसार 83 कारों की पार्किंग का प्रावधान करने के निर्देश दिए गए हैं। शौचालय और केयरटेकर रूम की सुविधा भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएगी।

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25/08/2026

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रेल की रफ्तार के साथ विकास की उड़ान, फ्रीज जोन समीक्षा से पहाड़ों में खुल सकती हैं नई संभावनाएंउत्तराखंड में बहुप्रतीक्ष...
25/08/2026

रेल की रफ्तार के साथ विकास की उड़ान, फ्रीज जोन समीक्षा से पहाड़ों में खुल सकती हैं नई संभावनाएं

उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना केवल परिवहन व्यवस्था को बदलने वाली योजना नहीं है, बल्कि यह पहाड़ों के आर्थिक और सामाजिक भविष्य को भी नई दिशा देने वाली परियोजना मानी जा रही है। अब जब इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का अधिकांश कार्य अंतिम चरणों में पहुंच चुका है, तो राज्य सरकार उन प्रतिबंधों की समीक्षा की ओर बढ़ रही है, जो निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा कारणों से लगाए गए थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आवास एवं शहरी विकास विभाग ने रेलवे फ्रिज जोन में लागू 400 मीटर प्रतिबंध की समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस दिशा में आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने संबंधित जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन क्षेत्रों में रेलवे ट्रैक और संबंधित निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है तथा वहां विकास गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से अनुमति दी जा सकती है। यह पहल केवल प्रशासनिक निर्णय भर नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों की उम्मीदों से भी जुड़ी है, जो पिछले कई वर्षों से पर्यटन, आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों पर लगे प्रतिबंधों के कारण प्रभावित हो रहे हैं।

विकास की राह में बना था सुरक्षा कवच
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना देश की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतीय रेल परियोजनाओं में शामिल है। परियोजना के निर्माण के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तराखंड सरकार ने 9 जनवरी 2024 को रेलवे कॉरिडोर से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को फ्रीज जोन घोषित किया था। योगनगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, व्यासी, सिराला, तिलवाड़ मल्ला, मलेथा, श्रीनगर, धारीदेवी, तिलनी, घोलतीर और गौचर जैसे क्षेत्रों में रेलवे परियोजना की परिसीमा से 400 मीटर तक के दायरे में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए गए थे। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि अनियंत्रित निर्माण कार्य रेलवे परियोजना की सुरक्षा, सुरंगों और अन्य तकनीकी ढांचों पर प्रतिकूल प्रभाव न डालें। इन प्रतिबंधों ने परियोजना को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन समय के साथ स्थानीय स्तर पर इसके प्रभाव भी सामने आने लगे। कई स्थानों पर होटल, होमस्टे, रिसॉर्ट, आवासीय भवन और व्यावसायिक परियोजनाएं ठहराव का शिकार हो गईं।

पर्यटन और निवेश को मिल सकती है नई संजीवनी
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन पर आधारित है। विशेष रूप से गढ़वाल मंडल के वे क्षेत्र, जहां से रेल परियोजना गुजर रही है, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ऐसे में फ्रीज जोन प्रतिबंधों की समीक्षा को स्थानीय विकास के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। सरकार के पास विभिन्न जिलों से लगातार सुझाव पहुंच रहे थे कि रेलवे ट्रैक का अधिकांश कार्य पूरा होने के बाद वर्तमान व्यवस्था अब विकास गतिविधियों में बाधा बन रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए आवास विभाग ने जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन शुरू किया है। यदि तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रतिबंधों में आंशिक शिथिलता दी जाती है, तो रेलवे कॉरिडोर के आसपास होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, आवासीय कॉलोनियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विकास का रास्ता खुल सकता है। इससे निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। रेल संपर्क शुरू होने के बाद इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ऐसे में पर्यटन आधारित बुनियादी ढांचे का विकास समय की आवश्यकता भी है। फ्रीज जोन समीक्षा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

जनहित और सुरक्षा के बीच संतुलन की कोशिश
राज्य सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी प्रकार की राहत रेलवे सुरक्षा से समझौता करके नहीं दी जाएगी। यही कारण है कि समीक्षा प्रक्रिया को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। डॉ. आर. राजेश कुमार के निर्देश पर जिलों से ऐसे क्षेत्रों की पहचान कराई जा रही है, जहां रेलवे निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और जहां विकास गतिविधियों को नियंत्रित एवं सुरक्षित तरीके से अनुमति दी जा सकती है। इसके साथ ही रेलवे से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं, भूगर्भीय परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों का भी परीक्षण किया जाएगा। सरकार की मंशा केवल प्रतिबंध हटाने की नहीं, बल्कि ऐसी संतुलित व्यवस्था विकसित करने की है, जिससे रेलवे परियोजना के दीर्घकालिक हित सुरक्षित रहें और स्थानीय नागरिकों को भी विकास का लाभ मिल सके।

पहाड़ों की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है नया आधार
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को उत्तराखंड की विकास यात्रा का गेम चेंजर माना जाता है। रेल संपर्क से जहां चारधाम यात्रा और पर्यटन को नई गति मिलेगी, वहीं इसके आसपास विकसित होने वाली आर्थिक गतिविधियां भी प्रदेश की तस्वीर बदल सकती हैं। फ्रीज जोन समीक्षा की यह पहल उसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसमें धामी सरकार विकास, निवेश और रोजगार को नई गति देने के साथ-साथ स्थानीय जरूरतों को भी प्राथमिकता दे रही है। यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो लंबे समय से ठहरी विकास योजनाओं को नई रफ्तार मिलेगी और रेलवे कॉरिडोर से जुड़े क्षेत्रों में निवेश का अनुकूल माहौल तैयार होगा।

बयान
डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव आवास
“मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रेलवे फ्रीज जोन में लागू प्रतिबंधों की समीक्षा की जा रही है। जहां रेलवे परियोजना का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, वहां की स्थिति का तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर आकलन कराया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि रेलवे सुरक्षा और तकनीकी मानकों से किसी प्रकार का समझौता किए बिना स्थानीय नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों को विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं। जनहित और परियोजना हित दोनों को समान प्राथमिकता देते हुए व्यावहारिक समाधान तैयार किए जाएंगे

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