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"सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ देना नहीं, बल्कि उन्हें अवसर, सम्मान, नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता...
02/09/2026

"सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ देना नहीं, बल्कि उन्हें अवसर, सम्मान, नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करना है।": मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी।

परिवहन आयुक्त, उत्तराखण्ड श्री रविनाथ रमन ने कार्यालय में हवाई फायरिंग करने वाले हल्द्वानी में तैनात वरिष्ठ प्रशासनिक अध...
02/09/2026

परिवहन आयुक्त, उत्तराखण्ड श्री रविनाथ रमन ने कार्यालय में हवाई फायरिंग करने वाले हल्द्वानी में तैनात वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री महेंद्र सिंह नेगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

02/09/2026

उत्तराखण्ड में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए संचालित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक (WDC-PMKSY 2.0) के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर केंद्र सरकार ने गंभीरता दिखाई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी को प्रेषित पत्र द्वारा राज्य में वाटरशेड से संबंधित कार्यों में तेजी लाने तथा उपलब्ध केंद्रीय सहायता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।

केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान उत्तराखण्ड में 15 वाटरशेड परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 0.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को लाभान्वित किया जाना प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं की कुल स्वीकृत लागत ₹232.26 करोड़ है, जिसमें केंद्रीय अंश ₹209.03 करोड़ निर्धारित है। राज्य को अब तक लगभग ₹113.48 करोड़ की केंद्रीय सहायता जारी की जा चुकी है।

उन्होंने अवगत कराया कि इन परियोजनाओं की मूल अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी थी। शेष कार्यों को पूर्ण करने के लिए परियोजना अवधि को 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया है। उन्होंने इसे शेष प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन गतिविधियों को पूरा करने और परियोजनाओं के लक्ष्यों को हासिल करने का महत्वपूर्ण अवसर बताया है।

कृषि मंत्री ने यह भी उल्लेख किया है कि चालू वित्तीय वर्ष में भी (WDC-PMKSY 2.0 के अंतर्गत उत्तराखण्ड के लिए ₹31.58 करोड़ की केंद्रीय सहायता आवंटित की गई है, जिसमें से ₹15.79 करोड़ की राशि परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन के लिए मदर सैंक्शन के रूप में जारी की जा चुकी है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि राज्य में वर्तमान मानसून परिस्थितियों को देखते हुए वाटरशेड परियोजनाओं के अंतर्गत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, मृदा नमी संरक्षण एवं सूखा-निरोधी उपायों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान प्राप्त वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण कर ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने तथा ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने की दिशा में प्रभावी प्रयास किये जाए।

उन्होंने विशेष रूप से चेक डैम, फार्म पॉण्ड, खेत तालाब, परकोलेशन टैंक, जल संचयन संरचनाओं, ड्रेनेज लाइन ट्रीटमेंट तथा अन्य मृदा एवं नमी संरक्षण कार्यों को गति देने पर जोर दिया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि WDC-PMKSY 2.0 के अंतर्गत राज्य का प्रदर्शन-स्वीकृत कार्यों की पूर्णता, केंद्रीय सहायता का उपयोग और परियोजनाओं की समयबद्ध प्रगति-आगामी (WDC-PMKSY 3.0) के अंतर्गत परियोजनाओं के आवंटन में महत्वपूर्ण आधार बनेगी। इसके साथ ही चालू वर्ष में राज्यों के बीच केंद्रीय सहायता के पुनः आवंटन का निर्णय भी कार्यान्वयन प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। तेजी से प्रगति करने वाले तथा उपलब्ध धनराशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने वाले राज्यों को अतिरिक्त आवंटन में प्राथमिकता दिए जाने पर भी विचार किया जाएगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर धामी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार मानसून की उपलब्ध परिस्थितियों का अधिकतम लाभ उठाते हुए जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, मृदा संरक्षण और ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण के कार्यों को नई गति देगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि भूमि संसाधन विभाग, भारत सरकार द्वारा उत्तराखण्ड सरकार को इस दिशा में हरसंभव सहयोग एवं सहायता प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु दिए जा रहे सहयोग के लिये केन्द्र सरकार एवं केंद्रीय कृषि मंत्री का आभार व्यक्त किया है।

