The OSHO School

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जैसा हर महापुरुष के साथ होता रहा, वैसा ही ओशो के साथ भी होगा. या तो वो भुला दिया जाएगा, या उसे ईश्वर बना दिया जाएगा. किस...
13/12/2023

जैसा हर महापुरुष के साथ होता रहा, वैसा ही ओशो के साथ भी होगा. या तो वो भुला दिया जाएगा, या उसे ईश्वर बना दिया जाएगा. किसी को भुला देना बुरा है, लेकिन किसी को ईश्वर बना देना भी कम बुरा नहीं.धर्म और ईश्वर से साथ हमारा रिश्ता यूं समझिए कि कोई उंगली से इशारा करके रास्ता बता रहा है. और हम उस रास्ते पर चलने के बजाय उस उंगली की या बहुत से बहुत उस रास्ते की पूजा करने लगते हैं. हमने धार्मिक पुस्तकों, धर्मगुरुओं आदि के साथ भी यही किया है. यही ओशो के साथ भी करेंगे.

20/03/2023

#1- जो कुछ भी महान है, उस पर किसी का अधिकार नहीं हो सकता. और यह सबसे मूर्ख बातों में से एक है जो मनुष्य करता है - मनुष्य अधिकार चाहता है.

ओशो The OSHO School

11/03/2023

आप सभी का स्वागत है The OSHO School YouTube Channel के Facebook पेज पर। हमें खुशी होती है कि हम आपको इस महान और उपयोगी चैनल के बारे में बता सकते हैं।

The OSHO School एक ऐसा चैनल है जो आपको जीवन के सभी पहलुओं से अवगत करवाता है। यहां पर हम आपको संघर्ष, संतुलन, ध्यान और स्वतंत्रता जैसे अनेक विषयों पर ज्ञान प्रदान करते हैं। हम वास्तविक जीवन में उपयोगी उपदेशों के साथ-साथ ध्यान, जागरूकता और समृद्धि के सूत्र भी देते हैं।

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ओशो : -   एक जीवन परिचयओशो (मूल नाम रजनीश) (जन्मतः चंद्र मोहन जैन, ११ दिसम्बर १९३१ - १९ जनवरी १९९०), जिन्हें क्रमशः भगवा...
11/03/2023

ओशो : - एक जीवन परिचय

ओशो (मूल नाम रजनीश) (जन्मतः चंद्र मोहन जैन, ११ दिसम्बर १९३१ - १९ जनवरी १९९०), जिन्हें क्रमशः भगवान श्री रजनीश, ओशो रजनीश, या केवल रजनीश के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय विचारक, धर्मगुरु और रजनीश आंदोलन के प्रणेता-नेता थे। अपने संपूर्ण जीवनकाल में आचार्य रजनीश को एक विवादास्पद रहस्यदर्शी, गुरु और आध्यात्मिक शिक्षक के रूप में देखा गया। वे धार्मिक रूढ़िवादिता के बहुत कठोर आलोचक थे, जिसकी वजह से वह बहुत ही जल्दी विवादित हो गए और ताउम्र विवादित ही रहे। १९६० के दशक में उन्होंने पूरे भारत में एक सार्वजनिक वक्ता के रूप में यात्रा की और वे समाजवाद, महात्मा गाँधी, और हिंदू धार्मिक रूढ़िवाद के प्रखर आलोचक रहे। उन्होंने मानव कामुकता के प्रति एक ज्यादा खुले रवैया की वकालत की, जिसके कारण वे भारत तथा पश्चिमी देशों में भी आलोचना के पात्र रहे, हालाँकि बाद में उनका यह दृष्टिकोण अधिक स्वीकार्य हो गया।

चन्द्र मोहन जैन का जन्म भारत के मध्य प्रदेश राज्य के रायसेन शहर के कुच्वाडा गांव में हुआ था। ओशो शब्द की मूल उत्पत्ति के सम्बन्ध में कई धारणायें हैं। एक मान्यता के अनुसार, खुद ओशो कहते है कि ओशो शब्द कवि विलयम जेम्स की एक कविता 'ओशनिक एक्सपीरियंस' के शब्द 'ओशनिक' से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'सागर में विलीन हो जाना। शब्द 'ओशनिक' अनुभव का वर्णन करता है, वे कहते हैं, लेकिन अनुभवकर्ता के बारे में क्या? इसके लिए हम 'ओशो' शब्द का प्रयोग करते हैं। अर्थात, ओशो मतलब- 'सागर से एक हो जाने का अनुभव करने वाला'। १९६० के दशक में वे 'आचार्य रजनीश' के नाम से एवं १९७० -८० के दशक में भगवान श्री रजनीश नाम से और १९८९ के समय से ओशो के नाम से जाने गये। वे एक आध्यात्मिक गुरु थे, तथा भारत व विदेशों में जाकर उन्होने प्रवचन दिये।

रजनीश ने अपने विचारों का प्रचार करना मुम्बई में शुरू किया, जिसके बाद, उन्होंने पुणे में अपना एक आश्रम स्थापित किया, जिसमें विभिन्न प्रकार के उपचारविधान पेश किये जाते थे. तत्कालीन भारत सरकार से कुछ मतभेद के बाद उन्होंने अपने आश्रम को ऑरगन, अमरीका में स्थानांतरण कर लिया। १९८५ में एक खाद्य सम्बंधित दुर्घटना के बाद उन्हें संयुक्त राज्य से निर्वासित कर दिया गया और २१ अन्य देशों से ठुकराया जाने के बाद वे वापस भारत लौटे और पुणे के अपने आश्रम में अपने जीवन के अंतिम दिन बिताये।

उनकी मृत्यु के बाद, उनके आश्रम, ओशो इंटरनॅशनल मेडिटेशन रेसॉर्ट को जूरिक आधारित ओशो इंटरनॅशनल फाउंडेशन चलाती है, जिसकी लोकप्रियता उनके निधन के बाद से अधिक बढ़ गयी है।

https://youtu.be/81YZb5K8N0I
11/03/2023

https://youtu.be/81YZb5K8N0I

Dharam kala hai mirtu ki ( धरम कला है मुर्त्यू की) धर्म काला है मृत्यु की - ओशो के संग आध्यात्मिक सफ...

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