03/09/2026
प्रकृति के पास अपनी नैसर्गिक बुद्धिमत्ता है, और तकनीक के पास उसे समझने की शक्ति। जब दोनों का समन्वय होता है, तभी विकास की दिशा वास्तव में सतत बनती है।
इसी विचार को केंद्र में रखते हुए लोक भवन में ‘अमृतकाल के लिए पर्यावरण और एआई’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में ‘सतत हिमालयी भविष्य के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ पर देश के प्रख्यात वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और युवाओं की सहभागिता की।
हिमालय केवल हमारी प्राकृतिक धरोहर नहीं, हमारी जीवन-व्यवस्था का आधार है। इसलिए विकास की हर नई दिशा में हिमालय और प्रकृति के हितों को केंद्र में रखना आवश्यक है। आने वाला समय नवाचार, AI, आधुनिक तकनीक और हरित विकास का है। मुझे विश्वास है कि भारत की युवा शक्ति अपने ज्ञान, प्रतिभा और नवाचार से तकनीकी प्रगति को पर्यावरणीय संवेदनशीलता से जोड़ते हुए एक सुरक्षित, सतत और समृद्ध भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।