02/09/2026

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को निर्धारित नियमों, मानकों और आवश्यक मान्यता के अनुरूप संचालित कराने को लेकर सरकार की सख्ती लगातार जारी है। मुख्यमंत्री द्वारा स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश में किसी भी शिक्षण संस्थान को निर्धारित नियमों एवं मानकों की अनदेखी करते हुए संचालित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसी क्रम में उधमसिंह नगर के बाजपुर परगना क्षेत्र में प्रशासन ने आज पांच और मदरसों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उन्हें सील कर दिया।

आज की कार्रवाई के तहत मदरसा गुलशन इस्लाम, कनोरा-बाजपुर, मदरसा जामिया हनकिया रजा उल उलूम, चकरपुर, मदरसा जामिया फातिमा जेहरा, जगन्नाथपुर-बाजपुर, मदरसा मोईनुल उलूम, मोहल्ला गांधीनगर, केलखेड़ा तथा मदरसा हुज्जतुल इस्लाम, गुमसानी रोड, बाजपुर को सील किया गया। प्रशासन की ओर से की गई यह कार्रवाई संबंधित संस्थानों के संचालन में आवश्यक मान्यता एवं निर्धारित नियमों और मानकों के अनुपालन से जुड़े मामलों की जांच के बाद की गई।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए यह स्पष्ट किया है कि शिक्षण संस्थानों का संचालन निर्धारित कानूनी एवं प्रशासनिक प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यार्थियों को सुरक्षित, व्यवस्थित और निर्धारित शैक्षणिक मानकों के अनुरूप वातावरण उपलब्ध हो तथा किसी भी संस्था को नियमों की अनदेखी कर मनमाने ढंग से संचालित करने की छूट न मिले।

बाजपुर क्षेत्र में पूर्व में भी नियमों के विपरीत अथवा आवश्यक मानकों के अनुरूप संचालित नहीं पाए गए संस्थानों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। प्रशासन द्वारा अब भी क्षेत्र में संचालित अन्य संस्थानों की स्थिति की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यदि कोई अन्य संस्था भी निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन करती हुई पाई जाती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

फ्लाइंग कार बनाने वाले युवा नवोन्मेषक एवं स्टार्टअप उद्यमी श्री रवि टम्टा ने आज मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री श्री पु...
02/09/2026

फ्लाइंग कार बनाने वाले युवा नवोन्मेषक एवं स्टार्टअप उद्यमी श्री रवि टम्टा ने आज मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। इस दौरान श्री टम्टा ने मुख्यमंत्री को फ्लाइंग कार के निर्माण से संबंधित अपने तकनीकी नवाचार, अब तक की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने श्री रवि टम्टा के अभिनव प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड के युवाओं में प्रतिभा, तकनीकी क्षमता और नवाचार की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि ऐसे युवाओं को अपने नए विचारों और तकनीकी प्रयोगों को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक सहयोग और अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

उन्होंने कहा, “उत्तराखण्ड के युवाओं के सपनों को पंख देना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। हमारे युवा नए विचारों और आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ रहे हैं। सरकार उनके नवाचार को केवल प्रोत्साहित ही नहीं करेगी, बल्कि उसे धरातल पर उतारने के लिए हरसंभव सहयोग भी प्रदान करेगी।”

मुख्यमंत्री ने मौके पर ही सचिव उद्योग को निर्देश दिए कि श्री रवि टम्टा के स्टार्टअप को नियमानुसार आवश्यक शासकीय सहयोग एवं सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार की प्रचलित स्टार्टअप एवं औद्योगिक नीतियों के अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं का लाभ दिलाने की संभावनाओं का परीक्षण किया जाए और आवश्यक प्रक्रियाओं में सहयोग प्रदान किया जाए।

उन्होंने कहा कि आज का दौर तकनीक और नवाचार का है। उत्तराखंड के युवा भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, एयरोस्पेस और अन्य आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे नवाचार न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा करते हैं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देते हैं।

उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड में नई तकनीकों के प्रयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। भविष्य में तकनीक आधारित परिवहन व्यवस्था राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि, ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए तकनीकी, सुरक्षा और नियामकीय मानकों का पालन आवश्यक होगा।

श्री रवि टम्टा ने मुख्यमंत्री को अपने फ्लाइंग कार प्रोजेक्ट की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि वे इस क्षेत्र में लगातार कार्य कर रहे हैं और भविष्य में इसे और विकसित करने की दिशा में प्रयासरत हैं।

मुख्यमंत्री ने श्री टम्टा के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रतिभावान युवाओं को आगे बढ़ने के लिए बेहतर इकोसिस्टम उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि “नया उत्तराखण्ड केवल विकास परियोजनाओं से नहीं, बल्कि युवाओं के नए विचारों, नवाचार और उद्यमिता से भी बनेगा। हमारी कोशिश है कि उत्तराखण्ड का कोई भी प्रतिभाशाली युवा संसाधनों के अभाव में अपने सपने को अधूरा न छोड़े।”

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड को स्टार्टअप और इनोवेशन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है। युवाओं के नवाचारों को प्रोत्साहन देकर उन्हें रोजगार सृजन, आत्मनिर्भरता और राज्य की आर्थिक प्रगति का माध्यम बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज शासकीय आवास में आवास विभाग के नियंत्रणाधीन समस्त विकास प्राधिकरणों की समीक्षा बै...
02/09/2026

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज शासकीय आवास में आवास विभाग के नियंत्रणाधीन समस्त विकास प्राधिकरणों की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने विकास प्राधिकरणों के कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान, परियोजनाओं, नागरिक सुविधाओं, सौंदर्यीकरण, पार्किंग, आवासीय योजनाओं और अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई से जुड़े प्रत्येक कार्य के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाए तथा संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाए।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण कार्यों को प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिए कि इसी माह से सभी विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण के कार्य प्रारंभ कर दिए जाएं। उन्होंने कहा कि इन कार्यों का स्वरूप और गुणवत्ता G20 समिट के दौरान किए गए सौंदर्यीकरण कार्यों की तरह आकर्षक और प्रभावी होनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि 15 अक्टूबर तक सौंदर्यीकरण के कार्य पूरे किए जाएं।

उन्होंने विकास प्राधिकरणों के अधीन आने वाली सड़कों की स्थिति में तत्काल सुधार के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी सड़कों का सर्वे कर उनकी स्थिति का आकलन किया जाए और जहां सड़कें खराब हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर सुधार एवं मरम्मत का कार्य कराया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अगले 15 दिनों के भीतर प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाली सभी सड़कों को बेहतर स्थिति में लाया जाए। सड़कों की गुणवत्ता और सुधार कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की भी समीक्षा करते हुए कहा कि सभी जनपदों में अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ प्राप्त कर चुके अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बीपीएल परिवारों की विस्तृत सूची तैयार कर 15 दिन के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने सभी शहरों में सिटी पार्क अनिवार्य रूप से विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सिटी पार्क में सामान्य टॉयलेट के साथ-साथ पिंक टॉयलेट की व्यवस्था भी अनिवार्य रूप से की जाए। इसके साथ ही शहरी, अर्द्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी आवश्यकता के अनुसार पिंक टॉयलेट विकसित किए जाएं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगली समीक्षा बैठक तक प्रदेश में इस लक्ष्य का करीब 70 प्रतिशत हासिल कर लिया जाए।

मुख्यमंत्री ने ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि इसे सभी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों के साथ एकीकृत किया जाए।

अवैध निर्माण के मामलों पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण शुरू होने के बाद कार्रवाई करने की प्रतीक्षा न की जाए, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शुरुआती स्तर पर ही अवैध निर्माण को चिन्हित किया जाए। उन्होंने GIS, सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए, ताकि संदिग्ध निर्माण की समय रहते पहचान हो सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी अवैध निर्माण के मामले में अधिकारियों की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

उन्होंने प्रत्येक विकास प्राधिकरण में Illegal Construction Monitoring Dashboard विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस डैशबोर्ड में संदिग्ध निर्माण की पहचान से लेकर निरीक्षण की तारीख, जारी किए गए नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तक प्रत्येक चरण की रियल टाइम स्थिति उपलब्ध होनी चाहिए। इससे अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित की जा सकेंगी।

