12/07/2026
ऋषिकेश के 7 मोड़ क्षेत्र में हो रही पेड़ों की कटाई ने पूरे उत्तराखंड को सोचने पर मजबूर कर दिया है। सालों से हरा-भरा रहा ये क्षेत्र न सिर्फ लोगों को स्वच्छ हवा देता था, बल्कि वन्यजीवों, ख़ासकर हाथियों के प्राकृतिक कॉरिडोर के रूप में भी जाना जाता रहा है। आज एडवोकेट राकेश बिनजौला ने उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल से फोन पर सवाल किया कि क्या पेड़ों की कटाई उनकी अनुमति या जानकारी में हो रही है। अगर मंत्री जी को जानकारी नहीं है, तो फिर सवाल उठता है कि जब वन विभाग की टीमें वहाँ तैनात हैं, तो जिम्मेदारी किसकी है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई इस क्षेत्र में ऐसी ट्रैफिक समस्या थी, जिसके लिए हज़ारों पेड़ों की बलि ज़रूरी थी? स्थानीय लोग तो कह रहे हैं कि 7 मोड़ में कभी स्थाई जाम की स्थिति नहीं बनी। फिर ऐसी स्थिति में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला ये कदम क्यों? क्या प्रकृति, वन्य-जीव और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से ज़्यादा जरूरी है कुछ किलोमीटर की सड़क चौड़ी करना? जनता पर्यावरण के प्रति संवेदनशील है, सवाल पूछ रही है, और भविष्य के लिए जवाब चाहती है। विकास ज़रूरी है, लेकिन ऐसा विकास किस काम का जो आने वाली पीढ़ियों को पछतावे में छोड़ जाए? पेड़ बचाइए, भविष्य बचाइए।