30/05/2026
मैं हूँ उत्तर प्रदेश l चटपटे स्वाद की बात हो रही है तो इस श्रृंखला में फर्रुखाबाद की हींग वाली दालमोठ का नाम तो स्वत: ही जुड़ जाता है l तीखे स्वाद और हींग से भरी यह दालमोठ देश भर में पसंद की जाती है l लोगों में इसकी लोकप्रियता को देखते हुए इसे एक जिला एक व्यंजन योजना में जगह मिली है l
फर्रुखाबाद की दालमोठ का इतिहास देश के उत्तरी हिस्सों की नमकीन संस्कृति से जुड़ा है l यह जिला मुगलकाल के दौरान व्यापार, संस्कृति और खानपान का प्रमुख केंद्र रहा है l दालमोठ के जन्म लेने के पीछे की कहानी यह है कि पुराने समय में यात्राएँ लम्बी लम्बी होती थीं l तब भोजन ऐसा होना चाहिये कि जो लम्बे समय तक खराब न हो l ऐसे में दाल, बेसन और मसालों से बनी सूखी नमकीन के बनने का सिलसिला शुरु हुआ l फर्रुखाबाद में स्थानीय हलवाइयों ने स्थानीय स्वाद को ध्यान में रखते हुए विशेष मसालों की कुरकुरी नमकीन बनाना शुरु किया l जिससे यहाँ की दालमोठ का स्वाद ही अलग निकला l यहाँ के दालमोठ की खासियत यह है कि इसमें बेहतरीन मसालों के साथ साथ असली हींग का तड़का लगाया जाता है जो इसे बाज़ार की अन्य नमकीनों से अलग करता है l इसमें भुनी हुई कुरकुरी दालों (मटर, मसूर), सेव, मूंगफली का संतुलित मिश्रण होता है l साथ ही इसमें सेम के बीज डाले जाते हैं जो इसे और स्वादिष्ट बनाते हैं l यह दालमोठ दो महीनों तक प्रयोग में लायी जा सकती है l यह जल्दी खराब नही होती है l 19वीं और 20वीं शताब्दी में जब मेरे शहरों के बीच व्यापार बढ़ा तो इस जिले की नमकीन भी आसपास के क्षेत्रों में मशहूर होने लगी l धीरे धीरे यह घरेलू नाश्ता घरों तक ही सीमित नहीं रह गया बल्कि स्थानीय उद्योग का हिस्सा बन गया l आज भी यहाँ कई परिवार ऐसे हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी दालमोठ बेचने और बनाने का काम करते आ रहे हैं l फर्रुखाबाद में अनेक ऐसी दुकानें हैं जो सिर्फ इसी नमकीन के लिये देश भर में जानी जाती हैं l फर्रुखाबाद की चटपटी नमकीन के बारे में बात करते हुए मेरे मुँह में पानी आने लगा है l
एक जिला एक व्यंजन योजना में शामिल होने के बाद यहाँ के नमकीन व्यवसाय में उन्नति के रास्ते खुलने के आसार बढ़ गये हैं l यहाँ की दालमोठ को क्षेत्रीय स्तर पर तो पहचान तो मिल गयी है पर अब इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिलेगी l साथ ही देश भर में यहाँ के दालमोठ की मांग बढ़ेगी l दालमोठ निर्माण का कारोबार बढ़ेगा तो यहाँ मसाला बनाने, दाल तलने, पैकेजिंग और अन्य कार्यों के लिये भी लोगों की आवश्यकता पड़ेगी l इसलिये यहाँ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे l बड़ी संख्या में महिलायें और छोटे परिवार इस उद्योग से जुड़ सकते हैं l बेहतर ब्रांडिंग और पैकजिंग के लिये सरकारी स्तर पर प्रशिक्षण दिये जायेंगे l दाल, बेसन, मसाले और तेल की मात्रा बढ़ने से स्थानीय किसानों और व्यापारियों का मुनाफा बढ़ेगा l आपको बता दूँ कि भारतीय नमकीनों की विदेशों में बड़ी मांग है l यदि गुणवत्ता और पैकेजिंग के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरी तो यह निर्यात का उत्पाद भी बन सकती है l
हालाँकि चुनौतियाँ तो यहाँ भी हैं l अब युवा पीढ़ी का रूझान इस व्यवसाय के प्रति कम हुआ है l इस कारोबार में अभी मार्केटिंग का अभाव है l यह व्यवसाय सोशल मीडिया, ई कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म का फायदा नहीं उठा पा रहा है l छोटे कारोबारियों के लिये अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करना आसान नही है l छोटे व्यापारियों को कई बार ऋण सुविधाओं और प्रशिक्षण आदि के बारे में भी पूरी जानकारी नही रह्ती है l एक जिला एक व्यंजन योजना में शामिल होने से इस व्यवसाय में प्रगति होने और इसकी चुनौतियों का समाधान होने की असीम सम्भावनायें हैं l
अब मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ l आप सब ऐसे ही मेरे साथ बने रहिये l कृपया इस पोस्ट को लाइक और शेयर करें और आगे भी ऐसी ही जानकारियां हासिल करते रहने के लिए, नीचे दिए लिंक के द्वारा मेरे पेज को फॉलो करें l धन्यवाद...
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