मुख्यमंत्री ने विकास प्राधिकरणों की वेबसाइट को नागरिकों के लिए अधिक सरल और उपयोगी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की वेबसाइट ‘Citizen Friendly’ होनी चाहिए, ताकि आम नागरिकों को योजनाओं, मानचित्र स्वीकृति, शुल्क, नियमों और अन्य सेवाओं से संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके।

उन्होंने देहरादून एवं हरिद्वार क्षेत्र में पार्किंग की समस्या को गंभीरता से लेते हुए ऐसी नगर पालिकाओं को चिन्हित करने के निर्देश दिए जहां पर्याप्त पार्किंग सुविधा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि MDDA और HRDA संबंधित नगर निकायों के साथ समन्वय स्थापित कर मल्टी-लेवल पार्किंग, सरफेस पार्किंग, पेरीफेरल पार्किंग तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल के माध्यम से पार्किंग विकसित करने की ठोस कार्ययोजना तैयार करें।

मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जनपद में आवासीय परियोजनाओं की प्रगति की भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक जनपद में आवासीय परियोजनाएं किस स्तर तक पहुंची हैं, अब तक कितने आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है और कितने आवास निर्माणाधीन हैं, इसका स्पष्ट विवरण तैयार किया जाए।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास प्राधिकरणों में नक्शा स्वीकृति, अवैध निर्माण, विकास शुल्क, मास्टर प्लान और प्रवर्तन की अलग-अलग व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जहां संभव हो, वहां प्रक्रियाओं में एकरूपता लाई जाए। उन्होंने अधिकारियों से इस संबंध में व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार करने को कहा, ताकि प्रदेश में नागरिकों को विकास प्राधिकरणों से संबंधित सेवाओं के लिए स्पष्ट, सरल और पारदर्शी व्यवस्था मिल सके।

उन्होंने Land Pooling Scheme को लेकर भी अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कम से कम 2 से 3 विकास क्षेत्रों में Land Pooling Scheme लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जाए। इस योजना के अंतर्गत किसानों और भूमि मालिकों को होने वाले लाभ का स्पष्ट एवं पारदर्शी मॉडल तैयार किया जाए और उन्हें योजना की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि विकास की योजनाओं में भूमि मालिकों के हितों और भविष्य के लाभ को स्पष्ट रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास प्राधिकरणों की भूमिका केवल शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिन ग्रामीण एवं अर्द्धशहरी क्षेत्रों में विकास प्राधिकरणों का क्षेत्र आता है, वहां भी नागरिक सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों के साथ समन्वय कर स्ट्रीट लाइट, पेयजल, बैठने की व्यवस्था सहित आवश्यक नागरिक सुविधाओं को विकसित करने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, सचिव श्री विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार सहित सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

मौसम विभाग, देहरादून द्वारा जारी भारी वर्षा की संभावना के दृष्टिगत 3 सितम्बर को जनपद अल्मोड़ा में कक्षा 1 से 12 तक के सम...
02/09/2026

मौसम विभाग, देहरादून द्वारा जारी भारी वर्षा की संभावना के दृष्टिगत 3 सितम्बर को जनपद अल्मोड़ा में कक्षा 1 से 12 तक के समस्त स्कूलों तथा सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय एवं समस्त राजकीय महाविद्यालयों के साथ- साथ सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में एक दिन का अवकाश घोषित किया गया है।

IndiaSkills 2026 के माध्यम से उत्तराखण्ड के युवाओं को अपनी प्रतिभा और कौशल प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर।
02/09/2026

IndiaSkills 2026 के माध्यम से उत्तराखण्ड के युवाओं को अपनी प्रतिभा और कौशल प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर।


02/09/2026

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर चमोली जनपद में उत्साह का माहौल है।
भगवान नारायण के प्रिय श्री बदरीनाथ धाम में भी जन्माष्टमी पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं।




मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज आईआरडीटी सभागार, देहरादून में उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वार...
02/09/2026

