04/09/2026
रिफ्यूजी कॉलोनियों के फ्रीहोल्ड के लिए सांसद श्रीमती बांसुरी स्वराज जी से मुलाकात
दिल्ली की रिफ्यूजी कॉलोनियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड कराने की वर्षों पुरानी मांग को लेकर नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की माननीय सांसद श्रीमती बांसुरी स्वराज जी से मुलाकात कर उन्हें विस्तृत रूप से ज्ञापन एवं अपनी मांग से अवगत कराया।
हमने माननीय सांसद जी को बताया कि वर्ष 1947 के देश के विभाजन के समय लाखों परिवार अपना घर, जमीन-जायदाद, कारोबार और सब कुछ पाकिस्तान में छोड़कर अपने ही देश भारत में विस्थापित होकर आए थे। दिल्ली में इन परिवारों के पुनर्वास के लिए रिफ्यूजी कॉलोनियां बसाई गईं। आज इन कॉलोनियों में रहने वाली तीसरी-चौथी पीढ़ी भी उसी संपत्ति में अपना जीवन बिता रही है, लेकिन अनेक परिवार आज भी लीजहोल्ड व्यवस्था में अपने घर के पूर्ण मालिकाना हक की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
हमने सांसद जी से आग्रह किया कि 1947 के विस्थापित परिवारों के इस लंबे इंतजार को अब समाप्त किया जाए और दिल्ली की पात्र रिफ्यूजी कॉलोनियों की लीजहोल्ड प्रॉपर्टी को तत्काल फ्रीहोल्ड करने की प्रक्रिया पुनः शुरू कराई जाए।
माननीय सांसद श्रीमती बांसुरी स्वराज जी का आश्वासन
माननीय सांसद जी ने हमारी पूरी बात गंभीरता और संवेदनशीलता से सुनी तथा आश्वासन दिया कि वे इस विषय को माननीय केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल जी के समक्ष रखेंगी।
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि दिल्ली की लीजहोल्ड रिफ्यूजी कॉलोनियों को फ्रीहोल्ड कराने तथा इस विषय में उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव प्रयास करेंगी।
हम माननीय सांसद श्रीमती बांसुरी स्वराज जी का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने 1947 के विस्थापित परिवारों की इस महत्वपूर्ण और वर्षों पुरानी मांग को गंभीरता से सुना और सरकार के समक्ष इसे उठाने का आश्वासन दिया।
हमारी मांग स्पष्ट है —
“1947 में जो परिवार अपना सब कुछ छोड़कर भारत आए, उन्हें 2026 में भी अपने ही घर के मालिकाना हक के लिए इंतजार न करना पड़े।”
दिल्ली की पात्र रिफ्यूजी कॉलोनियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड किया जाए और परिवारों को पूर्ण मालिकाना हक प्रदान किया जाए।
यह केवल जमीन का मामला नहीं है।
यह 1947 के विस्थापित परिवारों के सम्मान, अधिकार और न्याय का विषय है।
हम आशा करते हैं कि माननीय सांसद जी के प्रयासों से यह विषय शीघ्र ही केंद्रीय सरकार के समक्ष प्रभावी रूप से पहुंचेगा और दिल्ली के रिफ्यूजी परिवारों को उनका वर्षों से लंबित मालिकाना हक प्राप्त होगा।