Janta Ki Sarkar

Janta Ki Sarkar जनता की बात कहने का प्रभावशाली मंच

एक दिवस धर्मासाठीदि. २/०९/२०२३ वेळ :- सकाळी ११ वा.श्री. किरण (भैय्या) चव्हाण (आखिल भारत हिंदु महासभा, प्रदेशाध्यक्ष तथा ...
02/09/2023

एक दिवस धर्मासाठी
दि. २/०९/२०२३ वेळ :- सकाळी ११ वा.
श्री. किरण (भैय्या) चव्हाण (आखिल भारत हिंदु महासभा, प्रदेशाध्यक्ष तथा राष्ट्रीय कार्यकारीणी सदस्य)
धर्मसभा
कमलेशदासजी महाराज विश्वस्त, तिरुमला तिरुपती देवस्थानम (आंध्रप्रदेश) राष्ट्रीय धर्म प्रचारक अखिल भारत हिंदु महासभा

23/05/2023

मेघालय CM की प्रेस कॉन्फ्रेंस

19/05/2023

तमिल हिंदुओं को कब मिलेगा न्याय

19/04/2023

योगी जी आशा वर्कर की सुनो गुहार

27/03/2023

TDP support SC Status Demand for Dhobi Community

28/02/2023

ब्राह्मण समाज और सनातन का अपमान बर्दाश्त नहीं: राष्ट्रीय परशुराम परिषद

06/09/2022

मेरें बाकें बिहारी लाल, बना दो जनता की सरकार..
सरकार अब अब बन जाएगी

15/05/2022
डरा नहीं रहा हूँ बल्कि बता रहा हूँ। प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री मंत्री इनको तो सेना कहीं छुपा लेगी मगर अंधभक्तों तुम्हारा क...
11/05/2022

डरा नहीं रहा हूँ बल्कि बता रहा हूँ। प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री मंत्री इनको तो सेना कहीं छुपा लेगी मगर अंधभक्तों तुम्हारा क्या होगा ? सोचना जरूर।

जो जनता सर आँखो पर बैठा कर कुर्सी तक पहुँचाना जानती है, जब वही जनता कुर्सी छीनने पर उतारू होती है तो क्या होता है उसका सीधा उदाहरण वर्तमान श्रीलंका है।

श्रीलंका में राजपक्षे बंधु भारत में मोदी जी की ही तरह प्रचंड राष्ट्रवादी नेता माने जाते रहे हैं और वहां की जनता भी यही मानती आई थी कि राजपक्षे बंधु जो भी करेंगे, वह राष्ट्रहित में ही होगा।

राजपक्षे परिवार पर जनता के इस भरोसे की वजह भी वही थी , जो मोदी जी पर भारत की जनता की है … मोदी जी यहां मुस्लिमों और पाकिस्तान से राष्ट्र और धर्म को बचा रहे हैं तो राजपक्षे बंधु वहां की बहुसंख्यक सिंहली जनता के बौद्ध धर्म और राष्ट्र को तमिलों और भारत से बचा रहे थे।

मगर राजपक्षे अपने अजीबोगरीब फैसलों और नीतियों से श्रीलंका में एक के बाद एक आर्थिक संकट खड़ा करते गए। इसके चलते वहां रुपया लगातार गिरता गया और अंततः ऐसा जबरदस्त आर्थिक संकट गहराया कि रुपया नाममात्र कीमत वाले कागज के टुकड़ों में बदल गया।

हालात अब इतने बदतर हो चुके हैं कि प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं मगर जनता उन्हें व उनकी पूरी सरकार को इससे भी कड़ी सजा देने के लिए आतुर है।

लिहाजा कर्फ्यू के बावजूद उनका महल जला दिया गया है। सांसदों और मंत्रियों की जमकर कुटाई हो रही है। एक सांसद ने तो कुटाई और जिल्लत से बचने के लिए खुदकुशी कर ली है। वहां की सेना तक अब नेताओं को जनता के कहर से बचा नहीं पा रही है। जनता के गुस्से से नेताओं में ऐसा डर बैठ गया है कि वहां अब कोई कार्यवाहक प्रधानमंत्री तक बनने को तैयार नहीं हो रहा है।

