02/02/2022
विगत 40 सालों से ब्राजील में अद्वैत वेदांत का अध्यापन और वैदिक संस्कृति का प्रचार प्रसार करने वाली ग्लौरिया एरीरा को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। ग्लौरिया ने भारत की संस्कृति को साल 1974 में मुंबई में रहकर सीखा था जिसके बाद से उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इस सभ्यता को बढ़ावा देने में समर्पित कर दिया ।
1979 में ब्राजील पहुंचकर ग्लौरिया ने भारत से मिले ज्ञान को पुर्तगाली भाषा में लोगों तक पहुंचाना शुरू किया। कुछ सालों बाद 1984 में ग्लौरिया ने रियो डी जेनेरियो, ब्राजील में अपने साथियों की मदद से विद्या मंदिर सेंट्रो डे एस्टुदोस डी वेदांता ई सैन्सक्रिप्टो की स्थापना की। पुर्तगाली भाषा में अद्वैत वेदांत और संस्कृत के अलावा यहां महाभारत, भगवद गीता और रामायण का पाठ भी किया जाता है।ग्लौरिया द्वारा स्थापित विद्या मंदिर में हर शुक्रवार को प्रोफेसर हैनरिक कैस्ट्रो द्वारा सरस्वती पूजा की जाती है। साथ ही भारत में वैदिक कैलेंडर के त्यौहार मकरसंक्राति, महाशिवरात्रि, रामनवमी, हनुमान जयंती, जन्माष्टमी और दीपावली इत्यादि वैदिक धर्म के तरीके से मनाए जाते हैं।
ग्लौरिया ने ज्यादा लोगों तक वैदिक धर्म का प्रचार करने के लिए भगवद गीता का भी इंग्लिश में ट्रांसलेशन किया है। ग्लौरिया ने भारत में ली शिक्षा के दौरान ही कई आश्रमों में जाकर संस्कृत भाषा का ज्ञान लिया था। मैं एक बात बार बार कह रही हूँ कि सभी हिंदुओं का यह कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को संस्कृत की शिक्षा अवश्य दें। इसी संस्कृत के दिए से हम वेदांत का उजाला कर सकते हैं।
वैदिक ज्ञान प्रसार के लिए ऐसी विभूति को मैं नमन करती हूँ।🙏🙏
साभार : डॉ पवन विजय जी