07/10/2025
आपकी छोटी-सी मदद भी उम्मीद जगा सकती है — एक बीज बोया जाएगा, एक धागा बुना जाएगा, एक कला फिर से जीवित होगी।
पढ़ें, साझा करें, और अगर संभव हो तो योगदान दें।
यह एक पंजीकृत ट्रस्ट है, इसलिए आपके द्वारा किया गया योगदान आयकर अधिनियम की धारा 80G के अंतर्गत कर छूट के योग्य है। आपको रसीद प्रदान की जाएगी।
उत्तराखंड लोक विरासत ट्रस्ट एक गैर-लाभकारी संगठन है जो उत्तराखंड की समृद्ध और अनूठी लोक संस्कृति, कला और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए समर्पित है। यह ट्रस्ट कलाकारों, संगीतकारों और शिल्पकारों को एक मंच प्रदान करता है, उन्हें आर्थिक सहायता देता है और उनके काम को दर्शकों तक पहुँचाता है।
मुख्य उद्देश्य और गतिविधियाँ:
सांस्कृतिक संरक्षण: उत्तराखंड की लोक कलाओं, संगीत, नृत्य और परिधानों को बचाने और बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
कलाकारों का समर्थन: उत्तराखंड के विभिन्न जिलों के लोक कलाकारों, संगीतकारों और हस्तशिल्पियों को देहरादून में बुलाकर उनके कला प्रदर्शन और बिक्री के लिए एक मंच प्रदान करता है।
आर्थिक सहायता: ट्रस्ट इन कलाकारों को आर्थिक सहायता भी प्रदान करता है, जिससे उनकी आजीविका सुरक्षित होती है।
प्रचार-प्रसार: यह उत्तराखंड की लोक संस्कृति के बारे में जागरूकता बढ़ाता है और लोगों को राज्य की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है।
स्थानीय बाजार: हस्तशिल्प कलाकारों के लिए एक बाजार का आयोजन करता है, जिससे वे अपनी कलाकृतियाँ बेच सकें।
समर्थन और नेतृत्व:
यह ट्रस्ट उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए काम करता है, जैसा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री द्वारा भी रेखांकित किया गया है।
ट्रस्ट के सदस्यों में डॉ. के.पी. जोशी (अध्यक्ष), श्री सुधीर नौटियाल, और लोकगायक श्री नरेंद्र सिंह नेगी, पद्म श्री प्रीतम भरतवाण जैसे गणमान्य व्यक्ति शामिल हैं।
यह संगठन उत्तराखंड की स्थानीय पहचान और कला को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और पहाड़ी खान-पान, परिधानों व आभूषणों को संरक्षित करने के लिए।