*राजनितिक पार्टियां और उनके भाडे पर बनने वाले बिकाऊ नेता*आज रख तमाम नगर कॉलोनी आवासीय एवं औद्योगिक क्षेत्र विकसित करते ग...
03/05/2022

*राजनितिक पार्टियां और उनके भाडे पर बनने वाले बिकाऊ नेता*
आज रख तमाम नगर कॉलोनी आवासीय एवं औद्योगिक क्षेत्र विकसित करते गए पर उनके वैस्ट और गंदे पानी को बिना किसी योजना के पवित्र निर्मल जल की नदियों मे बहाते रहे। जिससे सभी प्राकृतिक जल स्रोत नदी तालाब कुआँ नोला धारा दूषित होते चलें गए तब बिसलेरी पानी का बिकास किया गया ।

अन्यथा आज किसी आयुष्मान भारत जैसी योजनाओ की जरूरत ही नहीं पड़ती

अभी भी यदि जनता जाग्रत हो जाए तो बहुत कुछ बचाया जा सकता है।

जिसके लिए सबसे पहले इस भयंकर राजनितिक मकडजाल को समझना होगा जिसमें नेता अधिकारी कर्मचारी और धर्माधिकारी समय समय पर एक जुट होकर निर्बल जनता के मौलिक अधिकारों का भी गला घोट देते है। क्योंकि बेफ्कुप् जनता कभी अपने मौलिक अधिकारों की लड़ाई मे भी जनता के साथ खड़ी नहीं होती?

और राजनितिक पार्टियां राष्ट्रीय पीएम के राज्यीय् सी एम के चुनावो के साथ साथ घरेलु लोकल (नगर निगम) के चुनाव मे भी अपने अपने टिकट उन्चे दामों मे बेच कर पैसा इकठ्ठा करने मे लगी रहती है।

हमें यानि जनता को सर्व प्रथम घरेलु चुनावो से राजनितिक पार्टियों का बहिस्कार करना होगा और समाज गली मोहल्ले के सामाजिक कार्यकर्ताओ को इन छोटे छोटे चुनावो मे उतार कर जीत दिलाना होगा ताकि वो जनता के अधिकारों की लड़ाई (एक पार्टी के गुलाम चाटुकार नेताओ की तरह नहीं) एक लीडर की तरह लड़ सके।।
साभार *शैडो केबिनेट*

भारतीय् संविधान में अबतक की विभिन्न सत्ताधारी पार्टियों ने अपने निजी स्वार्थ लाभ और विवेकानुसार समय समय पर करीब 127 संशो...
29/04/2022

भारतीय् संविधान में अबतक की विभिन्न सत्ताधारी पार्टियों ने अपने निजी स्वार्थ लाभ और विवेकानुसार समय समय पर करीब 127 संशोधन कर दिए ।

परंतु...

राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति जैसे पदो के नाम मे परिवर्तन नहीं किये जबकि राष्ट्राध्यक्ष या उप राष्ट्राध्यक्ष कर देने थे इससे किसी भी विपक्षी दल या किसी पड़ोसी पाकिस्तान बंगलादेश, अफगानिस्तान अथवा चायना को भी कोई आपत्ति नहीं होती ?

भारतीय् संविधान के भाग 5
भारत संघ Union of India अध्याय-1 कार्य पालिका अनुच्छेद Article 52 से 62 के अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति होता है। तथा अनुच्छेद 63 से 69 के अनुसार एक उपराष्ट्रपति होता है।।

लेकिन अब भारतीय् लोकतंत्र मे जनता को ही सोच विचार करना होगा क्योंकि
जो लोग भारत भूमि को अपनी मूल मातृ भूमि और संस्कृत को अपनी मातृ भाषा मानते है। भारतीय सनातन धर्म संस्कृति को ही अपनी मूल संस्कृति मानते है ।

एक राष्ट्र के रूप में राष्ट्र और राज्य की परिभाषा में चार मूल तत्त्व मुख्य आधार होते हैं।

अ.) मातृ भूमि,
ब.) मातृभाषा,
स.) मातृ संस्कृति और
द्.) जनसंख्या

स्वाधीन भारत में राज्यों के पुनर्गठन आयोग 1956 ने इसी आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की सिफारिश की थी।

तथा U.N.O सयुंक्त राष्ट्र महासभा ने भी इन्ही प्रमुख 4 तत्वों को राष्ट्र राज्य की परिभाषा में सम्मलित किया था

सोचने की बात है? विश्व मे कौन से देश के संविधान में ऐसी भाषा है जिसमें एक National President को राष्ट्रपति या Vice President को उप-राष्ट्रपति के नाम से जाना जाता है ?