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज आईआरडीटी सभागार, देहरादून में उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा आयोजित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान मान्यता प्रमाण-पत्र वितरण समारोह में प्रदेश के 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों (मदरसों) को मान्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम की थीम “नई पहचान, नया सम्मान। आधुनिक शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य” रही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राधिकरण द्वारा 26 शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रदान किया जाना अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक शुरुआत है। राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने मान्यता प्राप्त करने वाले सभी संस्थानों के प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना समाज और राष्ट्र के भविष्य निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में प्राधिकरण बनाए जाने के पीछे मूल उद्देश्य यही है कि सभी बच्चे आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़ें और उन्हें अपने व्यक्तित्व तथा भविष्य के निर्माण के लिए पर्याप्त अवसर प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि परंपराओं का अपना महत्व है, लेकिन वर्तमान समय ज्ञान-विज्ञान, साइंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और AI का समय है। पूरी दुनिया तेजी से बदल रही है और प्रत्येक देश विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना समय की आवश्यकता है, ताकि वे बदलती दुनिया की चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे उनका व्यक्तित्व विकसित हो, उनकी प्रतिभा सामने आए और वे अपने भविष्य का निर्माण कर सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से कोई बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, लेखक या वैज्ञानिक बन सकता है। आज प्रत्येक क्षेत्र में शोध और नवाचार हो रहा है, इसलिए बच्चों को नई तकनीक और शोध को समझने, सीखने तथा उसे व्यवहार में उतारने की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि आज केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों को व्यावहारिक, आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नीतियों और निर्णयों का उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा वर्ग को टारगेट करना नहीं है। उन्होंने UCC का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि यह किसी वर्ग को निशाना बनाने के लिए लागू नहीं की गई है और इसी प्रकार अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण भी किसी वर्ग को टारगेट करने के लिए नहीं बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में सभी वर्गों के बीच आपसी प्रेम, भाईचारा और मधुर संबंध हैं तथा किसी व्यक्ति के साथ केवल उसकी पहचान या वर्ग के आधार पर भेदभाव करने की नीति नहीं है। सरकार व्यक्ति के कार्य और उसके योगदान को महत्व देती है।

मुख्यमंत्री ने सरकारी भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हुआ है, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी गरीब व्यक्ति को परेशान करना सरकार का उद्देश्य नहीं है। यदि किसी व्यक्ति के पास विधिवत खरीदी गई जमीन, वैध दस्तावेज, रजिस्ट्री और स्वीकृत मानचित्र है तो उसे परेशान करने का कोई उद्देश्य नहीं है।

उन्होंने प्राधिकरण की उपाध्यक्ष फरजाना का उल्लेख करते हुए कहा कि काम करने और अपनी क्षमता साबित करने वाले लोगों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शायद उन्होंने भी कभी नहीं सोचा होगा कि उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि यही सरकार के कार्य करने की शैली है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक बिना किसी भेदभाव के पहुंच रहा है। इन योजनाओं का लाभ देते समय लाभार्थी की जाति, वर्ग या समुदाय नहीं देखा जाता, बल्कि पात्रता को आधार बनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि आज अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में एक नई व्यवस्था की शुरुआत हुई है और इसे मजबूत करने की जिम्मेदारी सरकार तथा शिक्षण संस्थानों दोनों की है। मुख्यमंत्री ने बच्चों की बात सुनने और उनकी भावनाओं को समझने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग द्वारा बच्चों के भविष्य के लिए नियम-कानून एवं व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं, इसलिए शिक्षण संस्थानों को भी पूरी जिम्मेदारी के साथ इस विश्वास को मजबूत करना होगा। केवल औपचारिकता पूरी करने के बजाय धरातल पर वास्तविक परिवर्तन दिखाई देना चाहिए। उन्होंने अपेक्षा की कि अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में आज शुरू हुई यह पहल भी आगे चलकर देश के लिए एक उदाहरण बने और उत्तराखण्ड को इस क्षेत्र में नई पहचान दिलाए।

कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्री खजान दास, उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, अपर सचिव श्री विक्रम सिंह यादव सहित विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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