25/05/2026
अमर शहीद श्रीदेव सुमनजी की जयंती पर शत-शत नमन! 🙏✨
आज उत्तराखंड के उस महान सपूत का दिन है जिसने राजशाही के जुल्मों के आगे झुकने के बजाय 84 दिनों तक भूखे रहकर अपने प्राणों की आहुति दे दी। लेकिन क्या आज की युवा पीढ़ी सिर्फ स्टेटस लगाने तक सीमित है? या हम उस इतिहास को वाकई जानते हैं जिसके दम पर आज हम आजाद हवा में सांस ले रहे हैं?
आज की युवा पीढ़ी और नौजवानों से कुछ सीधे और तीखे सवाल:
1️⃣ श्रीदेव सुमन कौन थे?
वे सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि टिहरी रियासत की क्रूर राजशाही और सामंतवाद के खिलाफ इंकलाब की बुलंद आवाज थे। प्रजामंडल के जरिए उन्होंने जनता को अधिकारों की लड़ाई लड़ना सिखाया।
2️⃣ श्रीदेव सुमन की हत्या किसने, क्यों और कब की थी?
25 जुलाई 1944 को टिहरी जेल में अमानवीय यातनाएं देकर उन्हें शहीद किया गया। यह किसी 'एक परिवार' की व्यक्तिगत रंजिश नहीं, बल्कि तत्कालीन टिहरी राजवंश और सामंती सत्ता द्वारा की गई एक सोची-समझी 'संस्थागत हत्या' (Institutional Murder) थी। जुर्म सिर्फ इतना था कि उन्होंने जनता की आजादी और अधिकारों की मांग की थी।
3️⃣ सत्ता और राजनीति का संरक्षण:
आजादी के बाद लोकतंत्र आया, लेकिन विडंबना देखिए! जिस राजशाही ने जनता का खून चूसा और श्रीदेव सुमन जैसे क्रांतिकारियों को प्रताड़ित किया, उसी राजघराने के लोगों को समय-समय पर देश के बड़े राजनैतिक दलों (जैसे कांग्रेस और भाजपा) ने सिर-आंखों पर बिठाया, टिकट दिए, सांसद-मंत्री बनाया और सत्ता का संरक्षण दिया।
4️⃣ आज दोनों परिवारों की स्थिति क्या है?
एक तरफ वो रसूखदार 'शाही परिवार' है जो आज भी सत्ता, राजनीति, संपत्ति और महलों के वैभव का आनंद ले रहा है। दूसरी तरफ, श्रीदेव सुमन जी का परिवार और उनकी विरासत है, जो आज भी गुमनामी, सादगी और संघर्षों के बीच सिर्फ इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गई है।
सोचिए और आत्ममंथन कीजिए...🤔
अगर हम इन सवालों के जवाब नहीं जानते या जानकर भी चुप हैं, तो यकीन मानिए—या तो हम भी सिर्फ अपने खोल में सीमित, परिवार और आजीविका के जीवन चक्र में रेशम के कीड़े की तरह कोकून बुन रहे हैं, जहां अंत में हम इसी कोकून के अंदर खुद ही घुटकर मर-खप जाएंगे... या फिर हम अंधे बन चुके हैं या अंधे बनने की प्रक्रिया में हैं!
इतिहास गवाह है कि जो कौम अपने शहीदों के हत्यारों और शोषकों को पूजने लगती है, उसका भविष्य कभी उज्ज्वल नहीं हो सकता।
उठो युवाओं, इतिहास को पढ़ो, सच को समझो और अंधभक्ति के कोकून से बाहर निकलो!
इंकलाब जिंदाबाद! ✊
अमर शहीद श्रीदेव सुमन अमर रहें! 🏔️❤️