महात्मा गाॅधी के लिए नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने सन 1939 ई में सिंगापोर से एक टेलीग्राम करके Oh my Father of Nation के नाम से सम्बोधित किया था ।

गाॅधी जी के लिए महात्मा, राष्ट्र पिता - राष्ट्र निर्माता नामक संज्ञा सम्बोधन एक सम्मान आदर बाचक शब्द उच्चारण था। यह कोई संवैधानिक पद नहीं था राष्ट्र पति पद अथवा उपराष्ट्रपति पद जैसी उपमा तो राज शाही में भी राजा के लिए नहीं होती थी ?

राजा भी मातृ भूमि राज्य लक्ष्मी का संरक्षक उत्तराधिकारी मात्र होता था ।

कभी युद्ध विजय करके राज्य का विस्तार कब्जा की गयी भूमि हासिल करने पर भूपति की उपमा हासिल करता था ?

लोकतान्त्रिक संसदीय शासन प्रणाली में कोई भी स्थायी राजा महाराजा नहीं बन सकता है ?

आप ही बताओ राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति पद कितना अभद्र -असभ्य है । क्या हम भारतीय लोगों की मातृ भूमि "वन्दे मातरम् -भारत माता" के वेतनखोर - तनखैया लोग पति और उपपति संवैधानिक पद दो पति कैसे सही हो सकते हैं ?

भारत माता किसी एक की पत्नी तो दूसरे की उपपत्नी है क्या ?

यह ध्यान रखे कि भारत भूमि में जन्म लेने वाला प्रत्येक नागरिक भारत माता का पुत्र - पुत्री ही हो सकता हैं ।

संविधान में परिवर्तन अनिवार्य रूप से तत्काल होना चाहिये?

सरकार् मे जनता की भागीदारी यानी कि सत्ता का विकेंद्रीकरण सत्ता को केंद्रित करके रखने वाली पार्टीओ और उनके नेताओं को हजम ...
19/04/2022

सरकार् मे जनता की भागीदारी यानी कि सत्ता का विकेंद्रीकरण सत्ता को केंद्रित करके रखने वाली पार्टीओ और उनके नेताओं को हजम नहीं हुई।

मिशन दिल्ली 272 जनता ही सरकार अबकी बार जनता की सरकार को भी इस राजनीतिक मकड़जाल का शिकार होना पड़ा ।

दिल्ली MCD के चुनाव जो डिस्मिस या पोस्टपोण्ड किए गए है। वे राजनीतिक मकड़जाल की भेंट चढ़ाए गए है क्योकि इसके नियमानुसार नेता, नेता का पक्षधर होता है ।अधिकारी, अधिकारी का खास हो जाता है। कर्मचारी, कर्मचारी को बचा लेता है । परंतु जनता कभी जनता का साथ नहीं देती, वह इन मकडजाल के हिस्सेदारो की चमचागिरी चाटुकारिता गुलामी अंधभक्ति करके खुद के उनके साथ फोटो खिचवा कर अपने आपको धन्य समझती रहती है।

जनता को दिखाने के लिए एक पार्टी दूसरी पार्टी को कोस रही है एक दूसरे को लांचन् जरूर दे रही हैं। पर अंदर से मिली हुई है । और कहीं ना कहीं भावी सत्ता पुजारी या सत्ता धारी नेताओं को यह समझ में आ रही थी कि जनता ही सरकार अबकी बार जनता की सरकार
आगे आने वाले समय में यदि खड़ी हो गई तो हम दोनों भुगतते रह जाएँगे तथा दूसरे इस नए बवाल को और भुगतना पड़ेगा सत्ता धारी पार्टी ने दाँव खेला पावर का स्तेमाल किया और एक डंडे से दोनों को मार गिराया इधर केजरीवाल चला जाएगा और इधर इस जनता की सरकार की भी बानगी मालूम पड़ जाएगी।

कि जनता ही सरकार अबकी बार जनता की सरकार में कितना दम है ।

अब हम अगर शांति होकर बैठ जाते हैं तो भी हमारा गुजारा नहीं है ।

हमें यह एक संदेश जनता के बीच में किसी प्रोग्राम के तहत किसी डिबेट के तहत किसी आयोजन के साथ मीडिया को एकत्र कर जरूर बता देना चाहिए ।
ताकि हमारी पहचान बनी रहे आन्यथा ये राजनीतिक पार्टियां एक बार तू एक बार मे की policy पर जनता को खाती रहेंगी।

क्योंकि जनता ही सरकार जनता की सरकार अबकी बार जनता की सरकार से जनता जाग रही है। जिससे सत्ता के विकेंद्रीकरण द्वारा सरकार मे जनता की भागीदारी संभवत् बनी रहे।।
साभार जनता की "शैडो केबिनेट"

14/04/2022

यज्ञ क्यों

 #दिल्लीकेगुनहगार  #दिल्लीकेसोतेलेबेटे केजरीवाल दिल्ली की जनता से टैक्स की उगाई के अरबो रुपए अपने विज्ञापन  के बहाने MCD...
01/04/2022

#दिल्लीकेगुनहगार #दिल्लीकेसोतेलेबेटे केजरीवाल दिल्ली की जनता से टैक्स की उगाई के अरबो रुपए अपने विज्ञापन के बहाने MCD को देते ही रहेगें।

दोनों ही राजनितिक पार्टियां दिल्ली की जनता को रखेल की तरह स्तेमाल कर रही है।

केजरीवाल विज्ञापन ज्यादा करते है उसका सारा पैसा किसको मिलता है MCD को ही ना....?

कल संसद भवन मे सांसद प्रवेश वर्मा जी 3 नगर निगम को एक करने के फायदे बता रहे थे। दिल्ली की जनता का फैसला बता रहे थे मात्र एक राजनैतिक षडयन्त्र, सत्तासीन राजनैतिक पार्टी का निजी फैसला है जिससे जनता को किसी भी तरह का राजनैतिक या प्रशासनिक विकास का लाभ नहीं मिल सकता ।

बल्कि अफसर शाही - लाल फीताशाही से अवैध वसूली का भ्रष्टाचार बढेगा और विकास में देरी होगी जिसका भुगतान भी जनता को ही करना पड़ेगा ?

भाजपा 15 वर्षो से तीनों नगर निगमों की राजसत्ता में रही है । केन्द्र सरकार के प्रतिनिधि उपराज्य पाल के अन्तर्गत कार्य करती है । उपराज्य पाल के पास भारत के प्रेजिडेंट और अन्य राज्यों के राज्यपालों से अधिक शक्तियां प्राप्त हैं ?

तीनों नगर निगमों को एकीकरण से एक कमिश्नर की नियुक्ति का मतलब कमिश्नर के पास अधिक शक्तियां होगी ?

तथा एक ही महापौर का चुना जाना । महापौर के पास दिल्ली के मुख्यमंत्री से अधिक शक्तियां हासिल होगी। मुख्य मन्त्री का पद एक "शैडो कैबिनेट" के जैसे ही रह जाएगा।।

हम तो कहते है ।
दिल्ली MCD के घरेलु और लोकल कहे जाने वाले चुनाव में राज्य स्तर के चुनाव मे लड़ने वाली/ राष्ट्रीय स्तर की राजनिती करने वाली राजनितिक पार्टीया होनी ही नहीं चाहिए ?

गली मोहल्ले वार्ड की जनता व समाज सेवी संस्थाओ के सामाजिक कार्यकर्ताओ को ही नगर निगम की सत्ता मे काबिज रहने की जरुरत है।
जनता ही सरकार एक पहल है एक जूनून है जनता का इम्युनिटी है।

#अबकीबारजनताकीसरकार

 #दिल्लीकेगुनहगार  #दिल्लीकेसोतेलेबेटे केजरीवाल जी खुद लो एण्ड ओर्डर बिगाडना चाहता है। इसके खिलाफ़ सभी संवेधानिक शक्त से...
31/03/2022

#दिल्लीकेगुनहगार #दिल्लीकेसोतेलेबेटे केजरीवाल जी खुद लो एण्ड ओर्डर बिगाडना चाहता है। इसके खिलाफ़ सभी संवेधानिक शक्त से शक्त देश द्रोही धाराओ मै कार्यवाही होनी ही चाहिये ?

परंतु??
*यक्ष प्रश्न..*
विश्व की सबसे बड़ी हिंदुत्व वादी पार्टी की केंद्र सरकार अपने अधिकारो का प्रयोग करके महामहिम राष्ट्रपति को दिल्ली विधान सभा भन्ग करने की सिफारिस नहीं कर पा रही ।

अन्यथा आज लोकसभा मे अमित शाह जी को इतनी लम्बी वार्ता नहीं करनी पड़ती और शायद नगर निगम एक करने की भी जरूरत नहीं पड़ती ?

जनता को यहाँ तक का दिमाग से सोचना चाहिए कि राजनितिक पार्टियां कभी भी जन भागीदारी और जन सहयोगी नियम क़ानून नहीं बनाती? वो अपनी राजनितिक सुबिधा नुसार ये सब करते रहते है।

जब एक नगर निगम के तीन हिस्से किये थे तब भी तब की राजनितिक पार्टी की सत्ता को लाभ लेना था और अब जब तीन से एक की जा रही है तब भी उनका अपना लाभ है। इसीको राजनितिक मकडजाल कहते है। जिसको अब जन जन को समझना चाहिए जिसमें नेता नेता का होता है।
अधिकारी अधिकारी का हित् करता है ।
कर्मचारी कर्मचारी को बचाता है जनता द्वारा फसने से ।
मगर दुर्भाग्य देश की जनता कभी अपने ही साथी जनता का साथ नहीं देती।

समझना होगा ?
ये राजनितिक पार्टियां सत्ता का विकेंद्रीकरण करना क्यों नहीं सीख् पाती ताकि सत्ता मे जनता की भी (नगर निगम, पालिका, ग्राम पंचायत, प्रधानी, छात्र संघ, चुनावो द्वारा) सीधे भागीदारी निश्चित हो सके।।

जनता ही सरकार एक उपयोग है। जिसके अंतर्गत घरेलु लोकल कहे जाने वाले नगर निगम चुनाव मे जनता की सीधे भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु इन राजनितिक पार्टियों की घुस पेठ को खत्म किया जाना है।।

आप भी इस छोटी सी पहल से जुड़ कर सहयोगी बन सकते है।
"शैडो केबिनेट"

दिल्ली नगर निगमों का आज एकीकरण  या भूतकाल में किए गए विभाजन केवल सत्ता धारी राजनैतिक पार्टियों के फायदे के लिए ही किये स...
23/03/2022

दिल्ली नगर निगमों का आज एकीकरण या भूतकाल में किए गए विभाजन केवल सत्ता धारी राजनैतिक पार्टियों के फायदे के लिए ही किये सौदे थे ।

लोकतान्त्रिक एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण से तीनो निगमों का पुनः एकीकरण कर देने से ज्वलंत जन समस्याओं मे कोई सुधार और समाधान की सम्भावनाए नहीं बनती ? बल्कि राजनैतिक पार्टियों के एक दूसरे को गिरा कर अपने अपने फायदे की प्रबल सम्भावनाए उभरती है।

नगर निगमों में खाने-पीने हेतु हजारों मुँह और हजारों बड़े- बड़े चमड़े के पेट हैं । इन चमड़े के पेटों में जितना भी धन डालते जाओगे, उतना चमड़े के पेट अधिक फैलते जायेगें जनता की मेहनत और 19 तरह के टैक्स वसूली से संचित वित्तीय कोष -सरकारी खजाने के घड़े के नीचे सैकड़ों दृष्य- अदृष्य छेदों से दिन रात 24 घण्टे लीकेज होल खुले हुए हैं ।

जब तक पेट की सीमा निर्धारित नहीं होगी और लीकेज के छेद बन्द नहीं होगें और ना ही जन समस्याओं का समाधान कभी होगा ?

जब एक से तीन किये थे तब भी उनके अपने निजी राजनितिक फायदे के लिए किये थे और अब जब उन तीनो को एक किया जा रहा है तब भी इन राजनितिक फायदे के लिए ही किया गया है?

19/03/2022

holi ka sandesh
#अबकीबारजनताकीसरकार

Holi parv ki hardik subh kamnaye
17/03/2022

Holi parv ki hardik subh kamnaye

09/03/2022

इतनी मिठास
अबकी बार जनता ही सरकार
#अबकीबारजनताकीसरकार

09/03/2022

हंगामा होंगा ही
#अबकीबारजनताकीसरकार

06/03/2022

आवाज उठाओ
#अबकीबारजनताकीसरकार

05/03/2022

नारी हूँ शक्तिशाली हूँ

 #दिल्लीकेगुनहगार  #दिल्लीकेसोतेलेबेटे केजरीवाल को एम सी डी मे आने से रोकना होगा ताकि जनता ही सरकार बने  #अबकीबारजनताकीस...
04/03/2022

#दिल्लीकेगुनहगार #दिल्लीकेसोतेलेबेटे केजरीवाल को एम सी डी मे आने से रोकना होगा ताकि जनता ही सरकार बने #अबकीबारजनताकीसरकार

सत्ता का ज्यादा से ज्यादा केंद्रीय करण बनाए रखने मे तनबल् मनबल् जनबल धनबल् बाहुबल् क्रिमिनल बल्कि कई जान तक फूँक देती है...
02/03/2022

सत्ता का ज्यादा से ज्यादा केंद्रीय करण बनाए रखने मे तनबल् मनबल् जनबल धनबल् बाहुबल् क्रिमिनल बल्कि कई जान तक फूँक देती है हमारे लोकतांत्रिक देश भारत की ये राजनीतिक पार्टियां?

विकेंद्रीकरण क्यूँ नहीं होने देती?

सत्ताराज जनहित जन कल्याण के लिए होना चाहिए?

राजनीतिक पार्टियां सत्ता मे जनता की भागीदारी क्यों नहीं करना चाहती ?

जनता को 5 साल मे केवल 1 वोट देने का अधिकार ही क्यों दिया इसके अलावा और क्या दिया सारे अधिकारों को निजी नियम कानूनो से जकड कर जन जन को वंचित कर रखा हुआ है।।

जनता को अपने घरेलु मोहल्ले लेवल के लीगल अधिकार पाने का हक क्यूँ नहीं वो भी ये ही राजनितिक पार्टियां ही क्यूँ देंगी?

अपने लोकल नियम कानून बनाने का कोई अधिकार क्यूँ नहीं है। वहाँ भी ये राजनितिक पार्टियां अपने फायदे के कायदे बनाकर खुद की मन मर्जी चलाती है।।

*इन्हें अब रोकना होगा*

आज देश के करोड़ों आरडब्लूए चलाने वाली जनता ही है।

25-50 लाख सोसाइटी NGO ट्रस्ट चलाने वाली जनता ही है।

फिर यह नगर निगम के चुनाव जो घरेलू लोकल चुनाव कहे जाते है वार्ड के गली मोहल्ले के चुनाव हैं इनकी शूव्यवस्था की भागीदारी में जनता क्यों नहीं।।

क्यों राजनीतिक पार्टियां जो देश पर राज करती हैं जो स्टेट् पर राज करती हैं वह यहां बैठ कर जनता पर अपना अधिकार क्यों जमाने आ जाती हैं ।

राशन का पांच 5 किलो अनाज फ्री का पानी बिजली परिवहन पाकर अब जनता जाग चुकी है 2 वर्ष के 2-2 लॉकडाउन की भरमार भुखमरी बेरोजगारी के बाद 2-2 इंजेक्शन और बूस्टर भी लगवा चुकी है अत: अब उसकी इम्युनिटी बढ़ चुकी है।

अब वह अपने नियम कायदे घरेलु स्तर के विकास प्रबन्धन खुद कर सकती है अपने निजी अधिकारों के लिए राज्य स्तर की सरकार और केंद्र सरकार से खुद लड़ने का मन बना चुकी है दिल्ली की जनता व् अब वह सक्षम भी है।

#अबकीबारजनताकीसरकार

02/03/2022

मानवता की आवाज
डॉक्टर दुआ जनता ही सरकार के साथ
#अबकीबारजनताकीसरकार

"जनता ही सरकार"  #अबकीबारजनताकीसरकार नगर निगम दिल्ली 2022*शैडो केबिनेट* चेयरमैन सेवायोगी मणिकेश चतुर्वेदीलाइव डिवेट देखे...
01/03/2022

"जनता ही सरकार" #अबकीबारजनताकीसरकार नगर निगम दिल्ली 2022
*शैडो केबिनेट* चेयरमैन
सेवायोगी मणिकेश चतुर्वेदी
लाइव डिवेट देखें
https://youtu.be/NZlyBduwkek

दिल्ली नगर निगम चुनाव- अबकी बार जनता की सरकार

28/02/2022

पुराना चावल खिलकर सुगंध देता है
#अबकीबारजनताकीसरकार

27/02/2022

MCD चुनावी गीत
आपने सुना क्या ?
#अबकीबारजनताकीसरकार

26/02/2022

ये जज़्बा जिताएगा MCD चुनाव

24/02/2022

#अबकीबारजनताकीसरकार (जनता ही सरकार) बनेगी घरेलु/लोकल कहे जाने वाले नगर निगम चुनाव दिल्ली 2022 में यदि आप भी मोहल्ले वार्ड के चुनाव मे अपने मनोनित व्यक्ति को चुनाव लडवाना चाहते है तो आप भी इस मुहिम का हिस्सा बने https://t.co/0VLgrb1LS6

23/02/2022

मिलिए अशोक सुराना जी से
#अबकीबारजनताकीसरकार

हमारे एक चुनावी सर्वे में खुलासा हुआ है कि बीजेपी से 2056 लोगआम आदमी पार्टी से 3639 लोग औरकांग्रेस से करीब 4500 लोग दिल्...
23/02/2022

हमारे एक चुनावी सर्वे में खुलासा हुआ है कि बीजेपी से 2056 लोग
आम आदमी पार्टी से 3639 लोग और
कांग्रेस से करीब 4500 लोग दिल्ली एमसीडी चुनाव की तैयारी करने मे लगे है जबकि दिल्ली एमसीडी मे 272 वार्ड है जिनपर पार्षद के चुनाव होने है। इसी वेफ्कुपी का आर्थिक फायदा ये राजनितिक पार्टियां अपनी टिकट कांप्टीशन मे ऊंचे रेट पर बेच कर उठा लेती है।

एमसीडी चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले गुलाम चमचे चाटुकार अंधभक्तो से हमारा निवेदन है कि वो इन दिग्गज राजनितिक पार्टीयो के मकडजाल मे ना फसे दिल्ली एमसीडी का चुनाव कोई राष्ट्रीय या राज्य लेवल का चुनाव नहीं है इसको घरेलु लोकल या मध्यम तीसरे दर्जे का चुनाव कहते है। जिसको लड़ने के लिए इसबार "शैडो केबिनेट" व् अन्य संस्थाओ के संयुक्त मिशन जनता ही सरकार #अबकीबारजनताकीसरकार मिशन से जुड़े। इस माध्यम से जनताअब खुद संकल्पित हो चुकी है। आप भी इन पार्टियों से टिकट ना मिलने पर होने वाली भावी पीड़ा से बचकर जनता के उद्देश्यों पर खरा उतर सकते है। चुनाव जीत सकते है । हम आपके साथ है।

#अबकीबारजनताकीसरकार जनता ही सरकार मिशन से जुड़े।।

जीत निश्चित हो तो, कायर भी लड़ सकते हैं, बहादुर तो वे कहलाते हैं, जो हार निश्चित होने पर भी मैदान नहीं छोड़ते?
23/02/2022

जीत निश्चित हो तो, कायर भी लड़ सकते हैं, बहादुर तो वे कहलाते हैं, जो हार निश्चित होने पर भी मैदान नहीं छोड़ते?

Address

110092, DL
Delhi
110092

Telephone

+918882221888

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Janta Ki Sarkar posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Janta Ki Sarkar:

Videos

Share

Category


Other Social Services in Delhi

Show All